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पाकिस्तानियों की नापाक हरकत, श्रीलंका के नागरिक को जिंदा जलाकर मार डाला, 100 से ज्यादा गिरफ्तार

पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में भीड़ ने शुक्रवार को श्रीलंका के एक नागरिक की कथित तौर पर ईशनिंदा के मामले में पीट-पीटकर हत्या कर दी। हत्या करने के बाद उसके शव को जला दिया।

इस्लामाबाद: पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान से एक वीभत्स घटना सामने आई है। यहां श्रीलंका के एक नागरिक को पाकिस्तानियों ने जलाकर मार डाला। इस मामले में 100 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

मिली जानकारी के मुताबिक, सियालकोट में कारखाने के श्रमिकों और अन्य लोगों की भीड़ ने एक कारखाने के श्रीलंकाई निर्यात प्रबंधक की हत्या करने और उसके शरीर को जलाने की घटना के बाद 100 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया है। 


समा टीवी की रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस ने श्रीलंकाई नागरिक की लिंचिंग में शामिल लोगों की पहचान करने और उन्हें गिरफ्तार करने के लिए दस टीमों का गठन किया है। पंजाब सरकार के प्रवक्ता हसन खरवार ने पत्रकारों को बताया कि मॉब लिंचिंग के मामले में अब तक 100 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। समा टीवी की रिपोर्ट के अनुसार, कुछ की पहचान सीसीटीवी फुटेज से हुई है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने इस कृत्य की निंदा करते हुए कहा कि यह देश के लिए "शर्म का दिन" है और इसमें शामिल सभी लोगों को गिरफ्तार किया जाएगा।
श्रीलंका के विदेश मंत्रालय ने मामले की जांच की मांग की है जबकि एमनेस्टी इंटरनेशनल ने एक स्वतंत्र जांच पर जोर दिया है। घटना वजीराबाद रोड इलाके की है।


पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में भीड़ ने शुक्रवार को श्रीलंका के एक नागरिक की कथित तौर पर ईशनिंदा के मामले में पीट-पीटकर हत्या कर दी। हत्या करने के बाद उसके शव को जला दिया।


पंजाब पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि यहां से करीब सौ किलोमीटर दूर सियालकोट जिले की एक फैक्टरी में करीब 40 वर्षीय प्रियंता कुमारा महाप्रबंधक के तौर पर काम करते थे। उन्होंने बताया, कुमारा ने कट्टरपंथी तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान (टीएलपी) के एक पोस्टर को कथित तौर पर फाड़ दिया, जिसमें कुरान की आयतें लिखी थीं और फिर उसे कचरे के डिब्बे में फेंक दिया।

इस्लामी पार्टी का पोस्टर कुमारा के कार्यालय के पास की दीवार पर चिपकाया गया था। फैक्टरी के कुछ कर्मियों ने उन्हें पोस्टर हटाते हुए देखा और फैक्टरी में यह बात बताई। ईशनिंदा की घटना को लेकर आसपास के इलाकों से सैकड़ों लोग फैक्टरी के बाहर इकट्ठा होने लगे। उनमें से अधिकतर टीएलपी के कार्यकर्ता एवं समर्थक थे।


करतारपुर दरबार साहिब के सामने पाकिस्तानी मॉडल ने कराया फोटोशूट, भारत ने जताई आपत्ति

करतारपुर दरबार साहिब के सामने एक पाकिस्तानी मॉडल द्वारा फोटोशूट कराए जाने पर भारत ने कड़ी आपत्ति जताई है। भारत ने पाक उच्चायोग प्रमुख को तलब कर ऐतराज दर्ज कराया है।

नई दिल्ली: करतारपुर दरबार साहिब के सामने एक पाकिस्तानी मॉडल द्वारा फोटोशूट कराए जाने पर भारत ने कड़ी आपत्ति जताई है। भारत ने पाक उच्चायोग प्रमुख को तलब कर ऐतराज दर्ज कराया है।

विदेश मंत्रालय प्रवक्ता के अरिंदम बागची के मुताबिक, भारत ने पाक राजनयिक को दिए सन्देश में साफ किया कि इस तरह की घटना से सिख धर्म को मानने वालों की भावनाएं आहत हुई हैं।  पाकिस्तान में लगातार अल्पसंख्यक समुदाय के धार्मिक स्थानों की मर्यादा तोड़ने की घटनाएं और असंवेदनशीलता दिखाती हैं।


पाकिस्तान से यह भी कहा  गया है कि इस घटना की सघनता से जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करे। बता दें कि पाकिस्तानी मॉडल सौलेहा की करतारपुर गुरुद्वारा प्रांगण में बिना माथा ढके ली गई एक तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हुई थी। हालांकि इसको लेकर सोशल मीडिया पर नज़र आई नाराज़गी के बाद पाकिस्तानी मॉडल ने खेद जताते हुए अपने इंस्टाग्राम पर माफीनामा भी पोस्ट किया था।

वहीं पाकिस्तान पुलिस ने इस मामले की जांच शुरू कर दी है। पुलिस ने यह जांच तस्वीरों को लेकर एक भारतीय सिख पत्रकार द्वारा आलोचना किये जाने के बाद शुरू की।


पाबंदियां लगाए जाने से दुखी है साउथ अफ्रीका, कहा-'ओमीक्रॉन का पता लगाने की मिल रही सजा'

विदेशी देशों की ओर से यात्रा प्रतिबंध लगाए जाने से नाखुश दक्षिण अफ्रीका ने शनिवार को कहा कि उसे एडवांस जीनोम सीक्वेंसींग के जरिए वैरिएंट खोजने की सजा दी जा रही है।

जोहान्सबर्ग: कोरोना वायरस के नए वैरिएंट ओमीक्रॉन का पता लगने के बाद ब्रिटेन समेत कई देशों ने दक्षिण अफ्रीका पर यात्रा प्रितबंध लगा दिया है। 

विदेशी देशों की ओर से यात्रा प्रतिबंध लगाए जाने से नाखुश दक्षिण अफ्रीका ने शनिवार को कहा कि उसे एडवांस जीनोम सीक्वेंसींग के जरिए वैरिएंट खोजने की सजा दी जा रही है। दक्षिण अफ्रीका ने आगे कहा कि इसकी वजह से पर्यटन, अर्थव्यवस्था के बाकी सेक्टर को नुकसान पहुंचने का खतरा बढ़ गया है। 

बात दें कि नए वैरिएंट का पता चलने के बाद ब्रिटेन, ऑस्ट्रिया, कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली और नीदरलैंड, अमेरिका, सऊदी अरब, श्रीलंका, ब्राजील समेत कई देशों ने अफ्रीकी देशों की फ्लाइट बैन कर दी है।

बता दें कि दक्षिण अफ्रीका में दुनिया के कुछ टॉप महामारी विज्ञानी और साइंटिस्ट हैं, जो कोरोना वायरस के इस नए प्रकार को पहचानने में कामयाब रहे हैं। ओमीक्रॉन वैरिएंटर का सबसे पहले पता साउथ अफ्रीका में ही लगा है और उसके बाद से बेल्जियन, बोत्सवाना, इजराइल और हांगकांग में भी इस वैरिएंटी के केस की पुष्टि हुई है। 

दक्षिण अफ्रीका के इंटरनेशनल रिलेशन और कॉपरेशन मंत्रालय ने कहा 'यात्रा प्रतिबंधों का यह नया दौर साउथ अफ्रीका को उसकी उन्नत जीनोम सिक्वेंसिंग और नए वैरिएंट का पता लगाने की क्षमता के लिए दंडित करने जैसा है।' 

मंत्रालय द्वारा कहा गया है कि अच्छे साइंस की सराहना की जानी चाहिए न कि दंडित किया जाना चाहिए। दरअसल, शुक्रवार और शनिवार को कई देशों ने दक्षिण अफ्रीका और इससे संबंधित क्षेत्र के अन्य देशों में यात्रा प्रतिबंधों की घोषणा की। 

दक्षिण अफ्रीका के विदेश मंत्री नलेदी पंडोर ने एक बयान में कहा कि हमारी चिंता यह है कि इन प्रतिबंधों, यात्रा और पर्यटन उद्योगों और व्यापा को नुकसान हो रहा है।


कंगाल हो चुका है पाकिस्तान, पीएम इमरान ने किया स्वीकार, कहा-'मुल्क चलाने के लिए नहीं हैं पैसे'

पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान पूरी तरह से कंगाल हो चुका है और इस बात को खुद पाकिस्तानी पीएम इमरान खान ने ही स्वीकार कर ली है और कहा कि हुकूमत के पास अब मुल्क चलाने के लिए पैसे नहीं बचे हैं।

इस्लामाबाद: पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान पूरी तरह से कंगाल हो चुका है और इस बात को खुद पाकिस्तानी पीएम इमरान खान ने ही स्वीकार कर ली है और कहा कि हुकूमत के पास अब मुल्क चलाने के लिए पैसे नहीं बचे हैं।

इमरान खान ने मंगलवार को कहा कि कम कर वसूली के साथ बढ़ते विदेशी ऋण उनके देश के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा बन गए हैं, क्योंकि सरकार के पास लोगों के कल्याण पर खर्च करने के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं हैं। इस्लामाबाद में चीनी उद्योग के लिए फेडरल ब्यूरो ऑफ रेवेन्यू के ट्रैक एंड ट्रेस सिस्टम (टीटीएस) के उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए खान ने कहा, "हमारी सबसे बड़ी समस्या यह है कि हमारे पास अपना देश चलाने के लिए पर्याप्त पैसा नहीं है, जिसके कारण हमें कर्ज लेना पड़ता है।"

पाकिस्तानी पीएम ने कहा कि संसाधनों की कमी के कारण सरकार के पास जनता के कल्याण पर खर्च करने के लिए बहुत कम है। खान ने कहा कि बढ़ते विदेशी कर्ज और कम कर राजस्व राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा बन गया है।

दुख जताते हुए इमरान खान ने कहा कि करों का भुगतान न करने की प्रचलित संस्कृति औपनिवेशिक काल की विरासत थी जब लोग करों का भुगतान करना पसंद नहीं करते थे क्योंकि उनका पैसा उन पर खर्च नहीं किया जाता था। उन्होंने कहा कि स्थानीय संसाधनों को उत्पन्न करने में विफलता के कारण, सरकारों ने ऋण का सहारा लिया।

उन्होंने बताया कि उनकी सरकार को पिछले चार महीनों में 3.8 अरब डॉलर का नया विदेशी कर्ज मिला है। आर्थिक मामलों के मंत्रालय के आंकड़ों से पता चलता है कि पिछले साल की समान अवधि में प्राप्त ऋण की तुलना में उधार 580 मिलियन अमरीकी डॉलर या 18 प्रतिशत अधिक था।



चीन का दुस्साहस! ताइवान के आसमानी क्षेत्र में उड़ाए परणामु बम गिराने वाले विमान

रविवार को ताइवान रक्षा मंत्रालय ने बयान जारी करते हुए कहा कि दो H-6s ने बाशी चैनल में उड़ान भरी। ये दोनों परमाणु बम गिराने वाले चीन के घातक विमान हैं।

नई दिल्ली: चीन अपने पड़ोसी देशों के साथ संबंध अच्छे नहीं रखना चाहता। कभी वह भारत के खिलाफ उकसावे वाले काम करता है तो कभी नेपाल व भूटान के साथ। ताजा मामले में चीन ने ताइवान के आकाशीय क्षेत्र में परमाणु बम गिराने वाले विमानों को उड़ाकर विवाद खड़ा कर दिया है।


ताइवान रक्षा मंत्रालय का दावा है कि चीन के दो परमाणु बम गिराने वाले विमानों ने रविवार को दक्षिण में उड़ान भरी। उधर, लिथुआनिया की ओर से ताइवान को अपने देश में दफ्तर खोलने की इजाजत देने से चीन तिलमिला गया है। चीन ने रविवार को बड़ा फैसला लेते हुए लिथुआनिया से अपने राजनैतिक संबंध राजदूत स्तर से नीचे कर दिए। 

चीन और ताइवान के बीच तनाव कम होने का नाम नहीं ले रहा है। अपना अभिन्न हिस्सा बताते हुए चीन ताइवान को मिलाने की कोशिश में है। हालांकि ताइवान खुद को स्वतंत्र राष्ट्र घोषित कर चुका है। 

रविवार को ताइवान रक्षा मंत्रालय ने बयान जारी करते हुए कहा कि दो H-6s ने बाशी चैनल में उड़ान भरी। ये दोनों परमाणु बम गिराने वाले चीन के घातक विमान हैं। इससे पहले भी चीन कई दफे शक्ति प्रदर्शन और ताइवान को डराने की नीयत से लड़ाकू विमान ताइवान के आसमान पर उड़ा चुका है।


सेटेलाइट इमेज ने खोली चीन की पोल, अब भूटान सीमा पर डोकलाम के करीब बसाया गांव

पड़ोसी देश चीन की एक और हरकत सेटेलाइट के जरिए दुनिया के सामने आई है। दरअसल, इमेज में खुलासा हुआ है कि चीन ने भूटान सीमा पर डोकलाम के समीप भी गांव बसा लिया है।

नई दिल्ली: पड़ोसी देश चीन की एक और हरकत सेटेलाइट के जरिए दुनिया के सामने आई है। दरअसल, इमेज में खुलासा हुआ है कि चीन ने भूटान सीमा पर डोकलाम के समीप भी गांव बसा लिया है।

लाइन ऑफ कंट्रोल के पास चीन और भारत के बीच अभी विवाद नहीं सुलझा है। इस बीच कुछ सैटेलाइट से सामने आई कुछ नई तस्वीरों से पता चला है कि ड्रैगन ने अब भूटान में घुसपैठ शुरू कर दी है। चीन ने यह गांव डोकलाम के नजदीक बसाए हैं। बताया जा रहा है कि पिछले एक साल के दौरान चीन ने भूटान की सीमा में करीब 100 स्क्वायर किलोमीटर क्षेत्र में कई नये गांव बना लिये हैं।

बुधवार की शाम सैटेलाइन की अलग-अलग तस्वीरें सामने आई हैं। दावा किया जा रहा है कि चीन सिक्किम में डोकलाम से सटे भूटान की सीमा के पास कई इमारतें बना रहा है। सैटेलाइट इमेजरी एक्सपर्ट ने ट्विटर पर तस्वीर शेयर किया है। इंटल लैब के एक रिसर्चर की तरफ से दावा किया जा रहा है कि चीन ने भूटान की सीमा में कई गांव बना लिये हैं। 

बताया जा रहा है कि डोकलाम के नजदीक भूटान और चीन के बीच विवादित जमीन पर साल 2020-21 से निर्माण कार्य किया जा रहा है। कई गांव वहां विकसित किये जा चुके हैं। 

कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि मई 2020 और नवंबर 2021 के बीच चार गांव बनाए गए हैं। इस इलाके में काम जारी है। इस समय के दौरान चीन और भूटान ने एक मेमोरेन्डम पर हस्ताक्षर भी किये थे जिसमें दोनों देशों के बीच सीमा के पास विवादित जमीन को लेकर तीन स्तरीय रोड मैड बनाकर इस विवाद को सुलझाने की बात कही गई थी।


अमीरी के मामले में 'सुपर पावर' अमेरिका से आगे निकला चीन, जानिए- 2 दशकों में कितनी बढ़ी ड्रैगन की दौलत

चीन की अर्थव्यवस्था सुपर पावर अमेरिका से भी आगे निकल चुकी है। यानि कि अमेरिका को चीन ने दौलत के मामले में पीछे छोड़ दिया है। दरअसल, मैनेजमेंट कंसल्टिंग कंपनी मैकिन्से एंड कंपनी की शोध शाखा की एक नई रिपोर्ट में ये दावा किया गया है।

नई दिल्ली: चीन की अर्थव्यवस्था सुपर पावर अमेरिका से भी आगे निकल चुकी है। यानि कि अमेरिका को चीन ने दौलत के मामले में पीछे छोड़ दिया है। दरअसल, मैनेजमेंट कंसल्टिंग कंपनी मैकिन्से एंड कंपनी की शोध शाखा की एक नई रिपोर्ट में ये दावा किया गया है।

कंपनी की रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया की कुल संपत्ति में चीन की हिस्सेदारी करीब एक तिहाई है। रिपोर्ट के मुताबिक, चीन के पास साल 2000 में सिर्फ 7 ट्रिलियन डॉलर की संपत्ति थी। जोकि अब यानि कि 2020 में बढ़कर 120 ट्रिलियन डॉलर हो गई। यीनी कि कि 20 वर्षों में चीन ने 20 साल में 113 ट्रिलियन डॉलर की छलांग लगाई है। 

वहीं, इन 20 वर्षों में अमेरिका ने अपनी कुल संपत्ति में दोगुने से अधिक की तेजी देखी है। अमेरिका की कुल संपत्ति 90 ट्रिलियन डॉलर है। रिपोर्ट की मानें तो साल 2000 में दुनिया की कुल संपत्ति 156 लाख करोड़ डॉलर थी, जो 2020 में बढ़कर 514 लाख करोड़ डॉलर हो गई। इस लिहाज से 2 दशक में दुनिया की संपत्ति तीन गुना हो गई है।

कंपनी की रिपोर्ट में इस बात का भी खुलासा किया गया है कि अमेरिका और चीन दोनों में, दो-तिहाई से अधिक धन सबसे अमीर 10 प्रतिशत परिवारों के पास है, और उनका हिस्सा बढ़ रहा है।

बतात चलें कि दुनिया के कुल 10 देशों की बैलेंस शीट के आधार पर रिपोर्ट तैयार की गई है। ये देश- मेक्सिको, चीन, अमेरिका, जर्मनी, फ्रांस, स्वीडन, ब्रिटेन, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और जापान शामिल हैं। 


अब PoK पर ड्रैगन की नजर, चीनी सैनिक बॉर्डर पोस्ट्स और गांवों का कर रहे सर्वे

नई दिल्ली: पड़ोसी देश चीन अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा है। एक तरफ वह एलएसी पर तनाव बढ़ा रहा है तो अब दूसरी तरफ अपने सदाबहार दोस्त पाकिस्तान की मदद से पीओके में भी सर्वे कर रहा है। 

चीनी सैनिक पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में घूम रहे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक चीनी सैनिक पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में बॉर्डर पोस्ट्स और गांवों का निरीक्षण कर रहे हैं। हालांकि कई डिफेंस एनालिस्ट पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में चीनी सैनिकों को चीन पाकिस्तान इकॉनोमिक कॉरिडोर के नजरिए से देख रहे हैं।

एक रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के केल, ज़ुरा और लीपा सेक्टर में करीब चार दर्जन चीनी सैनिक एक महीने पहले पहुंचे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक चीनी जवान, पाकिस्तानी सैनिकों और पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई के अधिकारियों के साथ खुद को पांच से छह ग्रुप में बांट लिया है। उन्होंने कई गांवों का दौरा किया है।

सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, चीनी सैनिकों ने पाकिस्तानी सेना की चौकियों और आतंकियों द्वारा कश्मीर घाटी तक पहुंचने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले घुसपैठ के रास्तों का भी सर्वेक्षण किया है। रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में गांवों का दौरा करने वाले चीनी सैनिक इन गांवों को आदर्श गांव बनाने के संकेत दिए हैं, जिनका इस्तेमाल नागरिक और सेना दोनों कर सकते हैं।

 


अजीत डोभाल के 'अफगानिस्तान प्लान' पर तालिबान ने जताई खुशी, कहा-'शांति और स्थिरता' लाने में मिलेगी मदद

तालिबान प्रवक्ता सुहेल शाहीन ने भारत के एक चर्चित समाचार चैनल से बातचीत के दौरान कहा कि तालिबान इस बैठक को एक सकारात्मक विकास के तौर पर देखता है और उसे उम्मीद है कि इससे अफगानिस्तान में 'शांति और स्थिरता' लाने में मदद होगी।

नई दिल्ली/काबुल: भारतीय एनएसए अजीत डोभाल की अध्यक्षता में कई देशों से एनएसए बुधवार को दिल्ली में बैठक के लिए एकत्रित हुए। बैठक में तमाम मुद्दों पर निर्णय लिया गया। इसमें एक अहम निर्णय यह लिया गया कि किसी भी हाल में अफगानिस्तान को आंतिकियों के पनाह का अड्डा नहीं बनने दिया जाएगा। वहीं, तालिबान भी इस बैठक से खुश है। उसने कहा है कि 'शांति और स्थिरता' लाने में उसे मदद मिलेगी।

तालिबान प्रवक्ता सुहेल शाहीन ने भारत के एक चर्चित समाचार चैनल से बातचीत के दौरान कहा कि तालिबान इस बैठक को एक सकारात्मक विकास के तौर पर देखता है और उसे उम्मीद है कि इससे अफगानिस्तान में 'शांति और स्थिरता' लाने में मदद होगी।

सुहेल शाहीन ने कहा कि तालिबान ऐसी किसी भी पहल का समर्थन करता है जिससे उनके देश में शांति और स्थिरता लाने में सहयोग मिले, नागरिकों के लिए रोजगार के अवसर बने और देश से गरीबी हटाने में सहयोग हो। 

शाहीन ने कहा, 'अगर उन्होंने (आठ देशों के एनएसए) ने कहा है कि वे अफगानिस्तान के लोगों के लिए देश के पुनर्निमाण, शांति और स्थिरता के लिए काम करेंगे तो यही हमारा उद्देश्य है। अफगानिस्तान की जनता शांति और स्थिरता चाहती है क्योंकि पिछले कुछ सालों में उन्होंने बहुत कुछ झेला है। फिलहाल, हम देश में आर्थिक परियोजनाओं को पूरा करना चाहते हैं और नए प्रॉजेक्ट शुरू करना चाहते हैं। हमारे लोगों के लिए नौकरी भी चाहते हैं। इसलिए एनएसए स्तर की बैठक में जो कहा गया, हम उससे सहमत हैं।'

पाकिस्तान के शामिल नहीं होने पर तालिबान ने कही ये बात

भारत में हुई एनएसए स्तरीय बैठक में पाकिस्तान के शामिल न होने पर सुहेल शाहीन ने कहा, 'यह किसी देश पर निर्भर करता है कि वह अपना रुख तय करे। आप इस बारे में उनसे पूछ सकते हैं। जहां तक अफगानिस्तान की सरकार और जनता का सवाल है, हम शांति और स्थिरता के साथ आर्थिक गतिविधियों को दोबारा शुरू करना चाहते हैं।'

आज पाकिस्तान में बैठक

भारत ने जहां बुधवार को एनएसए लेवल पर सात अन्य देशों के साथ बैठक की तो वहीं पाकिस्तान में आज मीटिंग होने जा रही है, जिसमें तालिबान के प्रतिनिधि को भी शामिल किया जाना है।

बता दें कि राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजित डोभाल की अध्यक्षता में भारत ने बुधवार को सात अन्य देशो के साथ वार्ता की। इस बैठक में ईरान, रूस, कजाखस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान और उज्बेकिस्तान के एनएसए शामिल हुए थे । भारत ने इस बैठक के लिए चीन और पाकिस्तान को भी न्योता भेजा था लेकिन दोनों देशों ने मीटिंग में आने से इनकार कर दिया।



'आतंक के आका' पाक ने भी बुलाई अफगान पर बैठक, भारत में कई देशों के NSA जुटने से उड़ी चैन

पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार मोईद युसूफ 'ट्रोइका प्लस' बैठक की अध्यक्षता करेंगे।

नई दिल्ली: आज भारत भारत द्वारा अफगानिस्तान मसले पर क्षेत्रीय देशों के साथ बैठक के आयोजन के बीच पाकिस्तान भी इसकी तैयारी में है। पाकिस्तान ने कहा है कि अफगानिस्तान मसले पर बातचीत करने को लेकर वह अमेरिका, चीन और रूस के सीनियर डिप्लोमैट्स की मेजबानी करेगा।

पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार मोईद युसूफ 'ट्रोइका प्लस' बैठक की अध्यक्षता करेंगे। पाकिस्तानी अखबार डॉन के मुताबिक, रूस, अमेरिका, चीन और पाकिस्तान के प्रतिनिधि अफगानिस्तान के विदेश मंत्री आमिर खान मुत्ताकी से भी मुलाकात करेंगे। रिपोर्ट्स के मुताबिक 10 नवंबर को मुत्ताकी इस्लामाबाद पहुंच रहे हैं।

ये वार्ता ऐसे वक्त में हो रही है जब भारत ने अफगानिस्तान मसले पर कई देशों के साथ बातचीत की है। इस बैठक में पाकिस्तान और चीन को भी बुलाया गया था लेकिन दोनों देशों ने आने से इनकार कर दिया था। ऐसे वक्त में जब तालिबान अंतर्राष्ट्रीय मान्यता की मांग कर रहा है, यह बैठक महत्वपूर्ण हो सकती है।

हालांकि पाकिस्तान ने अब तक तालिबान सरकार को मान्यता नहीं दी है लेकिन तालिबान शासन को मान्यता दिलाने के लिए लगातार फ्रंटफुट पर खेल रहा है। रूस और अमेरिका जैसे देश तालिबान को मान्यता देने में कोई जल्दबाजी में नहीं हैं। इन देशों ने कहा है कि जब तक तालिबान अपना वादा पूरा नहीं करता तब तक मान्यता की कोई बात ही नहीं है।

बता दें कि आज भारत की राजधानी दिल्ली में अफगानिस्तान के हालात पर चर्चा करने के लिए कई देशों के नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर आज दिल्ली में बैठक कर रहे हैं। बैठक की अध्यक्षता भारत के एनएसए अजीत डोभाल कर रहे हैं। वहीं, बैठक से पहले भारत के एनएसए उज्बेकिस्तान-ताजिकिस्तान से मुलाकात की। 

बैठक में शामिल होने से पहले एनएसए अजीत डोभाल ने बताया कि हम सब आज अफ़ग़ानिस्तान से संबंधित मुद्दों पर बात करने के लिए इकट्ठा हुए हैं। हम सब अफ़ग़ानिस्तान में हो रही घटनाओं को गौर से देख रहे हैं। इसके अफ़ग़ानिस्तान के लोगों के लिए ही नहीं बल्कि उसके पड़ोसी देशों और क्षेत्र के लिए भी इसके महत्वपूर्ण निहितार्थ हैं।

एनएसए अजीत डोभाल ने आगे कहा कि मुझे विश्वास है कि हमारे विचार-विमर्श प्रोडक्टिव व उपयोगी होंगे और अफ़ग़ानिस्तान के लोगों की मदद करने और हमारी सामूहिक सुरक्षा बढ़ाने में योगदान देंगे।



ड्रोन हमले में बाल-बाल बचे इराक के पीएम मुस्तफा अल-कदीमी, दर्जनों घायल

इराकी पीएम मुस्तफा अल कदीमी के आवास पर विस्फोटक से भरा ड्रोन हमला हुआ है। यह हमला रविवार सुबह होने की खबर है। हालांकि, इराकी पीएम इस हमले में बाल-बाल बच गए हैं।

नई दिल्ली: आज इराक के पीएम को निशाना बनाकर ड्रोन हमला किया गया। हालांकि, वह बच गये  लेकिन इस हमले में दर्जनों लोग घायल हुए हैं। इराकी पीएम मुस्तफा अल कदीमी के आवास पर विस्फोटक से भरा ड्रोन हमला हुआ है। यह हमला रविवार सुबह होने की खबर है। हालांकि, इराकी पीएम इस हमले में बाल-बाल बच गए हैं। अभी तक किसी संगठन ने इस हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है।


इराकी सेना ने इसे पीएम की हत्या की कोशिश बताया है। हालांकि, अल अरबिया की खबर के मुताबिक, इस हमले में कुछ लोग घायल हुए हैं। इराकी सेना की ओर से जारी एक बयान में कहा गया है कि यह हमला कदीमी के बगदाद स्थिति आवास के ग्रीन जोन को निशाना बनाकर किया गया। हालांकि, सेना की ओर से फिलहाल कोई अतिरिक्त जानकारी नहीं दी गई है। 

सैन्य अधिकारियों ने बताया कि कदीमी के आवास पर विस्फोटक से भरे ड्रोन से हमला किया गया। दोनों ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स को यह भी जानकारी दी कि हमले में प्रधानमंत्री कदीमी बाल-बाल बच गए हैं। वहीं, कदीमी ने हमले के बाद ट्वीट किया है कि वह सुरक्षित हैं। उन्होंने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील भी की है। 

हालांकि, अभी तक किसी समूह ने इस हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है। प्रधानमंत्री आवास के ग्रीन जोन इलाके में सरकारी इमारतें और विदेशी दूतावास हैं। यहां रहने वाले पश्चिमी देशों के राजदूतों ने बताया कि उन्होंने धमाकों और गोलीबारी की आवाज सुनी। 


दिवाली पर महात्मा गांधी की याद में ब्रिटिश हुकूमत ने जारी किया सोने-चांदी का सिक्का

यह गोल सिक्का हिंदू त्योहार दीपावली के उपलक्ष्य पर रॉयल मिंट के संग्रह का हिस्सा होगा, जिस पर भारत का राष्ट्रीय पुष्प कमल और गांधी का एक प्रसिद्ध उद्धरण ‘‘मेरा जीवन ही मेरा संदेश है’’ अंकित है।

लंदन: आज यानी दीवाली के दिन भारत के राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के जीवन और विरासत को पहली बार ब्रिटेन में विशेष संग्राहक सिक्के के माध्यम से याद किया जाएगा। 

ब्रिटेन के वित्त मंत्री ऋषि सुनक ने बृहस्पतिवार को यह घोषणा की। यह गोल सिक्का हिंदू त्योहार दीपावली के उपलक्ष्य पर रॉयल मिंट के संग्रह का हिस्सा होगा, जिस पर भारत का राष्ट्रीय पुष्प कमल और गांधी का एक प्रसिद्ध उद्धरण ‘‘मेरा जीवन ही मेरा संदेश है’’ अंकित है।

सुनक ने एक बयान में कहा, ‘‘एक हिंदू होने के नाते दीपावली पर इस सिक्के को जारी करने पर मैं गौरवान्वित महसूस कर रहा हूं। महात्मा गांधी ने भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में एक अहम भूमिका निभाई और पहली बार किसी ब्रितानी सिक्के के माध्यम से उनके उल्लेखनीय जीवन को स्मरण किया जाना शानदार है।’’

बताते चलें कि ऐसा पहली बार है जब किसी आधिकारिक ब्रितानी सिक्के के माध्यम से गांधी को स्मरण किया जाएगा।

पांच पाउंड का यह सिक्का सोने और चांदी से बनाया गया है और यह वैध मुद्रा है। हालांकि इसे सामान्य मुद्रा चलन के लिए नहीं बनाया गया है। दीपावली के अवसर पर बृहस्पतिवार से यह बिक्री के लिए उपलब्ध होगा। इसके साथ ही एक ग्राम और पांच ग्राम की सोने की छड़ें और धन की हिंदू देवी लक्ष्मी को दर्शाने वाली पहली ब्रितानी सोने की छड़ भी बिक्री के लिए उपलब्ध होगी।


दुनिया को अंधेरे में रखकर अपनी परमाणु शक्ति बढ़ा रहा चीन, 9 साल में 1000 परमाणु बम का लक्ष्य

दुनिया को अंधेरे में रखकर चीन अपनी परमाणु शक्ति बढ़ाने में जुटा हुआ है। यानी किसी दिन कोरोना वायरस की तरह कोई अनहोनी हो गई तो यह निश्चित है कि चीन खुद तबाह होगा ही साथ में उसके आस-पास के देश भी तबाह हो जाएंगे।

बीजिंग: दुनिया को अंधेरे में रखकर चीन अपनी परमाणु शक्ति बढ़ाने में जुटा हुआ है। यानी किसी दिन कोरोना वायरस की तरह कोई अनहोनी हो गई तो यह निश्चित है कि चीन खुद तबाह होगा ही साथ में उसके आस-पास के देश भी तबाह हो जाएंगे।


पीपुल्स रिपब्लिक चाइना (पीआरसी) 2030 तक 1,000 से अधिक हथियार बनाने के प्रोजेक्ट पर काम कर रहा है। पेंटागन की एक नई रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है। संयुक्त राज्य अमेरिका के रक्षा विभाग के मुख्यालय ने "चीन के जनवादी गणराज्य (पीआरसी) 2021 को शामिल करने वाले सैन्य और सुरक्षा विकास" शीर्षक के नाम से एक रिपोर्ट जारी किया है। 


यह पिछले साल के पेंटागन के अनुमानों से काफी आगे निकल जाएगा। 2020 में, अमेरिकी रक्षा विभाग ने अनुमान लगाया था कि चीन के पास 2030 तक 400 परमाणु हथियार होंगे। अमेरिकी रक्षा विभाग की बुधवार को जारी एक रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिका के अधिकारियों ने एक साल पहले जो अनुमान लगाया था, चीन उससे कहीं अधिक तेजी से अपनी परमाणु शक्ति में वृद्धि कर रहा है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि चीन की योजना शताब्दी के मध्य तक अमेरिकी वैश्विक शक्ति के बराबर पहुंचने या उससे कहीं आगे निकलने में सक्षम होने की है।
रिपोर्ट के अनुसार छह साल के भीतर चीनी परमाणु हथियारों की संख्या बढ़कर 700 तक हो सकती है और 2030 तक यह संख्या 1,000 से ऊपर हो सकती है।

हालांकि रिपोर्ट में यह नहीं बताया गया है कि अभी चीन के पास कितने हथियार हैं। लेकिन एक साल पहले अमेरिकी रक्षा विभाग मुख्यालय पेंटागन ने कहा था कि उसके परमाणु हथियारों की संख्या 200 से कम है और इस दशक के अंत तक इसके दोगुना होने का अनुमान है।


IS ने तालिबान के मेन कमांडर को मार गिराया, हक्कानी नेटवर्क की टूटी कमर

बताया जाता है कि काबुल पर कब्‍जे के बाद अशरफ गनी के कार्यालय में सबसे पहले घुसने वाला शख्स हमदुल्ला ही था। अशरफ गनी के दफ्तर में कुर्सी पर बैठे जिस तालिबानी की तस्वीर वायरल हुई थी, वह हक्कानी का कमांडर हमदुल्ला ही था।

काबुल: एक कहावत है 'जो बोओगे, वही काटोगे' और यह कहावत तालिबानी आतंकियों पर एकदम फिट बैठ रही है। पहले तो तालीबान ने अफगानिस्तान पर हथियारों के दम पर कब्जा कर लिया और वहां लोकतंत्र की जगह आतंक का राज कर दिया। अब तालीबान की नाक में उसके ही अंदाज में आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट ने दम कर रखा है। जब से अफगान में तालिबानियों का राज हुआ है, तब से इस्लामिक स्टेट ने हमले तेज कर दिए हैं।

खबर है कि तालिबान राज में पाकिस्तान के इशारों पर नाचने वाले आतंकी संगठन हक्कानी नेटवर्क को उस वक्त बड़ा झटका लगा, जब काबुल हमले में उसका खास कमांडर मारा गया। अधिकारियों ने बुधवार को कहा कि काबुल में इस्लामिक स्टेट द्वारा हुए हमले के जवाबी कार्रवाई के दौरान मारे गए तालिबान के सैन्य कमांडरों में हमदुल्ला मुखलिस भी शामिल था, जो हक्कानी नेटवर्क का काबुल कमांडर था। 

बता दें कि हक्कानी नेटवर्क का अहम सदस्य और बद्री कोर के विशेष बलों का सीनियर अधिकारी हमदुल्ला मुखलिस तालिबान की अफगान में वापसी के बाद से मरने वाला सबसे सीनियर और अहम शख्स है। तालिबान मीडिया अधिकारी ने कहा कि जब हमदुल्ला को सूचना मिली कि सरदार दाऊद खान अस्पताल पर हमला हो रहा है, तो काबुल कोर का कमांडर मौलवी हमदुल्ला (मोखलिस) तुरंत घटनास्थल पर पहुंचा और वहां इस्लामिक स्टेट के आतंकियों से लड़ाई में मारा गया। 

एक तालिबानी अधिकारी द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक, उसे रोकने की कोशिश की गई थी, मगर वह माना नहीं और मुस्कुराकर चल दिया। बताया जाता है कि काबुल पर कब्‍जे के बाद अशरफ गनी के कार्यालय में सबसे पहले घुसने वाला शख्स हमदुल्ला ही था। अशरफ गनी के दफ्तर में कुर्सी पर बैठे जिस तालिबानी की तस्वीर वायरल हुई थी, वह हक्कानी का कमांडर हमदुल्ला ही था।

इसका मरना हक्कानी नेटवर्क के लिए किसी बड़े झटके से कम नहीं है। दरअसल, काबुल के मुख्य सैन्य अस्पताल पर हुए हमले में 19 लोगों की मौत हो गई और 50 से अधिक घायल हो गए। इस हमले की जिम्मेदारी इस्लामिक स्टेट-खुरासान (आईएस-के) ने ली है। 

गौरतलब है कि हक्कानी नेटवर्क और पाकिस्तान के बीच काफी करीबी संबंध रहे हैं। संबंध ऐसे कि पाकिस्तान अपनी नापाक साजिशों को अंजाम देने के लिए समय-समय पर इस नेटवर्क का सहारा लेता रहा है। इस ग्रुप की स्थापना जलालुद्दीन हक्कानी ने की थी। पाकिस्तान ने इस नेटवर्क की पैसे और हथियार के रूप में काफी मदद की है।

तालिबानी गृह मंत्रालय के प्रवक्ता कारी सैयद खोस्ती ने विस्फोट के कुछ ही मिनटों बाद इनकी पुष्टि की और बताया कि कई लोग हताहत हुए हैं। हालांकि, उन्होंने कोई और विवरण नहीं दिया।

स्वास्थ्य मंत्रालय ने अस्पतालों से हताहतों के आंकड़े मिलने के बाद नई संख्या जारी की है। अब तक इस हमले में 16 लोगों की मौत हुई है और 50 से अधिक घायल हैं।


COP26 लीडर्स इवेंट को पीएम मोदी ने किया संबोधित, कही ये बड़ी बातें

अपने सम्बोधन में पीएम नरेंद्र मोदी में कहा कि ग्रीन ग्रिड की मेरी कई सालों पुरानी परिकल्पना को आज अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन और यूके के ग्रीन ग्रिड इनिशिएटिव से एक ठोस रूप मिला है।

ग्लास्गो: स्कॉटलैंड के ग्लास्गो में आयोजित  COP26 लीडर्स इवेंट 'एक्सेलरेटिंग क्लीन टेक्नोलॉजी इनोवेशन एंड डेवलपमेंट' को भारतीय पीएम नरेंद्र मोदी ने संबोधित किया। अपने सम्बोधन में पीएम नरेंद्र मोदी में कहा कि  ग्रीन ग्रिड की मेरी कई सालों पुरानी परिकल्पना को आज अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन और यूके के ग्रीन ग्रिड इनिशिएटिव से एक ठोस रूप मिला है।

पीएम नरेंद्र मोदी ने आगे कहा कि औद्योगिक क्रांति को जीवाशम ईंधन ने ऊर्जा दी थी। जीवाशम ईंधन के इस्तेमाल से कई देश तो समृद्ध हुए लेकिन हमारी धरती, हमारा पर्यावरण निर्धन हो गए। जीवाशम ईंधन की होड़ ने भू-राजनीतिक तनाव भी पैदा किए लेकिन आज तकनीक ने हमें एक बेहतरीन विकल्प दिया है। 

अपने संबोधन में पीएम नरेंद्र मोदी ने आगे कहा कि  पृथ्वी पर जब से जीवन उत्पन्न हुआ, तभी से सभी प्राणियों का जीवन चक्र, उनकी दिनचर्या सूर्य के उदय और अस्त से जुड़ी रही है। जब तक यह प्राकृतिक कनेक्शन बना रहा तब तक हमारा ग्रह भी स्वस्थ रहा। लेकिन आधुनिक काल में मनुष्य ने सूर्य द्वारा स्थापित चक्र से आगे निकलने की होड़ में प्राकृतिक संतुलन से छेड़छाड़ की और अपने पर्यावरण का बड़ा नुकसान भी कर लिया। अगर हमें फिर से प्रकृति के साथ संतुलित जीवन का संबंध स्थापित करना है तो इसका रास्ता हमारे सूर्य से ही प्रकाशित होगा।

उन्होंने आगे कहा कि इस रचनात्मक पहल से कार्बन फुटप्रिंट और ऊर्जा की लागत तो हम होगी ही अलग-अलग क्षेत्रों और देशों के बीच सहयोग का एक नया मार्ग भी खुलेगा। मुझे पूरा विश्वास है कि वन सन, वन वर्ल्ड, वन ग्रिड और ग्रीन ग्रिड इनिशिएटिव के सामंजस्य से एक संयुक्त और सुदृढ़ वैश्विक ग्रिड का विकास हो पाएगा। चुनौती सिर्फ इतनी है कि सौर ऊर्जा सिर्फ दिन में ही उपलब्ध है और मौसम पर ही निर्भर है। वन सन, वन वर्ल्ड, वन ग्रिड इसी चुनौती का हल है। एक वर्ल्ड वाइड ग्रिड से क्लीन एनर्जी हर जगह, हर समय मिल पाएगी, इससे स्टोरेज की आवश्यकता भी कम होगी और सोलर प्रोजेक्ट की व्यवहार्यता भी बढ़ेगी।

पीएम ने आगे कहा कि मानवता के भविष्य को बचाने के लिए हमें फिर से सूरज के साथ चलना होगा। जितनी ऊर्जा पूरी मानव जाति सालभर में उपयोग करती है, उतनी ऊर्जा सूर्य एक घंटे में धरती को देता है। ये अपार ऊर्जा पूरी तरह स्वच्छ और सतत है।

अपने संबोधन में पीएम नरेंद्र मोदी ने आगे कहा कि हमारी स्पेस एजेंसी इसरो विश्व को एक सोलर कैलकुलेटर ऐप्लिकेशन देने जा रही है। इससे सैटेलाइट डाटा के आधार पर विश्व की किसी भी जगह की सोलर पावर पोटेनशल मापी जा सकेगी। ये ऐप्लिकेशन सोलर प्रोजेक्ट का लोकेशन तय करने में उपयोगी होगा और इससे वन सन,वन वर्ल्ड,वन ग्रिड को मज़बूती मिलेगी।


'वर्ल्ड लीडर समिट ऑफ कोप-26' में पीएम मोदी ने दुनिया को दिया 'LIFE' का मंत्र, 'पंचामृत' के बारे में भी बताया

पीएम नरेंद्र मोदी ने आगे कहा कि विश्व की पूरी आबादी से भी अधिक यात्री, भारतीय रेल से हर वर्ष यात्रा करते हैं। इस विशाल रेलवे सिस्टम ने अपने आप को 2030 तक ‘नेट ज़ीरो’ बनाने का लक्ष्य रखा है।

ग्लासगो: स्कॉटलैंड के ग्लास्गो में आयोजित 'वर्ल्ड लीडर समिट ऑफ कोप-26' को आज पीएम नरेंद्र मोदी ने संबोधित किया। अपने संबोधन के दौरान पीएम मोदी ने दुनिया का ध्यान तमाम मुद्दों पर आकर्षित किया।

अपने संबोधन में पीएम मोदी ने आगे कहा कि मेरे लिए पेरिस में हुआ आयोजन, एक समिट नहीं, सेंटीमेंट था, एक कमिटमेंट था। और भारत वो वायदे, विश्व से नहीं कर रहा था, बल्कि वो वायदे, सवा सौ करोड़ भारतवासी, अपने आप से कर रहे थे। आज विश्व की आबादी का 17 प्रतिशत होने के बावजूद, जिसकी इमिशन में दायित्व सिर्फ 5 प्रतिशत रही है, उस भारत ने अपना कर्तव्य पूरा करके दिखाने में कोई कोर कसर बाकी नहीं छोड़ी है।

पीएम मोदी ने आगे कहा कि आज मैं आपके बीच उस भूमि का प्रतिनिधित्व कर रहा हूं जिस भूमि ने हज़ारों वर्षों पहले ये मंत्र दिया था 'संगच्छध्वं संवदध्वं सं वो मनांसि जानताम्'  आज 21वीं सदी में ये मंत्र और भी ज्यादा प्रासंगिक हो गया है। उन्होंने आगे कहा कि आज जब मैं आपके बीच आया हूं तो भारत के ट्रैक रिकॉर्ड को भी लेकर आया हूं। मेरी बातें, सिर्फ शब्द नहीं हैं, ये भावी पीढ़ी के उज्जवल भविष्य का जयघोष हैं। आज भारत स्थापित रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता में विश्व में चौथे नंबर पर है।


पीएम नरेंद्र मोदी ने आगे कहा कि विश्व की पूरी आबादी से भी अधिक यात्री, भारतीय रेल से हर वर्ष यात्रा करते हैं। इस विशाल रेलवे सिस्टम ने अपने आप को 2030 तक ‘नेट ज़ीरो’ बनाने का लक्ष्य रखा है। अकेली इस पहल से सालाना 60 मिलियन टन एमिशन की कमी होगी। मैं आज आपके सामने एक, वन वर्ड मूवमेंट का प्रस्ताव रखता हूं।यह एक शब्द क्लाइमेट के संदर्भ में एक विश्व का मूल आधार बन सकता है, अधिष्ठान बन सकता है। ये एक शब्द है- लाइफ... एल, आई, एफ, ई, यानि लाइफस्टाइल फॉर एनवायरनमेन्ट।


पीएम मोदी ने आगे कहा कि क्लाइमेट चेंज पर इस वैश्विक मंथन के बीच, मैं भारत की ओर से, इस चुनौती से निपटने के लिए पांच अमृत तत्व रखना चाहता हूं, पंचामृत की सौगात देना चाहता हूं। पहला- भारत, 2030 तक अपनी गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता को 500 गीगावाट तक पहुंचाएगा। उन्होंने आगे कहा कि दूसरा- भारत, 2030 तक अपनी 50 प्रतिशत ऊर्जा आवश्यकताओं, नवीकरणीय ऊर्जा से पूरी करेगा। तीसरा- भारत अब से लेकर 2030 तक के कुल प्रोजेक्टेड कार्बन एमिशन में एक बिलियन टन की कमी करेगा। चौथा- 2030 तक भारत, अपनी अर्थव्यवस्था की कार्बन इंटेन्सिटी को 45 प्रतिशत से भी कम करेगा और पांचवा- वर्ष 2070 तक भारत, नेट ज़ीरो का लक्ष्य हासिल करेगा।


'वर्ल्ड लीडर समिट ऑफ कोप-26' को पीएम मोदी ने किया संबोधित, कही ये बड़ी बातें

पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि अडपटेशन के तरीके चाहे लोकल हों पिछड़े देशों को इसके लिए ग्लोबल सहयोग मिलना चाहिए। लोकल अडपटेशन के लिए ग्लोबल सहयोग के लिए भारत ने कोएलिशन फॉर डिजास्टर रेजिस्टेंस इंफ्रास्ट्रक्चर पहल की शुरूआत की थी। मैं सभी देशों को इस पहल से जुड़ने का अनुरोध करता हूं।

ग्लासगो: आज पीएम नरेंद्र मोदी ने ग्लासगो में आयोजित 'वर्ल्ड लीडर समिट ऑफ कोप-26' को संबोधित किया। COP26 शिखर सम्मेलन विभिन्न विश्व नेताओं के साथ बातचीत करने का एक शानदार अवसर प्रदान करता है।


अपने संबोधन में पीएम मोदी ने कहा कि भारत में नल से जल, स्वच्छ भारत मिशन और उज्जवला जैसी परियोजनाओं से हमारे जरूरतमंद नागरिकों को अनुकूलन लाभ तो मिले ही हैं उनके जीवन स्तर में भी सुधार हुआ है। कई पारंपरिक समुदाय में प्रकृति के साथ सद्भाव में रहने का ज्ञान है। हमारी अनुकूलन नीतियों में इन्हें उचित महत्व मिलना चाहिए। स्कूल के पाठ्यक्रम में भी इसे जोड़ा जाना चाहिए।

पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि  अडपटेशन के तरीके चाहे लोकल हों पिछड़े देशों को इसके लिए ग्लोबल सहयोग मिलना चाहिए। लोकल अडपटेशन के लिए ग्लोबल सहयोग के लिए भारत ने कोएलिशन फॉर डिजास्टर रेजिस्टेंस इंफ्रास्ट्रक्चर पहल की शुरूआत की थी। मैं सभी देशों को इस पहल से जुड़ने का अनुरोध करता हूं।

पीएम नरेंद्र मोदी में अपने संबोधन में आगे कहा कि जलवायु पर वैश्विक बहस में अडपटेशन को उतना महत्व नहीं मिला है जितना मिटिगेशन को। ये उन विकासशील देशों के साथ अन्याय है जो जलवायु परिवर्तन से ज्यादा प्रभावित हैं।

उन्होंने आगे कहा कि भारत समेत अधिकतर विकासशील देशों के किसानों के लिए जलवायु परिवर्तन एक बड़ी चुनौती है। देश में बारिश, बाढ़ और लगातार आ रहे तूफानों से फसल नष्ट हो रही है। पेयजल के स्रोत से लेकर किफायती आवास तक सभी को जलवायु परिवर्तन के खिलाफ लचकदार बनाने की जरूरत है।


स्कॉटलैंड: PM मोदी और विश्व के दूसरे नेता ग्लासगो में आयोजित 'वर्ल्ड लीडर समिट ऑफ कोप-26' में पहुंचे, पढ़िए किसने क्या कहा

अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन ने कहा कहा कि हम में निवेश करने और एक स्वच्छ ऊर्जा वाले भविष्य का निर्माण करने की क्षमता है। इस प्रक्रिया में दुनिया भर में लाखों रोज़गार के अवसर पैदा होंगे। इससे हमारे बच्चों के लिए स्वच्छ हवा, हमारे ग्रह के लिए स्वस्थ वन और पारिस्थितिकी तंत्र तैयार होगा।

ग्लासगो: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विश्व के दूसरे नेता ग्लासगो में आयोजित 'वर्ल्ड लीडर समिट ऑफ कोप-26' में पहुंचे। 

किसने क्या कहा


ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन, ग्लासगो में आयोजित 'वर्ल्ड लीडर समिट ऑफ कोप-26' को संबोधित करते हुए कहा कि ग्रीन इंडस्ट्री रिवॉल्यूशन की अब दुनिया भर में आवश्यकता है। हमें विकसित दुनिया में अपनी विशेष ज़िम्मेदारी को पहचानना चाहिए। 

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेश ने कहा कि जैव विविधता के साथ क्रूर बर्ताव बहुत हुआ, कार्बन के साथ खुद को मारना बहुत हुआ, प्रकृति के साथ शौचालय जैसा बर्ताव बहुत हुआ। हम अपनी कब्र खुद खोद रहे हैं। हमारी आंखों के सामने हमारा ग्रह बदल रहा है।

अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन ने कहा कहा कि हम में निवेश करने और एक स्वच्छ ऊर्जा वाले भविष्य का निर्माण करने की क्षमता है। इस प्रक्रिया में दुनिया भर में लाखों रोज़गार के अवसर पैदा होंगे। इससे हमारे बच्चों के लिए स्वच्छ हवा, हमारे ग्रह के लिए स्वस्थ वन और पारिस्थितिकी तंत्र तैयार होगा।

जो बाइडेन ने आगे कहा कि हम दिखाएंगे कि अमेरिका दुनिया के सामने उदाहरण पेश करेगा और शक्ति से नेतृत्व करेगा। हमारा प्रशासन जलवायु प्रतिबद्धताओं को शब्दों में नहीं बल्कि कार्यों के जरिए पूरा के लिए लगातार काम कर रहा है।


टेरर फंडिंग रोकने के लिए FATF के फैसले का G-20 देशों ने किया, पाकिस्तान-तुर्की के खिलाफ लिया है एक्शन

पाकिस्तान और रूस के खिलाफ टेरर फंडिंग को लेकर FATF द्वारा की गई कार्यवाही का जी 20 देशों ने समर्थन किया है। बता दें कि पाकिस्तान की तमाम प्रयासों के बावजूद FATF द्वारा उसे ग्रे लिस्ट में एक बार फिर से डाल दिया गया है और तुर्की द्वारा पाक का समर्थन करना उसे भारी पड़ गया और उसे भी FATF ने ग्रे लिस्ट में डाल दिया है।

नई दिल्ली: पाकिस्तान और रूस के खिलाफ टेरर फंडिंग को लेकर FATF द्वारा की गई कार्यवाही का जी 20 देशों ने समर्थन किया है। बता दें कि पाकिस्तान की तमाम प्रयासों के बावजूद FATF द्वारा उसे ग्रे लिस्ट में एक बार फिर से डाल दिया गया है और तुर्की द्वारा पाक का समर्थन करना उसे भारी पड़ गया और उसे भी FATF ने ग्रे लिस्ट में डाल दिया है।


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित जी -20 नेताओं ने वित्तीय कार्रवाई कार्य बल के लिए अपने पूर्ण समर्थन की पुष्टि की है। उन्होंने माना कि मनी लॉन्ड्रिंग, आतंकवादी फंडिंग और प्रसार से निपटने के लिए किए गए उपायों का प्रभावी कार्यान्वयन वित्तीय बाजारों में विश्वास पैदा करने, एक स्थायी रिकवरी सुनिश्चित करने और अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय प्रणाली की अखंडता की रक्षा करने के लिए आवश्यक है।


एफएटीएफ ने तुर्की को मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवाद के वित्तपोषण से निपटने में कमियों के लिए 'ग्रे लस्टि' में शामिल किया। तुर्की के अलावा, जॉर्डन और माली को भी ग्रे सूची में जोड़ा गया है, जबकि बोत्सवाना और मॉरीशस को सूची से हटा दिया गया है। 

एफएटीएफ का फैसला तब आया है, जब पाकिस्तान और तुर्की पहले से ही आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। तुर्की की मुद्रा में गिरावट दर्ज की गई है और मुद्रास्फीति लगभग 20 प्रतिशत तक पहुंच गई है। वहीं पाकिस्तान की कंगाली के मुहाने पर खड़ा है। वह इतना लाचार हो चुका है कि अब उसे कोई जल्दी कर्ज देने को भी तैयार नहीं हो रहा है। बता दें कि तुर्की ने अतीत में एफएटीएफ की बैठकों में पाकस्तिान का जोरदार समर्थन किया है ताकि यह सुनश्चिति किया जा सके कि वैश्विक निगरानीकर्ता उसे काली सूची में नहीं डाले।


PM मोदी ने रोम में इंडोनेशिया के राष्ट्रपति जोको विडोडो से की मुलाकात

जी 20 देशों के सम्मेलन में शामिल होने इटली दौरे पर गए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज रोम में इंडोनेशिया के राष्ट्रपति जोको विडोडो से मुलाकात की।

रोम: जी 20 देशों के सम्मेलन में शामिल होने इटली दौरे पर गए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज रोम में इंडोनेशिया के राष्ट्रपति जोको विडोडो से मुलाकात की।


जिंदा है तालीबानी सुप्रीम लीडर अखुंदजादा, दुनिया के सामने आकर बोला-'जिंदा हूं मैं'

लंबे अरसे से गायब चल रहा तालिबान का सुप्रीम लीडर हैबातुल्लाह अखुंदजादा आखिर लोगों के सामने आ ही गया। दक्षिणी अफगान के कांधार में शहर में अखुंदजादा ने समर्थकों को संबोधित किया।

काबुल: दुनिया समझती है कि तालीबानी का सुप्रीम लीडर हैबातुल्लाह अखुंदजादा मर चुका है। उसके मरने की अफवाह भी कई बार उड़ चुकी है और अब उसने सार्वजनकि रूप से सामने आकर अपने जीवित होने का प्रमाण दिया है।

लंबे अरसे से गायब चल रहा तालिबान का सुप्रीम लीडर हैबातुल्लाह अखुंदजादा आखिर लोगों के सामने आ ही गया। दक्षिणी अफगान के कांधार में शहर में अखुंदजादा ने समर्थकों को संबोधित किया। 

बता दें कि अखुंदजादा 2016 से ही यहां पर इस्लामी गतिविधियों की अगुवाई करता रहा है। लेकिन पिछले काफी समय से वह अंडरग्राउंड था। यहां तक कि अगस्त में तालिबान के अफगानिस्तान पर कब्जे के बाद भी वह सामने नहीं आ रहा था।

हैबातुल्लाह अखुंदजादा के लंबे समय से गायब रहने और तालिबान सरकार में भी कोई भूमिका न होने पर उसके बारे में तरह-तरह की अफवाहें उड़ रही थीं। कई बार तो अखुंदजादा के मौत तक की आशंका भी जाहिर की गई। तालिबानी ऑफिशियल्स के मुताबिक शनिवार को वह दारुल उलूम हकीमा मदरसा पहुंचा था। इस दौरान उसने सिपाहियों और छात्रों से बात की थी। 

इस दौरान सुरक्षा के इंतजाम काफी तगड़े थे। यहां तक कि फोटो और वीडियो बनाने की भी इजाजत किसी को नहीं थी। हालांकि तालिबान के सोशल मीडिया अकाउंट्स पर दस मिनट की एक ऑडियो क्लिप शेयर की गई है। 

क्या है ऑडियो क्लिप में

ऑडियो मैसेज में अखुंदजादा को ‘अमीरुल मोमिनीन’ कहकर संबोधित किया जा रहा है। इसका अर्थ होता है विश्वसनीयों का कमांडर। अखुंदजादा इस दौरान धार्मिक संदेश दे रहा है। हालांकि इस भाषण में वह राजनीति की बात नहीं कर रहा है। लेकिन तालिबान लीडरशिप पर अल्लाह की मेहरबानी की बात जरूर कर रहा है। इस दौरान अखुंदजादा तालिबान शहीदों, घायलों और अन्य के लिए ऊपरवाले से दुआ कर रहा है।


जी 20 सम्मेलन: पहले सत्र में PM मोदी ने दिया ''वन अर्थ वन हेल्थ'' का मंत्र

विदेश सचिव हर्षवर्धन श्रृंगला ने इसकी जानकारी देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने महामारी प्रकोप के समय भारत सरकार की ओर से 150 से ज्यादा देशों को की गई मेडिकल आपूर्ति का जिक्र किया।

रोम: पीएम नरेन्द्र मोदी ने जी-20 शिखर सम्मेलन में भारत के 'एक पृथ्वी, एक स्वास्थ्य' के दृष्टिकोण को दुनिया के सामने रखा। 

शिखर सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में प्रधानमंत्री मोदी ने कोरोना महामारी के खिलाफ लड़ाई में भारत के योगदान का भी उल्लेख किया। विदेश सचिव हर्षवर्धन श्रृंगला ने इसकी जानकारी देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने महामारी प्रकोप के समय भारत सरकार की ओर से 150 से ज्यादा देशों को की गई मेडिकल आपूर्ति का जिक्र किया। अपने समर्थन में पीएम मोदी ने कहा कि भारत के 'वन अर्थ वन हेल्थ' विजन पर भी बात की जिसका जी-20 में विश्व के नेताओं ने स्वागत किया। 

मेजबान इटली के प्रधानमंत्री मारियो द्राघी ने अपने उद्घाटन संबोधन में दुनिया के अमीर देशों से गरीब देशों को कोरोना रोधी वैक्सीन मुहैया कराने के लिए आगे आने का आह्वान किया। कोरोना महामारी के चलते दो साल बाद जी-20 की यह आमने-सामने की बैठक हो रही है।

विदेश सचिव हर्ष श्रृंगला ने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी ने विस्तार से बताया कि भारत पूरी दुनिया के लिए एक जैसी स्वास्थ्य व्यवस्था की क्यों वकालत करता है। कोरोना महामारी के खिलाफ लड़ाई में भारत की अब तक स्थिति का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने दुनिया के 20 मजबूत अर्थव्यवस्था वाले देशों के प्रमुखों को यह भी बताया कि संकट की इस घड़ी में भारत ने किस तरह से आगे आकर दूसरे देशों की मदद की।


G20 शिखर सम्मेलन: PM मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों से की मुलाकात

इससे पहले पीएम मोदी ने वेटिकन में पोप फ्रासिस से मुलाकात की। पीएम मोदी ने कहा कि पोप फ्रांसिस के साथ बहुत गर्मजोशी से मुलाकात की। मुझे उनके साथ कई मुद्दों पर चर्चा करने का अवसर मिला और उन्हें भारत आने के लिए भी आमंत्रित किया।

रोम: जी 20 देशों के शिखर सम्मेलन के लिए पीएम मोदी इटली की राजधानी रोम में हैं। आज उन्होंने फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों से मुलाकात मुलाकात की। वे इंडोनेशिया के राष्ट्रपति जोको विडोडो से भी मिलेंगे।

इससे पहले पीएम मोदी ने वेटिकन में पोप फ्रासिस से मुलाकात की। पीएम मोदी ने कहा कि पोप फ्रांसिस के साथ बहुत गर्मजोशी से मुलाकात की। मुझे उनके साथ कई मुद्दों पर चर्चा करने का अवसर मिला और उन्हें भारत आने के लिए भी आमंत्रित किया।

इससे पहले पीएम मोदी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विश्व के अन्य नेताओं ने रोमा कन्वेंशन सेंटर में जी-20 शिखर सम्मेलन के दौरान 'वैश्विक अर्थव्यवस्था और वैश्विक स्वास्थ्य' पर आयोजित सत्र में हिस्सा लिया।

पहले सत्र में इटली के पीएम मारियो ड्रैगी ने कहा कि जितना अधिक हम अपनी सभी चुनौतियों के साथ जाते हैं, उतना ही यह स्पष्ट होता है कि बहुपक्षवाद उन समस्याओं का सबसे अच्छा उत्तर है जिनका हम आज सामना कर रहे हैं। कई मायनों में, यह एकमात्र संभव उत्तर है।


G20 शिखर सम्मेलन में पहुंचे PM मोदी, इटली के PM ने किया स्वागत

इटली में चल रहे जी20 शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए रोम कन्वेंशन सेंटर में जी20 शिखर सम्मेलन में पीएम नरेंद्र मोदी पहुंच गए हैं। उनका इटली के प्रधानमंत्री मारियो ड्रैगियस ने उनका स्वागत किया।

रोम: इटली में चल रहे जी20 शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए रोम कन्वेंशन सेंटर में जी20 शिखर सम्मेलन में पीएम नरेंद्र मोदी पहुंच गए हैं। उनका इटली के प्रधानमंत्री मारियो ड्रैगियस ने उनका स्वागत किया।

रोम कन्वेंशन सेंटर में जी20 शिखर सम्मेलन में शामिल होने से पहले पीएम नरेंद्र मोदी ने आज पोप फ्रांसिस से मुलाकात की। पीएम मोदी ने पोप फ्रांसिस को भारत आने का न्योता दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज वेटिकन में पोप फ्रासिस से मुलाकात की।

पीएम मोदी ने कहा कि पोप फ्रांसिस के साथ बहुत गर्मजोशी से मुलाकात की। मुझे उनके साथ कई मुद्दों पर चर्चा करने का अवसर मिला और उन्हें भारत आने के लिए भी आमंत्रित किया।

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सूत्रों के मुताबिक, पीएम मोदी ने वेटिकन में पोप फ्रांसिस के साथ बहुत गर्मजोशी से मुलाकात की। बैठक केवल 20 मिनट के लिए निर्धारित की गई थी, लेकिन एक घंटे तक चली। पीएम और पोप ने दुनिया को बेहतर बनाने के उद्देश्य से कई मुद्दों पर चर्चा की जैसे कि जलवायु परिवर्तन से लड़ना और गरीबी को दूर करना।

पीएम मोदी के साथ उनके साथ विदेश मंत्री एस जयशंकर और एनएसए अजित डोभाल भी मौजूद रहे। पीएम मोदी  पोप फ्रांसिस से मुलाकात के बाद वेटिकन सिटी से रवाना हो गए।



PM मोदी ने इटली के पीएम मारियो द्राघी के साथ की मुलाकात

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इटली के प्रधानमंत्री मारियो द्राघी के साथ मुलाकात की। इससे पहले पीएम मोदी को गार्ड ऑफ ऑनर देकर उनका स्वागत किया गया। पीएम नरेंद्र मोदी इटली के प्रधानमंत्री मारियो द्राघी के साथ बैठक के लिए पलाज्जो चिगी पहुंचे।

रोम: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इटली के प्रधानमंत्री मारियो द्राघी के साथ मुलाकात की। इससे पहले पीएम मोदी को गार्ड ऑफ ऑनर देकर उनका स्वागत किया गया। पीएम  नरेंद्र मोदी इटली के प्रधानमंत्री मारियो द्राघी के साथ बैठक के लिए पलाज्जो चिगी पहुंचे।

बता दें कि 5 दिवसीय इटली और ब्रिटेन की यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की कम से कम एक दर्जन देशों के प्रमुखों के साथ द्विपक्षीय मुलाकात संभव है। 


जिन देशों के नेताओं के साथ मुलाकात को अंतिम रूप दिया जा चुका है उनमें इटली के अलावा ब्रिटेन, नेपाल, सिंगापुर, फ्रांस, इंडोनेशिया, सऊदी अरब, आस्ट्रेलिया, जापान, स्पेन के नाम शामिल हैं। 


अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन के साथ भी पीएम की मुलाकात संभव है। इस मुलाकात को लेकर दोनों देशों के अधिकारी संपर्क में है। शनिवार को पीएम की मुलाकात वेटिकन में पोप फ्रांसिस से भी होगी, माना जा रहा है कि पीएम उन्हें भारत यात्रा के लिए भी आमंत्रित करेंगे। पीएम मोदी की द्विपक्षीय मुलाकातों का सिलसिला इटली की राजधानी रोम पहुंचने के कुछ ही समय बाद ही शुरू हो गया।


पीएम मोदी ने सबसे पहले यूरोपीय परिषद की प्रेसिडेंट चा‌र्ल्स मिशेल और यूरोपीय आयोग के प्रेसिडेंट उर्सूला लेयन से एक साथ मुलाकात की। इस मुलाकात के बारे में स्वयं पीएम मोदी ने इंटरनेट मीडिया साइट पर जानकारी दी और कहा कि हमारे बीच कारोबार, वाणिज्य, संस्कृति और पर्यावरण पर चर्चा हुई है।


उइगर मुसलमानों पर जुल्म कर रहा चीन, शरीर के अंगों की कर रहा कालाबाजारी

उइगर मुस्लिमों पर चीन लगातार जुल्म कर रहा है। अब एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि चीन उइगर मुस्लिमों के अंगों को बेच रहा है और अपना खजाना भर रहा है।

बीजिंग: उइगर मुस्लिमों पर चीन लगातार जुल्म कर रहा है। अब एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि चीन उइगर मुस्लिमों के अंगों को बेच रहा है  और अपना खजाना भर रहा है।

'Herald Sun' की एक रिपोर्ट के मुताबिक करीब डेढ़ लाख लोगों को यहां जबरन कैद कर रखा गया है। कैद के दौरान जबरन इन मुसलमानों के महत्वपूर्ण शारीरीक अंग जबरन निकाले जा रहे हैं और उनकी नसबंदी भी की जा रही है।  

चीन में इस अल्पसंख्यक समुदाय को कड़ी निगरानी में रखा गया है। इनपर सीसीटीवी कैमरों से हर वक्त कड़ी नजर रखी जाती है। जिस इलाके में यह रहते हैं उस इलाके से इन्हें निकलने तक की मनाही है और कई जगहों पर बैरियर लगाए गए हैं ताकि वो इस इलाके से बाहर ना जा सकें। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक अल्पसंख्यकों के धार्मिक स्थलों को बिना इन्हें पूर्व में सूचित किये ही नष्ट किया जा रहा है।

इस रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि उइगर मुस्लिमों को उनके घरों से खींच-खींच कर 'एजुकेशन सेंटर' में भेजा जा रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक इन कैदियों की बुरी तरह पिटाई की जा रही है और इनसे हिंसा कर पूछताछ की जा रही है। मारपीट कर इनसे झूठे जुर्म भी कबूलवाए जा रहे हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि इन अल्पसंख्यकों की आबादी को रोकने के लिए महिलाओं की नसबंदी भी व्यापक पैमाने पर कराई जा रही है। 

ASPI की रिपोर्ट के हवाले से न्यूजपेपर ने बताया है कि साल 2017 से 2019 के बीच करीब 80,000 उइगर मुसलमानों को देश के विभिन्न फैक्ट्रियों में तस्करी कर ले जाया गया। घर से दूर इन फैक्ट्रियों में इन्हें अलग-अलग रखा जाता है और काम के बाद इन्हें सैद्धांतिक ट्रेनिंग दी जाती है। इनपर सर्विलांस के जरिए कड़ी निगरानी रखी जाती है और इन्हें इनके धार्मिक कार्यों में भी भाग नहीं लेने दिया जाता है।  

रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि यहां एक साल में 1 अरब डॉलर के अंगों की ब्लैक मार्केटिंग की गई है। यह भी कहा गया है कि जिन अस्पतालों में मानव अंग निकाले जाते हैं वो इन डिटेन्शन सेंटर से ज्यादा दूर नहीं हैं। रिपोर्ट में बताया गया है कि अस्पताल में किये गये ऑपरेशन के आंकड़ों और शॉट वेटिंग लिस्ट से यह पता चलता है कि जबरन अंग निकालने की यह प्रक्रिया काफी लंबे समय से व्यापक पैमाने पर चल रही है। 

हेराल्ड सन ने आगे अपनी रिपोर्ट में बताया है कि हेल्दी लीवर को ब्लैक मार्केट में लाखों डॉलर में बेचा जा रहा है। लीवर के अलावा किडनी निकाल कर बेचने की बात भी सामने आई है।


इटली, ब्रिटेन समेत कई देशों के प्रमुखों के साथ पीएम मोदी की होगी मुलाकात

जिन देशों के नेताओं के साथ मुलाकात को अंतिम रूप दिया जा चुका है उनमें इटली, ब्रिटेन, नेपाल, सिंगापुर, फ्रांस, इंडोनेशिया, सऊदी अरब, आस्ट्रेलिया, जापान, स्पेन के नाम शामिल हैं।

नई दिल्ली: 5 दिवसीय इटली और ब्रिटेन की यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की कम से कम एक दर्जन देशों के प्रमुखों के साथ द्विपक्षीय मुलाकात संभव है। 

जिन देशों के नेताओं के साथ मुलाकात को अंतिम रूप दिया जा चुका है उनमें इटली, ब्रिटेन, नेपाल, सिंगापुर, फ्रांस, इंडोनेशिया, सऊदी अरब, आस्ट्रेलिया, जापान, स्पेन के नाम शामिल हैं। 

अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन के साथ भी पीएम की मुलाकात संभव है। इस मुलाकात को लेकर दोनों देशों के अधिकारी संपर्क में है। शनिवार को पीएम की मुलाकात वेटिकन में पोप फ्रांसिस से भी होगी, माना जा रहा है कि पीएम उन्हें भारत यात्रा के लिए भी आमंत्रित करेंगे। पीएम मोदी की द्विपक्षीय मुलाकातों का सिलसिला इटली की राजधानी रोम पहुंचने के कुछ ही समय बाद ही शुरू हो गया।

पीएम मोदी ने सबसे पहले यूरोपीय परिषद की प्रेसिडेंट चा‌र्ल्स मिशेल और यूरोपीय आयोग के प्रेसिडेंट उर्सूला लेयन से एक साथ मुलाकात की। इस मुलाकात के बारे में स्वयं पीएम मोदी ने इंटरनेट मीडिया साइट पर जानकारी दी और कहा कि हमारे बीच कारोबार, वाणिज्य, संस्कृति और पर्यावरण पर चर्चा हुई है।


इटली में पीएम मोदी ने भारतीय समुदाय के लोगों से की मुलाकात

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रोम के पियाजा गांधी में उनके स्वागत के लिए आए भारतीय समुदाय लोगों का अभिवादन किया। लोगों ने मोदी-मोदी के नारे लगाकर पीएम मोदी का स्वागत किया।

रोम: जी 20 सम्मेलन में शामिल होने गए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रोम के पियाजा गांधी में इकट्ठा हुए भारतीय समुदाय के लोगों से मुलाकात की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रोम के पियाजा गांधी में उनके स्वागत के लिए आए भारतीय समुदाय लोगों का अभिवादन किया। लोगों ने मोदी-मोदी के नारे लगाकर पीएम मोदी का स्वागत किया।

इससे पहले पीएम मोदी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रोम के पियाजा गांधी में महात्मा गांधी की प्रतिमा को पुष्पांजलि अर्पित कर श्रद्धांजलि अर्पित की। बता दें कि पीएम नरेंद्र मोदी अक्टूबर 30-31 तारीख को 16वें G-20 सम्मेलन में भाग लेंगे। इस दौरान वे इटली के प्रधानमंत्री मारियो ड्रैगी के साथ बैठक भी करेंगे।

पीएम मोदी शिखर सम्मेलन में जी-20 के नेताओं के साथ महामारी, सतत विकास और जलवायु परिवर्तन समेत कई मुद्दों पर चर्चा करेंगे। पीएम मोदी 30-31 अक्तूबर तक रोम में रहेंगे और वहां होने वाले 16वें जी-20 शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे।

इटली के प्रधानमंत्री मारियो ड्रैगी के निमंत्रण पर पीएम मोदी इटली पहुंचे हैं। इस दौरान दोनों नेताओं के बीच बैठक होगी और आपसी संबंधों को और अधिक मजबूत करने पर बातचीत संभव है। बैठक के दौरान आतंकवाद को रोकने और आपसी व्यापार को बढ़ावा देने पर भी चर्चा संभव है।


जी 20 सम्मेलन में हिस्सा लेने इटली पहुंचे पीएम मोदी

पीएम नरेंद्र मोदी अक्टूबर 30-31 तारीख को 16वें G-20 सम्मेलन में भाग लेंगे। इस दौरान वे इटली के प्रधानमंत्री मारियो ड्रैगी के साथ बैठक भी करेंगे।

रोम: जी 20 देशों की बैठक में हिस्सा लेने के लिये पीएम नरेंद्र मोदी इटली दौरे पहुंच चुके हैं। उनका विमान रोम में लैंड कर चुका है। पीएम नरेंद्र मोदी अक्टूबर 30-31 तारीख को 16वें G-20 सम्मेलन में भाग लेंगे। इस दौरान वे इटली के प्रधानमंत्री मारियो ड्रैगी के साथ बैठक भी करेंगे।

पीएम मोदी शिखर सम्मेलन में जी-20 के नेताओं के साथ महामारी, सतत विकास और जलवायु परिवर्तन समेत कई मुद्दों पर चर्चा करेंगे। पीएम मोदी 30-31 अक्तूबर तक रोम में रहेंगे और वहां होने वाले 16वें जी-20 शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे।

इटली के प्रधानमंत्री मारियो ड्रैगी के निमंत्रण पर पीएम मोदी इटली पहुंचे हैं। इस दौरान दोनों नेताओं के बीच बैठक होगी और आपसी संबंधों को और अधिक मजबूत करने पर बातचीत संभव है।


बैठक के दौरान आतंकवाद को रोकने और आपसी व्यापार को बढ़ावा देने पर भी चर्चा संभव है।


पाकिस्तान को मिली 'प्रिंस' से संजीवनी, 3 अरब डॉलर का सऊदी ने दिया कर्ज

कंगाली की कगार पर खड़े पाकिस्तान को सऊदी ने बड़ी राहत दी है। सऊदी अरब ने कहा है कि वह पाकिस्तान के केंद्रीय बैंक में 3 बिलियन अमेरिकी डॉलर जमा कर रहा है, ताकि विदेशी भंडार के साथ नकदी की कमी वाले देश पाकिस्तान की मदद की जा सके।

इस्लामाबाद: पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान की आर्थिक हालत किसी से छिपी नहीं है। आलम यह हो गया है कि उसे कोई भी देश कर्ज देना नहीं चाहता लेकिन मानवता को बचाने के लिए व मानवता के हित में सऊदी अरब जैसे देश उसे कर्ज तो दे रहे हैं लेकिन भीख समझकर। क्योंकि सऊदी अरब को अच्छी तरह से मालूम है कि पाकिस्तान के बस का कर्ज वापस करना नहीं है लेकिन इंसानियत के लिए उसे कर्ज दे दी जा रही है।

ताजा मामले में पाकिस्तान को सऊदी अरब ने 3 अरब डॉलर का कर्ज दिया है। कंगाली की कगार पर खड़े पाकिस्तान को सऊदी ने बड़ी राहत दी है। सऊदी अरब ने कहा है कि वह पाकिस्तान के केंद्रीय बैंक में 3 बिलियन अमेरिकी डॉलर जमा कर रहा है, ताकि विदेशी भंडार के साथ नकदी की कमी वाले देश पाकिस्तान की मदद की जा सके।

जियो न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, मंगलवार को सऊदी फंड फॉर डेवलपमेंट ने यह घोषणा की। द सऊदी फंड फॉर डेवलपमेंट ने कहा कि वह स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान (एसबीपी) में 3 अरब डॉलर जमा कर रहा है। इतना ही नहीं, बयान में कहा गया कि एक आधिकारिक निर्देश जारी किया गया है, जिसके तहत इस साल तेल उत्‍पादों के व्‍यापार के वित्‍तपोषण के लिए पाकिस्‍तान को 1.2 अरब डॉलर दिया जाएगा। सऊदी अरब ने पाकिस्‍तान को ऐसे वक्त में यह राहत दी है, जब पड़ोसी मुल्क आर्थिक संकट से जूझ रही है और उसकी अर्थव्‍यवस्‍था दिवालिया होने की कगार पर है।

खुद पाकिस्‍तान के सूचना मंत्री फवाद चौधरी और ऊर्जा मंत्री हमद अजहर ने पाकिस्‍तान को सऊदी अरब से मिलने वाली इस मदद की पुष्टि की है। अजहर ने समाचार साझा करते हुए कहा कि यह वैश्विक वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि के परिणामस्वरूप हमारे व्यापार और विदेशी मुद्रा खातों पर दबाव को कम करने में मदद करेगा। 

बता दें कि इससे पहले सऊदी अरब ने पाकिस्तान को 6 बिलियन अमरीकी डॉलर का वित्तीय पैकेज प्रदान किया था, जिसमें स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान में 3 बिलियन डॉलर जमा और शेष 3 बिलियन डॉलर वार्षिक आधार पर डेफर्ड पेमेंट पर तेल सुविधा के लिए शामिल थे। पिछले साल पाकिस्तान और सऊदी अरब के रिश्तों में उस वक्त खटास आ गई थी, जब विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने सऊदी अरब को कश्मीर मुद्दे पर भारत के खिलाफ कार्रवाई करने से इनकार करने के बाद एक कड़ी चेतावनी जारी की थी। 


T20 में भारत पर जीत का पाकिस्तानियों ने मनाया जश्न, हवाई फायरिंग में दर्जनभर लोगों को लगी गोली

पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान टी-20 अंतरराष्ट्रीय विश्व कप मैच में भारत पर मिली पहली जीत को पाकिस्तान पचा नहीं पा रहा है। यही वजह है कि जश्न मनाने की बजाय पाकिस्तानी हिंसा पर उतर आए हैं।

इस्लामाबाद: पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान  टी-20 अंतरराष्ट्रीय विश्व कप मैच में भारत पर मिली पहली जीत को पाकिस्तान पचा नहीं पा रहा है। यही वजह है कि जश्न मनाने की बजाय पाकिस्तानी हिंसा पर उतर आए हैं।

एक तरफ इमरान सरकार के मंत्री जहां एक तरफ इस जीत पर जहर उगल रहे हैं तो वहीं, कराची में अलग-अलग जगह हुई हवाई फायरिंग में 12 लोगों को गोली लगने की खबर है। पुलिस के मुताबिक, गोली लगने वालों में एक सब-इंस्पेक्टर भी शामिल है। 

पाकिस्तान के 'जियो न्यूज' के मुताबिक, कराची के ओरांगी टाउन के सेक्टर 4 में अज्ञात दिशा से आई बुलेट की वजह से दो लोग बुरी तरह जख्मी हो गए। वहीं, गुलशन-ए-इकबाल इलाके में जीत की खुशी में हो रही हवाई फायरिंग को रोकने पहुंचे अब्दुल गनी नाम के एक सब-इंस्पेक्टर को भी गोली लग गई। कराची के सचल गोथ, ओरांगी टाउन, न्यू कराची, गुलशन-ए-इकबाल और मलिर सहित कई इलाकों में हवाई फायरिंग किए जाने की खबरें मिलीं।

इससे पहले पहली बार विश्व कप में भारत के खिलाफ मिली जीत पर पाकिस्तान के आंतरिक मंत्री यानी गृह मंत्री शेख रशीद ने टिप्पणी की और जहर उगला। गृह मंत्री शेख रशीद ने रविवार को कहा कि पाकिस्तान द्वारा पहली बार टी20 मैच में दस विकेट से जीत हासिल करने के बाद भारतीय मुसलमानों सहित दुनिया के सभी मुसलमान जश्न मना रहे है।

क्रिकेट की बाजी को जंग की बाजी की तरह पेश करते हुए उन्होंने भारत के खिलाफ मिली इस जीत को पूरे इस्लाम की जीत करार दिया और दुनियाभरके मुसलमानों को फतह मुबारक कहा।


अफगानिस्तान के पूर्व उप राष्ट्रपति अमरुल्लाह सालेह ने जमकर लगाई पाक को लताड़ा

काबुल पर तालिबान के कब्जे के बाद से वह पंजशीर घाटी में थे। लेकिन कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मौजूदा वक्त में वह तजाकिस्तान में रह रहे हैं।

काबुल: अमरुल्लाह सालेह अफगानिस्तान के उप राष्ट्रपति रहे हैं। काबुल पर तालिबान के कब्जे के बाद से वह पंजशीर घाटी में थे। लेकिन कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मौजूदा वक्त में वह तजाकिस्तान में रह रहे हैं। 


सालेह ने 49 दिनों के बाद ट्विटर पर तीन ट्वीट कर अपनी बात रखी है और पाकिस्तान को जमकर लताड़ा है।  

उन्होंने ट्वीट कर कहा है कि पाकिस्तान द्वारा अफगानिस्तान पर कब्जे के ढाई महीने बाद के नतीजे-
जीडीपी में 30 फीसद की गिरावट (अनुमानित)
गरीबी का स्तर 90 फीसद
शरियत के नाम पर महिलाओं की घरेलू गुलामी
सिविल सर्विस डाउन
प्रेस/मीडिया/अभिव्यक्ति की आजादी पर रोक
शहरी माध्यम वर्ग चले गए
बैंक ठप हैं


अमरुल्लाह सालेह ने आगे कहा है कि अफगानिस्तान कूटनीति का स्थान दोहा स्थानांतरित। अफगानिस्तान की विदेश और सुरक्षा से जुड़े फैसले अब रावलपिंडी से लिए जा रहे। तालिबान से अधिक शक्तिशाली एनजीओ हैं। पाकिस्तान सेना और हक्कानी ग्रुप ने आतंकियों को ट्रेनिंग देने में लगी हुई है। 

अमरुल्लाह सालेह ने पाकिस्तान को लताड़ते हुए कहा है कि अफगानिस्तान बहुत बड़ा है जिसे पाकिस्तान निगल नहीं सकता है। ये वक्त की बात है। हम उन सभी मामलों में प्रतिरोध करेंगे जिसके कि हम हमारी सम्मान की रक्षा पाकिस्तानी आधिपत्य से कर सकें। ये वक्त की बात है लेकिन हम अफगानिस्तान के उदय को जरूर देखेंगे।


'भाई' पाकिस्तान को बचाने की कोशिश में खुद फंस गया टर्की, दोनों FATF की ग्रे लिस्ट में

एफएटीएफ (फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स) ने पाकिस्तान को अपनी ग्रे सूची में बरकरार रखा है। इतना ही नहीं, इस बार उसके दोस्त तुर्की को भी झटका लगा है। एफएटीएफ ने तुर्की को मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवाद के वित्तपोषण से निपटने में कमियों के लिए 'ग्रे लिस्ट' में शामिल किया। तुर्की के अलावा, जॉर्डन और माली को भी ग्रे सूची में जोड़ा गया है, जबकि बोत्सवाना और मॉरीशस को सूची से हटा दिया गया है।

नई दिल्ली: ऐसा माना जाता है कि बुराई का साथ देने वाला भी बुरा होता है और यह सही साबित हो रहा है तुर्की के लिए। दरअसल, काफी दिनों से चुर्की पाकिस्तान के प्रति प्रेम दिखा रहा था। नतीजा यह हुआ है कि पाकिस्तान तो पहले से ही FATF की ग्रे लिस्ट में था और अब तुर्की को भी पाकिस्तान के प्रति प्रेम दिखाना महंगा पड़ गया है और वह भी FATF की ग्रे लिस्ट में आ गया है।

पाकिस्तान की तमाम कोशिशों के बावजूद वह एफएटीएफ की ग्रे सूची से बाहर नहीं निकल पा रहा है। इस मामले में एक बार फिर उसे वैश्विक संस्था से झटका लगा है। एफएटीएफ (फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स) ने पाकिस्तान को अपनी ग्रे सूची में बरकरार रखा है। इतना ही नहीं, इस बार उसके दोस्त तुर्की को भी झटका लगा है। एफएटीएफ ने तुर्की को मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवाद के वित्तपोषण से निपटने में कमियों के लिए 'ग्रे लिस्ट' में शामिल किया। तुर्की के अलावा, जॉर्डन और माली को भी ग्रे सूची में जोड़ा गया है, जबकि बोत्सवाना और मॉरीशस को सूची से हटा दिया गया है। 

एफएटीएफ का फैसला तब आया है, जब पाकिस्तान और तुर्की पहले से ही आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। तुर्की की मुद्रा में गिरावट दर्ज की गई है और मुद्रास्फीति लगभग 20 प्रतिशत तक पहुंच गई है। वहीं पाकिस्तान की कंगाली के मुहाने पर खड़ा है। वह इतना लाचार हो चुका है कि अब उसे कोई जल्दी कर्ज देने को भी तैयार नहीं हो रहा है। बता दें कि तुर्की ने अतीत में एफएटीएफ की बैठकों में पाकस्तिान का जोरदार समर्थन किया है ताकि यह सुनश्चिति किया जा सके कि वैश्विक निगरानीकर्ता उसे काली सूची में नहीं डाले।

दरअसल, एफएटीएफ ने मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवादी वित्तपोषण के खिलाफ लड़ाई में प्रमुख मुद्दों पर चर्चा करने के लिए तीन दिवसीय पूर्ण बैठक बुलाई थी। एफएटीएफ के अध्यक्ष डॉ. मार्कस प्लीयर ने कहा कि पाकिस्तान लगातार ग्रे सूची में है। उन्होंने बताया कि पाकिस्तानी सरकार आतंकवाद के खिलाफ 34 सूत्रीय एजेंडे में से चार को पूरा करने में विफल रही है।

पाक ने संयुक्त राष्ट्र के प्रतिबंधित आतंकवादियों के खिलाफ भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं की है। पाकिस्तान जून, 2018 से इस सूची में है। प्लीयर ने कहा था कि पाकिस्तान तब तक ग्रे लिस्ट में रहेगा तब तक कि वह जून, 2018 में सहमत कार्य योजना को पूरा नहीं कर लेता।

एफएटीएफ ने पाकिस्तान को आतंकवाद के वित्तपोषण को पूरी तरह रोकने के लिए कुल 34 कार्ययोजनाएं पूरी करने की जिम्मेदारी दी थी, मगर पाकिस्तान अभी तक इसे पूरा नहीं कर पाया है। संयुक्त राष्ट्र द्वारा नामित आतंकियो मसूद अजहर आदि पर कार्रवाई भी शामिल है।

FATF के बारे में

फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स यानी एफएटीएफ एक इंटरनेशनल निगरानी निकाय है, जिसे फ्रांस की राजधानी पेरिस में जी7 समूह के देशों द्वारा 1989 में स्थापित किया गया था। इसका काम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवाद के वित्तपोषण पर नजर रखना और कार्रवाई करना है।

बता दें कि एफएटीएफ का निर्णय लेने वाला निकाय को एफएटीएफ प्लेनरी कहा जाता है। इसकी बैठक एक साल में तीन बार आयोजित की जाती है।


पाकिस्तान: गरीबों को अमीरों से सस्ते दाम पर मिलेगा पेट्रोल-डीजल, इमरान सरकार ने बनाया ये प्लान

बाइक सवार, ऑटो चालकों और कम आमदनी वाले लोगों को सब्सिडी दर पर पेट्रोल-डीजल दिया जाएगा तो वहीं अमीरों को बाजार दर पर कीमत चुकानी होगी।

इस्लामाबाद: पेट्रोल डीजल की आसमान छूती कीमत को लेकर घिरी इमरान खान की सरकार नए प्लान पर काम कर रही है। 

जियो न्यूज की एक रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान सरकार अमीरों और गरीबों के लिए तेल की कीमत अलग-अलग रखने पर विचार कर रही है। इस प्लान के मुताबिक, बाइक सवार, ऑटो चालकों और कम आमदनी वाले लोगों को सब्सिडी दर पर पेट्रोल-डीजल दिया जाएगा तो वहीं अमीरों को बाजार दर पर कीमत चुकानी होगी।


रिपोर्ट के मुताबिक, इमरान खान ने बुधवार को सत्ताधारी पार्टी के सदस्यों की एक बैठक बुलाई थी, जिसमें पेट्रोलियम की कीमतों पर चर्चा की गई। रिपोर्ट के मुताबिक, इमरान खान ने संबंधित अधिकारियों को निम्न आय वर्ग के लिए पेट्रोल सब्सिडी प्लान ड्राफ्ट करने को कहा है।


मोटरसाइकिल सवारों, रिक्शा और पब्लिक ट्रांसपोटर्स के अलावा कम आमदनी वाले लोगों को सस्ते दर पर पेट्रोल-डीजल मिलेगा। इस ड्राफ्ट को अगले सप्ताह पेश किया जा सकता है। 

बताया जा रहा है कि कम आमदनी वाले लोगों को यह सब्सिडी यूटिलिटी स्टोर्स के माध्यम से उपलब्ध कराई जाएगी। यह सब्सिडी योजना केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर चलाएंगी।   


बांग्लादेश: हिंदुओं पर हमला करनेवालों के खिलाफ कड़ी कार्यवाई के आदेश, PM शेख हसीना एक्शन में

हिन्दू मंदिरों और हिंदुओं को निशाना बनाने वाले कट्टरपंथियों के खिलाफ बांग्लादेशी पीएम शेख हसीना ने कड़ी कार्यवाई के आदेश दिए हैं। बांग्लादेश की पीएम शेख हसीना ने 19 अक्टूबर को गृहमंत्री से हिंदुओं के खिलाफ हिंसा करने वालों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई शुरू करने का आदेश दिया है।

ढाका: बांग्लादेश में हिन्दू मंदिरों और हिंदुओं को निशाना बनाने वाले कट्टरपंथियों के खिलाफ बांग्लादेशी पीएम शेख हसीना ने कड़ी कार्यवाई के आदेश दिए हैं। बांग्लादेश की पीएम शेख हसीना ने 19 अक्टूबर को गृहमंत्री से हिंदुओं के खिलाफ हिंसा करने वालों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई शुरू करने का आदेश दिया है। 

दुर्गा पूजा से बांग्लादेश में हिंदुओं के मंदिरों पर हमले बढ़ गए हैं। दुर्गा पूजा समारोहों के दौरान सोशल मीडिया पर कथित तौर पर ईशनिंदा करने वाला एक पोस्ट देखने को मिला था जिसके बाद से बांग्लादेश में एक भीड़ ने 66 मकानों को क्षतिग्रस्त कर दिया और कम से कम 20 मकानों को आग के हवाले कर दिया।


सरकार के कैबिनेट सचिव खांडकर अनवारूल इस्लाम के हवाले से ढाका ट्रिब्यून ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि पीएम हसीना ने मंगलवार को साप्ताहिक कैबिनेट बैठक के दौरान गृहमंत्री असदुज्जमान खान को उन लोगों के खिलाफ तुरंत कार्रवाई करने का निर्देश दिया है जिन्होंने धर्म का इस्तेमाल कर हिंसा भड़काई थी। हसीना ने गृह मंत्रालय को सतर्क रहने और ऐसी घटनाओं न हो, इसे लेकर कदम उठाने का निर्देश दिया है। उन्होंने पीड़ित परिवारों को हर संभव सहायता मुहैया करने की घोषणा की है।

स्थानीय मीडिया के मुताबिक अलग-अलग हमलों में हिंदू समुदाय के छह लोग मारे गए हैं लेकिन इस आंकड़े की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की जा सकी है। गृहमंत्री ने कहा है कि कोमिला घटना की जांच की जा रही है। हम आरोपियों को न्याय के दायरे में लाने के लिए काम कर रहे हैं।


सत्तारूढ़ अवामी लीग पार्टी हालिया सांप्रदायिक हिंसा के खिलाफ देशभर में सौहार्द्र रैलियां कर रही है और शांतिपूर्ण जुलूस निकाल रही है। अवामी लीग के महाचिव ओबैदुल कादिर ने यहां एक रैली में कहा है कि हिंदू भाई-बहन को डरने की जरूरत नहीं है। शेख हसीना और अवामी लीग आपके साथ है।


बांग्लादेश: सांप्रदायिक हिंसा नहीं ले रही थमने का नाम, कट्टरपंथियों ने 20 हिंदुओं के घर जलाए

पाकिस्तान के बाद अब बांग्लादेश में भी अल्पसंख्यों की सुरक्षा पर खतरा मडरा रहा है। करीब तीन दिन से जारी हिंसा अभी भी थमने का नाम नहीं ले रही है। ताजा मामले में कट्टरपंथियों ने 20 हिंदुओं के घर जलाकर राख कर दिए है।

ढाका: पाकिस्तान के बाद अब बांग्लादेश में भी अल्पसंख्यों की सुरक्षा पर खतरा मडरा रहा है। करीब तीन दिन से जारी हिंसा अभी भी थमने का नाम नहीं ले रही है। ताजा मामले में कट्टरपंथियों ने 20 हिंदुओं के घर जलाकर राख कर दिए हैं।

मिली जानकारी के मुताबिक, रंगपुर उपजिला पीरगंज में हिंदुओं के घरों में आग लगाने का मामला सामने आया है। यह घटना रविवार की है, जिसमें 20 घर बुरी तरह जल गए हैं। बांग्लादेश के मीडिया हाउस ढाका ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, यह घटना पीरगंज के एक गांव रामनाथपुर यूनियन में माझीपारा के जेलपोली में घटी है।

स्थानीय मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, इस घटना में 20 घर बुरी तरह जल गए हैं। हालांकि स्थानीय संघ परिषद के अध्यक्ष के अनुसार कुछ कट्टरपंथियों ने हिंदुओं के 65 घरों को आग के हवाले कर दिया था। 

पुलिस द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक, पुलिस के मुताबिक, यह मामला एक सोशल मीडिया पोस्ट से जुड़ा हुआ है, जिसके बाद यह तनाव पैदा हो गया है। एक हिंदू शख्स पर एक धार्मिक आपत्तिजनक पोस्ट करने का आरोप है। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर इस युवक को तो सुरक्षा मुहैया कराई और उसके घर को भी सुरक्षित कर लिया, लेकिन उपद्रवियों ने उस लोकेशन में आसपास के 15-20 घरों में आग लगा दी।

इस मामले में चेयरमैन मोहम्मद सादकुल इस्लाम ने बांग्लादेश के प्रतिष्ठित समाचार पत्र ढाका ट्रिब्यून को बताया, 'वे हमलावर जमात-ए-इस्लामी और उसकी छात्र शाखा इस्लामी छात्र शिबिर की स्थानीय इकाइयों के थे।' दमकल सेवा को घटना की सूचना रात करीब 9:50 बजे मिली। इसके बाद पीरगंज, मीठापुकुर और रंगपुर शहर से दमकल की गाड़ियां आग बुझाने के लिए घटनास्थल पर पहुंचीं। वे सोमवार सुबह तीन बजे तक घटनास्थल पर रहे।

बता दें कि नानुआर दिघी के तट पर एक दुर्गा पूजा स्थल पर पवित्र कुरान के कथित अपमान के बारे में सोशल मीडिया पर खबर आने के बाद बांग्लादेश में कई जगहों पर सांप्रदायिक हिंसा भड़क गई। इस दौरान चांदपुर, चटगांव, गाजीपुर, बंदरबन, चपैनवाबगंज और मौलवीबाजार में कई पूजा स्थलों में तोड़फोड़ की गई। इन झड़पों में कई लोग हताहत हुए हैं।

बांग्लादेश के नोआखली जिले के बेगमगंज उपजिला में शुक्रवार को हुए एक हमले में जतन कुमार साहा नाम के एक व्यक्ति की मौत हो गई और 17 अन्य घायल हो गए। साथ ही, बांग्लादेश के नोआखली जिले में शुक्रवार को भीड़ ने इस्कान मंदिर पर हमला किया और समुदाय के अनुसार, इसके एक सदस्य की मौत हो गई।


बांग्लादेश: हिन्दू मंदिरों में तोड़फोड़ के बाद प्रदर्शन, 'इस्लाम के दुश्मनों' को सजा देने की मांग

बांग्लादेश में दुर्गा पूजा के पंडालों में तोड़फोड़ और फिर नोआखली में इस्कॉन मंदिल पर हमले के बाद से जारी विरोध प्रदर्शन शनिवार को भी जारी रहा। प्रदर्शनकारियों की कई जगह पुलिस के साथ झड़पें भी हुईं।

ढाका: बांग्लादेश में दुर्गा पूजा के पंडालों में तोड़फोड़ और फिर नोआखली में इस्कॉन मंदिल पर हमले के बाद से जारी विरोध प्रदर्शन शनिवार को भी जारी रहा। प्रदर्शनकारियों की कई जगह पुलिस के साथ झड़पें भी हुईं। 


कुछ  10 हजार की संख्या में प्रदर्शनकारियों ने ढाका की मुख्य मस्जिद के बाहर प्रदर्शन किया। एक दिन पहले ही यहां पुलिस के साथ हिंसक झड़प हुई थी। ये प्रदर्शनकारी 'इस्लाम के दुश्मनों' को बाहर निकालने और दोषियों को फांसी देने की मांग कर रहे थे।

बता दें कि यह बवाल तब शुरू हुआ जब इस्लाम के पवित्र ग्रंथ यानी कुरान की एक प्रति को कमिल्ला जिले में एक हिंदू मंदिर में लगी प्रतिमा के पैर के पास रखे जाने की तस्वीरें सामने आईं। इसके बाद से ही पूरे बांग्लादेश में मंदिरों में तोड़फोड़ और हिंसा जारी है। 


बांग्लादेशी इस्लामिक मूवनेंट के अध्यक्ष मोसादेक बिलाह अल मदनी ने कहा, 'हम सरकार से उन लोगों की गिरफ्तारी करने की मांग करते हैं जिन्होंने कमिल्ला में एक प्रतिमा के पैर के पास कुरान रखी थी।' उन्होंने कहा कि इस तरह की तस्वीरों के लिए जिम्मेदारों को मौत की सजा होनी चाहिए।


वहीं, मुस्लिमों की भीड़ द्वारा मंदिरों पर हमले और दो लोगों की हत्या के बाद करीब 1000 हिंदुओं ने भी विरोध प्रदर्शन किया। पुलिस के मुताबिक, शुक्रवार के हमले में कम-से-कम दो हिंदुओं की मौत हो गई। 


अब चीन को टक्कर देगा ताईवान, यूएस से 'जल्दी' मांगे F-16 फाइटर जेट

चीनी लड़ाकू विमानों की घुसपैठ और ड्रैगन से बढ़ते खतरे के बीच रिपोर्टें सामने आई हैं कि ताइवान के अधिकारियों ने वाशिंगटन से ताइपे को अमेरिकी-निर्मित एफ-16 फाइटर जेट की डिलीवरी में तेजी लाने का आग्रह किया है।

नई दिल्ली: अक्सर चीन ताईवान को गीदड़भभकी देता रहता है लेकिन अब ताईवान उससे डरने वाले नहीं बल्कि उसे टक्कर देने वाला है।

ताइवान ने अमेरिका से जल्द से जल्द एफ-16 लड़ाकू विमानों की डिलीवरी करने की गुहार लगाई है। अब ताइवा ने चीन के साथ दो-दो हाथ करने का मन बना लिया है। यही वजह है कि वह अपनी सुरक्षा के लिए पहले से ज्यादा तैयार दिख रहा है। 

चीनी लड़ाकू विमानों की घुसपैठ और ड्रैगन से बढ़ते खतरे के बीच रिपोर्टें सामने आई हैं कि ताइवान के अधिकारियों ने वाशिंगटन से ताइपे को अमेरिकी-निर्मित एफ-16 फाइटर जेट की डिलीवरी में तेजी लाने का आग्रह किया है।

ताइपे टाइम्स ने सीएनएन की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन के प्रशासन ने ताइवान के अधिकारियों के साथ ताइवान को अमेरिकी निर्मित एफ-16 की डिलीवरी में तेजी लाने की संभावना पर चर्चा की है। बता दें कि 2019 में ताइवान ने अमेरिका से F-16 फाइटर जेट खरीदने का सौदा किया था, जो करीब 10 साल में पूरा होगा। 


रिपोर्ट में कहा गया है कि 22 फाइटर जेट्स की बिक्री को 2019 में मंजूरी दी गई थी, मगर चीनी उकसावे और खतरे के मद्देनजर ताइवान को वास्तविक डिलीवरी के समय में तेजी लाने की उम्मीद है, जिसमें आमतौर पर 10 साल तक का समय लग सकता है। 

रिपोर्ट में कहा गया है कि यह डेवलपमेंट ऐसे वक्त में आया है, जब पेंटागन इंडो-पैसिफिक कमांड ने बढ़ती चिंता को देखा रहा है, क्योंकि चीन ने अपनी सेना का तेजी से आधुनिकीकरण किया है और ताइवान को ध्यान में रखते हुए अपने प्रशिक्षण में सुधार किया है। 


बांग्लादेश: हिंदुओं के खिलाफ भड़की हिंसा, अबतक 6 लोगों की मौत

आज सुबह कुछ मंदिरों में तोड़-फोड़ की सूचना थी, अब जानकारी मिल रही है कि हिंसा में हमलावरों ने दो हिंदू युवकों की हत्या कर दी गई। पुलिस अधिकारियों ने शनिवार को बताया कि धार्मिक हिंसा में मरने वालों की संख्या अब तक 6 हो गई है। आरोपियों की तलाश की जा रही है।

ढाका: बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ हिंसा थमने का नाम नहीं ले रही है। आज सुबह कुछ मंदिरों में तोड़-फोड़ की सूचना थी, अब जानकारी मिल रही है कि हिंसा में हमलावरों ने दो हिंदू युवकों की हत्या कर दी गई। पुलिस अधिकारियों ने शनिवार को बताया कि धार्मिक हिंसा में मरने वालों की संख्या अब तक 6 हो गई है। आरोपियों की तलाश की जा रही है।

बांग्लादेश पुलिस ने बताया कि ताजा हिंसा दक्षिणी शहर बेगमगंज में हुई है। इससे पहले सैंकड़ों की संख्या में बाहुल्य समुदाय के लोगों ने दुर्गा पूजा के अंतिम दिन शुक्रवार की नमाज के बाद सड़क पर जुलूस निकाला। इस दौरान 200 से अधिक प्रदर्शनकारियों ने इस्कॉन मंदिर पर हमला किया हमला उस वक्त हुआ जब हिंदु समुदाय के लोग विजयदशमी पर रैली आयोजित करने वाले थे। अज्ञात हमलावरों ने मंदिर समिति के एक कार्यकारी सदस्य को पीटा और उसे चाकू घोंप दिया।

स्थानीय पुलिस प्रमुख शाहिदुल इस्लाम ने एएफपी को बताया कि शनिवार की सुबह मंदिर के बगल में एक तालाब के पास एक और हिंदू व्यक्ति का शव मिला है। उन्होंने कहा, "कल के हमले के बाद से दो लोगों की मौत हो गई है। हम हमलावरों की तलाश कर रहे हैं।"


एक साल पहले ही मारा जा चुका है हैबतुल्लाह अखुंदजादा, तालिबान ने किया कन्फर्म

तालिबान के सीनियर नेता आमिर-अल-मुमिनिन ने कहा कि हैबतुल्लाह अखुंदजादा पाक सेनाओं द्वारा समर्थित आत्मघाती हमले में ‘शहीद’ हो गया था।

काबुल: हैबतुल्लाह अखुंदजादा के संबंध में सारे कयास फेल हो चुके है।वह अब कभी भी दुनिया के सामने नहीं आ सकेगा। दरअसल, उसे 2020 में ही मारा जा चुका है।


अफगानिस्तान की सत्ता में 20 साल बाद वापसी करने वाले तालिबान ने अपने सुप्रीम लीडर हैबतुल्लाह अखुंदजादा को लेकर जारी सस्पेंस से पर्दा उठा दिया है। महीनों से चले आ रही अटकलों को विराम देते हुए अब तालिबान ने सुप्रीम लीडर हैबतुल्लाह अखुंदजादा की मौत की पुष्टि कर दी है। मीडिया रिपोर्ट की मानें तो आतंकी संगठन ने बताया कि 2016 से तालिबान का मुखिया रहा हैबतुल्लाह अखुंदजादा साल 2020 में पाकिस्तान में एक आत्मघाती हमले में मारा गया था।


दरअसल, अफगानिस्तान की सत्ता में तालिबान की वापसी के बाद से ही सबकी निगाहें इस बात पर टिकी थीं कि आखिर तालिबान का मुखिया अखुंदजादा कहां है। इससे पहले हैबतुल्लाह अखुंदजादा के गायब होने रहने पर कई तरह की अटकलें थीं। कोई मरने की बात कहता था तो कोई जेल में बंद करने की, मगर तालिबान ने चुप्पी साध रखी थी। मगर अब उसने कन्फर्म कर दिया है कि उसका सुप्रीम लीडर मारा जा चुका है। अखुंदजादा पाकिस्तानी सेनाओं द्वारा समर्थित आत्मघाती हमले में मारा गया था।

एक समाचार चैनल की रिपोर्ट के मुताबिक, तालिबान के सीनियर नेता आमिर-अल-मुमिनिन ने कहा कि हैबतुल्लाह अखुंदजादा पाक सेनाओं द्वारा समर्थित आत्मघाती हमले में ‘शहीद’ हो गया था। हैबतुल्लाह अखुंदजादा आज तक कभी भी लोगों के सामने नहीं आया और वह एक रहस्य ही बनकर रहा। न्यू यॉर्क पोस्ट के होली मैक काय के मुताबिक हैबतुल्लाह अखुंदजादा की इंटरनेट पर तस्वीर भी बरसों पुरानी है। 

अफगानिस्तान की सत्ता में वापसी के बाद ऐसी उम्मीदें थीं कि अब अखुंदजादा सार्वजनिक रूप से सबके सामने आएगा, मगर काबुल पर तालिबानी कब्जे के बाद भी वह सामने नहीं आया तो ऐसे में अफवाहों का दौर शुरू हो गया। मौत की अफवाहें तो तालिबान नेताओं के बीच भी चलने लगीं कि क्या सच में अखुंदजादा जिंदा नहीं है?

बता दें कि तालिबान के पूर्व नेता अख्तूर मंसूर के अमेरिकी ड्रोन हमले में मारे जाने के बाद मई 2016 में हैबतुल्लाह अखुंदजादा को आतंकी समहू का चीफ नियुक्त किया गया था। उस वक्त तालिबान द्वारा शेयर किए गए एक वीडियो संदेश के मुताबिक, हैबतुल्लाह अखुंदजादा आतंकी मंसूर का डिप्टी था, मगर ड्रोन हमले में उसकी मौत के बाद उसे गद्दी मिली थी। 

पाकिस्तान में एक बैठक के दौरान प्रमोट कर उसे तालिबान का सुप्रीम लीडर बनाया गया था। हैबतुल्लाह अखुंदजादा को एक सैनिक के बजाय एक धार्मिक कानूनी विद्वान के रूप में वर्णित किया जाता था। 

बता दें कि 15 अगस्त को तालिबान ने अफगानिस्तान पर कब्जा किया था और उसके बाद से ही कयास लगाए जा रहे थे कि अखुंदजादा अब सार्वजनिक तौर पर सबके सामने आएगा।


अफगानिस्तान: शिया मस्जिद पर फिर से हमला, 16 की मौत, 50 घायल

अफगानिस्तान में कंधार के एक शिया मस्जिद में हुए हमले में कम से कम 16 लोगों की मौत हो चुकी है।

काबुल: एक बार फिर से अफगानिस्तान में शिया मुस्लिमों को निशाना बनाकर आतंकी हमला किया गया है। मिली जानकारी के मुताबिक,अफगानिस्तान में कंधार के एक शिया मस्जिद में हुए हमले में कम से कम 16 लोगों की मौत हो चुकी है। स्थानीय पुलिस ने जानकारी दी है कि हमले में कम से कम 16 लोगों की मौत हो चुकी है और 40 से अधिक लोग घायल हो गए हैं।

यह धमाका जुम्मे की नमाज के दौरान हुआ है। अफगानिस्तान की न्यूज एजेंसी टोलो न्यूज के मुताबिक कंधार के इमाम बरगाह मस्जिद में एक के बाद लगातार तीन धमाके हुए हैं। बता दें कि इमाम बरगाह मस्जिद कंधार के सबसे बड़े मस्जिदों में से है।

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक धमाका जोरदार था और इस हमले में मारे गए लोगों की संख्या बढ़ सकती है। अब तक किसी ग्रुप ने इस हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है।

गौरतलब है कि हाल ही में 8 अक्टूबर को एक शिया मस्जिद में हुए हमले में कम से कम 100 लोगों की मौत हो गई थी। इस धमाके को एक आत्मघाती हमलावर द्वारा अंजाम दिया गया था।


बांग्लादेश: कट्टरपंथियों ने तोड़े मां दुर्गा के पांडाल, प्रतिमाओं को भी किया क्षतिग्रस्त, हरकत में सरकार

एक सोशल मीडिया पोस्ट में कथित तौर पर एक पूजा स्थल पर कुरान के अपमान के बाद हिंसा भड़क गई थी।

ढाका: पड़ोसी देश बांग्लादेश में कई दुर्गा पूजा के पंडालों में तोड़फोड़ होने के बाद सरकार के कड़ी कारवाई की चेतावनी दी है। अधिकतर हमले कमिला जिले में हुए हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक एक सोशल मीडिया पोस्ट में कथित तौर पर एक पूजा स्थल पर कुरान के अपमान के बाद हिंसा भड़क गई थी।

मिली जानकारी के मुताबिक, चांदपुर के हाजीगंज, चट्टोग्राम के बंशखली, चपैनवाबगंज के शिबगंज और कॉक्स बाजार के पेकुआ में हुई हिंसा में मंदिरों पर भी हमला किया गया है। कई जगह दुर्गा की प्रतिमा को भी क्षतिग्रस्त कर दिया गया। हिंसा की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हैं।

चांदपुर के एक हॉस्पिटल ने बताया है कि उन्हें तीन लोगों की बॉडी मिली है, जिसे लेकर हॉस्पिटल का मानना है कि हिंसा में ये लोग मारे गए हैं। हालांकि पुलिस ने अब तक इस बात कि पुष्टि नहीं की है कि ये मौतें हिंसा से जुड़ी हुई हैं या नहीं।

बांग्लादेश के सुरक्षा अधिकारीयों ने घटनास्थल पर अर्धसैनिक बलों को तैनात कर दिया है। केंद्रीय गृहमंत्री ने अधिकारीयों से अपराधियों के खिलाफ कारवाई करने को कहा है। 

गृह मंत्री असदुज्जमां खान ने कहा कि चटगांव जिले के कमिला में हमलों के पीछे लोगों का पता लगाया जाएगा। मुझे शक है कि यह घटना तोड़फोड़ से जुड़ी है। अधिकारियों को अपराधियों को जल्द से जल्द पकड़ने के आदेश दिए गए हैं।


पाकिस्तानी पीएम इमरान खान से इस बात पर नाराज हैं अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन

पाकिस्तान के पूर्व आंतरिक मंत्री अब्दुल रहमान मलिक ने कहा कि 2020 के अमेरिकी चुनाव अभियान के दौरान पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के पक्ष में पाकिस्तान की पक्षपातपूर्ण भूमिका से जो बाइडेन काफी नाराज चल रहे हैं।

नई दिल्ली: पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान के पीएम इमरान खान की हरकतों का खामियाजा पूरे देश को भुगतना पड़ रहा है। अफगानिस्तान में तालिबान का साथ देने की वजह से पाकिस्तान के रिश्ते अब अमेरिका से खराब हो चुके है।

कहा गया कि अफगानिस्तान के मुद्दे पर इमरान खान के रुख से अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन नाराज है। हालांकि यह सच्चाई नहीं है। नई रिपोर्ट जो सामने आई है, वह दोनों देशों के बीच बिगड़ते संबंधों की कुछ और ही कहानी बयां कर रही है।

पाकिस्तान के पूर्व आंतरिक मंत्री अब्दुल रहमान मलिक ने कहा कि 2020 के अमेरिकी चुनाव अभियान के दौरान पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के पक्ष में पाकिस्तान की पक्षपातपूर्ण भूमिका से जो बाइडेन काफी नाराज चल रहे हैं। 

मलिक ने द न्यूज इंटरनेशनल को बताया, "अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव के दौरान, एक पाकिस्तानी व्यवसायी ने वाशिंगटन में पाकिस्तानी दूतावास को ट्रम्प के चुनाव कार्यालय के रूप में इस्तेमाल किया। जब राष्ट्रपति जो बाइडेन को इसके बारे में पता चला, तो वह काफी नाराज हो गए।"

मलिक ने इमरान खान को अमेरिकी राष्ट्रपति को पत्र लिखने और पाकिस्तान की स्थिति स्पष्ट करने की सलाह दी। पाकिस्तान के पूर्व मंत्री ने कहा कि दोनों देशों के बीच संबंधों में खटास आज भी जारी है। अगर ऐसा नहीं होता तो बाइडेन, इमरान खान से जरूर बात करते।


अमेरिकी उप विदेश मंत्री वेंडी शेरमेन ने हाल की पाकिस्तान की यात्रा की है। उनकी यह यात्रा अफगानिस्तान की वर्तमान स्थिति पर केंद्रित थी। शेरमेन की व्यस्तताओं पर अमेरिकी विदेश विभाग के बयान ने अमेरिका-पाकिस्तान वार्ता में अफगान मुद्दे की प्रमुखता का संकेत दिया। ये घटनाक्रम इस बात की पुष्टि करते हैं कि शेरमेन ने पिछले गुरुवार को मुंबई में एक कार्यक्रम में क्या कहा। उन्होंने घोषणा की कि वाशिंगटन अब खुद को पाकिस्तान के साथ "व्यापक-आधारित संबंध" बनाने के लिए नहीं देखता है।


EU ने 'मानवता' के नाते अफगान को दिया 1 बिलियन यूरो का पैकेज

मंगलवार को यूरोपियन यूनियन ने ऐलान किया कि वो अफगानिस्तान को 1 बिलियन यूरो की मदद करेगा। ताकि वहां मानवता पर आई संकट और खराब होती आर्थिक स्थिति को पटरी पर लाया जा सके।

काबुल: अफगानिस्तान पर बंदूकों के दम पर तालिबान ने बेशक कब्जा जमा लिया है और सरकार बना ली है लेकिन वहां की व्यवस्था नहीं सुधार पा रही है। आज आलम यह हो गए हैं कि वहां की आर्थिक हालात इतने खराब हो गए हैं कि भुखमरी तक की नौबत आ गई है। अभी भी पाकिस्तान, चीन को छोड़कर दुनिया के अन्य देश अफगानिस्तान को लेकर वेट एंड वाच की मुद्रा में लेकिन मानवता के नाते तालिबान के अफगान की मदद की जा रही है। 


मंगलवार को यूरोपियन यूनियन ने ऐलान किया कि वो अफगानिस्तान को 1 बिलियन यूरो की मदद करेगा। ताकि वहां मानवता पर आई संकट और खराब होती आर्थिक स्थिति को पटरी पर लाया जा सके। यूरोपीय कमीशन की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन वर्चुअल जी 20 सम्मेलन में मौजूद थीं। इटली इस सम्मेलन को होस्ट कर रहा है। इस दौरान उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने अफगानिस्तान में मानवता को मदद पहुंचाते रहने का संकल्प भी दोहराया। 

उन्होंने अपने बयान में जोर देकर कहा कि यह पैसे धीरे तौर पर अफगानिस्तान की मदद के लिए हैं। यह पैसे उन अतंरराष्ट्रीय संगठनों को दिये जाएंगे जो जमीन पर वहां काम कर रहे हैं। उन्होंने साफ किया कि यह पैसे तालिबान की सरकार को नहीं दिया जाएंगे क्योंकि उन्हें अभी मान्यता नहीं मिली है। उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने कहा, 'अफगानिस्तान में मानवता और सामाजिक-आर्थिक स्थिति की रक्षा के लिए हम सभी को वो सबकुछ करना चाहिए जो हम कर सकते हैं। हमें इसे जल्दी करना होगा।' उन्होंने आगे कहा, 'तालिबान के साथ किसी भी तरह के सहयोग को लेकर हम अपने शर्तों पर कायम है और बिल्कुल साफ भी हैं। लेकिन तालिबान के इस काम की सजा वहां के लोगों को नहीं मिलनी चाहिए।'

बताया जा रहा है कि 1 बिलियन पैकेज का इस्तेमाल अफगानिस्तान के हेल्थ सिस्टम को सुधारने के लिए किया जाएगा। इसके अलावा इसका इस्तेमाल प्रवासी प्रबंधन और आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई लड़ने में किया जाएगा।  




पाकिस्तान को तालिबान बनाने पर तुले पीएम इमरान खान, जानिए-क्या है पूरा मामला

रविवार को उन्होंने 'दुनिया में इस्लाम की सही तस्वीर' पेश करने का ठेका खुद को देते हुए रहमतुल लील आलमीन अथॉरिटी के गठन का ऐलान किया। बात यहां तक तो ठीक थी, लेकिन अगले ही पल उन्होंने इसका असली मकसद भी साफ कर दिया और कहा कि इस अथॉरिटी का काम पाकिस्तान की शिक्षा व्यवस्था को शरिया के मुताबिक बदलना है।

इस्लामाबाद: तालिबान से पाकिस्तान के पीएम इमरान खान काफी खुश हैं और उसे अब अपना गुरू बनाने का प्लान कर रहे हैं। अफगानिस्तान में तालिबान के कब्जे से गदगद पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान नियाजी जिस तरह कट्टरवादी इस्लामिक समूह की शान में कसीदे गढ़ रहे हैं, उससे पहले ही संकेत मिल चुका था कि वह अपने मुल्क को भी उसी राह पर ले जाना चाहते हैं। अब उन्होंने इस दिशा में कदम आगे भी बढ़ाने शुरू कर दिए हैं। रविवार को उन्होंने 'दुनिया में इस्लाम की सही तस्वीर' पेश करने का ठेका खुद को देते हुए रहमतुल लील आलमीन अथॉरिटी के गठन का ऐलान किया। बात यहां तक तो ठीक थी, लेकिन अगले ही पल उन्होंने इसका असली मकसद भी साफ कर दिया और कहा कि इस अथॉरिटी का काम पाकिस्तान की शिक्षा व्यवस्था को शरिया के मुताबिक बदलना है।

माना जा रहा है कि इमरान खान ने एक तरह से देश में 'तालिबान की नींव' रख दी है। बताते चलें कि अफगानिस्तान पर कब्जा जमाने वाला कट्टरपंथी संगठन तालिबान की शुरुआत भी छात्र संगठन के रूप में हुई थी, जो खुद को इस्लाम का पैरोकार और शरिया का पालनकर्ता बताते हैं। शरिया के नाम पर क्रूरता करने वाले संगठन की इमरान जिस तरह तारीफ करते हैं, उससे यह आशंका लाजिमी है कि इमरान भी उसी राह पर चल सकते हैं।

इस्लामाबाद में आयोजित अशरा-ए-रहमतुल लील आलमीन (PBUH) को संबोधित करते हुए इमरान खान ने इसे देश के विकास से जोड़ते हुए कहा कि अपने नैतिक मूल्यों को कम करके कोई भी देश तरक्की नहीं कर सकता है। इमरान ने कहा, ''कई विद्वान इसका (अथॉरिटी) हिस्सा होंगे। इस अथॉरिटी का एक काम दुनिया को यह बताना होगा कि असल में इस्लाम क्या है। 

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने कहा कि मशहूर विद्वान इस अथॉरिटी का हिस्सा होंगे, जोकि स्कूलों के पाठ्यक्रम की निगरानी करेगा। तालिबान खान ने कहा, ''वे हमें बताएंगे कि क्या पाठ्यक्रम को बदलने की जरूरत है।'' देश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा में नाकाम रहे इमरान ने यह भी कहा कि दूसरे धर्मों की भी शिक्षा दी जाएगी। इमरान खान ने यह भी साफ किया कि मीडिया और सोशल मीडिया भी शरिया जानकारों के मुताबिक चलना होगा।  उन्होंने कहा कि एक विद्वान मीडिया और सोशल मीडिया से जुड़े मुद्दों को देखेगा। 

इमरान खान ने कहा कि अथॉरिटी को अपनी संस्कृति के मुताबिक कार्टून भी बनाने का काम दिया जाएगा। उन्होंने कहा, ''कार्टून हमारे बच्चों को विदेशी संस्कृति दिखा रहे हैं। हम उन्हें रोक नहीं सकते हैं, लेकिन उन्हें विकल्प दे सकते हैं।  इमरान खान ने कहा कि अथॉरिटी पाकिस्तानी समाज पर पश्चिमी सभ्यता के फायदे नुकसान का भी आकलन करेगा। उन्होंने कहा, ''जब आप देश में पश्चिमी सभ्यता लाते हैं, इसका आकलन करने की भी जरूरत है कि इसका हमें क्या नुकसान हो रहा है।''




तालिबान की अमेरिका को गीदड़भभकी, कहा-'अफगान को अस्थिर करने की कोशिश न करो'

तालिबान के प्रतिनिधियों ने अमेरिका से अफगानिस्तान के केंद्रीय बैंक के भंडार पर लगे प्रतिबंध को हटाने को कहा है।

काबुल: अफगानिस्तान पर तालिबान का शासन आने के बाद से उसके हौसले बढ़े हुए है। तालिबान ने अमेरिका को चेतावनी देते हुए कहा कि वह अफगानिस्तान को अस्थिर करने की कोशिश न करे। अफगानिस्तान के कार्यवाहक विदेश मंत्री अमीर खान मुत्तकी दोहा में तालिबान-अमेरिका की वार्ता का नेतृत्व कर रहे हैं। इतना ही नहीं, तालिबान के प्रतिनिधियों ने अमेरिका से अफगानिस्तान के केंद्रीय बैंक के भंडार पर लगे प्रतिबंध को हटाने को कहा है। 



अफगानिस्तान के कार्यवाहक विदेश मंत्री ने शनिवार को दोहा में समाचार चैनल अल-जजीरा से बात करने के दौरान यह टिप्पणी की। अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक अफगानिस्तान के कार्यवाहक विदेश मंत्री अमीर खान मुत्तकी ने कहा कि वाशिंगटन ने बैठक के दौरान कोरोना रोधी टीके की पेशकश की। अफगानिस्तान पर तालिबान का कब्जा होने के बाद पहली बार दोनों पक्ष (तालिबान और अमेरिका) आमने-सामने की बैठक कर रहे हैं। मंत्री ने कहा कि बैठक में अफगान प्रतिनिधिमंडल और अमेरिका के बीच एक नया पृष्ठ खोलने पर चर्चा हुई। 


अफगानिस्तान: नमाज पढ़ते शिया मुस्लिमों पर आत्मघाती हमला, 100 से ज्यादा की मौत, आईएस पर शक

शुक्रवार को दोपहर के समय जब विस्फोट हुआ तब इलाके में रहने वाले शिया मुसलमान बड़ी संख्या में नमाज पढ़ने के लिए मस्जिद में आए हुए थे।

काबुल:  अफगानिस्तान के कुंदूज शहर में मस्जिद के भीतर हुए बम विस्फोट में सौ से ज्यादा लोग मारे गए हैं जबकि सैकड़ों घायल हुए हैं। शुक्रवार को दोपहर के समय जब विस्फोट हुआ तब इलाके में रहने वाले शिया मुसलमान बड़ी संख्या में नमाज पढ़ने के लिए मस्जिद में आए हुए थे।

तेज आवाज के साथ हुए विस्फोट के बाद मस्जिद धुंए से भर गई और चीख-पुकार मच गई। धुंआ छंटने पर जब आसपास के लोग मस्जिद के भीतर पहुंचे तो खून से रंगी धरती पर मानव अंग बिखरे पड़े थे, तमाम घायल मदद के लिए लोगों को पुकार रहे थे। माना जा रहा है कि यह आत्मघाती हमला था।

हमले की जिम्मेदारी किसी ने नहीं ली है लेकिन शक आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट (आइएस) की खोरसान शाखा पर है। अफगानिस्तान में जड़ जमा रहे आइएस के हमलों में तालिबान के सत्ता में काबिज होने के बाद खासी तेजी आई है।


'आतंक के आका' पाकिस्तान को सदाबहार दोस्त चीन की आतंकवाद पर गुरुमंत्र, कहा-'पालने वाले को ही खाता है बाघ...'

अब चीन ने भी कहा है कि आतंकियों को पालना बाघ पालने जैसा है जो मालिक को ही अपना शिकार बना सकता है। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि क्या पाकिस्तान अपने सदाबहार दोस्त की बात मानेगा। हालांकि, वैश्विक आतंकी मसूद अजहर के लिए ढाल बनने जैसे कदमों से चीन कई बार पाकिस्तान की आतंक नीति को बढ़ावा दे चुका है।

नई दिल्ली: स्टेट पॉलिसी के तौर पर आतंकवाद का इस्तेमाल करने वाले पाकिस्तान को दुनिया ने समझाया, लेकिन यह बात अब तक समझ नहीं आई है कि यह उसके लिए भी विनाशकारी ही साबित होगा। 

अब चीन ने भी कहा है कि आतंकियों को पालना बाघ पालने जैसा है जो मालिक को ही अपना शिकार बना सकता है। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि क्या पाकिस्तान अपने सदाबहार दोस्त की बात मानेगा। हालांकि, वैश्विक आतंकी मसूद अजहर के लिए ढाल बनने जैसे कदमों से चीन कई बार पाकिस्तान की आतंक नीति को बढ़ावा दे चुका है। 

चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने शुक्रवार को ग्लोबल काउंटर टेरेरिज्म फोरम में कहा, ''अच्छे और बुरे आतंकवाद में कोई फर्क नहीं है। काउंटर टेरेरिज्म का राजनीतिकरण या राजनीतिक आवश्यकताओं के लिए इसका हथियार के रूप में इस्तेमाल बाघ पालने जैसा है, जो केवल बर्बादी ही लाएगा।'' 

चीन ने यह बात भले ही पाकिस्तान के संदर्भ में ना कही हो, लेकिन ड्रैगन के सदाबहार दोस्त को दुनिया लंबे समय से यही बात समझाने की कोशिश कर रही है। ऐसे में दुनिया की उम्मीद यही होगी कि पाकिस्तान को कम से कम अपने दोस्त की बात पर तो यकीन करे।

वांग ने ईस्ट तुर्किस्तान इस्लामिक मूवमेंट (ETIM) के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की अपील की। यूएन सिक्यॉरिटी काउंसिल की ओर से वैश्विक आतंकवादी संगठन करार दिया जा चुका ईटीआईएम लंबे समय से चीन के लिए सिरदर्द बना रहा है। 

अफगानिस्तान में तालिबान के कब्जे से चीन को यह आशंका सता रही है कि ईटीआईएम यहां अपनी ताकत बढ़ा सकता है। यही वजह है कि चीन ने तालिबान से दोस्ती कर ली है और आर्थिक मदद के बदले वह ईटीआईएम का अफगानिस्तान से सफाया चाहता है।


कुत्ते की दुम नहीं हो सकती सीधी! 'आतंक के आका' पाकिस्तान ने यूएन में फिर अलापा कश्मीर राग, भारत ने फिर से लगाई जमकर लताड़

संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान के एक बार फिर कश्मीर का मुद्दा उठाने को लेकर भारत ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। भारत ने कहा कि पाकिस्तान, आतंकवाद का सबसे बड़ा समर्थक तथा उसे बढ़ावा देने वाला देश है। साथ ही खुद को इसका पीड़ित बताने का ढोंग करता है।

नई दिल्ली:  पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान अपनी हरकतों के चलते कई बार यूएन में भारत से लताड़ खा चुका है लेकिन एक कहावत है कि कुत्ते की दुम कभी सीधी नहीं हो सकती चाहे उसे परखनली में ही क्यों ना डाल दी जाए। एक बार फिर से पाकिस्तान ने यूएन में कश्मीर राग अलापा जिसके बाद हमेशा की तरह भारत ने एक बार फिर से उसे जमकर लताड़ लगाई है।

संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान के एक बार फिर कश्मीर का मुद्दा उठाने को लेकर भारत ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। भारत ने कहा कि पाकिस्तान, आतंकवाद का सबसे बड़ा समर्थक तथा उसे बढ़ावा देने वाला देश है। साथ ही खुद को इसका पीड़ित बताने का ढोंग करता है।

संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन की काउंसलर एवं कानूनी सलाहकार डॉ. काजल भट्ट ने कहा कि सभी सदस्य देशों को अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद विरोधी कार्यक्रमों और सम्मेलनों में निहित अपने दायित्वों को पूरा करना चाहिए। अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद को खत्म करने के तरीकों पर महासभा की छठी समिति (कानूनी) की बैठक में भट्ट ने कहा कि मैं इस बात पर निराशा व्यक्त करना चाहती हूं कि पाकिस्तान ने एक बार फिर इस महत्वपूर्ण मंच का दुरुपयोग करते हुए अपने झूठ को दोहराना शुरू कर दिया है।

भट्ट ने कहा कि जम्मू-कश्मीर, भारत का हिस्सा था और हमेशा रहेगा। उन्होंने कहा कि हम पाकिस्तान से हिंदू, ईसाई, सिख और बौद्ध सहित अपने सभी अल्पसंख्यक समुदायों का नस्लीय सफाया करना बंद करने की मांग करते हैं। संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान के दूत मुनीर अकरम द्वारा छठी समिति की बैठक में फिर से कश्मीर के मुद्दे को उठाने और अपनी टिप्पणी में भारत के खिलाफ निराधार आरोप लगाने के बाद भारत की ओर से यह कड़ी प्रतिक्रिया दी गई।

वहीं, भारत के स्थायी प्रतिनिधि टीएस तिरुमूर्ति ने पाकिस्तान का परोक्ष रूप से जिक्र करते हुए कहा है कि भारत सीमा पार से तस्करी किए गए अवैध हथियारों का उपयोग करने वाले आतंकवादी संगठनों से कई दशकों से प्रभावित है। साथ ही उन्होंने वैश्विक समुदाय से ऐसे आतंकवादी संगठनों को बढ़ावा देने वालों की स्पष्ट रूप से निंदा करने का आह्वान भी किया। तिरुमूर्ति ने छोटे एवं हल्के हथियारों पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की एक बैठक में आतंकवादियों और आतंकवादी संगठनों को हथियार देने और उनकी तस्करी करने पर परिषद के ध्यान देने की आवश्यकता को दृढ़ता से रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि कई दशकों से मेरा देश, सीमा पार आतंकवाद एवं हिंसा से प्रभावित है। अब तो ड्रोन के माध्यम से भी हथियारों की तस्करी की जाती है।


डेविड जूलियस और अरदम पैटापूटियन को मेडिकल के क्षेत्र में दिया जाएगा वर्ष 2021 का नोबेल प्राइज

डेविड जूलियस और अरदम पैटापूटियन ने तापमान और स्पर्श के लिए रिसेप्टर्स की अपनी खोजों के लिए शरीर विज्ञान या चिकित्सा में 2021 का नोबेल पुरस्कार जीता है।

स्टाकहोम: फिजियोलाजी या चिकित्सा के क्षेत्र में मिलने वाले नोबेल पुरस्कार 2021 की घोषणा की गई है। डेविड जूलियस और अरदम पैटापूटियन ने तापमान और स्पर्श के लिए रिसेप्टर्स की अपनी खोजों के लिए शरीर विज्ञान या चिकित्सा में 2021 का नोबेल पुरस्कार जीता है। 

डेविड जूलियस ने त्वचा के तंत्रिका के अंत में एक सेंसर की पहचान करने के लिए मिर्च से एक तीखा यौगिक, जो जलन पैदा करता है। कैप्साइसिन का उपयोग किया है। जो गर्मी के प्रति प्रतिक्रिया करता है। इसके साथ ही अरदम पैटापूटियन ने सेंसर के एक नोवेल वर्ग की खोज के लिए दबाव-संवेदनशील कोशिकाओं का उपयोग किया जो त्वचा और आंतरिक अंगों में यांत्रिक उत्तेजनाओं को रिस्पांड करते हैं।

इन सफल वैज्ञानिकों ने गहन शोध गतिविधियों को शुरू किया जिससे यह समझने में तेजी से वृद्धि हुई कि तंत्रिका तंत्र गर्मी, ठंड और यांत्रिक उत्तेजनाओं को कैसे महसूस करता है।

नोबेल समिति की रिपोर्ट के अनुसार पुरस्कार विजेताओं ने इंद्रियों और पर्यावरण के बीच जटिल परस्पर क्रिया की समझ में महत्वपूर्ण लापता लिंक की पहचान की है। पहचाने गए आयन चैनल (ion channels) कई शारीरिक प्रक्रियाओं और रोग स्थितियों के लिए महत्वपूर्ण हैं।

बता दें कि 2021 के नोबेल पुरस्कारों में से पहला सबसे प्रतिष्ठित पुरस्कार की घोषणा इसी सप्ताह से शुरू हुआ है। स्टाकहोम में करोलिंस्का संस्थान में एक पैनल द्वारा इन पुरस्कारों की घोषणा की गई है। नोबेल पुरस्कार रायल स्वीडिश एकेडमी ऑफ साइंसेज द्वारा प्रदान किया जाता है और इसकी कीमत 10 मिलियन स्वीडिश क्राउन (1.15 मिलियन अमेरिकी डालर) है।


चीन की दबंगई! ताइवान में उड़ाए 3 दिन में 100 लड़ाकू विमान, अमेरिका ने दी चेतावनी

अब इस मामले पर अमेरिका भी भड़क गया है और उसने चीन को चेतावनी दे दी है। अमेरिका ने इस मामले पर चीन से उसकी "उकसाने वाली सैन्य" गतिविधियों को रोकने के लिए कहा है।

नई दिल्ली: चीन अपनी बदमाशियों से बाज नहीं आ रहा है। ड्रैगन ने ताइवान के रक्षा क्षेत्र के ऊपर से लगभग 100 सैन्य विमान उड़ाए, जिसके बाद से ताइवान ने भी चीन को चेतावनी देने के लिए अपने विमान भेजे थे। अब इस मामले पर अमेरिका भी भड़क गया है और उसने चीन को चेतावनी दे दी है। अमेरिका ने इस मामले पर चीन से उसकी "उकसाने वाली सैन्य" गतिविधियों को रोकने के लिए कहा है।

अमेरिका ने अपने बयान में कहा , 'हम बीजिंग से अपील करते हैं कि वह ताइवान पर सैन्य, कूटनीतिक और आर्थिक दबाव और दंडात्मक कार्रवाई रोके।' ताइवान के रक्षा मंत्रालय न बताया कि चीन की वायु सेना ने शुक्रवार, शनिवार और रविवार को फिर से सैन्य विमानों को भेजा था। अकेले शनिवार को 39 विमानों को ताइवान के क्षेत्र में देखा गया था।

ताइवान पिछले 1 साल से चीन की ऐसी घटिया हरकतों की शिकायत करता आ रहा है लेकिन चीन अपनी चालाकियों से बाज नहीं आ रहा है। चीन ने अभी तक अपनी गतिविधियों पर टिप्पणी नहीं की है, और यह स्पष्ट नहीं है कि बीजिंग ने मिशनों को माउंट करने का निर्णय लेने का क्या कारण हो सकता है। हालांकि शुक्रवार को देश का राष्ट्रीय दिवस था।



भारत के साथ व्यापार और सुरक्षा समझौता करने को इच्छुक है ब्रिटेन

ब्रिटेन की नई विदेश मंत्री लिज ट्रस ने रविवार को कहा कि उनका देश रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत और अन्य लोकतांत्रिक देशों के साथ व्यापार और सुरक्षा समझौते करना चाहता है।

लंदन: ब्रिटेन की नई विदेश मंत्री लिज ट्रस ने रविवार को कहा कि उनका देश रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत और अन्य लोकतांत्रिक देशों के साथ व्यापार और सुरक्षा समझौते करना चाहता है। ऐसा करने से अधिनायकवादी देशों के प्रभाव को चुनौती दी जा सकेगी। ट्रस ने कहा कि वह 'आकस' की तर्ज पर और अधिक समझौता करने की इच्छुक हैं।

आकस आस्ट्रेलिया, ब्रिटेन और अमेरिका के बीच त्रिपक्षीय सुरक्षा गठबंधन, जिसे व्यापक रूप से चीन के जवाब के तौर पर देखा जाता है। विदेश मंत्री लिज ट्रस ने विदेश, राष्ट्रमंडल और विकास कार्यालय (एफसीडीओ) में अपनी नई भूमिका संभालने के बाद से अपने पहले साक्षात्कार में 'द संडे टाइम्स' को बताया, हम अधिक आर्थिक समझौते और सुरक्षा समझौते के लिए अपने दोस्तों और सहयोगियों के साथ काम करना चाहते हैं। आकस विशेष रूप से आस्ट्रेलिया के साथ व्यापार और नौवहन मार्गों की सुरक्षा के बारे में है, लेकिन मैं भारत, जापान और कनाडा के साथ उसी तरह के क्षेत्रों में उस सुरक्षा सहयोग का विस्तार करने के लिए व्यवस्थाओं को देखना चाहती हूं।


ब्रिटेन की विदेश मंत्री लिज ट्रस ने कहा कि कुछ देशों के साथ हम दूसरों के मुकाबले अधिक गहन सुरक्षा व्यवस्था करने में सक्षम होंगे। दो साल तक व्यापार मंत्री रहने के बाद एक बात मुझे पता चली कि ब्रिटेन पर काफी भरोसा किया जाता है।

ट्रस ने कहा कि लोग जानते हैं कि हम भरोसेमंद हैं और जब हम कहते हैं कि हम कुछ करेंगे तो हम करेंगे, हम नियमों का पालन करते हैं। ब्रिटेन दुर्भावनापूर्ण भूमिका निभाने वालों और अधिनायकवादी देशों के प्रभाव को चुनौती देने के लिए लोकतंत्रिक व्यवस्थाओं के साथ गठबंधन की कोशिश करेगा। ऐसा सुरक्षा समझौते व्यापार सौदों को बढ़ा सकते हैं।  

लिज ट्रस ने यह भी कहा कि यह अन्य देशों को शामिल करने के लिए एक सकारात्मक रणनीति है। हम एक मुक्त व्‍यापार, खुली, स्‍वतंत्र व्यापारिक दुनिया को सफल देखना चाहते हैं। यह दुनिया की आर्थिक मजबूती के लिए एक सकारात्मक रणनीति है।


अफगानिस्तान: काबुल में मस्जिद के बाहर बम ब्लास्ट, 2 लोगों की मौत

यह बम धमाका काबुल में ईदगाह मस्जिद को निशाना बना कर किया गया जहां तालिबान प्रवक्ता जबीहुल्ला मुजाहिद की मां के लिए एक प्रार्थना सभा आयोजित की जा रही थी।

काबुल: अफगानिस्‍तान की सत्‍ता पर तालिबान की वापसी के बाद हालात और खराब हो गए हैं। अफगानिस्‍तान अभी भी आतंकी हमलों की आग में झुलस रहा है। 

समाचार एजेंसी एएफपी की रिपोर्ट के मुताबिक अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में रविवार एक मस्जिद के प्रवेश द्वार के बाहर बम धमाका हुआ जिसमें दो लोगों की मौत हो गई। यह बम धमाका काबुल में ईदगाह मस्जिद को निशाना बना कर किया गया जहां तालिबान प्रवक्ता जबीहुल्ला मुजाहिद की मां के लिए एक प्रार्थना सभा आयोजित की जा रही थी।

तालिबान सरकार के गृह मंत्रालय के एक प्रवक्ता कारी सैयद खोस्ती ने एएफपी को बताया कि प्रारंभिक जानकारी में दो नागरिकों के मारे जाने और तीन के घायल होने की खबर है। उन्‍होंने बताया कि तालिबान प्रवक्ता जबीहुल्ला मुजाहिद की मां का पिछले हफ्ते इंतकाल हो गया था। अंत्‍येष्टि परंपरा के तहत रविवार को मस्जिद में एक प्रार्थना समारोह आयोजित किया जा रहा था। जबीहुल्ला मुजाहिद ने शनिवार को सोशल मीडिया के जरिए सभी लोगों को इस प्रार्थना सभा में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया था।

घटना स्‍थल के पास के एक दुकानदार अहमदुल्ला ने एएफपी को बताया कि मैंने ईदगाह मस्जिद के पास एक विस्फोट की आवाज सुनी जिसके बाद गोलीबारी हुई। विस्फोट से ठीक पहले तालिबान ने ईदगाह मस्जिद में जबीहुल्लाह मुजाहिद की मां के लिए नमाज अदा करने के लिए सड़क जाम कर दी थी।

 बम धमाके के बाद एम्बुलेंसों को शहर-ए-नवा इलाके में काबुल के आपातकालीन अस्पताल की ओर दौड़ते देखा गया। अस्पताल ने ट्विटर पर बताया कि चार मरीजों का इलाज चल रहा है।


चीन ने नेपाल की जमीन पर जमाया कब्जा, नागरिकों ने लगाए 'चीन गो बैक' के नारे

चीन अपने पड़ोसी देशों के साथ छल कपट करता रहता है यह कोई नई बात नहीं है। ताजा मामले में चीन ने नेपाल की जमीन पर कब्जा कर लिया। जिसके बाद वहां के नागरिकों ने चीन विरोधी नारे लगाए और 'चीन गो बैके' के नारे लगाए।


काठमांडू: चीन अपने पड़ोसी देशों के साथ छल कपट करता रहता है यह कोई नई बात नहीं है। ताजा मामले में चीन ने नेपाल की जमीन पर कब्जा कर लिया। जिसके बाद वहां के नागरिकों ने चीन विरोधी नारे लगाए और 'चीन गो बैके' के नारे लगाए।


चीन ने नेपाल की सैकड़ों हेक्टेयर जमीन पर कब्जा जमा लिया है। जिसको लेकर नेपाल में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। राजधानी काठमांडू में सड़कों पर निकले युवा ‘चीन गो बैक’ के नारे लगा रहे हैं।  नेपाल में चीन के खिलाफ लोगों का गुस्सा लगातार बढ़ता जा रहा है। लोग जिस नेपाली जमीन पर चीन ने कब्जा कर लिया है, उसे वापस लौटाने की मांग कर रहे हैं।

चीन ने नेपाल की करीब 150 हेक्टेयर जमीन पर कब्जा किया है। नेपाली जमीन पर चीनी कब्जा लिमी लप्चा से लेकर हुमला जिले के हिल्सा तक हुआ है। हुमला में चीन ने 10-11 इमारतों को निर्माण कर लिया है। सभी इमारतें नेपाली सीमा के 2 किलोमीटर भीतर बनी हुई हैं। हुमला के मुख्य जिला अधिकारी की तरफ से भी चीनी कब्जे की जांच करायी गयी थी। जांच में पाया गया है कि नेपाली जमीन पर चीन की इमारतें बनाने की बात बिल्कुल सही है। इसी के बाद नेपाल में चीन गो बैक के नारे लगने शुरू हो गए हैं।


पाकिस्तान के साथी तुर्की की अमेरिका में इंटरनेशनल बेइज्जती, जो बाइडेन ने नहीं दिया मिलने का समय

जिस तरह अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन से पहली बातचीत को इमरान तरस रहे हैं उसी तरह अब तैयब एर्दोगान को भी बाइडेन ने ठेंगा दिखा दिया है। जिससे तुर्की के राष्ट्रपति को ऐसी मिर्जी लगी है कि वह ना सिर्फ बाइडन की बुराई करने लगे हैं, बल्कि रूस और तालिबान से दोस्ती बढ़ाने की बात और जोरशोर से कर रहे हैं।

नई दिल्ली: आतंक के आका पाकिस्तान के साथ दोस्ती करने की कीमत तुर्की को अब वैश्विक स्तर पर चुकानी पड़ रही है। अब उसके साथ भी वही हो रहा है जो पाकिस्तान के साथ होता था। दरअसल, अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन से तुर्की के राष्ट्रपति मिलना चाहते थे लेकिन उन्हें जो बाइडेन द्वारा मिलने का समय ही नहीं दिया गया। ऐसा पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान के साथ भी किया जा चुका है।

बात कश्मीर की हो या तालिबान की, तुर्की के राष्ट्रपति तैयब एर्दोगान इमरान खान का साथ निभाते नजर आते हैं। अब वह इमरान को अमेरिका से मिली बेइज्जती के हमदर्द भी बन गए हैं। जी हां, जिस तरह अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन से पहली बातचीत को इमरान तरस रहे हैं उसी तरह अब तैयब एर्दोगान को भी बाइडेन ने ठेंगा दिखा दिया है। जिससे तुर्की के राष्ट्रपति को ऐसी मिर्जी लगी है कि वह ना सिर्फ बाइडन की बुराई करने लगे हैं, बल्कि रूस और तालिबान से दोस्ती बढ़ाने की बात और जोरशोर से कर रहे हैं।  

मिली जानकारी के मुताबिक, 23 सितंबर को तैयब संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठक में हिस्सा लेने के लिए अमेरिका गए थे। इस दौरान वह अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन से भी मुलाकात करना चाहते थे। लेकिन बाइडेन ने उन्हें इसके लिए समय नहीं दिया। 

अलजजीरा की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि इससे तैयाब बेहद निराश और नाराज हुए। उन्होंने तुर्की पत्रकारों के सामने अपना दर्द बयां भी किया और कहा कि अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपतियों के साथ वह ठीक से काम कर पाए, लेकिन बाइडन के साथ अब तक ऐसा नहीं हुआ है।

अगले ही दिन 24 सितंबर को इस्तांबुल में भी तैयब ने बाइडन की आलोचना की। उन्होंने यह भी कहा कि वह और बाइडन अपने मतभेदों को दूर नहीं कर पाए हैं। तुर्की के राष्ट्रपति ने यहां तक कहा कि अमेरिका आतंकी संगठनों से लड़ने की बजाय उनकी मदद कर रहा है। 

इसके अलावा उन्होंने यह भी ऐलान किया कि तुर्की रूस से s-400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम की खरीद करेगा, जो अमेरिका नहीं चाहता। इसके बाद अमेरिका ने तुर्की को प्रतिबंधों की चेतावनी भी दी है। तैयब ने बुधवार को रूसी राष्ट्रपति से मुलाकात भी की है। 


अपनी जाल में छोटे देशों को कर्ज देकर बुरी तरह फंसा रहा चीन

चीन के महत्वाकांक्षी विदेशी बुनियादी ढांचे ने 385 अरब डॉलर के साथ गरीब देशों को परेशान करके रख दिया है। विदेशों में चीन की एक तिहाई से अधिक परियोजनाएं कथित तौर पर भ्रष्टाचार, घोटालों और विरोधों से प्रभावित हुई हैं।

बीजिग: चीन की चाल से बहुत सारे देश अभी वाकिफ नहीं है। वह अपनी चाल से अपने जाल में छोटे देशों को कर्ज दे-देकर फंसा रहा है। कुछ देशमें इनमे से ऐसे भी हैं जिनकी जीडीपी से 10 गुणा ज्यादा उन्होंने चीन ने कर्ज दे दिया है। चीन के महत्वाकांक्षी विदेशी बुनियादी ढांचे ने 385 अरब डॉलर के साथ गरीब देशों को परेशान करके रख दिया है। विदेशों में चीन की एक तिहाई से अधिक परियोजनाएं कथित तौर पर भ्रष्टाचार, घोटालों और विरोधों से प्रभावित हुई हैं।

इंटरनेशनल डेवलपमेंट रिसर्च लैब ऐडडेटा की एक रिसर्च रिपोर्ट बताती है कि चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के प्रमुख निवेश अभियान बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव के तहत दर्जनों कम आय वाली सरकारों को कर्ज से जकड़ दिया है। 2013 में कार्यक्रम की घोषणा के बाद से चीन ने करीब 163 देशों में सड़कों, पुलों, बंदरगाहों और अस्पतालों के निर्माण के लिए 843 बिलियन डॉलर से अधिक का निवेश किया है। इसमें अफ्रीका और एशिया के कई देश शामिल हैं।

एडडेटा के कार्यकारी निदेशक ब्रैड पार्क्स ने एक न्यूज एजेंसी को बताया कि इस पैसों का करीब 70 फीसद राज्य के बैंकों या चीनी व्यवसायों और उन देशों में लोकल पार्टनर्स के बीच जॉइंट वेंचर्स को दिया गया है, जो पहले से ही बीजिंग के कर्जदार थे। पार्क्स ने बताया है कि कई गरीब सरकारें और कर्ज नहीं ले सकतीं। अस्पष्ट कॉन्ट्रैक्ट बनाए गए है और सरकारों को खुद नहीं पता है कि चीन से कितना कर्ज लिया हुआ है। 


रिसर्च में यह बात सामने आई है कि कर्ज करीब 385 बिलियन डॉलर के हैं। कई देशों ने चीन से अपने राष्ट्रीय सकल घरेलू उत्पाद के 10 फीसद से अधिक का कर्ज लिया हुआ है। पाकिस्तान के बलोचिस्तान जैसे इलाके में चीन के प्रति लोगों की नाराजगी जगजाहिर है। यहां के लोगों का कहना है कि उन्हें बहुत कम लाभ मिल रहा है। 

यह भी बता दें कि कई विदेशी नेता जो पहले चीन से कर्ज लेने को तैयार थे अब उन प्रोजेक्ट्स को रद्द कर रहे हैं। चीन ने कर्ज चुकाने में हो रही देरी को लेकर देशों से उच्च ब्याज दर की मांग की है। 


तालिबान की यूएस को गीदड़भभकी, कहा-'अफगानिस्तान के एयरस्पेस में ड्रोन उड़ाया तो अंजाम भुगतने को तैयार रहो'

अफगानिस्तान पर बंदूकों के दम पर कब्जा करने के बाद तालिबान अब दुनियाभर को हुड़की दे रहा है। ताजा मामले में उसने अमेरिका को चेतवानी दी है कि अगर उसके ड्रोन्स अफगानिस्तान के एयरस्पेस में उड़ते पाएंगे तो वह अंजाम भुगतने के लिए तैयार रहे।

काबुल: अफगानिस्तान पर बंदूकों के दम पर कब्जा करने के बाद तालिबान अब दुनियाभर को हुड़की दे रहा है। ताजा मामले में उसने अमेरिका को चेतवानी दी है कि अगर उसके ड्रोन्स अफगानिस्तान के एयरस्पेस में उड़ते पाएंगे तो वह अंजाम भुगतने के लिए तैयार रहे।

तालिबान ने संयुक्त राज्य अमेरिका से अफगानिस्तान हवाई क्षेत्र में ड्रोन का संचालन बंद करने के लिए कहा है। साथ ही धमकी भरे लहजे में यह भी कहा है कि उसे अगर किसी नकारात्मक परिणामों से बचना है तो इसका पालन करना ही होगा। बता दें कि तालिबान का यह बयान उस घटना के संदर्भ में आया है, जिसमें आतंकियों पर अमेरिका ने ड्रोन हमला किया था, मगर गलती से इस हमले में निर्दोष मारे गए थे।

तालिबान के प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने अमेरिका के कदम को राष्ट्रीय सुरक्षा का उल्लंघन करार देते हुए सभी देशों से कहा कि वे आपसी दायित्वों के अनुसार काम करें, वरना अंजाम भुगतने को तैयार रहें। अफगानिस्तान के इस्लामी अमीरात (आईईए) द्वारा मंगलवार को जारी एक बयान के अनुसार, सभी देश अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत अपने देशों की क्षेत्रीय और हवाई संप्रभुता के एकमात्र मालिक हैं। इसलिए इस्लामिक अमीरात, अफगानिस्तान की एकमात्र कानूनी इकाई के रूप में अफगानिस्तान की भूमि और हवाई क्षेत्र का संरक्षक है।

तालिबान द्वारा जारी किए गए बयान में कहा गया है कि मगर हमने हाल ही में संयुक्त राज्य अमेरिका को दोहा, कतर में इस्लामिक अमीरात के लिए सभी अंतरराष्ट्रीय अधिकारों, कानून और संयुक्त राज्य अमेरिका की प्रतिबद्धताओं का उल्लंघन करते हुए देखा, क्योंकि अफगानिस्तान के पवित्र हवाई क्षेत्र पर अमेरिकी ड्रोन द्वारा हमला किया जा रहा है। इन उल्लंघनों को सुधारा जाना चाहिए और रोका जाना चाहिए।


मुजाहिद ने सभी देशों, विशेष रूप से संयुक्त राज्य अमेरिका से किसी भी नकारात्मक परिणाम को रोकने के लिए पारस्परिक दायित्वों के अनुसार कार्य करने का आह्वान किया। बता दें कि पिछले महीने अमेरिका ने काबुल में ड्रोन हमले से  ISIS-K के आतंकवादियों को निशाना बनाया, जिसमें सात बच्चों सहित 10 नागरिक मारे गए। मगर बाद में पता चला कि अमेरिका ने जहां ड्रोन हमला किया, उसमें आतंकी नहीं मारे गए, बल्कि निर्दोष मारे गए। सच सामने आने के बाद इस महीने की शुरुआत में अमेरिका ने इस दुखद गलती के लिए माफी मांगी।


तालिबान की दुनिया से गुहार, काबुल एयरपोर्ट तैयार है इंटरनेशन उड़ानों के लिए, शुरू की जाए इंटरनेशनल फ्लाइट्स

तालिबान के राज वाले अफगानिस्तान की हालत इतनी दयनीय है कि अब वहां कोई भी देश अपनी अन्तर्राष्ट्रीय उड़ाने नहीं संचालित करना चाहता। अब तालिबान ने दुनिया से अंतर्राष्ट्रीय विमानों के संचालन के लिए गुहार लगाई है।

काबुल: तालिबान के राज वाले अफगानिस्तान की हालत इतनी दयनीय है कि अब वहां कोई भी देश अपनी अन्तर्राष्ट्रीय उड़ाने नहीं संचालित करना चाहता। अब तालिबान ने दुनिया से अंतर्राष्ट्रीय विमानों के संचालन के लिए गुहार लगाई है।


अफगानिस्तान की तालिबान सरकार ने रविवार को अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को फिर शुरू करने की अपील की है। उन्होंने एयरलाइन्स के साथ पूरा सहयोग करने का वादा किया और साथ कहा कि काबुल एयरपोर्ट की सभी समस्याओं का समाधान कर दिया है और यह सभी घरेलू और इंटरनेशनल उड़ानों के लिए तैयार है। 

अफगानिस्तान में अब तालिबान की सरकार पुरानी सरकार के पतन के बाद फिर से देश को खोलने और अंतरराष्ट्रीय मान्यता हासिल करने के अपने प्रयासों को आगे बढ़ा रही है। बता दें कि हवाई अड्डे से सीमित संख्या में सहायता और यात्री उड़ानें संचालित हो रही हैं।

लेकिन तालिबान के राजधानी पर कब्जा करने लेने के बाद से हजारों विदेशी और अफगान हर रोज देश छोड़ने के लिए एयरपोर्ट पर इकट्ठा होते थे, जिसके बाद निकासी बंद कर दी गई थी और अब वाणिज्यिक सेवाओं को फिर से शुरू करना बाकी है। देश छोड़कर जाने वाले लोगों की अराजकता के कारण एयरपोर्ट क्षतिग्रस्त हो गया था। अब कतर और तुर्की की तकीनीकी टीमों की सहायता से इसे अब फिर से खोल दिया गया है। 

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अब्दुल कहर बल्खी ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के निलंबन से कई अफगान विदेश में फंसे हुए हैं और लोगों को काम या अध्ययन के लिए यात्रा करने से भी रोका गया है। उन्होंने एक बयान में कहा, "कई अफगान नागरिक बाहर फंस गए थे और अपने वतन लौटने में असमर्थ थे।"

बाल्खी ने कहा, "इसके अलावा, कई अफगान नागरिक जिनके पास अंतरराष्ट्रीय रोजगार है या विदेश में शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं, उन्हें अब अपने गंतव्य तक पहुंचने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।" 

जब से तालिबान ने अफगानिस्तान पर कब्जा किया है तभी से देश एक गंभी आर्थिक संकट से जूझ रहा है। लड़कियों की शिक्षा से लेकर पूर्व अधिकारियों और पिछली सरकार से जुड़े अन्य लोगों के खिलाफ प्रतिशोध के आरोपों तक मुद्दों पर दबाव का सामना कर रहा है।


अफगान पासपोर्ट व राष्ट्रीय पहचान पत्र बदलने की तैयारी में तालिबान

अफगानिस्तान की तालीबानी हुकुमत अब पासपोर्ट व राष्ट्रीय पहचान पत्र बदलने की तैयारी कर रहा है। तालिबान ने घोषणा की है कि वे पिछली सरकार द्वारा जारी किए गए अफगान पासपोर्ट और राष्ट्रीय पहचान पत्र बदल देंगे। साथ ही यह भी कहा कि ये दस्तावेज कुछ समय के लिए मान्य होंगे।

काबुल: अफगानिस्तान की तालीबानी हुकुमत अब पासपोर्ट व राष्ट्रीय पहचान पत्र बदलने की तैयारी कर रहा है। तालिबान ने घोषणा की है कि वे पिछली सरकार द्वारा जारी किए गए अफगान पासपोर्ट और राष्ट्रीय पहचान पत्र बदल देंगे। साथ ही यह भी कहा कि ये दस्तावेज कुछ समय के लिए मान्य होंगे।

एक न्यूज एजेंसी के मुताबिक, तालिबान के सूचना और संस्कृति के उप मंत्री और प्रवक्ता जबीउल्लाह मुजाहिद का हवाला देते हुए बताया कि यह संभव है कि अफगान पासपोर्ट और एनआईडी में 'अफगानिस्तान के इस्लामी अमीरात' नाम हो। 

मुजाहिद ने यह भी कहा कि पिछली सरकार द्वारा जारी किए गए दस्तावेज अभी भी देश के कानूनी दस्तावेजों के रूप में मान्य हैं।

समाचार एजेंसी के अनुसार, अफगानिस्तान में पासपोर्ट और राष्ट्रीय पहचान पत्र विभाग अभी भी बंद हैं और केवल वे ही इन दस्तावेजों को प्राप्त कर सकते हैं जिन्होंने अपना बायोमेट्रिक्स प्रक्रिया पूरा कर लिया है।


बता दें कि सत्ता में आने के बाद तालिबान लगातार कुछ न कुछ बदलाव कर रहा है। बीते दिनों उसने महिलाओं की मिनिस्ट्री खत्म कर दी और उसे प्रार्थना और मार्गदर्शन मंत्रालय बना दिया। वहीं उसने कहा है तालिबान में शरिया कानून लाएगा, जिसमें हाथ काटने से लेकर फांसी जैसी बर्बर सजा का प्रावधान है। 


तालीबानी कानून को लेकर भड़का अमेरिका, कहा-'तुम्हारी कथनी और करनी दोनों पर है नजर'

अफगानिस्तान में हथियारों के दम पर कब्जा करने वाले तालिबान ने पहले तो दुनिया से तमाम वादे कर डाले लेकिन अब उसका कहना यह है कि वह अपने कानून लाएगा, यानी आरोपी को पत्थर से मारना, हाथ कटवा देना समेत तमाम क्रूर कानून को पहले की तरह फिर से लागू करेगा। लेकिन अमेरिका उसपर अब भड़क उठा है।

नई दिल्ली: अफगानिस्तान में हथियारों के दम पर कब्जा करने वाले तालिबान ने पहले तो दुनिया से तमाम वादे कर डाले लेकिन अब उसका कहना यह है कि वह अपने कानून लाएगा, यानी आरोपी को पत्थर से मारना, हाथ कटवा देना समेत तमाम क्रूर कानून को पहले की तरह फिर से लागू करेगा। लेकिन अमेरिका उसपर अब भड़क उठा है। 

अमेरिका की यह प्रतिक्रिया ऐसे वक्त में आई है, जब तालिबान के संस्थापकों में से एक मुल्ला नूरुद्दीन तुराबी ने कहा कि अफगानिस्तान में एक बार फिर फांसी और अंगों को काटने की सजा दी जाएगी। हालांकि, उसने कहा था कि यह संभव है कि ऐसी सजा सावर्जनिक स्थानों पर न दी जाए। 

तुराबी ने साफ कहा है कि स्टेडियम में दंड देने को लेकर दुनिया ने हमारी आलोचना की है। हमने उनके नियमों और कानूनों के बारे में कुछ नहीं कहा है। ऐसे में कोई हमें यह नहीं बताए कि हमारे नियम क्या होने चाहिए। हम इस्लाम का पालन करेंगे और कुरान पर अपने कानून बनाएंगे।

तालिबान द्वारा फांसी और हाथ और शरीर काटने जैसी सजाएं फिर शुरू किये जाने की चेतावनी के एक दिन बाद संगठन ने इस पर अमल भी कर दिखाया। चार लोगों के शवों को बड़ी क्रूरता से क्रेन के माध्यम से चौराहों पर लटका दिया गया। 


अमेरिका ने तालिबान के इस बयान की कड़ी निंदा की है और कहा है कि उसकी कथनी और करनी दोनों पर हमारी नजर है। अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता नेड प्राइस ने शरिया कानूनों को लागू करने पर तालिबान के हालिया बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने कहा, तालिबान का शरिया कानून मानवाधिकारों का स्पष्ट उल्लंघन है और वे अफगानिस्तान में मानवाधिकार सुनिश्चित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ काम कर रहे हैं। 

नेड प्राइस ने कहा कि हम न केवल तालिबान के बयान पर बल्कि अफगानिस्तान में उसके एक्शन पर भी नजर रख रहे हैं। प्राइस ने कहा कि अमेरिका अफगान पत्रकारों, नागरिक कार्यकर्ताओं, महिलाओं, बच्चों, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और विकलांग लोगों के साथ खड़ा है और तालिबान से उनके अधिकारों को सुनिश्चित करने के लिए कहा है।


बता दें कि 15 अगस्त 2021 को तालिबान द्वारा अफगानिस्तान पर हथियारों के दम पर कब्जा कर लिया गया। जिसके बाद उसने दुनिया से तमाम वादे किए और खुद को 'गुड बॉय' साबित करने की कोशिश की। लेकिन दुनिया से किया वादा तालिबान 24 घंटे भी नहीं निभा पाया। ऐसे में तालिबान को लेकर पूरी दुनिया 'वेट एंड वाच' की नीति अपनाए हुए है। हालांकि, चीन और पाकिस्तान द्वारा शुरू से ही पाकिस्तान का समर्थन किया जाता रहा है।


अफगान में तालिबानी राज होने के बाद से बढ़ा ड्रग्स तस्करी का खतरा, ISI दे रही साथ

नशीले पदार्थो और खासकर अफीम की तस्करी में तालिबान भी माहिर है, जो हाल में अफगानिस्तान की सत्ता पर बंदूक के बल पर काबिज हुआ है। वहींं, पाकिस्त्तान उसका जमकर साथ दे रहा है।

नई दिल्ली: नशीले पदार्थो और खासकर अफीम की तस्करी में तालिबान भी माहिर है, जो हाल में अफगानिस्तान की सत्ता पर बंदूक के बल पर काबिज हुआ है। वहींं, पाकिस्त्तान उसका जमकर साथ दे रहा है।

तालिबान दशकों से अफगानिस्तान में अफीम की खेती करता आ रहा है। वह अफीम की तस्करी दुनिया भर में करता है। इसमें उसका साथ देती है पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आइएसआइ। अफगानिस्तान में दुनिया की करीब 85 फीसदी अफीम की खेती होती है। वहां तालिबान के सत्ता में काबिज होने के बाद ड्रग्स की तस्करी का खतरा और बढ़ गया है।


भारत किस तरह नशीले पदार्थो के तस्करों के निशाने पर है, इसका उदाहरण है पिछले दिनों गुजरात के कच्छ में मुंद्रा बंदरगाह पर हेरोइन की तीन हजार किलोग्राम की खेप पकड़ा जाना। इसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत 21 हजार करोड़ रुपये बताई जा रही है। इसे टेल्कम पाउडर बताकर मंगाया गया था। इसे अफगानिस्तान से ईरान के रास्ते गुजरात के तट पर लाया गया। इससे यही पता चलता है कि हेरोइन के तस्कर कितने दुस्साहसी हैं और उनके लिए उसकी तस्करी करना कितना आसान है? 

माना जा रहा है कि हेरोइन की इस खेप को भारत लाने के पीछे तालिबान और पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आइएसआइ का हाथ है। आइएसआइ यह काम पहले भी करती रही है। वह भारत में आतंकवाद के साथ नशीले पदार्थो की तस्करी को भी बढ़ावा दे रही है, ताकि यहां के युवाओं को पथभ्रष्ट करने के साथ नाकारा बनाया जा सके।

अपनी अर्थव्यवस्था ठीक करने के लिए इस कारोबार में लिप्त है पाकिस्तान

पाकिस्तान इस काले कारोबार में इसलिए भी लिप्त है, क्योंकि उसकी अर्थव्यवस्था भी खस्ताहाल है। तालिबान जबसे अफगानिस्तान की सत्ता पर काबिज हुआ है, तबसे उसके लिए विश्व समुदाय को यह समझाना मुश्किल हो रहा है कि वह सुधर गया है। उसे अपनी सत्ता के संचालन के लिए कहीं से कोई आर्थिक सहायता नहीं मिल रही है। हैरानी नहीं कि उसे हेरोइन की तस्करी आसान रास्ता आसान लगा हो। यह मानने के अच्छे-भले कारण हैं कि अब अफगानिस्तान से नशीले पदार्थो की तस्करी में तेजी आएगी। इसका कारण वहां अन्य आतंकी गुटों का भी सक्रिय होना है।


भारत की सदियों पुरानी 150 से अधिक मूर्तियों को US ने लौटाया, PM मोदी ला रहे हैं साथ

हिन्दू, बौद्ध और जैन धर्म से जुड़ी 150 से अधिक सदियों पुरानी मूर्तियों को यूएस ने वापस भारत को दे दिया है और इन्हें पीएम नरेंद्र मोदी वापस भारत लाया रहे हैं। इन मूर्तियों की कीमत बहुत ही ज्यादा है।

न्यूयॉर्क: पीएम नरेंद्र मोदी इस बार अमेरिका से भारत की सदियों पुरानी अनमोल मूर्तियों को अमेरिका से ला रहे हैं। दरअसल, हिन्दू, बौद्ध और जैन धर्म से जुड़ी 150 से अधिक सदियों पुरानी मूर्तियों को यूएस ने वापस भारत को दे दिया है और इन्हें पीएम नरेंद्र मोदी वापस भारत लाया रहे हैं। इन मूर्तियों की कीमत बहुत ही ज्यादा है।

मिली जानकारी के मुताबिक, यूनाइटेड स्टेट्स की तरफ से 157 कलाकृतियां भारत को वापस की गई हैं। यूनाइटेड स्टेट्स की तरफ से मूर्तियां वापस किये जाने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यूनाइटेड स्टेट्स की सराहना की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने सांस्कृतिक वस्तुओं के अवैध व्यापार और चोरी को रोकने के लिए कड़े प्रयास किये जाने पर सहमति जताई है।

इन कुल157 कलाकृतियों की लिस्ट में 10वीं सीई के बलुआ पत्थर में रेवंता के डेढ़ मीटर बेस रिलीफ पैनल से लेकर 8.5 सेंटीमीटर लंबे कांस्य नटराज तक के सेट हैं। ये बहुत ही कीमती हैं। इन आइटम में अधिकतर 11 वीं सीई से 14 वीं सीई के दौरान के ऐतिहासिक हैं। वहीं करीब 45 कलाकृतियां बिफोर कॉमन एरा की हैं।

12वीं सीई की उत्कृष्ट ब्रोंज नटराज की मूर्ति भी है। इनमें 11वीं सीई से लेकर 14वीं सीई तक की मूर्तियों के अलावा अन्य कई ऐतिहासिक कलाकृतियां शामिल हैं। 2000 ईशा पूर्व की कॉपर से बनी मानवकृति भी शामिल है। इसके अलावा इसमें 45 ऐसी कलाकृतियां भी हैं जो सामान्य युग से पहले की हैं। 

इन आइटम में आधी कलाकृतियां यानी करीब 71 कलाकृतियां सांस्कृतिक हैं। वहीं आधे से अधिक मूर्तियां हैं जो हिंदू धर्म (60), बौद्ध धर्म (16) और जैन धर्म (9) से संबंधित हैं। इन मूर्तियों का निर्माण धातु, पत्थर और टेराकोटा के जरिए हुआ है। 


कांस्य की कलाकृतियों में लक्ष्मी नारायण, बुद्ध, विष्णु, शिव पार्वती और 24 जैन तीर्थंकरों की प्रसिद्ध मुद्राओं की अलंकृत मूर्तियां हैं। इसके अलावा रूपांकनों में हिंदू धर्म की धार्मिक मूर्तियां तीन सिर वाले ब्रह्मा, रथ के साथ सूर्य, विष्णु और उनकी पत्नी, आदि है।


UNGA में PM मोदी का पाक पर करारा हमला, कहा-'आतंकवाद का टूल के तौर पर इस्‍तेमाल करने वालों के लिए यह भस्मासुर'

पीएम मोदी ने बिना नाम लिए पाकिस्‍तान पर हमला बोलते हुए कहा कि जो देश आतंकवाद का टूल के तौर पर इस्‍तेमाल कर रहे हैं वह यह बात भूल रहे हैं कि आतंकवाद उनके लिए भी खतरा बनेगा।

न्‍यूयार्क: पीएम नरेंद्र मोदी शनिवार को न्‍यूयार्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित किया अपने संबोधन में पीएम मोदी ने इशारों ही इशारों में आतंकवाद को लेकर पाकिस्तान पर करारा हमला बोला। 

पीएम मोदी ने बिना नाम लिए पाकिस्‍तान पर हमला बोलते हुए कहा कि जो देश आतंकवाद का टूल के तौर पर इस्‍तेमाल कर रहे हैं वह यह बात भूल रहे हैं कि आतंकवाद उनके लिए भी खतरा बनेगा।


पीएम मोदी ने कहा- दुनियाभर में चरमपंथ का खतरा बढ़ता जा रहा है। जो देश प्रतिगामी सोच के साथ आतंकवाद का राजनीतिक उपकरण के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं उन्हें ये समझना होगा कि आतंकवाद, उनके लिए भी उतना ही बड़ा खतरा है। मौजूदा वक्‍त में यह सुनिश्चित किया जाना बेहद ज़रूरी है कि अफगानिस्तान की धरती का इस्तेमाल आतंकवाद फैलाने और आतंकी हमलों के लिए ना हो।


राष्ट्र महासभा के 76 वें सत्र को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि हमें इस बात के लिए भी सतर्क रहना होगा कि अफगानिस्‍तान कि नाजुक स्थितियों का इस्तेमाल कोई देश अपने स्वार्थ के लिए एक टूल की तरह इस्तेमाल करने की कोशिश ना करने पाए।

पीएम मोदी ने पाकिस्‍तान और चीन को एक साथ आईना दिखाते हुए भारतीय लोकतंत्र की तारीफ की। पीएम मोदी ने कहा कि ये भारत के लोकतंत्र की ताकत है कि एक छोटा बच्चा जो कभी एक रेलवे स्टेशन पर चाय की दुकान पर अपने पिता की मदद करता था वो आज चौथी बार भारत के प्रधानमंत्री के तौर पर UNGA को संबोधित कर रहा है। 

पीएम मोदी ने कहा कि लोकतंत्र की हमारी हज़ारों वर्षों की महान परंपरा रही है। हमारी विविधता ही हमारे सशक्त और चमकदार लोकतंत्र की पहचान है।


पकिस्तानी पीएम इमरान खान को 'दोस्त' तालिबान ने लगाई फटकार, अफगान के मामलों से दूर रहने की दी नसीहत

तालिबान नेता जनरल मुबीन ने कहा है कि इमरान खान को पाकिस्तान के लोगों ने नहीं चुना है। पाकिस्तान में इमरान खान को लोग कठपुतली कहते हैं।

काबुल: पाकिस्तान खुद को तालिबान का दोस्त मान रहा है लेकिन हकीकत इसके उलट है। अफगानिस्तान पर कब्जा करने के बाद से ही लगातार तालिबान पाकिस्तान को झटके पर झटके दिए जा रहा है। ताजा मामले में उसने पाकिस्तान के पीएम इमरान खान को पाक आर्मी की 'कठपुतली' बताते हुए अफगानिस्तान के मामलों से दूर रहने की सलाह दी है।

तालिबान नेता जनरल मुबीन ने कहा है कि इमरान खान को पाकिस्तान के लोगों ने नहीं चुना है। पाकिस्तान में इमरान खान को लोग कठपुतली कहते हैं। 

उन्होंने पाकिस्तान को धमकी देते हुए कहा है कि हम ये हक किसी को नहीं देते कि कोई हमारे शासन में हस्तक्षेप करे और अगर कोई ऐसा करता है तो हम भी हस्तक्षेप का हक रखते हैं। मुबीन ने इमरान खान को अफगानिस्तान के मामलों से दूर रहने की सलाह दी है।

मुबीन ने कहा है कि इमरान खान अफगानिस्तान में समावेशी सरकार चाहते हैं। उन्हें जनता ने पीएम नहीं चुना है और हमें सलाह दे रहे हैं। पाकिस्तान के लोग कहते हैं कि वह पाकिस्तानी सेना के कठपुतली हैं। इमरान खान की सरकार में पश्तून सहित सारे अल्पसंख्यक समुदायों के साथ बुरा सलूक किया जा रहा है। पाकिस्तान को अफगानिस्तान में समावेशी सरकार क्यों चाहिए? ताकि वह अपने जासूस और कठपुतली अफगानिस्तान में भर सके। ऐसा नहीं हो सकता। आप मानें या न मानें लेकिन मौजूदा सरकार समावेशी है।

मुबीन ने आगे कहा है कि पाकिस्तान का बुरा हाल है और ऐसे में इमरान खान को चाहिए कि वह अपने देश पर ध्यान दें। वहां के लोगों की बेहतरी के लिए काम करें। हम पाकिस्तान की संप्रभुता का सम्मान करते हैं और पाकिस्तान से भी यही चाहते हैं।


दुनिया को तालिबान की गीदड़भभकी, कहा-'हमें ये ना बताए कि हमारे कानून क्या हो'

अफगानिस्तान पर बंदूकों के दम पर कब्जा करने के बाद तालिबान अब दुनिया को गीदड़भभकी दे रहा है। उसने कहा है कि वह इस्लाम का पालन करेगा और अपने पुराने कानून फिर से लाएगा। साथ ही उसने कहा है कि दुनिया उसे यह ना बताए कि उसके लिए क्या कानून हो।

काबुल: अफगानिस्तान पर बंदूकों के दम पर कब्जा करने के बाद तालिबान अब दुनिया को गीदड़भभकी दे रहा है। उसने कहा है कि वह इस्लाम का पालन करेगा और अपने पुराने कानून फिर से लाएगा। साथ ही उसने कहा है कि दुनिया उसे यह ना बताए कि उसके लिए क्या कानून हो।


एक ओर तालिबान दुनिया को बता रहा है कि वह अब बदल गया है। तालिबान दुनिया के देशों से मान्यता मिलने के इंतजार में है और यूनाइटेड नेशंस में जगह तलाश रहा है लेकिन तालिबान से किसी भी तरह की उम्मीद रखने वालों को फिर से झटका मिला है। 

तालिबान के संस्थापकों में से एक मुल्ला नूरुद्दीन तुराबी ने न्यूज एजेंसी एपी से बात करते हुए कहा है कि अफगानिस्तान में एक बार फिर फांसी और अंगों को काटने की सजा दी जाएगी। लेकिन यह संभव है कि ऐसी सजा सावर्जनिक स्थानों पर न दी जाए।

तुराबी ने साफ कहा है कि स्टेडियम में दंड देने को लेकर दुनिया ने हमारी आलोचना की है। हमने उनके नियमों और कानूनों के बारे में कुछ नहीं कहा है। ऐसे में कोई हमें यह नहीं बताए कि हमारे नियम क्या होने चाहिए। हम इस्लाम का पालन करेंगे और कुरान पर अपने कानून बनाएंगे।

15 अगस्त को काबुल पर तालिबान के कब्जे के बाद से दुनिया की निगाहें अफगानिस्तान पर टिकी हैं कि क्या तालिबान 1990 के दशक वाले नियम कानून फिर से थोपेगा या नहीं। लेकिन तुराबी के इन बयानों से साफ है कि तालिबान की विचारधारा जस की तस है।

पिछले तालिबान शासन के दौरान हत्यारों को खुले मैदान में गोली मार दिया जाता था। चोरों का एक हाथ काट दिया जाता था और हाईवे पर डकैती करने वालों के एक हाथ और पैर काट दिए जाते थे। 

तुराबी के बयानों से यह साफ है कि इन नियमों में कोई बदलाव संभव नहीं है। तुराबी ने इस बात पर लगातार जोर दिया है कि अफगानिस्तान के कानूनों की नींव कुरान होगी और फिर से वही सजा बहाल की जाएगी। तुराबी ने कहा है कि सुरक्षा के दृष्टिकोण से हाथ काटना बेहद जरूरी है। सावर्जनिक तौर पर दंड देने को लेकर हम बातचीत कर रहे हैं और इसे लेकर हम जल्द ही नई नीति विकसित कर लेंगे। 

बताते चलें कि बता दें कि तुराबी नई तालिबान सरकार के तहत जेलों के प्रभारी हैं। वह उन तालिबान नेताओं में शामिल हैं जो संयुक्त राष्ट्र की प्रतिबंध सूची में हैं।


UNGA को PM मोदी आज करेंगे संबोधित, 'वंदे मातरम' व 'भारत माता की जय' से गूंजा न्यूयॉर्क

न्यूयॉर्क पहुंचकर मोदी ने आज ट्वीट कर कहा, “न्यूयार्क सिटी पहुंच गया हूं। शाम साढ़े छह बजे (भारतीय समयानुसार) यूएनजीए को संबोधित करूंगा।”

न्यूयॉर्क: आज पीएम मोदी यूएनजीए को संबोधित करेंगे। बता दें कि अमेरिका यात्रा का पहला चरण राजधानी वाशिंगटन में पूरा करने के बाद शनिवार को न्यूयॉर्क पहुंचे, जहां वह संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) के 76वें अधिवेशन को संबोधित करेंगे। शुक्रवार सुबह न्यूयॉर्क के होटल के पीएम मोदी बाहर भारतीय अमेरिकियों से मुलाकात करते दिखे। यहां पीएम मोदी को देखकर लोगों की भीड़ वंदे मातरम और भारत माता की जय के नारे लगाती दिखी।

न्यूयॉर्क पहुंचकर मोदी ने आज ट्वीट कर कहा, “न्यूयार्क सिटी पहुंच गया हूं। शाम साढ़े छह बजे (भारतीय समयानुसार) यूएनजीए को संबोधित करूंगा।”

बता दें कि पीएम मोदी ने शुक्रवार को यहां अमेरिका के राष्ट्रपति जोसेफ आर बिडेन के साथ पहली द्विपक्षीय बैठक की और फिर दोपहर बाद अमेरिकी राष्ट्रपति तथा जापान एवं ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्रियों के साथ हिन्द प्रशांत क्षेत्र को लेकर गठित चतुष्कोणीय फ्रेमवर्क (क्वाड) की पहली रूबरू शिखर बैठक में भाग लिया।


न्यूयॉर्क पहुंचकर मोदी ने आज ट्वीट कर कहा, “न्यूयार्क सिटी पहुंच गया हूं। शाम साढ़े छह बजे (भारतीय समयानुसार) यूएनजीए को संबोधित करूंगा।” उन्होंने शुक्रवार को यहां अमेरिका के राष्ट्रपति जोसेफ आर बिडेन के साथ पहली द्विपक्षीय बैठक की और फिर दोपहर बाद अमेरिकी राष्ट्रपति तथा जापान एवं ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्रियों के साथ हिन्द प्रशांत क्षेत्र को लेकर गठित चतुष्कोणीय फ्रेमवर्क (क्वाड) की पहली रूबरू शिखर बैठक में भाग लिया।


UNGA में पाक के 'कश्मीर राग' अलापने पर भारत ने लगाई कड़ी फटकार, कहा-'लादेन को पालते हो... जल्दी खाली करो PoK को'

पाकिस्तानी पीएम इमरान खान को UNGA में कश्मीर राग अलापना महंगा पड़ गया है। भारत ने उसकी पोल खोलते हुए जमकर लताड़ लगाई और कहा कि वह जल्द से जल्द PoK को खाली कर दे।

नई दिल्ली: पाकिस्तानी पीएम इमरान खान को UNGA में कश्मीर राग अलापना महंगा पड़ गया है। भारत ने उसकी पोल खोलते हुए जमकर लताड़ लगाई और कहा कि वह जल्द से जल्द PoK को खाली कर दे।

संयुक्त राष्ट्र के मंच पर फिर से कश्मीर का राग अलापने वाले पाकिस्तान को भारत ने राइट टू रिप्लाई के तहत मुंहतोड़ जवाब दिया है और कहा कि संयुक्त राष्ट्र मंच का पाकिस्तान ने हमेशा गलत इस्तमाल किया है। ओसामा बिन लादेन का नाम लेकर भारत ने दुनिया के सामने पाकिस्तान की पोल खोल दी है कि कैसे आतंक का आका आतंकवाद का समर्थन करता रहा है। बता दें कि आज सुबह (भारतीय समयानुसार) इमरान खान ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के सत्र को वर्चुअली संबोधित किया और कश्मीर का जिक्र कर कहा कि पाक शांति चाहता है और कश्मीर विवाद के समधाना से ही दक्षिण एशिया में शांति स्थापित होगी। 

राइट टू रिप्लाई के तहत भारत की तरफ से इमरान खान के भाषण पर जवाब देते हुए भारत की फर्स्ट सेक्रेटरी स्नेहा दुबे ने कहा कि अफसोस की बात है कि यह पहली बार नहीं है जब पाकिस्तान के नेता ने मेरे देश के खिलाफ झूठे और दुर्भावनापूर्ण प्रचार करने के लिए संयुक्त राष्ट्र द्वारा प्रदान किए गए मंचों का दुरुपयोग किया है। वह दुनिया का ध्यान अपने देश की उस स्थिति से हटाने की कोशिश कर रहे हैं जहां आतंकवादी फ्री पास का आनंद लेते हैं। जबकि आम लोगों, विशेष रूप से अल्पसंख्यक समुदायों के लोगों का जीवन वहां उलटा हो जाता है। उनके ऊपर अत्याचार होता है।


संयुक्त राष्ट्र महासभा में पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान के संबोधन के राइट टू रिप्लाई में भारत ने कहा कि पाकिस्तान खुले तौर पर आतंकवादियों का समर्थन करने और उन्हें हथियार देने के लिए विश्व स्तर पर जाना जाता है। भारत ने आगे कहा कि पाकिस्तान के पास संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद द्वारा प्रतिबंधित आतंकवादियों की सबसे बड़ी संख्या की मेजबानी करने का अपमानजनक रिकॉर्ड है। 

भारत की फर्स्ट सेक्रेटरी स्नेहा दुबे ने आगे कहा कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के संपूर्ण केंद्र शासित प्रदेश भारत के अभिन्न और अविभाज्य अंग थे, हैं और रहेंगे। इसमें वे भी क्षेत्र शामिल हैं जो पाकिस्तान के अवैध कब्जे में हैं। हम पाकिस्तान से उसके अवैध कब्जे वाले सभी क्षेत्रों को तुरंत खाली करने के लिए कहते हैं।

भारत ने पाकिस्तान को करारा जवाब दिया और संयुक्त राष्ट्र के मंच पर दुनिया को बताया कि ओसामा बिन लादेन को पाकिस्तान में पनाह मिली। आज भी पाकिस्तान नेतृत्व आतंकी लादेन को 'शहीद' के रूप में महिमामंडित करता है। भारत ने कहा कि पाकिस्तान अपने घर में आतंकवादियों को इस उम्मीद में पालता है कि वे केवल उनके पड़ोसियों को नुकसान पहुंचाएंगे। 

भारत ने तंज कसते हुए कहा कि हम सुनते रहते हैं कि पाकिस्तान 'आतंकवाद का शिकार' है। आग लगाने वाला पाक नकाब पहनकर खुद को फायर फाइटर बता रहा है। भारतीय प्रतिनिधि ने आगे कहा कि पाकिस्तान के लिए बहुलवाद को समझना बहुत मुश्किल है जो अपने अल्पसंख्यकों को राज्य के उच्च पदों की आकांक्षा से रोकता है। 

बता दें कि आज सुबह (भारतीय समयानुसार) इमरान खान ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के सत्र को वर्चुअली संबोधित किया और कश्मीर का जिक्र कर कहा कि पाक शांति चाहता है और कश्मीर विवाद के समधाना से ही दक्षिण एशिया में शांति स्थापित होगी। 


UNGA में पाक पीएम इमरान खान ने अलापा कश्मीर राग, लताड़ लगाने के लिए भारत करेगा अपने इस अधिकार का इस्तेमाल

अफगान और तालिबान को लेकर एक बात फिर से इमरान खान का प्रेम उमड़ा। संयुक्त राष्ट्र में वर्चुअल संबोधन के दौरान इमरान खान ने अपने अफगानिस्तान और तालिबान पर मसले को भी बढ़कर कर उठाया।

नई दिल्ली: पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने एक बार फिर से कश्मीर राग अलापा है। संयुक्त राष्ट्र के मंच का इमरान खान ने फिर से भारत के खिलाफ प्रोपेगेंडा चलाने के लिए इस्तेमाल किया और कश्मीर का राग अलापा। इमरान ने कहा कि पाकिस्तान शांति चाहता है, लेकिन यह भारत की जिम्मेदारी है कि वह सार्थक रूप से जुड़े।

इमरान खान ने अपने संबोधन के दौरान कश्मीर का मुद्दा उठाया। यह कहते हुए कि पाकिस्तान भारत के साथ शांति चाहता है, इमरान खान ने कहा कि दक्षिण एशिया में स्थायी शांति जम्मू-कश्मीर विवाद के समाधान पर निर्भर है। 

शांति स्थापित करने का ठिकरा भारत पर फोड़ते हुए उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि पाकिस्तान के साथ सार्थक और परिणामोन्मुखी जुड़ाव के लिए अनुकूल माहौल बनाने की जिम्मेदारी भारत पर बनी हुई है। संयुक्त राष्ट्र में वर्चुअल संबोधन के दौरान इमरान खान ने अपने अफगानिस्तान और तालिबान पर मसले को भी बढ़कर कर उठाया।



वहीं, अफगान और तालिबान को लेकर एक बात फिर से इमरान खान का प्रेम उमड़ा। संयुक्त राष्ट्र में वर्चुअल संबोधन के दौरान इमरान खान ने अपने अफगानिस्तान और तालिबान पर मसले को भी बढ़कर कर उठाया। 

इमरान खान ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को युद्धग्रस्त देश में वर्तमान सरकार को मजबूत और स्थिर करना चाहिए। खान ने कहा कि आगे एक बहुत बड़ा मानवीय संकट आने वाला है और इसका न केवल अफगानिस्तान के पड़ोसियों के लिए बल्कि हर जगह गंभीर असर होगा। पाकिस्तान पर तालिबान को खुलेआम और परोक्ष रूप से समर्थन करने का आरोप लगाया गया है।

इमरान ने यहां एक और गलती कर दी। उन्होंने पाकिस्तान समर्थक अलगावादी नेता सैयद अली शाह गिलानी की मौत का भी जिक्र किया और कहा कि गिलानी के परिजनों के साथ अन्याय हुआ। 

इमरान ने कहा कि गिलानी के परिवार ने कहा है कि कश्मीर में अलगाववादी नेता को उचित इस्लामिक तरीके से दफनाने से इनकार करते हुए भारतीय अधिकारियों ने उनके शव को ले लिया और उन्हें उनकी सहमति के बिना दफन कर दिया। मैं इस असेंबली से मांग करता हूं कि गिलानी के परिवार को उनका अंतिम संस्कार इस्लामी तरीके से करने की मंजूरी दी जाए। 

वहीं, कहा जा रहा है कि इमरान खान के संदर्भों का जवाब देने के लिए भारत राइट टू रिप्लाई का इस्तेमाल करेगा।  इमरान खान ने कश्मीर का राग अलाप कर बड़ी गलती कर दी है। पीएम मोदी संयुक्त राष्ट्र महासबा को संबोधित करने के लिए न्यूयॉर्क में है। जब वह सत्र को संबोधित करेंगे तो पाकिस्तान को मुंहतोड़ जवाब दे सकते हैं। इसके अलावा, संयुक्त राष्ट्र महासभा में केंद्र शासित प्रदेश जम्मू और कश्मीर पर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान के संदर्भों का मुंहतोड़ जवाब देने के लिए भारत राइट टू रिप्लाई के अपने अधिकार का उपयोग करेगा।


Modi in America : पीएम मोदी और जो बाइडेन के बीच हुई मुलाकात, इन मुद्दों पर हुई बात

बाइडेन ने भारतीयों की जमकर सराहना की। अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की व्हाइट हाउस में मुलाकात हुई है।

वाशिंगटन: पीएम नरेंद्र मोदी अमेरिका दौरे पर हैं और आज उनकी और अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन की मुलाकात हुई। इस दौरान बाइडेन ने भारतीयों की जमकर सराहना की। अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की व्हाइट हाउस में मुलाकात हुई है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन के बीच मुलाकात खत्म हो चुकी है। दोनों नेतााओं के बीच करीब आधे घंटे तक यह मुलाकात चली है। इस मुलाकात के दौरान बाइडन ने कहा कि हमें महात्मा गांधी के मूल्यों को याद रखना है। पीएम ने कहा कि महात्मा गांधी के पैगाम को याद रखना है। हमें अहिंसा, सहिष्णुता को याद रखना है। व्यापार में हम एक-दूसरे के पूरक हो सकते हैं। 

पीएम मोदी ने कहा कि भारत में बाइडन सरनेम वाले लोग हैं। बाइडेन सरनेम वालों का दस्तावेज लेकर आया हूं। भारत का टैलेंट अमेरिका में विकास का सहयोगी। लोकांत्रिक मूल्यों में दोनों देश समान। इस दशक में टैलेट का अहम महत्व है। 

इस मुलाकात के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि इस बेहतरीन स्वागत के लिए मैं आपका धन्यवाद करता हूं। पहले भी हमलोगों के बीच चर्चा हुई थी और उस वक्त आपने भारत-यूएस द्विपक्षीय रिश्तों के बारे में बातचीत की थी। आज आप ने दोनों देशों के रिश्तों को आगे बढ़ाने के लिए आपने प्रयास किया है। 

इस मुलाकात के दौरान पीएम मोदी ने कहा कि साल 2014, 2016 में विस्तार से बात करने का मौका मिला था। मैं राष्ट्रपति बाइडन का आभारी हूं। मैं आपके प्रयासों का स्वागत करता हूं। पीएम मोदी ने कहा कि यह दशक भारत के लिए बेहद अहम है।

पीएम मोदी के व्हाइट हाउस पहुंचने पर जो बाइडन ने उनका तहे दिल से स्वागत किया। जो बाइडन ने कहा कि मैं पीएम मोदी को काफी वक्त से जानता हूं। पीएम मोदी के व्हाइट आने से खुश हूं। पीएम मोदी ने इसपर कहा कि कहा कि भारत-यूएस रिश्तों के लिए आपका विजन काफी प्रेरक है।

इस मुलाकात से पहले अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने ट्वीट किया है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा, 'आज सुबह मैं एक द्विपक्षीय बैठक के लिए व्हाइट हाउस में भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मेजबानी कर रहा हूं। मैं अपने दोनों देशों के बीच गहरे संबंधों को मजबूत करने, एक स्वतंत्र और खुले इंडो-पैसिफिक को बनाए रखने और कोविड-19 से लेकर जलवायु परिवर्तन तक हर चीज पर बात करने के लिए तत्पर हूं।'


पाकिस्तान ने ब्रिटिश संसद में अलापा कश्मीर राग, भारत ने लगाई फटकार, दिलाई 'तालिबान की याद'

कश्मीर का राग अलापे जाने पर ब्रिटिश सांसदों ने भी पाकिस्तान को खरी-खोटी सुनाई और कहा कि पाकिस्तान वर्षों से तालिबान जैसे आतंकी संगठनों को सुरक्षा मुहैय्या करा रहा है।

नई दिल्ली: एक बार फिर से पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान ने कश्मीर राग अलापा है। इस बार उसने ब्रिटेन की संसद में कश्मीर राग अलापा जिसके बाद भारत ने उसे फिर से फटकार लगाते हुए तालिबान की याद दिलाई है। दरअसल, सर्वदलीय बहस के दौरान भारत ने 'कश्मीर में मानवाधिकार' के मुद्दे पर सांसदों द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली भाषा पर भी कड़ी आपत्ति जताई। कश्मीर का राग अलापे जाने पर ब्रिटिश सांसदों ने भी पाकिस्तान को खरी-खोटी सुनाई और कहा कि पाकिस्तान वर्षों से तालिबान जैसे आतंकी संगठनों को सुरक्षा मुहैय्या करा रहा है।

लंदन में भारतीय उच्चायोग के एक मंत्री ने कहा कि कश्मीर देश का एक अभिन्न अंग है। इससे संबंधित विषय पर किसी भी मंच में किए गए किसी भी दावे को तथ्यों के साथ प्रमाणित करने की आवश्यकता है। भारत सर्वदलीय बैठक में सांसदों द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली भाषा से इत्तेफाक नहीं रखती।

लंदन में भारतीय उच्चायोग के एक मंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ इस्तेमाल किए गए शब्दों की भी निंदा की और फिर दोहराया कि कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है।

2002 गुजरात दंगों का हवाला देने वाले पाकिस्तानी मूल के सांसद नाज़ शाह की टिप्पणी का जिक्र करते हुए भारतीय उच्चायोग के मंत्री ने कहा, "ये दुख की बात है कि एक प्रतिष्ठित मंच के माध्यम से दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के निर्वाचित नेता के खिलाफ गलत शब्दों का इस्तेमाल किया गया।"

चर्चा के दौरान ब्रिटेन की विपक्षी लेबर पार्टी के सांसद डेबी अब्राहम ने कहा कि चर्चा को किसी भी देश के "समर्थक या विरोधी" के रूप में नहीं समझा जाना चाहिए, क्योंकि सांसद केवल मानवाधिकारों की रक्षा में बोल रहे थे। उन्होंने कहा, "कश्मीरियों को त्रिपक्षीय शांति निर्माण प्रक्रिया के केंद्र में होना चाहिए।"

इस सर्वदलीय बैठक में 20 से अधिक पार्टी सदस्यों ने भाग लिया। जिसमें सत्तारूढ़ कंजर्वेटिव पार्टी के सांसद बॉब ब्लैकमैन और थेरेसा विलियर्स ने भारतीय अदालतों और संस्थानों के पक्ष में बोला। "मानवाधिकारों के हनन की ठीक से जांच" करने पर उन्होंने कहा कि पिछले साल कश्मीर में हुए चुनाव सकारात्मक संकेत थे।

विलियर्स ने कहा, "एक लोकतंत्र के रूप में जहां धार्मिक अल्पसंख्यकों को पूर्ण संवैधानिक सुरक्षा प्राप्त है और कानून को बहुत महत्व देते हैं, मेरा मानना ​है कि भारत की अदालतें और संस्थान मानवाधिकारों के हनन की ठीक से जांच करने में सक्षम हैं।"

चर्चा के दौरान दौरान लेबर पार्टी के सांसद बैरी गार्डिनर ने पाकिस्तान की खिंचाई की और कहा कि पाकिस्तान प्रशासन ने आतंकी शिविरों को पनाह दी है। इतना ही नहीं अपने पड़ोसी मुल्क अफगानिस्तान में भी वह आतंकी गतिविधि कराने में संलिप्त है। उन्होंने कहा, "वर्षों से, पाकिस्तान और आईएसआई तालिबान नेताओं को सुरक्षा सेवाएं दे रहा है, इसी तरह अन्य आतंकवादी संगठनों को भी कई प्रकार से अपना समर्थन दे रहा है। 


अफगान में तालिबान के खिलाफ खड़ा होगा राजनीतिक विकल्प, करजई, अब्दुल्ला, अहमद मसूद और सालेह संपर्क में

बंदूकों के दम पर तालिबान ने अफगानिस्तान ने सत्ता तो हासिल कर ली है लेकिन अब उसे राजनीतिक लड़ाई भी लड़नी पड़ेगी। सूत्रों के हवाले से खबर है कि पूर्व राष्ट्रपति हामिद करज़ई, डॉ अब्दुल्लाह, रेजिस्टेंस फ़ोर्स के नेता अहमद मसूद और पूर्व उपराष्ट्रपति अमरुल्लाह इस संबंध में आपस में संपर्क में हैं।

काबुल: बंदूकों के दम पर तालिबान ने अफगानिस्तान ने सत्ता तो हासिल कर ली है लेकिन अब उसे राजनीतिक लड़ाई भी लड़नी पड़ेगी। सूत्रों के हवाले से खबर है कि पूर्व राष्ट्रपति हामिद करज़ई, डॉ अब्दुल्लाह, रेजिस्टेंस फ़ोर्स के नेता अहमद मसूद और पूर्व उपराष्ट्रपति अमरुल्लाह इस संबंध में आपस में संपर्क में हैं।

खबर है कि गनी सरकार के दौरान करीब 70 देशों में तैनात सभी अफगानी राजदूत भी इस बातचीत में शामिल हैं और जल्दी ही तालिबान के खिलाफ एक मज़बूत राजनीतिक विकल्प खड़ा हो सकता है।

सूत्रों ने निर्वासित सरकार के गठन की संभावनाओ से भी इंकार नहीं किया। इससे ये संकेत भी साफ मिलते हैं कि इस संदर्भ में ये सभी लोग तमाम मुल्कों के संपर्क में है। लिहाज़ा दुनिया भर के देश तालिबान को मान्यता देने में ज्यादा जल्दीबाजी नहीं करेंगे।

तालिबान को ठीक करने की लिए राजनीतिक विकल्प की जरूरत

दरअसल, तालिबान द्वारा तमाम दावों के विरुद्ध ना तो तालिबान की सरकार व्यापक बनी और ना ही औरतों को उनके हक दिए जा रहे। तालिबान पिछली बार की ही तरह अपनी दमनकारी नीतियों पर कायम है। लिहाज़ा तालिबान के खिलाफ एक राजनीतिक विकल्प खड़ा करने की ज़रूरत है।


Modi in America: कमला हैरिस ने PM मोदी संग बैठक में उठाया आतंकवाद का मुद्दा, पाकिस्तान को कड़ा संदेश

पीएम मोदी के साथ मुलाकात के दौरान अमेरिकी उपराष्ट्रपति कमला हैरिस ने आतंकवाद का मुद्दा भी उठाया था। उन्होंने स्पष्ट कहा कि वहां (पाकिस्तान की धरती पर) कई आतंकी संगठन सक्रिय हैं। उन्होंने पाकिस्तान को कहा है कि वह इन आतंकी संगठनन पर एक्शन ले, जिससे अमेरिका और भारत की सुरक्षा पर इसका कोई असर ना पड़े।

वाशिंगटन: पीएम मोदी अपने अमेरिकी दौरे के क्रम में मुलाकातों की कड़ी में दूसरी बैठक अमेरिका की उपराष्ट्रपति कमला हैरिस के साथ हुई। मुलाकात के दौरान पीएम मोदी ने ने कोविड-19 महामारी में अमेरिका की ओर से मिले सहयोग के लिए उनके योगदान के लिए भावपूर्ण आभार व्यक्त किया।

इससे पहले व्हाइट हाउस में पहले दोनों नेताओं ने एकांत में बात की और फिर प्रतिनिधिमंडल स्तर की बैठक में भाग लिया। पीएम मोदी ने कमला हैरिस को भारत आने का न्योता भी दिया।

Kamala Harris "Source Of Inspiration For Many Around The World": PM  Narendra Modi

वहीं, पीएम मोदी के साथ मुलाकात के दौरान अमेरिकी उपराष्ट्रपति कमला हैरिस ने आतंकवाद का मुद्दा भी उठाया था। उन्होंने स्पष्ट कहा कि वहां (पाकिस्तान की धरती पर) कई आतंकी संगठन सक्रिय हैं। उन्होंने पाकिस्तान को कहा है कि वह इन आतंकी संगठनन पर एक्शन ले, जिससे अमेरिका और भारत की सुरक्षा पर इसका कोई असर ना पड़े।

बैठक के पहले दोनों नेताओं ने प्रेस को संबोधित किया। पीएम मोदी ने कोविड महामारी के दौरान कमला हैरिस की मदद को याद करते हुए कहा कि उपराष्ट्रपति बनने के बाद दोनों नेताओं के बीच कई बार बातचीत हुई है। एक बार तब बातचीत हुई थी जब भारत कोविड महामारी से जूझ रहा था। उस समय कमला हैरिस के एकजुटता व्यक्त करने वाले शब्द उन्हें याद हैं।

पीएम मोदी ने प्रेस वार्ता के दौरान कहा कि अमेरिका की सरकार एवं कंपनियां और प्रवासी भारतीय समुदाय कोविड महामारी से बहुत कठिन मुकाबले में काफी मददगार रहे। अमेरिकी राष्ट्रपति और हैरिस स्वयं ने ऐसे समय पदभार संभाला जब पूरी दुनिया बहुत कठिन चुनौती से जूझ रही थी और बहुत कम समय में ही उन्होंने तमाम उपलब्धियां हासिल कीं चाहे वह कोविड से मुकाबला हो या जलवायु परिवर्तन हो या क्वाड हो।


पीएम मोदी ने कहा कि भारत एवं अमेरिका विश्व के सबसे बड़े एवं सबसे पुराने लोकतंत्र हैं। हमारे मूल्य समान हैं और हमारा सहयोग धीरे-धीरे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा, 'अमेरिका के उपराष्ट्रपति के रूप में आपका चुनाव एक बहुत ही महत्वपूर्ण एवं ऐतिहासिक घटना रही है। आप विश्व भर में बहुत से लोगों के लिए प्रेरणास्रोत हैं और मुझे विश्वास है कि राष्ट्रपति जो बाइडेन एवं आपके नेतृत्व में हमारे द्विपक्षीय संबंध नयी ऊंचाई छुएंगे।' पीएम मोदी ने उन्हें निमंत्रित करते हुए कहा, 'भारत के लोग आपका स्वागत करने की प्रतीक्षा कर रहे हैं। मैं आपको भारत आने का निमंत्रण देता हूं।'

कमला हैरिस ने कही ये बड़ी बात

इसके बाद कमला हैरिस ने कहा कि भारत अमेरिका का एक बहुत ही अहम साझीदार है। जब भारत कोविड की दूसरी लहर से परेशान था, अमेरिका को भारत के लोगों की जरूरत और उसके लोगों के टीकाकरण की जिम्मेदारी का समर्थन एवं सहयोग देने का गर्व है। उन्होंने कोविड टीकों के नियार्त को बहाल करने की भारत की घोषणा का स्वागत किया और इस बात पर प्रसन्नता व्यक्त की कि भारत रोजाना करीब एक करोड़ लोगों का टीकाकरण कर रहा है।


व्हाइट हाउस में हुई इस मुलाकात में दोनों नेताओं ने परस्पर हितों से जुड़े द्विपक्षीय, क्षेत्रीय एवं वैश्विक मुद्दों पर विचार विमर्श किया। भारतीय प्रतिनिधिमंडल में विदेश मंत्री एस जयशंकर, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, विदेश सचिव हर्षवर्धन श्रृंगला, अमेरिका में भारत के राजदूत तरणजीत सिंह संधू और विदेश मंत्रालय में संयुक्त सचिव (अमेरिका) वाणी राव शामिल थीं।


Modi in America : अपने ऑस्ट्रेलियाई समकक्ष स्कॉट मॉरिशन से पीएम मोदी ने की मुलाकात

जनवरी 2020 से टलती आ रही दोनों प्रधानमंत्रियों की रू-ब-रू मुलाकात अब वाशिंगटन डीसी में हुई है। बता दें कि जून 2020 में दोनों नेताओं के बीच वर्चुअल बैठक हुई थी।

वाशिंगटन: अपने अमेरिकी दौरे के क्रम में पीएम नरेंद्र मोदी ने वाशिंगटन डीसी में ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिशन के साथ द्विपक्षीय बैठक की। जनवरी 2020 से टलती आ रही दोनों प्रधानमंत्रियों की रू-ब-रू मुलाकात अब वाशिंगटन डीसी में हुई है। बता दें कि जून 2020 में दोनों नेताओं के बीच वर्चुअल बैठक हुई थी।

बता दें कि पीएम मोदी और ऑस्ट्रेलिया के उनके समकक्षीय प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन के बीच विभिन्न अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों के इतर पूर्व में कई मौकों पर मुलाकात हुई है। मॉरिसन ने हाल में ‘ऑकस’ गठबंधन के बारे में मोदी से फोन पर बात की थी।

गौरतलब है कि अमेरिका, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया ने 21वीं सदी के खतरों से निपटने के लिए हिंद-प्रशांत क्षेत्र के लिए ऑकस गठबंधन की पिछले हफ्ते घोषणा की थी।

बताते चलें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को अलग-अलग क्षेत्र की पांच प्रमुख कंपनियों के सीईओ के साथ मुलाकात कर अपनी अमेरिका यात्रा की शुरुआत की। इस दौरान उन्होंने भारत में उपलब्ध आर्थिक अवसरों के बारे में बताया। अपनी यात्रा के दौरान वह अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन और उपराष्ट्रपति कमला हैरिस के साथ पहली बार आमने- सामने की बैठक करेंगे।


उन्होंने अपनी यात्रा के पहले दिन उन्होंने क्वालकॉम, एडोब, फर्स्ट सोलर, जनरल एटॉमिक्स और ब्लैकस्टोन जैसी पांच प्रमुख कंपनियों के मुख्य कार्यकारी अध्यक्ष (सीईओ) के साथ एक-एक करके मुलाकात की।

प्रधानमंत्री मोदी ने जिन पांच कंपनियों के शीर्ष अधिकारियों से मुलाक़ात की, उनमे एडोब के सीईओ शांतनु नारायण और जनरल एटॉमिक्स के सीईओ विवेक लाल भारतीय मूल के अमेरिकी हैं।


पाक NSA की गीदड़भभकी कहा-'तालिबान को अकेला न छोड़े दुनियां,बढ़ेगा ग्लोबल आतंकवाद'

इस बीच पाकिस्तान के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार ने दुनिया को आतंकवाद का भय दिखाकर एक प्रकार से धमकी भरे लहजे में कहा है कि अगर तालिबान का साथ दुनिया नहीं देगी तो अच्छा नहीं होगा।

इस्लामाबाद: 'आतंक का आका' पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान अपने दोस्त तालिबान के लिए लगातार प्रयास कर रहा है कि वह यूएन व अन्य वैश्विक स्तर के सम्मेलनों में जगह पा जाए लेकिन उसे और चीन को छोडकर बाकी सभी देश अभी तालिबान को लेकर 'वेट एंड वाच' की स्थिति में है। इस बीच पाकिस्तान लगातार तमाम तरह की गीदड़भभकी दे रहा है और दुनिया से अपील कर रहा है कि दुनिया तालिबान का साथ दे।

इस बीच पाकिस्तान के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार ने दुनिया को आतंकवाद का भय दिखाकर एक प्रकार से धमकी भरे लहजे में कहा है कि अगर तालिबान का साथ दुनिया नहीं देगी तो अच्छा नहीं होगा।

देखिए किस तरह से पाकिस्तानी एनएसए गीदड़भभकी दे रहा है



संयुक्त राष्ट्र में तालिबान को बैठाना चाहता है पाक, भारत ने इस तरह से फेरा उम्मीदों पर पानी

अफगानिस्तान पर कब्जा करने वाले पाक के दोस्त तालिबान के लिए पाकिस्तान फड़फड़ा रहा है। वह अब उसे संयुक्त राष्ट्र में बैठाना चाह रहा है लेकिन भारत ने उसकी इस उम्मीदों पर पानी फेर दिया है।

नई दिल्ली: पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान आतंकियों की पनाह देने वाला देश है और यह बात जग जाहिर है। वहीं, अफगानिस्तान पर कब्जा करने वाले पाक के दोस्त तालिबान के लिए पाकिस्तान फड़फड़ा रहा है। वह अब उसे संयुक्त राष्ट्र में बैठाना चाह रहा है लेकिन भारत ने उसकी इस उम्मीदों  पर पानी फेर दिया है।

मिली जानकारी के मुताबिक, यूएन में तालिबान के प्रतिनिधि को मान्यता देने की मांग के पीछे भी पाकिस्तान का ही दिमाग बताया जा रहा है। जानकारों का कहना है कि तालिबान को लेकर दुनिया की आशंकाओं के बीच पाकिस्तान की पैरोकारी उसके भी इरादों पर सवाल खड़ा कर रही है। फिलहाल भारत पुरजोर तरीके से पाकिस्तान की कवायद का विरोध कर रहा है। भारत के ठोस तर्क के आगे अभी तक पाकिस्तान की दाल गलती नहीं नजर आ रही है।

बताचे चलें कि इससे पहले एससीओ में तालिबानी प्रतिनिधित्व को लाने की कोशिश की गई। बात नहीं बनी तो सार्क विदेश मंत्रियों की बैठक के लिए पाकिस्तान ने तालिबानी प्रतिनिधित्व की मांग पुरजोर तरीके से उठाई। सार्क देशों ने भी पाकिस्तान की मांग को अस्वीकार कर दिया। बैठक इसी वजह से रद्द हो गई।

विशेषज्ञों का कहना है कि पाक अपनी खुफिया एजेंसी आईएसआई पूरी तरह से तालिबानी शासन पर अपना वर्चस्व जमाने की रणनीति पर काम कर रही है। पाकिस्तान ने तालिबान को भरोसा दिया है कि वह उसकी आवाज वैश्विक स्तर पर मुखर करेगा। तालिबानी व्यवस्था में पाकिस्तान समर्थक चेहरों को ज्यादा तरजीह दिलाने के लिए भी पाकिस्तानी एजेंसी शुरू से प्रयासरत रही है।


पाकिस्तान के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार मोईद यूसुफ ने कुछ दिन पहले कहा था कि तालिबान शासन को मान्यता देने की 'वेट एंड वाच' नीति पूरी तरह से गलत है और इसके परिणामस्वरूप संघर्षग्रस्त देश का आर्थिक पतन हो सकता है। हालांकि दुनिया को दिखाने के लिए पाकिस्तान यह भी जता रहा है कि वह तालिबान पर समावेशी सरकार के लिए दबाव बना रहा है। सूत्रों का कहना है कि अफगानिस्तान के संदर्भ में यूएन की साझा नीति की वकालत कई देश कर रहे हैं। भारत के तर्क को दुनिया के ज्यादातर देशों ने स्वीकार किया है।

वहीं, दूसरी तरफ भारत, रूस, अमेरिका समेत तमाम देश तालिबान को मान्यता देने के मूड़ में नहीं है। चीन और पाकिस्तान को छोड़कर लगभग पूरी दुनिया तालिबान को लेकर अभी 'वेट एंड वॉच' की मूद्रा में हैं। वहीं, पाकिस्तान अपने दोस्त तालिबान को हर हाल में आगे बढ़ाना चाहता है।


अमेरिका दौर पर PM Modi: वाशिंगटन पहुंचने पर पीएम मोदी का जोरदार स्वागत

पीएम नरेंद्र मोदी गुरुवार को अपने तीन दिवसीय अमेरिकी दौरे के लिए वॉशिंगटन पहुंच गए हैं। वॉशिंगटन में पीएम मोदी का जोरदार स्वागत किया गया।

वाशिंगटन: पीएम  नरेंद्र मोदी गुरुवार को अपने तीन दिवसीय अमेरिकी दौरे के लिए वॉशिंगटन पहुंच गए हैं। वॉशिंगटन में पीएम मोदी का जोरदार स्वागत  किया गया।


एयरपोर्ट पर पीएम मोदी के स्वागत के लिए अमेरकी विदेश मंत्रालय के कई अधिकारी पहुंचे थे। वहीं, भारत के अमेरिका में राजदूत तरणजीत सिंह संधु भी हवाईअड्डे पर मौजूद थे। पीएम मोदी के आने की खुशी में हवाईअड्डे पर 100 से ज्यादा भारतीय समुदाय के लोग भी पहुंचे थे।  

बता दें कि अपने इस दौरे पर पीएम मोदी संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करेंगे और क्वाड देशों के नेताओं संग बैठक करेंगे। इसके अलावा पीएम मोदी व्हाइट हाउस में अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन के साथ द्विपक्षीय वार्ता भी करेंगे। 

पीएम मोदी ने भी ट्वीट कर अपने वॉशिंगटन पहुंचने की जानकारी दी। उन्होंने लिखा, 'वॉशिंगटन डीसी पहुंच गया। अगले दो दिनों में मैं अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन और उपराष्ट्रपति कमला हैरिस, स्कॉट मॉरिसन, योशिहिदे सुगा से मिलूंगा। इस दौरान मैं क्वाड मीटिंग में हिस्सा लूंगा और शीर्ष कंपनियों के सीईओ से मुलाकात कर भारत में आर्थिक उपलब्धियों को उनके सामने रखूंगा।'

पीएम मोदी के वॉशिंगटन पहुंते ही भारतीय समुदाय के लोगों ने नारे लगाने शुरू कर दिया। खास बात यह थी कि बारिश के बावजूद भारतीय-अमेरिकी पीएम मोदी का इंतजार करते रहे। पीएम मोदी इन लोगों से मिलने के लिए खासतौर पर अपनी गाड़ी तक से उतरे।

बता दें कि पीएम मोदी और जो बाइडेन की मुलाकात 24 सितंबर यानी भारतीय समयानुसान शुक्रवार को होगी। इसी साल 20 जनवरी को अमेरिका का राष्ट्रपति पद संभालने के बाद यह पीएम मोदी के साथ बाइडेन की पहली आमने-सामने मुलाकात होगी। वहीं, कोरोना महामारी के बीच पीएम मोदी का भी यह पहला बड़ा विदेश दौरा है। 


इंटरनेशनल बेइज्जती से पाक बौखलाया, कहा-न्यूजीलैंड क्रिकेट टीम को भारत से भेजी गई थी धमकी

हाल ही में न्यूजीलैंड क्रिकेट टीम ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए पाकिस्तान के अपने दौरे को रद्द कर दिया था। अब इसके लिए भी पाकिस्तान ने भारत को जिम्मेदार ठहराया है।

नई दिल्ली: पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान से चीन के अलावा कोई अन्य देश दोस्ती रखने के मूड में नहीं है। इतना ही नहीं अब तो सुरक्षा व्यवस्था का हवाला देकर खिलाड़ी भी पाकिस्तान का दौरान नहीं करना चाह रहे हैं। हाल ही में न्यूजीलैंड क्रिकेट टीम ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए पाकिस्तान के अपने दौरे को रद्द कर दिया था। अब इसके लिए भी पाकिस्तान ने भारत को जिम्मेदार ठहराया है।

पाकिस्तान ने बुधवार को आरोप लगाया कि भारत की ओर से न्यूजीलैंड क्रिकेट टीम को एक धमकी भरा ईमेल भेजा गया था, जिसके बाद कीवी टीम को पाक का दौरा रद्द करना पड़ा। बता दें कि न्यूजीलैंड के बाद ईसीबी ने भी अपनी पुरुष और महिला टीमों का पाकिस्तान दौरा रद्द कर दिया था।

पाकिस्तान के सूचना और प्रसारण मंत्री फवाद चौधरी ने आरोप लगाया है कि न्यूजीलैंड की क्रिकेट टीम को जिस डिवाइस से धमकी भेजी गई थी उसका संबंध भारत से था। बुधवार को आंतरिक मंत्री शेख राशिद अहमद के साथ एक संवाददाता सम्मेलन में सूचना मंत्री फवाद चौधरी ने कहा कि तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान के आतंकवादी एहसानुल्लाह एहसान के नाम से अगस्त में एक फर्जी पोस्ट बनाया गया था जिसमें न्यूजीलैंड क्रिकेट बोर्ड और सरकार को टीम को पाकिस्तान भेजने से बचने को कहा गया था, क्योंकि टीम को निशाना बनाया जा सकता है।

चौधरी ने कहा कि बावजूद इसके न्यूजीलैंड क्रिकेट टीम पाकिस्तान के दौरे पर आई। हालांकि, पहले मैच के दिन न्यूजीलैंड के अधिकारियों ने कहा कि सरकार को सुरक्षा की चिंता है और इस वजह से दौरा रद्द किया गया। 

पाकिस्तान के प्रतिष्ठित अखबार डॉन के मुताबिक, उन्होंने कहा कि एक दिन बाद न्यूजीलैंड की टीम को हमजा अफरीदी के आईडी का उपयोग करके एक दूसरा धमकी भरा ईमेल भेजा गया था। उन्होंने दावा किया कि जांच अधिकारियों ने पाया कि ईमेल भारत से जुड़े एक उपकरण से भेजा गया था। इसे वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क (वीपीएन) का उपयोग करके भेजा गया था, इसलिए इसके लोकेशन को सिंगापुर के रूप में दिखाया गया था। उन्होंने कहा कि उन्होंने कहा कि इसी डिवाइस में 13 अन्य आईडी थे, जिनमें से लगभग सभी भारतीय नाम थे।

उन्होंने दावा किया कि न्यूजीलैंड की टीम को धमकी देने के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला उपकरण भारत का था। एक फर्जी आईडी का इस्तेमाल किया गया था लेकिन इसे महाराष्ट्र से भेजा गया था। उन्होंने कहा कि गृह मंत्रालय ने मामला दर्ज किया है और तहरीक-ए-लब्बैक प्रोटोनमेल और हमजा अफरीदी की आईडी पर सहायता और जानकारी के लिए इंटरपोल से अनुरोध किया था।

पाकिस्तानी मंत्री ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है। हमारा मानना ​​है कि यह अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के खिलाफ अभियान है। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) और अन्य संस्थाओं को इस पर ध्यान देना चाहिए। चौधरी ने मंगलवार को दावा किया था कि उनका देश अपनी धरती पर अमेरिकी सैन्य ठिकानों को अनुमति देने पर अमेरिका को ना कहने की कीमत चुका रहा है।


तालिबानी आतंकियों के खिलाफ फैसला देने वाली अफगान की पूर्व महिला छिप-छिपकर जिंदगी जी रहीं जिंदगी

अफगानिस्तान की पूर्व महिला अभियोजक उन लोगों से प्रतिशोध के डर से छिप रही हैं, जो कभी उनके फैसलों के बाद जेल गए थे और अब तालिबान राज में रिहा हो गए हैं।

काबुल: वैसे तो कोर्ट और जज जब भी कोई फैसला देते हैं तो सबूतों और गवाहों को मद्देनजर रखते हुए देते हैं लेकिन अफगानिस्तान में तालिबान का राज होने के बाद एक महिला जज अप छिप-छिपकर जीने को मजबूर है जिसने तालिबानी आतंकियों को कभी सजा सुनाई थी। दरअसल, तालिबानी आतंकियों को जेल से रिहा कर दिया गया है।


अफगानिस्तान में तालिबान राज आने से उन लोगों की भी जिंदगी अब खतरे में आ गई है, जिन्होंने कभी तालिबानियों के खिलाफ में फैसला सुनाया था या फिर सरकार की ओर से केस लड़ा था। अफगानिस्तान की पूर्व महिला अभियोजक उन लोगों से प्रतिशोध के डर से छिप रही हैं, जो कभी उनके फैसलों के बाद जेल गए थे और अब तालिबान राज में रिहा हो गए हैं।


अफगानिस्तान में 20 साल बाद वापसी करने वाले तालिबान ने काबुल पर कब्जा जमाने के बाद ही कई कैदियों को जेल से रिहा कर दिया है। महिला अभियोजकों का दावा है कि पूर्व कैदी बदला लेने के लिए उनकी तलाश कर रहे हैं। खामा प्रेस न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक, एक महिला जज ने कहा कि तालिबान के देश पर कब्जा करने के बाद से उन्हें बार-बार अज्ञात नंबरों से फोन किया गया है।

तालिबान राज के बाद से कई महिला जज जो भागने में सफल रहीं, वे अब विदेश में हैं, मगर सैकड़ों की संख्या में अब भी महिला जज देश में छिपी हुई हैं। इन महिला जजों ने आमतौर पर महिलाओं के अधिकारों के उल्लंघन, महिलाओं के उत्पीड़न, बलात्कार, हत्या और पारिवारिक उत्पीड़न के मामलों को डील किया। 

खामा प्रेस न्यूज एजेंसी ने बताया कि अफगानिस्तान में अन्य महिला कर्मचारियों के साथ महिला अभियोजक भी अपने घरों पर हैं और उन्हें अपनी नौकरी पर नहीं जाने के लिए कहा गया है। बता दें कि 15 अगस्त को तालिबान ने काबुल पर कब्जा कर लिया था और उसके बाद महिलाओं को काम पर जाने से मना कर दिया था। 


जागती आंखों से तालिबान देख रहा संयुक्त राष्ट्र महासभा में बैठने का ख्वाब, पत्र लिखकर की यह मांग

बता दें कि अभी तक तालिबान के नेतृत्व वाले अफगान को पाकिस्तान और चीन की कोशिशों के बावजूद किसी भी देश ने आधिकारिक तौर पर मान्यता नहीं दी है। अब तालिबान ने कहा है कि न्यूयॉर्क में होने जा रही संयुक्त राष्ट्र महासभा में शामिल होकर दुनिया के नेताओं को संबोधित करने दिया जाए।

काबुल: बंदूकों की 'संसद' तलाने वाले तालिबान को अब समझ आ रहा है कि दुनिया के दिलों में उसके लिए रहम आने से क्या फायदा होगा। या फिर यह भी कहना सही होगा कि उसे अपने वास्तविक औकात पता चल गई है। तालिबान को यह पता चल गया है कि अगर दुनिया के साथ चलना है और अपना भला करना है तो दुनिया के ही वसूलों पर चलना होगा और अपने वसूलों को भूलना होगा। शायदइसलिए ही तालिबान अब संयुक्त राष्ट्र महासभा में बैठने का ख्वाब देख रहा है।

बता दें कि अभी तक तालिबान के नेतृत्व वाले अफगान को पाकिस्तान और चीन की कोशिशों के बावजूद किसी भी देश ने आधिकारिक तौर पर मान्यता नहीं दी है। अब तालिबान ने कहा है कि न्यूयॉर्क में होने जा रही संयुक्त राष्ट्र महासभा में शामिल होकर दुनिया के नेताओं को संबोधित करने दिया जाए। तालिबान ने दोहा में मौजूद अपने प्रवक्ता सुहेल शाहीन को संयुक्त राष्ट्र में अफगानिस्तान का राजदूत भी नियुक्त कर दिया है। 

सोमवार को इस संबंध में तालिबान के विदेश मंत्री आमिर खान मुत्ताकी ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतेरस को चिट्ठी लिखी है। मुत्ताकी ने इस चिट्ठी में मांग रखी है कि अफगानिस्तान की ओर से उन्हें भी यूएनजीए में बोलने दिया जाए। यूएनजीए की मीटिंग अगले सोमवार को खत्म होने वाली है। 

गुतेरस के प्रवक्ता फरहान हक ने मुत्ताकी की चिट्ठी मिलने की पुष्टि की है। बीते महीने तक गुलाम इजाकजल अफगानिस्तान सरकार का यूएन में प्रतिनिधित्व कर रहे थे। हालांकि, तालिबान ने अपनी चिट्ठी में लिखा है कि इजाकजल का मिशन अब खत्म हो चुका है और वह अब अफगानिस्तान का प्रतिनिधित्व नहीं करते हैं। 

हक ने बताया कि संयुक्त राष्ट्र में सीट पाने के लिए तालिबान की चिट्ठी को नौ सदस्यीय क्रीडेंशियल कमेटी के आगे भेजा गया है। इस कमेटी में अमेरिका, चीन, रूस भी सदस्य हैं। इसके अलावा इस कमेटी में बहमास, भूटान, चिली, नामीबिया, सिएरा लियोन और स्वीडन शामिल हैं।  हालांकि, अगले सोमवार से पहले इस कमेटी की बैठक असंभव है, ऐसे में तालिबान विदेश मंत्री के संयुक्त राष्ट्र आमसभा में संबोधन की संभावना न के बराबर है।

अगर संयुक्त राष्ट्र तालिबान के राजदूत को मान्यता दे देता है तो इस्लामिक कट्टरपंथी समूह को अंतरराष्ट्रीय मान्यता देने में यह बहुत बड़ा कदम होगा। अंतरराष्ट्रीय मान्यता पाकर अफगानिस्तान में आर्थिक मदद के दरवाजे खुल सकते हैं। वैसे इस बात संभावना न के ही बराबर है।


भारत से दोस्ताना माहौल बनाने की तैयारी में नेपाल की देउवा सरकार, सभी सीमा नाका खोलने का लिया निर्णय

मंगलवार हुई कैबिनेट की बैठक में देऊबा सरकार ने ओली सरकार के सीमा व्यवस्थापन संबंधी आदेश को खारिज करते हुए नया आदेश जारी किये जिससे बुधवार से नेपाल भारत की सभी छोटी बड़ी सीमा खोलने का उल्लेख है।

नई दिल्ली/काठमांडु: नेपाल की मौजूदा देउबा सरकार ने भारत से दोस्ताना माहौल बनाने की तैयारी शुरू कर दी। इसके तहत उसने सबसे पहले भारत सीमा की सभी नाका को खोलने का निर्णय लिया है। मंगलवार हुई कैबिनेट की बैठक में देऊबा सरकार ने ओली सरकार के सीमा व्यवस्थापन संबंधी आदेश को खारिज करते हुए नया आदेश जारी किये जिससे बुधवार से नेपाल भारत की सभी छोटी बड़ी सीमा खोलने का उल्लेख है।


नेपाल की देउवा सरकार ने ओली द्वारा नियुक्त दर्जन देशों के राजदूत बर्खास्त किये। भारत में नेपाल के राजदूत नीलाम्बर आचार्य, चीन के राजदूत महेन्द्र बहादुर पाण्डे, अमेरिका में राजदूत युवराज खतिवडा, ब्रिटेन के राजदूत लोकदर्शन रेग्मी सहित करीब 15 देशों के राजदूतों को पद से हाथ धोना पड़ा।

मिली जानकारी के मुताबिक, भारत और नेपाल की सीमा से सटे पर्सा जिला वीरगंज के होटल तथा पर्यटन व्यापारी संघ के अध्यक्ष हरि पंत ने मंगलवार की देर संध्या काठमांडू सिंह दरबार में नेपाल के नवपदस्थापित प्रधानमंत्री शेरबहादुर देउवा से मुलाकात की। उनलोगों ने रक्सौल बार्डर खोलने की मांग की। इसके लिए उन्हें मांग पत्र सौंपा गया। इसमें बताया है कि पर्यटन और होटल व्यापार ठप हो गया है। जिस कारण इससे जुड़े लोगों की हालत बदतर हो गई है। साथ ही बताया है कि रक्सौल से जुड़े पर्सा और बारा जिला में छोटे-बड़े करीब दो सौ होटल हैं। बार्डर सील होने से होटल बंद पड़े हैं। भारतीय वाहनों के परिचालन शुरू होने से पर्यटकों की संख्या बढ़ेगी, जिससे अर्थव्यवस्था पटरी पर आ सकेगा। प्रधानमंत्री ने संघ के इस मांग को सकारात्मक रूप में लिया है। पूर्व की सरकार ने कोरोना संक्रमण को लेकर बार्डर को सील कर दिया है। जिससे देश-विदेश के पर्यटकों के भारतीय नंबर के वाहनों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया है। 

बता दें कि करीब पांच माह पूर्व नेपाल के तत्कालीन प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के नेतृत्व वाली मंत्रिमंडल ने बॉर्डर खोलने का निर्णय लिया था। इसकी घोषणा के बाद नेपाल सरकार के उप प्रधानमंत्री ईश्वर पोखरेल ने दो दिनों के अंदर भारतीय वाहनों को नेपाल में प्रवेश की अनुमति का आश्वासन दिया था। लेकिन नतीजा ढाक के तीन पात निकला। इस संबंध में नेपाल होटल तथा पर्यटन व्यवसायी संघ और पर्यटन पत्रकार संघ ने ज्ञापन भी सौंपा गया था। जिसमें बताया था कि नेपाल की अर्थव्यवस्था पर्यटन पर आधारित है। नेपाल के विभिन्न प्रदेशों में छह अरब से अधिक की लागत से होटल तैयार किया गया है।

नेपाल में 70 प्रतिशत भारतीय मूल के पर्यटक आते हैं। जिससे उक्त व्यापार चलता है। कोरोना संक्रमण काल में बार्डर सील होने से देशी-विदेशी पर्यटकों का आगमन बंद हो गया। भारतीय वाहनों पर प्रतिबंध लगाने और स्थानीय प्रशासन की सख्ती से व्यापार ठप हो गया। जिसे उप प्रधानमंत्री श्री पोखरेल ने गंभीरता से लिया था। नेपाल में मंत्रिमंडल के निर्णय के बाद स्थानीय नेपाल प्रशासन ने भारतीय वाहनों के प्रवेश की अनुमति अबतक नहीं दी है। इससे देशी-विदेशी पर्यटकों की संख्या काठमांडू, पोखरा, चितवन आदि क्षेत्रों में नगण्य हो गई है। इस कारण राजस्व की क्षति हो रही है। वाहनों के प्रवेश नहीं होने से पहाड़ी व्यापारियों की स्थिति आर्थिक रूप से कमजोर हो रही है। इसके अलावा दोनों देशों के लोगों के बीच दूरी बढ़ रही है। बता दें कि करीब दो वर्ष से रोक जारी होने से भारतीय पर्यटक और स्थानीय लोग भारतीय वाहनों को लेकर नेपाल नहीं जा पा रहे है।

भारत-नेपाल सीमा कोरोना संक्रमण को लेकर 20 माह से सील है। इस कारण भारतीय वाहनों का नेपाल में प्रवेश नहीं हो रहा है। जबकि नेपाली वाहन निर्बाध गति से भारतीय सीमा में आ रहे हैं। नेपाल के सीमावर्ती पर्सा औऱ बारा जिला के प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि बार्डर खोलने का निर्णय हुआ है। इसके लिए अधिकृत रूप से कोई पत्र और मेल नहीं मिला है। जबकि भारत या तीसरे देशों से आयात-निर्यात पर प्रतिबंध नहीं है। भारतीय वाहनों का प्रवेश नहीं होने से देशी-विदेशी पर्यटकों के नेपाल यात्रा को लेकर संशय है।

पर्यटकों के लिए नेपाली टैक्सी काफी महंगा है। जबकि भारत सरकार ने दोनों देशों के सीमावर्ती क्षेत्र के लोगों की समस्याओं को देखते हुए करीब दस माह पूर्व ही इंडो-नेपाल बॉर्डर को खोल दिया है। हालांकि सीमावर्ती क्षेत्र के लोग चोरी-छिपे ग्रामीण रास्तों से नेपाली नंबर की बाइक और टेम्पो से आवागमन कर रहे है। जबकि भारत-नेपाल पारगमन संधि के मुताबिक दोनों देशों के बार्डर सबंधित एयरपोर्ट, अस्पताल, रेलवे स्टेशन और बस पड़ाव तक निर्बाध रूप से वाहनों के आवागमन की छूट है। 




UNGA में अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन का दुनिया को संदेश, कहा-'नया शीतयुद्ध नहीं चाहता, आतंकवाद को बढ़ावा देने वाले खुद को अमेरिका का कट्टर दुश्मन समझे'

अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि पिछले महीने काबुल हवाई अड्डे पर हुए आतंकवादी हमले में हमने 13 अमेरिकी हीरो और कई अफगान नागरिकों को खो दिया। जो लोग हमारे खिलाफ आतंकवाद को बढ़ावा देते हैं, वे अमेरिका को एक कट्टर दुश्मन के रूप में पाएंगे।

न्यूयॉर्क: अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने मंगलवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा में कहा कि अमेरिका चीन के साथ संबंधों के संदर्भ में "नया शीत युद्ध" नहीं चाहता है। उन्होंने न्यूयॉर्क में विश्व नेताओं से कहा, "संयुक्त राज्य अमेरिका किसी भी राष्ट्र के साथ काम करने के लिए तैयार है जो चुनौतियों को साझा करने के लिए शांतिपूर्ण समाधान का प्रयास करता है, भले ही हमारे बीच अन्य क्षेत्रों में तीव्र असहमति हो।"

अफगान के हालात का जिक्र करते हुए जो बाइडेन में कहा कि पीड़ा और असाधारण संभावनाओं के इस समय में हमने बहुत कुछ खोया है... हमने लाखों लोगों को खोया है। प्रत्येक मृत्यु हृदयविदारक है। आज हम आतंकवाद के ख़तरे का सामना कर रहे हैं, हमने अफगानिस्तान में 20 साल से चल रहे संघर्ष को समाप्त कर दिया है। हम कूटनीति के दरवाजे खोल रहे हैं। हमारी सुरक्षा, समृद्धि, स्वतंत्रता आपस में जुड़ी हुई है। हमें पहले की तरह एक साथ काम करना चाहिए।


बाइडेन ने आगे कहा कि हथियार कोविड-19 या फ्यूचर वेरिएंट से हमारा बचाव नहीं कर सकते, सामूहिक विज्ञान और राजनीतिक इच्छाशक्ति कर सकती है। हमें अभी काम करने की ज़रूरत है। भविष्य के लिए वैश्विक स्वास्थ्य सुरक्षा को फाइनेंस करने के लिए हमें एक नया मकैनिजम बनाने की ज़रूरत है। हम एक और शीत युद्ध नहीं चाहते, जिसमें दुनिया विभाजित हो...अमेरिका किसी भी राष्ट्र के साथ काम करने के लिए तैयार है जो शांतिपूर्ण प्रस्तावों का अनुसरण करता हो...क्योंकि हम सभी अपनी असफलताओं के परिणाम भुगत चुके हैं।

अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि पिछले महीने काबुल हवाई अड्डे पर हुए आतंकवादी हमले में हमने 13 अमेरिकी हीरो और कई अफगान नागरिकों को खो दिया। जो लोग हमारे खिलाफ आतंकवाद को बढ़ावा देते हैं, वे अमेरिका को एक कट्टर दुश्मन के रूप में पाएंगे।

उन्होंने आगे कहा कि अमेरिका अब वही देश नहीं रहा जिस पर 20 साल पहले 9/11 को हमला हुआ था। आज हम ज़्यादा ताकतवर और आतंकवाद की चुनौतियों के लिए तैयार हैं। अमेरिका आतंकवाद के खिलाफ अपनी और अपने सहयोगियों की रक्षा करता रहेगा।


सत्ता के तालिबानी नेताओं में खूनी संघर्ष, अपने सुप्रीम लीडर अखुंदजादा का किया कत्ल, मुल्ला बरादर को बनाया बंधक

अखुंदजादा को लेकर रिपोर्ट में कहा गया है कि अभी तक यह पता नहीं लग सका है कि वह कहां है। वह काफी समय से न तो दिखा है और न ही उसका कोई संदेश ही जारी किा गया है। ऐसे में यह कयास लगाए जा रहे हैं कि अखुंदजादा की मौत हो गई है।

काबुल: अफगानिस्तान में तालिबान ने बंदूकों के दम पर सत्ता तो हासिल कर ली है लेकिन सत्ता संभालना उसके बस की बात नहीं है। अब गद्दी के लिए तालिबानी आपस में एक दूसरे के खून के प्यासे हो चुके हैं। ताजा मामले में तालिबानी ग्रुप में हुई आपसी झड़प में तालिबान के सुप्रीम लीडर अखुंदजादा की हत्या किए जाने की बात सामने आ रही है। इतना ही नहीं ड्यूटी पीएम मुल्लाह बरादर को हक्कानी ग्रुप में बंधक भी बना लिया है।

सत्ता के लिए यह संघर्ष तालिबान के ही दो धड़ों के बीच हुआ था। मैगजीन ने यह भी बताया कि हक्कानी धड़े के साथ इस झगड़े में सबसे ज्यादा नुकसान मुल्लाह बरादर को ही पहुंचा है। ब्रिटेन की मैगजीन ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि सितंबर माह में तालिबान के दोनों धड़ों की बैठक हुई थी। 

इस दौरान एक मौका ऐसा भी आया जब हक्कानी नेता खलील-उल रहमान हक्कानी अपनी कुर्सी से उठा और उसने बरादर पर मुक्के बरसाने शुरू कर दिए। बरादर लगातार तालिबान सरकार के कैबिनेट में गैर-तालिबानियों और अल्पलसंख्यकों को भी जगह देने का दबाव बना रहा था ताकि दुनिया के अन्य देश तालिबान सरकार को मान्यता दें।

इस झड़प के बाद बरादर कुछ दिनों के लिए लापता था और अब एक बार फिर से उसे कंधार में देखा गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, बरादर ने आदिवासी नेताओं से मुलाकात की है, जिनका समर्थन भी उसे मिला है। हालांकि, बरादर पर दबाव बनाकर उससे वीडियो संदेश जारी किया। मैगजीन ने दावा किया कि इस वीडियो से ऐसे संकेत मिल रहे हैं कि बरादर को बंधक बना लिया गया है।

अखुंदजादा को लेकर रिपोर्ट में कहा गया है कि अभी तक यह पता नहीं लग सका है कि वह कहां है। वह काफी समय से न तो दिखा है और न ही उसका कोई संदेश ही जारी किा गया है। ऐसे में यह कयास लगाए जा रहे हैं कि अखुंदजादा की मौत हो गई है। 

तालिबान में इससे पहले सत्ता को लेकर ऐसा संघर्ष नहीं देखा गया था। तालिबान और हक्कानी नेटवर्क 2016 में एक हो गए थे। बरादर की कोशिश थी कि वह तालिबान की एक अलग छवि पेश करे ताकि दुनिया उसे मान्यता दे। वहीं, हक्कानी नेटवर्क आत्मघाती हमलों का पैरोकार बना हुआ है। अफगानिस्तान में शरणार्थियों के मंत्री खलील हक्कानी को संयुक्त राष्ट्र ने अपनी आतंकियों की सूची में शामिल किया हुआ है। 


पाक पीएम इमरान खान से इस बात पर खफा हुआ तालिबान, जानिए-क्या है पूरी बात

कुछ दिन पहले,इमरान खान ने यह बात स्वीकार की थी कि इस्लामाबाद ने एक 'समावेशी सरकार' के लिए तालिबान के साथ बातचीत शुरू की है, जिसमें देश में अल्पसंख्यक शामिल होंगे।

काबुल/इस्लामाबाद: पाकिस्तान के पीएम इमरान खान आए दिन तालिबान को लेकर बड़बोलापन दिखा रहे हैं। लेकिन अब यह बात तालिबान को अच्छी नहीं लग रही है। दरअसल कुछ दिनों पहले इमरान खान ने कहा था कि अफगानिस्तान में समावेशी सरकार बनानी चाहिए जिससे सरकार में सभी  समुदायों का प्रतिनिधित्व हो। हालांकि तालिबान को यह बात पसंद नहीं आई और उसने कहा है कि किसी देश को ऐसा कहने का हक नहीं है। उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान में एक 'समावेशी' सरकार स्थापित करने के लिए कहने का किसी देश को कोई अधिकार नहीं है।


तालिबान के प्रवक्ता और उप सूचना मंत्री जबीहुल्ला मुजाहिद ने यह बात तब कही है जब पाकिस्तान और कई अन्य देश अफगानिस्तान में समावेशी सरकार बनाने की बात कह चुके हैं। एक समाचार पत्र ने मुजाहिद के हवाले से बताया, "पाकिस्तान या किसी अन्य देश को इस्लामिक अमीरात से अफगानिस्तान में 'समावेशी' सरकार स्थापित करने के लिए कहने का कोई अधिकार नहीं है।"

बता दें कि कुछ दिन पहले,इमरान खान ने यह बात स्वीकार की थी कि इस्लामाबाद ने एक 'समावेशी सरकार' के लिए तालिबान के साथ बातचीत शुरू की है, जिसमें देश में अल्पसंख्यक शामिल होंगे।

इससे पहले, तालिबान के एक अन्य नेता, मोहम्मद मोबीन ने भी व्यक्त किया था कि अफगानिस्तान किसी को भी देश में 'समावेशी सरकार' का आह्वान करने का अधिकार नहीं देता है। अफगानिस्तान के एरियाना टीवी पर एक डिबेट शो के दौरान उन्होंने कहा, "क्या समावेशी सरकार का मतलब सिस्टम में पड़ोसियों के अपने प्रतिनिधि और जासूस का होना है?"


न्यूजीलैंड क्रिकेट टीम ने रद्द किया पाकिस्तान दौरा तो भड़क हुए पाक गृहमंत्री, कहा-'उनकी पूरी फौज से ज्यादा सैनिक तो हमने उनकी सुरक्षा में लगाए थे'

पाकिस्तान के गृह मंत्री शेख राशिद भड़ उठे हैं। उन्होंने कहा कि जितनी न्यूजीलैंड के पास फौज है उससे ज्यादा सैनिक हमने उनकी टीम की सुरक्षा में लगाए थे।

इस्लामाबाद: न्यूजीलैंड क्रिकेट टीम ने पाकिस्तान दौरे पर मैच के ठीक पहले जाने से मना कर दिया। इसके पीछे न्यूजीलैंड द्वारा सुरक्षा कारणों का हवाला दिया गया। जिसके बाद पाकिस्तान के गृह मंत्री शेख राशिद भड़ उठे हैं। उन्होंने कहा कि जितनी न्यूजीलैंड के पास फौज है उससे ज्यादा सैनिक हमने उनकी टीम की सुरक्षा में लगाए थे।

पाकिस्तान के गृह मंत्री शेख रशीद ने सोमवार को कहा कि न्यूजीलैंड की क्रिकेट टीम की सुरक्षा में उनके देश ने बड़ी संख्या में जवान तैनात किए थे। रशीद ने कहा कि जितनी न्यूजीलैंड के पास फौज नहीं है, उससे ज्यादा सैनिक तो पाकिस्तान ने कीवियों की सुरक्षा में लगाए थे। मीडिया से बात करते हुए रशीद ने कहा कि मुल्क की आवाम को उम्मीद नहीं खोनी चाहिए और एक दिन ऐसा जरूर आएगा जब पूरी दुनिया की क्रिकेट टीमें मैच खेलने के लिए पाकिस्तान आएंगी।


बताते चलें कि न्यूजीलैंड क्रिकेट टीम ने पहला वनडे मैच शुरू होने से ठीक पहले बीते शुक्रवार को सुरक्षा को खतरे का हवाला देते हुए पाकिस्तान का अपना वर्तमान दौरा रद्द कर दिया था। पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने इसे एकतरफा फैसला करार देते हुए कहा था कि मेहमान टीम की सुरक्षा को किसी तरह का खतरा नहीं था। यह न्यूजीलैंड का पिछले 18 वर्षों में पाकिस्तान का पहला दौरा था जिसमें टीम को 3 वनडे और 5 टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच खेलने थे।

बता दें कि पीसीबी ने एक बयान में कहा था कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने व्यक्तिगत स्तर पर न्यूजीलैंड की प्रधानमंत्री जेसिंडा अर्डर्न से बात की और उन्हें बताया कि हमारे पास दुनिया की सर्वश्रेष्ठ खुफिया प्रणाली है और मेहमान टीम के लिए किसी भी तरह का कोई सुरक्षा खतरा नहीं है। हालांकि इमरान खान के फोन का भी मेहमान टीम के फैसले पर कोई असर नहीं पड़ा और यह दौरा रद्द हो गया।

वहीं, PCB चीफ रमीज राजा ने कहा कि दौरे से हटने पर न्यूजीलैंड को आईसीसी (अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद) को जवाब देना होगा। रमीज ने कहा, ‘बेहद ही निराशाजनक दिन। मुझे प्रशंसकों और हमारे खिलाड़ियों के लिए बहुत खेद है। सुरक्षा खतरे पर एकतरफा फैसला लेकर दौरे से हटना बहुत निराशाजनक है। खासकर जब वे इस खतरे को साझा भी नहीं कर रहे है। न्यूजीलैंड किस दुनिया में रह रहा है?  न्यूजीलैंड को आईसीसी में हमें जवाब देना होगा।’


रूस की यूनिवर्सिटी में अंधाधुध गोलीबारी, 8 की मौत, 19 घायल, खौफ में बिल्डिंग से कूदे छात्र

रूसी जांच समिति ने यह जानकारी दी। पर्म क्षेत्र के स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक 19 लोग घायल हुए हैं। घायलों को लेकर आ रहे अलग-अलग आंकड़ों का फिलहाल मिलान नहीं हो सका है।

नई दिल्ली: आज रूस की यूनिवर्सिटी में में एक हैरान कर देने वाली गोलीबारी की घटना सामने आई है। इस गोलीबारी में 8 लोगों की मौत हो गई है। घटना के बाद पूरी यूनिवर्सिटी में हडकंप मच गया और छात्र बिल्डिंग से कूदकर भागने लगे। सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर किया गया है जिसमें देखा जा सकता है कि छात्र कितना डर गए थे। इस घटना में कम से कम 8 लोगों की मौत हो गई है।

रूस के पर्म शहर के एक विश्वविद्यालय में सोमवार सुबह हुई गोलीबारी में 8 लोगों की मौत हो गई जबकि छह अन्य घायल हो गए। रूसी जांच समिति ने यह जानकारी दी। पर्म क्षेत्र के स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक 19 लोग घायल हुए हैं। घायलों को लेकर आ रहे अलग-अलग आंकड़ों का फिलहाल मिलान नहीं हो सका है।

यनिवर्सिटी में गोलीबारी की घटना से इतना खौफ फैल गयै कि स्टूडेंट अपनी जान बचाने के लिए बिल्डिंग से कूदकर भागने लगे।

पर्म स्टेट यूनिवर्सिटी प्रेस सर्विस के अनुसार, अज्ञात अपराधी ने एक गैर-घातक बंदूक का इस्तेमाल किया। विश्वविद्यालय के छात्रों और कर्मचारियों ने खुद को कमरों में बंद कर लिया, और विश्वविद्यालय ने उन लोगों से परिसर छोड़ने का आग्रह किया जो ऐसा करने की स्थिति में थे।

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रूस के गृह मंत्रालय ने बताया कि बंदूकधारी को बाद में हिरासत में ले लिया गया। घटना के बाद जांच समिति ने हत्या की जांच शुरू कर दी है। सरकारी तास समाचार एजेंसी ने एक अनाम कानूनी स्रोत का हवाला देते हुए कहा कि कुछ छात्र एक इमारत की खिड़कियों से बाहर कूद गए। क्षेत्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक घायलों को गोलीबारी और इमारत से भागने की कोशिश में चोटें आई हैं।


'काबुल एयरस्ट्राइक में आतंकी नहीं, 10 निर्दोष मरे थे', अमेरिका ने कबूला अपना गुनाह

29 अगस्त को अमेरिका द्वारा काबुल एयरपोर्ट के समीप किये गए एयर स्ट्राइक में आतंकियों की नहीं, बल्कि निर्दोष 10 लोगों की मौत हुई थी। इनमें से 7 मृतक छोटे बच्चे थे। इसके लिए अमेरिका ने अब माफी मांगते हुए कहा है कि यह उससे बहुत बड़ी गलती हो गई है।

न्यूयॉर्क: 29 अगस्त को अमेरिका द्वारा काबुल एयरपोर्ट के समीप किये गए एयर स्ट्राइक में आतंकियों की नहीं, बल्कि निर्दोष 10 लोगों की मौत हुई थी। इनमें से 7 मृतक छोटे बच्चे थे। इसके लिए अमेरिका ने अब माफी मांगते हुए कहा है कि यह उससे बहुत बड़ी गलती हो गई है। इससे वह सबक लेते हैं और भविष्य में इस तरह की गलती ना करने का प्रयास करेंगे।


अमेरिकी रक्षा मंत्रालय पेंटागन ने शुक्रवार को स्वीकार किया कि अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में 29 अगस्त को किये गये एक ड्रोन हमले में सात बच्चों सहित 10 निर्दोष नागरिकों की मौत हो गई और ऐसी कोई आशंका नहीं है कि वे आईएसआईएस-के से जुड़े हुए थे या अमेरिकी सेना के लिए खतरा थे। 


अमेरिकी रक्षा सचिव (रक्षा मंत्री) लॉयड ऑस्टिन ने काबुल में हुए ड्रोन हमले के लिए शुक्रवार को माफी मांगी, जिसमें दस लोगों की मौत हो गई थी। ऑस्टिन ने एक बयान में कहा कि मैं ड्रोन हमले में मारे गए लोगों के पीड़ित परिवार के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करता हूं। उन्होंने आगे कहा कि हम क्षमा चाहते हैं और हम इस भयानक गलती से सीखने का प्रयास करेंगे।
वहीं, पेंटागन में जनरल केनेथ मैकेंजी ने कहा कि यह एक गलती थी, और मैं गंभीरतापूर्वक माफी मांगता हूं।

 अमेरिकी रक्षा मंत्रालय के यूनाइटेड स्टेट्स सेंट्रल कमांड की एक जांच में पाया गया कि अमेरिकी हमले में एक निदोर्ष सहायता कर्मी और उसके परिवार के सदस्यों की मौत हो गई थी, जिनमें सात बच्चे भी शामिल थे। 


इस हमले को शुरू में 'न्यायसंगत' करार दिया गया था। हमले में मारी गई सबसे छोटी बच्ची सुमाया महज दो साल की थी। जांच में बताया गया कि सुरक्षा बलों ने कार में जिस चीज को रखते हुए देखा था, वह विस्फोटक नहीं बल्कि पानी के कंटेनर थे। 


पेंटागन ने बताया कि अमेरिकी खुफिया एजेंसी ने आठ घंटे तक उस व्यक्ति की कार को ट्रैक किया था, क्योंकि इसे आतंकवादी समूह इस्लामिक स्टेट-खोरासान से जुड़े एक परिसर में देखा गया था। जांच में पाया गया कि कार की गतिविधि काबुल हवाईअड्डे पर हमले के लिए आतंकवादी समूह की योजनाओं के बारे में खुफिया एजेंसियों को मिली सूचनाओं से काफी हद तक मेल खाती है।

इसी दौरान, एक निगरानी ड्रोन ने कुछ लोगों को कार के ट्रंक में विस्फोटक लोड करते हुए देखा, लेकिन बाद में जांच में वे पानी के कंटेनर निकले।
सहायता कर्मी जमैरी अकमाधी की कार पर हवाई अड्डे से करीब तीन किमी दूर हमला किया गया। 

ड्रोन हमले के बाद कार में दूसरा बड़ा धमाका हुआ था, जिसके आधार पर अमेरिकी अधिकारियों ने शुरू में कहा था कि कार में विस्फोटक लदे हुए थे, लेकिन जांच में पाया गया कि संभवत: मार्ग में किसी प्रोपेन टैंक के कारण यह धमाका हुआ। पीड़ितों के रिश्तेदारों ने बताया कि उन्होंने अमेरिका जाने के लिए आवेदन किया था और वे हवाई अड्डे पर जाने के लिए एक फोन कॉल का इंतजार कर रहे थे।


SCO शिखर सम्मेलन में भी पाकिस्तान का जागा 'तालिबान प्रेम', दुनिया से की मदद की अपील

आज पाकिस्तान के पीएम इमरान खान ने एक बार फिर से तालिबान का राग अलापते हुए कहा है कि दुनिया को अफगानिस्तान की मदद करनी होगी।

नई दिल्ली/इस्लामाबाद: पडो़सी मुल्क पाकिस्तान का तालिबान प्रेम अब अन्तर्राष्ट्रीय मंच पर भी तालिबान के लिए मदद की गुहार लगा रहा है। अबतक वह सिर्फ अपने स्तर पर ही तालिबान से दोस्ती निभा रहा था। आज पाकिस्तान के पीएम इमरान खान ने एक बार फिर से तालिबान का राग अलापते हुए कहा है कि दुनिया को अफगानिस्तान की मदद करनी होगी। इमरान खान ने SCO को संबोधित करते हुए कहा कि अफगानिस्तान को बाहर से नियंत्रित नहीं किया जा सकता है।

अपने संबोधन में पाक पीएम इमरान खान ने कहा कि इस्लामाबाद की ओर से अफगानिस्तान को मदद की जाती रहेगी। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि तालिबान को अपनी ओर से किए हुए वादों को पूरा करना होगा। इससे पहले भी इमरान खान कई बार तालिबान का खुलकर समर्थन कर चुके हैं।

इमरान ने आगे कहा कि अफगानिस्तान में मानवीय संकट को टालने के लिए वैश्विक स्तर पर मदद करनी होगी। इमरान खान ने तालिबान का बचाव करते हुए कहा कि फिलहाल अफगानिस्तान की सरकार विदेशी मदद पर निर्भर है। इमरान खान ने कहा, 'तालिबान को उन वादों को पूरा करना होगा, जो उसने किए हैं। शांतिपूर्ण और स्थिर अफगानिस्तान से पाकिस्तान के भी हित जुड़े हैं और इसके लिए हम काम करते रहेंगे।' इसके साथ ही इमरान खान ने कहा कि अफगानिस्तान में कोई बाहरी दखल नहीं होना चाहिए।


भारतीय पीएम नरेंद्र मोदी ने लताड़ा

वहीं, भारतीय पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि मेरा मानना है कि इस क्षेत्र में सबसे बड़ी चुनौतियां शांति, सुरक्षा और विश्वास की कमी से संबंधित है। क्षेत्र की समस्याओं का मूल कारण बढ़ती कट्टरता है। अफगानिस्तान में हाल के घटनाक्रमों ने कट्टरपंथ से उत्पन्न चुनौती को और अधिक स्पष्ट कर दिया है। उन्होंने आगे कहा कि एससीओ को इस्लाम से जुड़े उदारवादी, सहिष्णु तथा एवं समावेशी संस्थानों और परम्पराओं के बीच मजबूत सम्पर्क विकसित करने के लिए काम करना चाहिए। 


गौरतलब है कि तालिबान ने 15 अगस्त को अफगानिस्तान पर कब्जा जमा लिया था। उसके बाद से ही देश में अशांति का माहौल है। एक तरफ अमेरिका ने अपने फेडरल बैंक में जमा अफगानिस्तान की 9 अरब डॉलर की पूंजी को फ्रीज कर दिया है तो वहीं दूसरी तरफ आईएमएफ ने अपने संबंधों को खत्म कर लिया है। आईएमएफ का कहना है कि जब तक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तालिबान को मान्यता नहीं मिलती है, तब तक उसके संसाधनों तक उसकी पहुंच नहीं होगी। 


समुद्र में चीन को घेरने के लिए अमेरिका, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया ने बनाया ‘ऑकस’, जानिए-क्या है पूरा प्लान

इससे ये देश अपने साझा हितों की रक्षा कर सकेंगे और परमाणु ऊर्जा से संचालित पनडुब्बियां हासिल करने में ऑस्ट्रेलिया की मदद करने समेत रक्षा क्षमताओं को बेहतर तरीके से साझा कर सकेंगे।

नई दिल्ली: समुद्र में अपना प्रभाव बढ़ा रहे चीन के लिए बुरी खबर है। अब उसे घेरने के लिए अमेरिका, ब्रिटेन और ऑस्टेलिया एक साथ आगे आए हैं। ऐसे में ड्रैगन के मंसूबों पर पानी फिरना तय है। ब्रिटेन, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया ने हिंद प्रशांत में चीन को घेरने के लिए नया त्रिपक्षीय सुरक्षा गठबंधन ऑकस (एयूकेयूएस) की घोषणा की है। इससे ये देश अपने साझा हितों की रक्षा कर सकेंगे और परमाणु ऊर्जा से संचालित पनडुब्बियां हासिल करने में ऑस्ट्रेलिया की मदद करने समेत रक्षा क्षमताओं को बेहतर तरीके से साझा कर सकेंगे।

Are Asian allies backing the United States' new position on South China  Sea? | ORF

ऐतिहासिक नए गठबंधन यानी ऑकस को बुधवार को टेलीविजन पर प्रसारित एक संयुक्त संबोधन के दौरान डिजिटल माध्यम से शुरू किया गया। इस गठबंधन के तहत तीनों राष्ट्र संयुक्त क्षमताओं के विकास करने, प्रौद्योगिकी को साझा करने, सुरक्षा के गहन एकीकरण को बढ़ावा देने और रक्षा संबंधित विज्ञान, प्रौद्योगिकी, औद्योगिक केंद्रों और आपूर्ति शृंखलाओं को मजबूत करने पर सहमत हुए।

Australian Warship Joins U.S. Exercise in South China Sea

ऑकस की पहले बड़ी पहल के तहत अमेरिका और ब्रिटेन की मदद से ऑस्ट्रेलिया परमाणु ऊर्जा से चलने वाली पनडुब्बियों का एक बेड़ा बनाएगा, जिसका मकसद हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता को बढ़ावा देना है। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने इस अवसर पर कहा कि ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका स्वाभाविक सहयोगी हैं। हम भले ही भौगोलिक आधार पर अलग हों, लेकिन हमारे हित और मूल्य साझे हैं। 

US Navy's improved littoral combat warships in Asia to be armed with  radar-evading precision missiles | South China Morning Post

वर्चुअल संबोधन के दौरान अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन और ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन भी मौजूद थे। उन्होंने कहा कि नई साझेदारी का मकसद मिलकर काम करना और हिंद-प्रशांत की सुरक्षा एवं स्थिरता को संरक्षित रखना है। मॉरिसन ने कहा कि अगले 18 महीनों में तीनों देश सर्वश्रेष्ठ मार्ग तय करने के लिए मिलकर काम करेंगे। बाइडन ने व्हाइट हाउस से कहा कि तीनों देश 20वीं सदी की तरह 21वीं सदी के खतरों से निपटने की अपनी साझा क्षमता को बढ़ाएंगे। उन्होंने कहा, हमारे राष्ट्र और हमारे बहादुर बल 100 से अधिक वर्षों से कंधे से कंधा मिलाकर खड़े रहे हैं।

Navy Recognition

तीनों नेताओं की ओर से जारी संयुक्त बयान में कहा गया, दशकों पुराने हमारे गहरे रक्षा संबंधों को पहचानते हुए, हम अपनी संयुक्त क्षमताओं और अंतर-संचालन को बढ़ाने के लिए ऑकस के तहत त्रिपक्षीय सहयोग शुरू करते हैं। ये प्रारंभिक प्रयास साइबर क्षमताओं, कृत्रिम मेधा, क्वांटम प्रौद्योगिकियों और समुद्र के भीतर अतिरिक्त क्षमताओं पर केंद्रित होंगे।

ड्रैगन ने जताया ऐतराज

वहीं, इस मसले पर चीन ने कड़ी आपत्ति जताई है। चीन ने कहा है कि वह इस समझौते पर करीबी नजर रखेगा, जो क्षेत्रीय स्थिरता को काफी कमजोर कर देगा और हथियारों की होड़ बढ़ाएगा तथा परमाणु अप्रसार की अंतरराष्ट्रीय कोशिशों को नुकसान पहुंचाएगा।

चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता झाओ लिजियान की यह टिप्पणी हिंद-प्रशांत के लिए अमेरिका, ब्रिटेन और आस्ट्रेलिया के एक नया त्रिपक्षीय सुरक्षा गठजोड़ की घोषणा करने के बाद आई है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता, साइबर और क्वांटम प्रौद्योगिकी भी इस समझौते के दायरे में आता है जिसे एयूकेयूएस के नाम से जाना जा रहा है।

दिलचस्प है कि 24 सितंबर को वाशिंगटन में अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन की मेजबानी में क्वाड नेताओं की एक बैठक से हफ्ते भर पहले एयूकेयूएस की घोषणा की गई। क्वाड, चार देशों-भारत, आस्ट्रेलिया, जापान और अमेरिका-का एक समूह है।


ऑकस से हिंद-प्रशांत एवं अन्य क्षेत्रों में संबंधों को नया रूप मिलेगा। राष्ट्रपति जो बाइडन अफगानिस्तान से अमेरिकी सेना हटा ली है, जबकि चीन के साथ तनाव बढ़ा है। प्रशांत क्षेत्र में अमेरिका एवं अन्य का दक्षिण चीन सागर में चीन की आक्रामक कार्रवाई और जापान, ताईवान तथा ऑस्ट्रेलिया का विरोध किए जाने को लेकर चिंता है। समझौते की घोषणा करते हुए तीनों नेताओं ने चीन का जिक्र नहीं किया, जबकि चीन इस गठबंधन को भड़काने वाला कदम बताता है।

ब्रिटेन ने क्या कहा 

ब्रेग्जिट के तहत यूरोपीय संघ छोड़ने के बाद ब्रिटेन दुनिया में अपनी मौजूदगी को नए सिरे से दर्शाना चाहता है। इसके तहत उसका झुकाव हिंद-प्रशांत की तरफ बढ़ा है। जॉनसन ने कहा कि इससे तीनों देश एक- दूसरे के और नजदीक आएंगे।


ऑस्ट्रेलिया ने क्या कहा

समझौते के तहत ऑस्ट्रेलिया अमेरिकी विशेषज्ञता का इस्तेमाल कर कम से कम आठ परमाणु संपन्न पनडुब्बियां बनाएगा, जबकि फ्रांस के साथ डीजल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बियों के समझौते को रद्द कर देगा। मॉरिसन ने कहा कि उन्होंने जापान और भारत के नेताओं को इस बारे में फोन किया है।

चीन ने क्या कहा

चीन ने कहा कि इस गठबंधन से क्षेत्रीय शांति एवं स्थिरता बुरी तरह प्रभावित होगी और परमाणु हथियारों का प्रसार रोकने के प्रयास बाधित होंगे। अमेरिका और ब्रिटेन का यह अत्यंत गैर जिम्मेदाराना कार्य है कि वे परमाणु तकनीक का निर्यात कर रहे हैं।

फ्रांस ने क्या कहा 

ऑस्ट्रेलिया ने फ्रांस से कहा है कि वह इसके डीसीएनएस के साथ दुनिया के सबसे बड़े, 12 परंपरात पनडुब्बियां बनाने के ठेके को खत्म करेगा। यह ठेका अरबों डॉलर का है। फ्रांस इससे क्षुब्ध है और सभी पक्षों से जवाब मांग रहा है।

न्यूजीलैंड ने क्या कहा

नए गठबंधन से ऑस्ट्रेलिया के पड़ोसी न्यूजीलैंड को बाहर रखा गया है। इसकी लंबे समय से परमाणु मुक्त नीति रही है जिसमें परमाणु संपन्न पोतों के इसके बंदरगाह में प्रवेश पर प्रतिबंध भी शामिल है।


तालिबान के अफगान में लागू हुआ 'काला कानून', मंत्रालय में महिलाओं की नो एंट्री !

अब महिलाओं की एंट्री मंत्रालयों में बंद कर दी गई है। मंत्रालय के एक कर्मचारी ने कहा महिला मामलों के मंत्रालय वाले इमारत में केवल पुरुषों को जाने की इजाजत है।

काबुल: अफगान की तालिबानी हुकूमत ने एक और 'काला कानून' बनाया है। दरअसल, अब महिलाओं की एंट्री मंत्रालयों में बंद कर दी गई है। मंत्रालय के एक कर्मचारी ने कहा महिला मामलों के मंत्रालय वाले इमारत में केवल पुरुषों को जाने की इजाजत है। 


एक समाचार एजेंसी ने मंत्रालय के कर्मचारी के हवाले कहा है कि चार महिलाओं को इमारत में प्रवेश करने की अनुमति नहीं मिली। इसके बाद महिलाओं ने मंत्रालय के सामने ही सरकार के इस कदम का विरोध किया।

बता दें कि 20 साल के बाद तालिबान ने एक बार फिर अफगानिस्तान पर अपना कब्जा जमा लिया है। तालिबान के मौजूदा रवैये को देखते हुए विशेषज्ञों का मानना है कि आतंकवादी समूह के इस शासन के तहत अफगान महिलाओं को अनिश्चित भविष्य का सामना करना पड़ सकता है। 

वैसे भी तालिबान का असली चेहरा अभी तक कोई भूला नहीं है। पहले की सरकार में भी तालिबान अपना असली चेहरा दिखा चुका है। जिसमें महिलाएं बड़े पैमाने पर अपने घरों तक ही सीमित थीं। 

हालांकि, काबुल पर कब्जा जमाने के बाद पहली बार मीडिया से बात करते हुए तालिबान ने आश्वासन दिया था कि समूह इस्लाम के आधार पर महिलाओं को उनके अधिकार प्रदान करेगा। 

तालिबान के प्रवक्ता जबीहुल्ला मुजाहिद ने कहा कि तालिबान इस्लाम के आधार पर महिलाओं को उनके अधिकार प्रदान करने के लिए प्रतिबंद्ध हैं। 

उन्होंने कहा था कि महिलाएं स्वास्थ्य क्षेत्र और अन्य क्षेत्रों में काम कर सकता हैं जहां उनकी जरूरत है। महिलाओं के खिलाफ कोई भेदभाव नहीं होगा लेकिन तालिबान के वादे सिर्फ झूठ साबित हो रहे हैं।


बता दें कि अमेरिका ने अपने सबसे लंबे युद्धों में से एक को समाप्त करते हुए अफगानिस्तान से अपने सैनिकों वापस बुला चुका है। 


तालिबान के लिए ब्लैकमेलिंग पर उतारू हुआ पाक, अलकायदा-IS का दिखा रहा डर

तालिबानी हुकूमत वाले अफगान को लेकर दो-चार देशों को छोड़कर पूरी दुनिया 'वेट एंड वाच' की स्थिति में है लेकिन पाकिस्तान, अफगान को मान्यता दिलाने में अपनी पूरी ताकत झोक दी है और अब ब्लैकमेलिंग पर भी उतारू हो गया है।

इस्लामाबाद/काबुल: पड़सो मुल्क पाकिस्तान अक्सर अपने कारनाओं को लेकर सुर्खियों में रहता है। ताजा मामले में वह दुनिया को आतंक का डर दिखाकर ब्लैकमेल करना चाह रहा है। दरअसल, तालिबानी हुकूमत वाले अफगान को लेकर दो-चार देशों को छोड़कर पूरी दुनिया 'वेट एंड वाच' की स्थिति में है लेकिन पाकिस्तान, अफगान को मान्यता दिलाने में अपनी पूरी ताकत झोक दी है और अब ब्लैकमेलिंग पर भी उतारू हो गया है।

अफगानिस्तान में तालिबान राज को दुनिया से मान्यता दिलाने के लिए पाकिस्तान ने पूरी ताकत झोंक दी है। खुद तालिबान के नेता इतनी जल्दबाजी में नहीं है, जितनी बेचैनी में इमरान खान और उनकी सरकार है। पाकिस्तान के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार मोईद यूसुफ ने कहा है कि दुनिया को 'वेट एंट वॉच' की पॉलिसी नहीं अपनानी चाहिए। उन्होंने इससे अफगानिस्तान की अर्थव्यवस्था ध्वस्त हो जाने और आतंकवाद का खतरा बढ़ जाने का डर दिखाया है।

तालिबान ने मध्य अगस्त में पश्चिमी देशों की समर्थित निर्वाचित सरकार को बाहर करके अफगानिस्तान पर कब्जा जमा लिया। तालिबान की ओर से घोषित अंतरिम सरकार में कई खूंखार आतंकी भी शामिल हैं। भारत सहित दुनिया के अधिकतर देशों ने अफगानिस्तान को 'वेट एंच वॉच' की पॉलिसी अपनाई है और तालिबान को अभी मान्यता देने के मूड में नहीं हैं। सभी बड़े देशों ने कहा है कि वह तालिबान सरकार की मानवाधिकार और महिलाओं के प्रति रवैये को देखने के बाद ही फैसला लेंगे। हालांकि, पाकिस्तान में प्रधानमंत्री, मंत्री और सेना तालिबान के दूत, प्रवक्ता और वकील के रूप में काम कर रहे हैं।      

यूसुफ ने कहा, ''इंतजार करो और देखो (अफगानिस्तान में नए निजाम के प्रति) का मतलब होगा बर्बादी।'' उन्होंने यह भी कहा कि 1990 के दशक में भी यही गलती की गई थी। पश्चिमी नेताओं ने अपनी गलती को माना और इसे ना दोहराने की बात कही थी। यूसुफ ने कहा कि दुनिया के हित में यही है कि वे तालिबान से अपनी चिंता को लेकर खद बात करें, जिसमें आतंकवाद, मानवाधिकार और समावेशी सरकार या अन्य मुद्दे शामिल हैं।   

इन दिनों पाकिस्तान से ज्यादा तालिबान की बात करने वाले यूसुफ ने कहा कि अफगानिस्तान को अकेला छोड़ देने पर यह भी आतंकवादियों के लिए सुरक्षित पनाहगाह बन सकता है। उन्होंने कहा, ''यदि इसका त्याग कर दिया जाता है तो सुरक्षा को लेकर खालीपन पैदा होगा। आप पहले ही जानते हैं कि इस्लामिक स्टेट पहले से वहां मौजूद है, पाकिस्तानी तालिबान भी है। अलकायदा है। हम सुरक्षा खालीपन का जोखिम क्यों ले?'' पाकिस्तान ने इससे पहले इसी महीने खुफिया एजेंसी आईएसआई के चीफ लेफ्टिनेंट जनरल फैज हमीद को काबुल भेजा था।


जिंदा है अफगान के तालिबानी सरकार का डिप्टी पीएम मुल्ला बरादर

एक बार खुद मुल्ला अब्दुल गनी बरादर ने अपना ऑडियो संदेश जारी करके खंडन किया था लेकिन अब तालिबान ने उसका वीडियो शेयर कर उसकी मौत का खंडन किया है।

काबुल: अफगानिस्तान में तालिबान ने सरकार बना ली है लेकिन उसके शीर्ष नेता अभी भी दुनिया का सामने नहीं आ रहे हैं। इस बीच पिछले कुछ दिनों से तालिबानी हुकूमत के डिप्टी पीएम मुल्ला बरादर को लेकर अटकलों का बाजार गर्म था। वह कही दिखाई नहीं दे रहे थे ऐसे में उसकी मौत की बात मीडिया रिपोर्ट्स में आई। जिसके एक बार खुद मुल्ला अब्दुल गनी बरादर ने अपना ऑडियो संदेश जारी करके खंडन किया था लेकिन अब तालिबान ने उसका वीडियो शेयर कर उसकी मौत का खंडन किया है।

अब तालिबान की ओर से बरादर के इंटरव्यू का वीडियो ट्वीट किया गया है और उसकी मौत की खबरों का खंडन किया गया है। ये वीडियो अफगानिस्तान के सांस्कृतिक आयोग के मल्टीमीडिया ब्रांच के चीफ अमदुल्ला मुत्तकी ने ट्वीट किया है। इससे पहले मुल्ला अब्दुल गनी बरादर ने सोमवार को खुद एक ऑडियो संदेश में पुष्टि की कि वह जीवित है और घायल नहीं है। तालिबान के प्रवक्ता का कहना है कि तालिबान के डिप्टी पीएम मुल्ला अब्दुल गनी बरादर की हत्या की अफवाहें सच नहीं हैं। वह पिछले 2 सालों से हैबतुल्लाह अखुंदजादा के बारे में यही बात कह रहा है, लेकिन पिछले 2 सालों में अब तक कोई भी नहीं उसे देखा या अब तक उससे सुना। इससे पहले की रिपोर्ट में कहा गया था कि पाकिस्तान की इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस के प्रमुख फैज हमीद, बरादर और हक्कानी समर्थित समूहों के बीच झड़प के बाद काबुल पहुंचा था, जिसमें बरादर घायल हो गया था।


मुल्ला अब्दुल गनी बरादर के बारे में

मुल्ला अब्दुल गनी बरादर तालिबान का संस्थापक सदस्य है। वह अंतरिम तालिबानी सरकार में उप प्रधानमंत्री भी है। साल 2010 में पाकिस्तान की ISI ने उसे गिरफ्तार किया था। इसके बाद साल 2018 में उसे रिहा कर दिया गया। तालिबान में कई मदरसों का संचालन का जिम्मा उसके पास है। जानकारी के अनुसार, बरादर कतर की राजधानी दोहा में रहता है।


दरअसल, बरादर को कई दिनों तक सार्वजनिक रूप से नहीं देखा गया है और वह तालिबान के उस प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा नहीं था, जो 12 सितंबर को काबुल में कतर के विदेश मंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान अल-थानी से मिला था। कतर में स्थित तालिबान के एक वरिष्ठ सदस्य ने भी विवाद और गरमागरम बहस की रिपोर्ट की पुष्टि की है।


तालिबान का खौफ: 736 अफगानी नागरिकों ने भारत में शरण के लिए करवाया नया रजिस्ट्रेशन

अफगानिस्तान पर तालिबानी हुकूमत काबिज होने के बाद वहां के नागरिक डरे हुए हैं। इस बात का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि ७३६ नए अफगानी नागरिकों ने भारत में शरणार्थी के रूप में नया रजिस्ट्रेशन कराया है।

काबुल: अफगानिस्तान पर तालिबानी हुकूमत काबिज होने के बाद वहां के नागरिक डरे हुए हैं। इस बात का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि  ७३६ नए अफगानी नागरिकों ने भारत में शरणार्थी के रूप में नया रजिस्ट्रेशन कराया है।

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (यूएनएचआरसी) ने कहा है कि 1 अगस्त से 11 सितंबर तक कुल 736 अफगानों ने भारत में शरण के लिए नया रजिस्ट्रेशन करवाया है। इसमें आगे कहा गया है कि भारत में अफगानों के पंजीकरण और सहायता के बढ़ते अनुरोधों को पूरा करने के लिए वह अपनी क्षमता बढ़ा रहा है। संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी ने कहा कि वह वीजा जारी करने और समयसीमा बढ़ाने, सहायता और समाधान सहित अफगान नागरिकों से संबंधित मामलों पर सरकार के साथ लगातार बातचीत कर रही है।

आंकड़ों के अनुसार, भारत में यूएनएचसीआर के लिए 'पर्सन आफ कंसर्न' की कुल संख्या 43,157 है। इनमें 15,559 रिफ्यूजी और शरण मांगने वाले अफगानिस्तान के लोग हैं। इसका मतलब उन लोगों से है, जिन्हें एजेंसी आंतरिक रूप से विस्थापित, शरण मांगने वाला, या बिना देश वाले व्यक्ति मानती है। संयुक्त राष्ट्र निकाय ने एक बयान में कहा कि 1 अगस्त से 11 सितंबर तक यूएनएचसीआर द्वारा नए पंजीकरण के लिए 736 अफगानों का नाम दर्ज किया गया है। जिन लोगों ने यूएनएचसीआर से संपर्क किया है, उनमें अफगान नागरिक हैं जो 2021 में आए है।

यूएनएचसीआर ने आगे कहा कि वह भारत में अफगानों के पंजीकरण और सहायता के बढ़ते अनुरोधों को पूरा करने के लिए अपनी क्षमता बढ़ा रहा है। संयुक्त राष्ट्र निकाय का कहना है कि वह अफगानिस्तान से आए लोगों के लिए अपने मानवीय प्रतिक्रिया कार्यक्रम को बढ़ा रहा है। इन लोगों को भोजन, नकद-आधारित सहायता और मुख्य राहत सामग्री जैसी बुनियादी सहायता प्रदान की जा रही है।

यूएनएचसीआर ने कहा कि उसने एक अफगानिस्तान आपातकालीन प्रकोष्ठ और अफगानों के लिए एक समर्पित सहायता पृष्ठ भी स्थापित किया है जिसमें पंजीकरण और सहायता के बारे में व्यापक जानकारी उपलब्ध है। इसमें कहा गया है, 'अफगान समुदायों के साथ सीधे जुड़ने और चौबीसों घंटे सवालों के जवाब देने के लिए अतिरिक्त 24/7 हेल्पलाइन की स्थापना की गई। इसपर प्रतिदिन 130 से अधिक काल आ रही है। इसमें मुख्य रूप से सहायता और पंजीकरण के बारे में पूछताछ की जा रही है।'

गौरतलब है कि अफगानिस्तान में अब तालिबान की हुकूमत भी हो गई है। उसने 15 अगस्त 2021 को पूरे अफगानिस्तान पर कब्जा कर लिया था हालांकि, पंजशीर घाटी में अभी भी उसे पंजशीर के लड़ाके कड़ी टक्कर दे रहे हैं। यहां उसका कब्जा पूरा तरह नहीं हो पाया है।


अफगान में आंतरिक कलह से जूझ रही तालिबानी सरकार, बरादर ने काबुल छोड़ा

तालिबान सरकार में डिप्टी प्राइम मिनिस्टर बनाए गए मुल्ला अब्दुल गनी बरादर के हक्कानी नेटवर्क से मतभेद के बाद उन्होंने काबुल छोड़ दिया है।

काबुल: बंदूकों के दम पर तालिबान ने अफगान की सत्ता तो हासिल कर ली है लेकिन सत्ता संभालना उसके बस के बात शायद नहीं है। अब तालिबानी गुटों में मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं और आपसी रार भी शुरू हो गई है। ताजा मामले में बरादर के काबुल छोड़ने की खबर है।

मिली जानकारी के मुताबिक, तालिबान सरकार में डिप्टी प्राइम मिनिस्टर बनाए गए मुल्ला अब्दुल गनी बरादर के हक्कानी नेटवर्क से मतभेद के बाद उन्होंने काबुल छोड़ दिया है। पिछले सप्ताह राष्ट्रपति भवन में बरादर और हक्कानी नेटवर्क के नेता खलील उर-रहमान के बीच कहासुनी हो गई। इसके बाद दोनों नेताओं के समर्थक आपस में भिड़ गए। खलील उर-रहमान तालिबान सरकार में शरणार्थी मंत्री हैं।

बीबीसी ने एक शीर्ष तालिबानी नेता के हवाले से बताया है कि काबुल के राष्ट्रपति कार्यालय में अंतरिम कैबिनेट को लेकर दोनों नेताओं के बीच बहस हुई थी। 15 अगस्त को काबुल पर तालिबान के कब्जे के बाद से ही अलग-अलग समूहों के बीच नेतृत्व और सरकार गठन को लेकर संघर्ष रहा है। काफी गतिरोध के बाद अंतरिम सरकार के गठन की घोषणा हो पाई थी।

खबर है कि तालिबान की राजनीतिक ईकाई की ओर से सरकार में हक्कानी नेटवर्क को प्रमुखता दिए जाने का विरोध किया जा रहा है। वहीं हक्कानी नेटवर्क खुद को तालिबान की सबसे फाइटर यूनिट मानता है। बरादर के धड़े का मानना है कि उनकी कूटनीति के कारण तालिबान को अफगानिस्तान में सत्ता मिली है, जबकि हक्कानी नेटवर्क के लोगों को लगता है कि अफगानिस्तान में जीत लड़ाई के दम पर मिली है।

बताते चलें कि दोहा में अमेरिका और तालिबान के बीच हुई कई दौर की वार्ता में अब्दुल गनी बरादर अगुवा के तौर पर थे। ऐसे में अफगानिस्तान से अमेरिकी सैनिकों की वापसी का वह क्रेडिट लेते रहे हैं। वहीं हक्कानी नेटवर्क को तालिबानियों में सबसे खूंखार माना जाता है, जो पाकिस्तान की सेना से करीबी संबंध रखता है। 

वैसे तो तालिबान में कई स्तरों पर मतभेद है लेकिन कंधार प्रांत को लेकर ज्यादा ही मतभेद हैं। कंधार प्रांत से आने वाले तालिबान के नेताओं और उत्तर एवं पूर्वी अफगानिस्तान से आने वाले लोगों के बीच भी मतभेद हैं। कंधार को तालिबान का गढ़ माना जाता रहा है। ऐसे में वहां से ताल्लुक रखने वाले नेता सत्ता में अहम भागीदारी चाहते हैं। बीते कुछ दिनों से बरादर सार्वजनिक तौर पर नहीं दिखे थे। इसके चलते ये अफवाहें भी थीं कि वह गोलीबारी में घायल हो गए हैं या फिर मौत हो गई है। 


काबुल में बरादर की गैर-मौजूदगी की वजह से सोशल मीडिया पर उसकी मौत की खबरें भी चलने लगी है। बीबीसी ने तालिबान सूत्रों के हवाले से कहा है कि बरादर काबुल छोड़ कंधार चले गए हैं। एक प्रवक्ता ने पहले कहा कि बरादर कंधार सुप्रीम नेता से मिलने गए हैं, बाद में बताया गया कि वह थक गए थे और अभी आराम करना चाहते हैं।

इस बीच सोमवार को बरादार के नाम पर एक ऑडियो टेप जारी किया गया, जिसमें वह कह रहे हैं कि मैं यात्राओं की वजह से बाहर हूं और इस वक्त  जहां भी हूं, ठीक हूं। इस ऑडियो टेप को तालिबान की कई आधिकारिक वेबसाइटों पर पोस्ट किया गया है, लेकिन इसकी सत्यता की निष्पक्ष रूप से पुष्टि नहीं हो पाई।


भारतीय मूल के अफगानी व्यवसायी को तालिबानियों ने हथियारों के दम पर किया अगवा !

अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में अफगान मूल के एक भारतीय मूल के अफगानी व्यवसायी को बंदूक की नोक पर उसकी दुकान के पास से अगवा कर लिया गया है।

काबुल: अफगानिस्तान की तालिबानी सरकार बेशक दुनिया के सामने लंबे-चौड़े वादे कर रहा है कि वह शांति चाहता है लेकिन हकीकत कुछ और ही है। तालिबानी लोगों को न सिर्फ परेशान कर रहे हैं बल्कि उनकी जिंदगी बर्बाद करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे। 

ताजा मामले में अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में भारतीय मूल के एक अफगानी व्यवसायी को बंदूक की नोक पर उसकी दुकान के पास से अगवा कर लिया गया है। माना जा रहा है कि तालिबानियों ने ही भारतीय नागरिक को किडनैप किया है। हालांकि, इस घटना को लेकर अब भारत सरकार से संपर्क साधा गया है। 

इंडियन वर्ल्ड फोरम के अध्यक्ष पुनीत सिंह चंडोक ने मंगलवार को बताया कि उन्होंने इस मामले में हस्तक्षेप करने को लेकर भारत सरकार के विदेश मंत्रालय से संपर्क किया है। उन्होंने कहा कि उन्हें अफगान हिंदू-सिख समुदाय द्वारा जानकारी दी गई है कि अफगान मूल के एक भारतीय नागरिक बंसरी लाल अरेन्दे (50) को काबुल स्थित उसकी दुकान के पास से सोमवार को सुबह लगभग आठ बजे अगवा कर लिया गया। 

चंडोक ने बताया कि बंसरी लाल फामार्स्युटिकल उत्पादों के व्यवसायी हैं और इस घटना के समय वह अपने कर्मचारियों के साथ अपनी दुकान पर सामान्य दिनचर्या में लिप्त थे। उन्होंने बताया कि बंसरी लाल को उसके कर्मचारियों के साथ अगवा किया गया था, लेकिन उसके कर्मचारी किसी तरह भागने में सफल रहे, हालांकि अपहरणकतार्ओं ने उन्हें बेरहमी से पीटा है। बंसरी लाल का परिवार दिल्ली में रहता है। 

चंडोक ने कहा कि स्थानीय समुदाय संबंधित अधिकारियों के साथ सम्पर्क में है और स्थानीय जांच एजेंसियों ने इस सिलसिले में मामला दर्ज कर लिया है। उन्होंने कहा कि उनके दोस्तों के अनुसार, बंसरी लाल का पता लगाने के लिए दिन में तलाशी ली गई। चंडोक ने कहा कि उन्होंने मामले के संबंध में भारत सरकार के विदेश मंत्रालय को सूचित कर दिया गया है और इस संबंध में तत्काल हस्तक्षेप और सहायता का अनुरोध किया गया है।


अफगानिस्तान में तालिबानी हुकुमत से बुलंदी पर ISI के हौसले, 100 से ज्यादा बार कश्मीर में घुसपैठ की आतंकियों ने की कोशिश

अफगानिस्तान में तालिबान की सरकार बनने के बाद अब तक 105 बार आतंकियों ने कश्मीर के रास्ते भारत में घुसपैठ करने की कोशिश की जिसमें वह 6 बार सफल हुए हैं। आतंकियों को घुसपैठ कराने आईएसआई और पाकिस्तानी आर्मी भरपूर सहयोग दे रही है।

नई दिल्ली: अफगानिस्तान में तालिबान की सरकार बनने से पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान के हौसले बुलंद हो गए हैं। खासकर उसकी खुफिया एजेंसी आईएसआई की। 

इस का अन्दाजा आप इस बात से लगा सकते  हैं कि अफगानिस्तान में तालिबान की सरकार बनने के बाद अब तक 105 बार आतंकियों ने कश्मीर के रास्ते भारत में घुसपैठ करने की कोशिश की जिसमें वह 6 बार सफल हुए हैं। आतंकियों को घुसपैठ कराने आईएसआई और पाकिस्तानी आर्मी भरपूर सहयोग दे रही है।

सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक आईएसआई ने पाकिस्तानी आर्मी की मदद से पाक अधिकृत कश्मीर (POK) और इंटरनेशनल बॉर्डर से आतंकी घुसपैठ के लिए जून से से लेकर अगस्त तक 105 बार कोशिश की।

भारतीय सुरक्षाबलों ने घुसपैठ की अधिकतर कोशिशें नाकाम कर दीं लेकिन करीब छह जगह आतंकी घुसपैठ करने में सफल भी रहे हैं। यही नहीं, सुरक्षा बलों को खुफिया एजेंसियों से ये अलर्ट भी मिला है कि आतंकवादी संगठन आईएस केपी के प्रशिक्षित आतंकवादी भारत में धमाके कर सकते हैं।

सूत्रों के मुताबिक अफगान पाकिस्तान बॉर्डर स्पिन बोल्डक के नजदीक मौजूद आतंकी संगठन भारत स्थित आतंकियों से संपर्क साधने में जुटे हैं। इसमें वे सोशल मीडिया का सहारा लेकर उन्हें भड़का रहे हैं।

भारत में मौजूद आतंकियों को आईईडी बनाने और छोटे हथियार खरीदने के लिए फंड पहुंचाने का आश्वासन दिया जा रहा है। खुफिया रिपोर्ट के मुताबिक आईएस KP के निशाने पर राइट विंग के नेता, मंदिर, भीड़भाड़ वाली जगह और विदेशी नागरिक हैं।

एक अधिकारी ने नाम सार्वजनिक नही करने की शर्त पर बताया कि पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी हर एक एंगल से तालिबान की ताकत को कश्मीर के लिए भुनाना चाहती है। सूत्रों की मानें तो हाल ही में कुछ वीडियो कश्मीर में इंटरसेप्ट भी किए गए हैं जिनसे ये पता चला है कि आईएसआई की सोशल मीडिया विंग कश्मीर में अफगानिस्तान के वीडियो दिखाकर लोगों को भड़काने की साजिश रच रही है। 

हालांकि, कश्मीर के युवाओं पर इस तरह के वीडियो का कोई प्रभाव नहीं पड़ रहा है फिर भी पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई अपनी नापाक हरकतों से बाज नहीं आ रहा है।


तालिबान के अफगान में नया कानून, अवैध संबंध बनाने वालों को मारे जाएंगे पत्थर, चोरी करने पर काट दिए जाएंगे हाथ !

अफगानिस्तान में सरकार बनाने के बाद तालिबान अब नया कानून भी बना रहा है। नए कानून के तहत अवैध संबंध बनाने वाले को पत्थरों से मारा जाएगा और चोरी करने वाले शख्स के हाथ काट दिए जाएंगे।

काबुल: अफगानिस्तान में सरकार बनाने के बाद तालिबान अब नया कानून भी बना रहा है। नए कानून के तहत अवैध संबंध बनाने वाले को पत्थरों से मारा जाएगा और चोरी करने वाले शख्स के हाथ काट दिए जाएंगे।


अफ़ग़ानिस्तान अब पूरी तरह से तालिबान के कब्जे में है। वहां की अंतरिम सरकार अब अपने एजेंडे के आधार पर शासन कर रही है। नए शासन में 'सद्गुण के प्रचार और बुराई की रोकथाम' मंत्रालय भी है। 

इस मंत्रालय का नाम सुनने में भले ही सुंदर लग रहा है हो लेकिन इसके फरमान खुंखारी मानसिकता की पुष्टि कर रहे हैं। तालिबान शरिया कानून के कठोर संस्करण को लागू करने के लिए कुख्यात है। इसमें पुरुष साथी के बिना महिलाओं के घर के बाहर नौकरी पर जाना तक प्रतिबंध है। 

तालिबान के एक अधिकारी ने न्यूयॉर्क पोस्ट से कहा कि उनका मुख्य उद्देश्य इस्लाम की सेवा करना है, जिसके लिए एक अच्छाई और सद्गुण मंत्रालय की जरूरत है। अफगानिस्तान के केंद्रीय क्षेत्र के लिए जिम्मेदार होने का दावा करने वाले मोहम्मद यूसुफ ने अमेरिकी दैनिक टैब्लॉइड को बताया कि तालिबान शासन उल्लंघन करने वालों को "इस्लामी नियमों" के अनुसार दंडित करेगा।


यूसुफ ने समझाया कि एक हत्यारा जिसने जानबूझकर अपराध किया है, उसे मार दिया जाएगा। अगर जानबूझकर नहीं किया है को तो एक निश्चित राशि का भुगतान करने जैसी सजा हो सकती है।

न्यूयॉर्क पोस्ट के मुताबिक, तालिबानी अधिकारी ने कहा कि चोरों के हाथ काट दिए जाएंगे, जबकि "अवैध संभोग" में शामिल लोगों को पथराव किया जाएगा।यूसुफ ने दावा किया कि "अवैध संभोग" में शामिल पुरुषों और महिलाओं दोनों को एक ही कठोर तरीके से सजा दिया जाएगा।

न्यूयॉर्क पोस्ट ने यूसुफ के हवाले से कहा, “अगर कहानी में थोड़ा सा भी अंतर है, तो कोई सजा नहीं होगी। लेकिन अगर वे सभी एक ही बात, एक ही तरह और एक ही समय कह रहे हैं, तो सजा होगी। सुप्रीम कोर्ट इन सभी मुद्दों की अनदेखी करेगा। अगर वे दोषी पाए जाते हैं, तो हम दंडित करेंगे।” उसने कहा, "हम सिर्फ इस्लामी नियमों और विनियमों के साथ एक शांतिपूर्ण देश चाहते हैं। शांति और इस्लामी शासन ही हमारी एकमात्र इच्छा है।"


बता दें कि 1996-2001 के अपने पहले के शासन के दौरान, इस मंत्रालय ने अफगानिस्तान की सड़कों पर नैतिक पुलिस स्थापित की और अपराध के आधार पर उल्लंघन करने वालों को कोड़े मारे गए, पत्थर मारे गए और यहां तक ​​कि सार्वजनिक रूप से मार डाला गया।


Video: तालिबानियों ने अफगान के एक पूर्व नेता और नौकरशाह को गाड़ी की डिग्गी में भरकर किया अगवा

तालिबानियों द्वारा एक कार की डिग्गी में एक पूर्व नेता और एक नौकरशाह को कार की डिग्गी में भरकर अगवा कर लिया गया है। तालिबानियों की इस कृत का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

काबुल: अफगानिस्तान में बंदूकों के दम पर सत्ता हासिल करने के बाद तालिबान अपनी असली हरकतों पर उतारू हो गया है। पहले तो उसने महिलाओं की आजादी छीनने का काम शुरू किया, फिर मीडिया की आजादी छीना और अब जन प्रतिनिधियों को अगवा तक कर ले रहा है। ताजा मामले में तालिबानियों द्वारा एक कार की डिग्गी में एक पूर्व नेता और एक नौकरशाह को कार की डिग्गी में भरकर अगवा कर लिया गया है। तालिबानियों की इस कृत का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

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तालिबान के 'आका' पाकिस्तान की US ने लगाई क्लास, मुश्किल समय में अफगान में भारत की मौजदूगी को सराहा

एक बार फिस से पाकिस्तान को यूएस ने लताड़ लगाई है साथ ही अफगानिस्तान में तालिबान के कब्जे के बाद से खुशी मनाते पाकिस्तान को अब अमेरिका ने चेतावनी दे दी है। इतना ही नहीं मुश्किल वक्त में अफगानिस्तान में भारत की मौजूदगी की सराहना भी की है।

नई दिल्ली: एक बार फिस से पाकिस्तान को यूएस ने लताड़ लगाई है साथ ही अफगानिस्तान में तालिबान के कब्जे के बाद से खुशी मनाते पाकिस्तान को अब अमेरिका ने चेतावनी दे दी है। इतना ही नहीं मुश्किल वक्त में अफगानिस्तान में भारत की मौजूदगी की सराहना भी की है। 

अमेरिका ने कहा है कि पाकिस्तान से उसके रिश्ते इस बात पर निर्भर करेंगे कि तालिबान के साथ उसके संबंध कैसे होने वाले हैं। यह बात दुनिया से छुपी नहीं है कि पाकिस्तान तालिबान का कितना बड़ा समर्थक है और उसने आतंकवादी समूह का कितना साथ दिया है। अब अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकेन ने कहा है कि अमेरिका आने वाले हफ्तों में पाकिस्तान के साथ अपने संबंधों पर विचार करेगा और सोचेगा कि अफगानिस्तान के भविष्य में अमेरिका पाकिस्तान को क्या भूमिका निभाते देखना चाहेगा।

ब्लिंकेन ने इस दौरान अफगानिस्तान में भारत की मौजूदगी को भी सराहा। उन्होंने कहा कि भारत की मौजूदगी से अफगान में पाकिस्तान की नुकसानदेह गतिविधियों पर असर जरूर हुआ है।


अफगानिस्तान से अमेरिकी सेनाओं के हट जाने के बाद हुई पहली सार्वजनिक सभा में ब्लिंकेन ने कहा कि अफगानिस्तान से पाकिस्तान के ऐसे कई फायदे हैं जो हमारे लिए दिक्कत पैदा कर सकते हैं। ब्लिंकेन ने कहा, "पाकिस्तान अफगानिस्तान के भविष्य को लेकर लगातार दो नाव की सवारी कर रहा है। वह तालिबानियों को पाल रहा है और दूसरी तरह आतंकवाद विरोधी कई गतिविधियों में हमारा भी सहयोग कर रहा है।" 

ब्लिंकेन की इस बातचीत के दौरान वहां मौजूद सांसदों ने सवाल किया कि क्या अमेरिका को अब पाकिस्तान के साथ अपने संबंधों को लेकर फिर से विचार करना चाहिए? तो ब्लिंकेन ने कहा कि प्रशासन जल्द ही ऐसा करेगा। उन्होंने कहा, "आने वाले हफ्तों में हम कई चीजों पर विचार करेंगे- पाकिस्तान ने पिछले 20 साल में जो भूमिका निभाई है उस पर और आने वाले हफ्तों में हम उसे जो भूमिका निभाते हुए देखना चाहते हैं उस पर भी। साथ ही इस बात भी विचार करेंगे कि ऐसा करने के लिए क्या कुछ करने की जरूरत पड़ेगी।"

पाकिस्तान के तालिबान के साथ गहरे संबंध रहे हैं। एक तरफ जहां अमेरिकी समर्थित सरकार तालिबान के साथ युद्ध लड़ रही थी वहीं पाकिस्तान आतंकी समूह का समर्थन करता रहा था - हालांकि इस्लामाबाद ने इन आरोपों से इनकार किया था। इसके अलावा कतर के बाद पाकिस्तान दूसरा ऐसा देशा है जिसका तालिबान पर सबसे अधिक प्रभाव है और 2001 में अमेरिका के आक्रमण के बाद कई बड़े तालिबानी नेता पाकिस्तान में ही पनाह लेने के लिए भाग गए थे। 

अफगानिस्तान से सेना की वापसी के मुद्दे से निपटने के लिए राष्ट्रपति जो बाइडन के प्रशासन द्वारा उठाए गए कदमों का विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने सोमवार को पुरजोर तरीके से बचाव किया। राष्ट्रपति जो बाइडन ने इस साल अप्रैल में अमेरिकी सैनिकों की अफगानिस्तान से वापसी का ऐलान किया था। अमेरिकी सैनिकों की वापसी के बीच तालिबान ने बेहद कम दिनों में अफगानिस्तान पर नियंत्रण हासिल कर लिया, जिसे लेकर अमेरिकी सांसदों ने बाइडन प्रशासन की आलोचना की थी।

अफगानिस्तान मामले पर संसद की समिति के समक्ष हुई सुनवाई के दौरान सोमवार को ब्लिंकन ने कहा, '' इस बात का कोई सबूत नहीं है कि अधिक समय तक ठहरने से अफगान सुरक्षा बल या अफगान सरकार को और अधिक मजबूती मिलती या वे आत्मनिर्भर हो जाते। यदि समर्थन, उपकरण और प्रशिक्षण में 20 साल और सैकड़ों अरब डॉलर पर्याप्त नहीं थे, तो एक और साल, या पांच या दस साल से क्या फर्क पड़ेगा?''

बता दें कि अफगानिस्तान के घटनाक्रम के संबंध में अमेरिकी संसद के दोनों सदनों में सुनवाई होनी है। ब्लिंकन सोमवार को संसद की विदेश मामलों की समिति के समक्ष पेश हुए और उन्हें सीनेट की विदेश संबंध समिति के समक्ष मंगलवार को पेश होना होगा।


भुखमरी की दहलीज पर तालिबान का अफगान, मान्यता नहीं मानवता के नाते अमेरिका भेजेगा 4 हजार करोड़ रुपये की मदद

एक आंकड़े के मुताबिक, अफगानिस्तान में सिर्फ 15 दिन का खाद्य सामग्री बची हुई है। ऐसे में वह अब दुनिया से खाने-पीने की चीजों के लिए गुहार लगा रहा है।

काबुल: बंदूकों के दम पर तालिबान ने अफगानिस्तान पर बेशक कब्जा कर लिया हो लेकिन हुकूमत चलाना उसके बसकी बात नहीं रही। आज आलम यह हो चुका है कि तालिबान का अफगान भुखमरी की कगार पर है। एक आंकड़े के मुताबिक, अफगानिस्तान में सिर्फ 15 दिन का खाद्य सामग्री बची हुई है। ऐसे में वह अब दुनिया से खाने-पीने की चीजों के लिए गुहार लगा रहा है।

खबर है कि अमेरिका मानवता के नाते उसे लगभग 4 हजार करोड़ रुपए की वित्तीय मदद देने का एलान किया है। यह मदद अमेरिका द्वारा मानवता के नाते की जा रही है। हालांकि, अमेरिका ने अभी भी तालिबान को मान्यता ना देने की बात कही है। अमेरिका ने सोमवार को ऐलान किया है कि वह अफगानिस्तान को 6.4 करोड़ डॉलर यानी करीब 470 करोड़ रुपये की मानवीय सहायता भेजेगा। इससे पहले संयुक्त राष्ट्र ने भी अफगानिस्तान को भुखमरी और जन स्वास्थ्य संकट से बचाने के लिए 60 करोड़ डॉलर यानी करीब साढ़े 4 हजार करोड़ रुपये की मदद का ऐलान किया था। 


'द हिल' की खबर के मुताबिक, यह सहायता राशि यूएस एजेंसी फॉर इंटरनेशनल डेवलपमेंट और यूएस विदेश मंत्रालय की ओर से दी जाएगी, जिसे संयुक्त राष्ट्र और अन्य स्वतंत्र संस्थाओं के जरिए अफगानिस्तान तक पहुंचाया जाएगा। 

इस धनराशि को आवंटित करने के बाद इस साल अफगानिस्तान को दी जाने वाली अमेरिकी मानवीय सहायता 33 करोड़ डॉलर तक पहुंच गई है। अमेरिका अब अफगानिस्तान को डोनेशन देने वाला सबसे बड़ा सहयोगी बन गया है। 


अफगानिस्तान: हर कदम पर तालिबान का साथ दे रहा पाक, ISI चीफ खुद बैठा है पंजशीर घाटी में

अफगानिस्तान में तालिबान की सरकार बन गई है लेकिन पंजशीर अभी भी उसके लिए बहुत दूर है। इस बीच खबर है पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई का चीफ खुद पंजशीर घाटी में डेरा डाले हुआ है और तालिबान की मदद में जुटा हुआ है।

काबुल/इस्लामाबाद: अफगानिस्तान में तालिबान की सरकार बन गई है लेकिन पंजशीर अभी भी उसके लिए बहुत दूर है। इस बीच खबर है पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई का चीफ खुद पंजशीर घाटी में डेरा डाले हुआ है और तालिबान की मदद में जुटा हुआ है।

ईरान के वरिष्ठ सांसद एवं अफगानिस्तान में देश के पूर्व राजदूत फदा हुसैन मालेकी ने कहा कि पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी इंटर-सर्विसिस इंटेलिजेंस (आईएसआई) के प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल फैज हमीद वर्तमान में पंजशीर प्रांत में हैं। वह काबुल में तालिबान कैबिनेट के गठन में भी शामिल हैं।


मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक मालेकी ने सुझाव दिया कि ईरान के विदेश मंत्रालय को पाकिस्तान के साथ बातचीत करनी चाहिए और अफगान समस्या के समाधान के लिए रूस, चीन, ईरान और पाकिस्तान के बीच बैठक होनी चाहिए। वह ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति समिति के भी सदस्य हैं। 

मालेकी ने यह भी कहा कि पाकिस्तान आईएसआई प्रमुख पंजशीर में मौजूद हैं और तालिबान कैबिनेट के गठन में शामिल हैं। उन्होंने कहा कि हमें पाकिस्तान के हस्तक्षेप करने और अफगानिस्तान में अमेरिकी स्थिति बनाए रखने की अनुमति नहीं देनी चाहिए।


उन्होंने कहा कि ईरान सभी जातीय और धार्मिक समूहों की भागीदारी के साथ अफगानिस्तान में एक समावेशी सरकार की मांग कर रहा है। मालेकी ने कहा कि विदेश मंत्री का मानना है कि अफगानिस्तान में एक समावेशी सरकार का गठन किया जाना चाहिए ताकि सभी जातीय समूह सरकार में अपनी भूमिका निभा सकें।

उल्लेखनीय है कि काबुल में तालिबान ने कब्जे के बाद अफगानिस्तान में अपनी कार्यवाहक सरकार बनाई है। गौरतलब है कि पाकिस्तान के आईएसआई प्रमुख हमीद जाहिर तौर पर तालिबान नेतृत्व से मिलने के लिए पिछले सप्ताह काबुल गए थे। उत्तर पूर्व अफगानिस्तान के पंजशीर में प्रतिरोध बलों ने हालांकि आरोप लगाया कि वह अहमद मसूद के नेतृत्व में प्रतिरोध बलों पर तालिबान की जीत की निगरानी के लिए काबुल में थे।


अफगानिस्तान: ऑडियो टेप जारी कर बोला बरादर-'जिंदा हूं मैं'

बरादर ने सोमवार को एक ऑडियो बयान जारी कर कहा कि सोशल मीडिया पर उसके निधन की खबर झूठी है। वह जिंदा है और ठीक है।

काबुल: तालिबान के अफगान के उप प्रधानमंत्री अब्दुल गनी बरादर की मौत की खबरें सोशल मीडिया पर फैली। नतीजन खुद बरादर ने ही आकर अपने जिंदा होने की जानकारी दी। सोमवार को एक ऑडियो बयान जारी कर कहा कि सोशल मीडिया पर उसके निधन की खबर झूठी है। वह जिंदा है और ठीक है।

बरादर ने क्लिप में कहा, "मीडिया में मेरी मौत की खबर थी। पिछली कुछ रातों से मैं यात्रा कर रहा हूं। मैं इस समय जहां भी हूं, मेरे सभी भाई और दोस्त ठीक हैं।" उसने आगे कहा, "मीडिया हमेशा नकली प्रचार प्रकाशित करता है। इसलिए, उन सभी झूठों को बहादुरी से खारिज करें। मैं आपको 100 प्रतिशत पुष्टि करता हूं कि कोई समस्या नहीं है।"

अब्दुल गनी बरादर, जिसे अफगानिस्तान की नई तालिबान सरकार में पिछले हफ्ते नंबर दो का ओहदा दिया गया था, ने तालिबान द्वारा पोस्ट किए गए एक ऑडियो संदेश में मौत की अफवाहों के लिए "फर्जी प्रचार" को जिम्मेदार ठहराया है। 


कतर कार्यालय के तालिबान प्रवक्ता सुहैल शाहीन ने भी तालिबान के सह-संस्थापक की मौत की खबरों का खंडन करते हुए ट्वीट किया है। आपको बता दें कि ऑडियो संदेश को प्रमाणित करना संभव नहीं था, लेकिन इसे तालिबान की आधिकारिक साइटों पर पोस्ट किया गया है। इनमें नई सरकार के राजनीतिक कार्यालय के प्रवक्ता भी शामिल हैं।

बताते चलें कि इससे पहले तालिबान के सर्वोच्च नेता, हिबतुल्लाह अखुंदज़ादा की भी कई वर्षों तक मृत्यु होने की अफवाह थी, जब समूह के प्रवक्ता ने कहा कि वह सत्ता संभालने के दो सप्ताह बाद "कंधार में मौजूद" थे।

वहीं, बरादर की मौत की खाबरें सोशल मीडिया में खूब वायरल हो रही है। कहा जा रहा है कि राष्ट्रपति महल में प्रतिद्वंद्वी तालिबान गुटों के साथ हुई गोलीबारी में वह गंभीर रूप से घायल हो गया था।


अफगान की नई सरकार पर भड़का तजाकिस्तान, पाकिस्तान को लपेटा, तालिबान को दी ये चेतावनी

अफगानिस्तान की नई तालिबानी सरकार में अल्पसंख्यको को ना शामिल किये जाने से तजाकिस्तान भड़क उठा है। उसने तालिबान को चेतावनी देते हुए पाकिस्तान पर भी गुस्सा जाहिर किया है।

नई दिल्ली: अफगानिस्तान की नई तालिबानी सरकार में अल्पसंख्यको को ना शामिल किये जाने से तजाकिस्तान भड़क उठा है। उसने तालिबान को चेतावनी देते हुए पाकिस्तान पर भी गुस्सा जाहिर किया है।


अफगानिस्तान में तालिबान राज में जिस तरह से अल्पसंख्यक समुदायों को नजरअंदाज किया गया है, उससे पड़ोसी तजाकिस्तान (ताजिकिस्तान) बहुत नाराज हो गया है। मध्य एशिया में भारत का रणनीतिक सहयोगी और अफगानिस्तान के पड़ोसियों में से एक ताजिकिस्तान ने काबुल में तालिबान सरकार के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। इसकी वजह है कि तालिबान की सरकार में केवल पश्तून समुदाय की भागीदारी। 

तजाकिस्तान की आपत्ति इस बात को लेकर है कि यह तो केवल पश्तुनों की सरकार है, इसमें न तो ताजिक समुदाय को उचित भागीदारी मिली है और न तो हजारा को। तजाकिस्तान के राष्ट्रपति इमोमाली रहमोन ने सख्त लहजे में तालिबान से सरकार में सभी अल्पसंख्यकों की भागीदारी के साथ अफगान में एक समावेशी सरकार लाने को कहा है। साथ ही नाम लिए बगैर पाकिस्तान को भी लपेटा है।

पिछले दो दशक से तजाकिस्तान पर राज कर रहे रहमोन ने का मानना है कि अफगानिस्तान की राजनीतिक समस्याओं को दूर करने के लिए सभी अल्पसंख्यकों की भागीदारी के साथ एक समावेशी सरकार बनाना आवश्यक है। 

दरअसल, तालिबान ने अपनी अंतरिम सरकार में अल्पसंख्यक समुदायों को बहुत ही कम जगह दी है। अफगान में नवनियुक्त 33 मंत्रियों में से 90 फीसदी मंत्री केवल पश्तून समुदाय के हैं, जबकि हजारा समुदाय का एक भी मंत्री नहीं है। ताजिक और उज्बेक लोगों को भी पर्याप्त प्रतिनिधत्व नहीं मिला है। इसी वजह से तजाकिस्तान तालिबान पर गुस्सा है। 

ताजिक राष्‍ट्रपति इमोमली रहमोन ने अपने अधिकारियों से देश (तजाकिस्तान) में कट्टरपंथियों के उभार और उनकी विचारधारा को फैलाने वालों के खिलाफ सख्‍त कार्रवाई के लिए कहा है। इतना ही नहीं, ताजिक राष्ट्रपति ने नाम लिए बगैर पाकिस्तान पर ही हमला बोला है और कहा है कि पंजशीर घाटी में तालिबान की कब्जा करने की कोशिश को तीसरा देश (पाकिस्तान) मदद कर रहा है।

 खबरों की मानें तो पंजशीर में पाकिस्तान के स्पेशल फोर्सेस तालिबान की राह आसान कर रहे हैं। इतना ही हीं, तालिबान की ड्रोन से भी पाकिस्तान ने मदद की है। 


अफगान में ही हैं अहमद मसूद, जानिए- क्यों नहीं आ रहे सामने

एक रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि अहमद मसूद अभी भी अफगानिस्तान में हैं और वह तालिबान से निबटने के लिए काम कर रहे हैं।

काबुल: अफगानिस्तान में तालिबान ने बेशक सरकार बना ली हो लेकिन पंजशीर अभी भी उसके लिए बहुत दूर है। पंजशीर के लड़ाके तगड़ी चुनौती दे रहे हैं। इस बीच खबर आई थी कि अहमद मसूद अफगानिस्तान छोड़कर किसी दूसरे देश भाग चुके हैं लेकिन यह खबर सही नहीं है। दरअसल, एक रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि अहमद मसूद अभी भी अफगानिस्तान में हैं और वह तालिबान से निबटने के लिए काम कर रहे हैं।


ईरानी की न्यूज एजेंसी 'फार्स' की रिपोर्ट के मुताबिक, पूर्व अफगान गुरिल्ला कमांडर अहमद शाह मसूद के बेटे अहमद मसूद के तुर्की या किसी और देश भागने की अफवाहें झूठी हैं। मसूद अफगानिस्तान में ही किसी सुरक्षित ठिकाने पर मौजूद हैं।

तालिबान ने बीते हफ्ते ही यह ऐलान किया था कि अब तक अजेय रहे पंजशीर प्रांत पर भी उसने कब्जा कर लिया है। हालांकि, तालिबान से लोहा ले रही विद्रोही सेना नेशनल रेजिस्टेंस फ्रंट यानी एनआरएफ ने इस दावे को खारिज किया था। एनआरएफ का नेतृत्व अहमद मसूद और पूर्व अफगान उपराष्ट्रपति अमरुल्लाह सालेह कर रहे हैं। सालेह ने खुद को अफगानिस्तान का केयरटेकर राष्ट्रपति भी घोषित किया था। 

बीते महीने 14 अगस्त को राजधानी काबुल पर कब्जे के बाद ही तालिबान ने पूरे अफगानिस्तान पर नियंत्रण का ऐलान कर दिया था। हालांकि, पंजशीर घाटी पर अब तक उसका नियंत्रण नहीं हो सका था। वहीं, एनआरएफ का कहना था कि अभी भी वह पंजशीर के अहम इलाकों में मौजूद है और उनकी जंग जारी रहेगी। 

ताजिकिस्तान में अपदस्थ अफगान सरकार के राजदूत ने भी यह कहा था कि अहमद मसूद और अमरुल्लाह सालेह अफगानिस्तान से भागे नहीं है और उनकी सेना अभी भी तालिबान से लोहा ले रही है। राजदूत जाहिर अगबर ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा था कि वह सालेह से लगातार संपर्क में हैं और सुरक्षा कारणों की वजह से वे और रेजिस्टेंस लीडर्स किसी तरह के संवाद से दूर हैं। 


इस बीच अमरुल्लाह सालेह के भतीजे ने शनिवार को बताया कि तालिबान ने सालेह के भाई और उनके ड्राइवर को पंजशीर घाटी में मार गिराया है। उन्होंने बताया कि रोहुल्लाह सालेह अजीजी अपनी गाड़ी से कहीं जा रहे थे और तभी तालिबान लड़ाकों ने एक चेकपॉइंट पर उनकी गाड़ी रोकी और गोलियां बरसा दीं।


खुलासा: पाक ने की अफगान के खिलाफ तालिबान की मदद, मुल्ला बरादर के पासपोर्ट से खुली पोल

अब्दुल गनी बरादर और मुल्ला बरादर के पासपोर्ट और पहचान पत्र से यह बात साफ जाहिर हो गया है कि अफगान के खिलाफ पाकिस्तान ने तालिबान की जमकर मदद की थी।

काबुल/इस्लामाबाद: अफगानिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति अशरफ गनी के वो दावे सही साबित हो रहे हैं जिसमें वह पाकिस्तान पर तालिबान की मदद का आरोप लगा रहे थे। दरअसल, अब्दुल गनी बरादर और मुल्ला बरादर के पासपोर्ट और पहचान पत्र से यह बात साफ जाहिर हो गया है कि अफगान के खिलाफ पाकिस्तान ने तालिबान की जमकर मदद की थी।

बता दें कि अफगान में नवगठित तालिबान सरकार में उपप्रधानमंत्री मुल्ला अब्दुल गनी बरादर का पाकिस्तानी पासपोर्ट और पहचान-पत्र सामने आया है। दोनों दस्तावेजों में उसका नाम मोहम्मद आरिफ आघा के रूप में दर्ज किया गया है। इससे पाक खुफिया एजेंसी आईएसआई के काबुल पर कब्जे के अभियान में तालिबान को मदद देने की खबरों को एक बार फिर बल मिला है। इस तरह से यह साबित होता है कि तालिबान की अफगान की सत्ता में वापसी में पाकिस्तान ने जमकर मदद की है।

मुल्ला बरादर का पाकिस्तानी पहचान पत्र (संख्या : 42201-5292460-5) दस जुलाई 2014 को जारी किया गया था। इसमें उसका जन्म साल 1963 का बताया गया है। वहीं, पिता के नाम के कॉलम में सय्यद एम नजीर आघा लिखा है। यह पहचान-पत्र ताउम्र वैध है। पाकिस्तान के महापंजीयक ने बकायदा इस पर दस्तखत कर रखे हैं।

वहीं, मुल्ला बरादर के पाकिस्तानी पासपोर्ट की बात करें तो इसका नंबर ‘जीएफ680121’ है। यह भी दस जुलाई 2014 को जारी किया गया था।

पाकिस्तान पर लंबे अरसे से तालिबान को अफगान सुरक्षाबलों के खिलाफ अभियान में सैन्य, वित्तीय और खुफिया मदद मुहैया कराने के आरोप लगते आ रहे हैं। हालांकि, इस्लामाबाद ने सभी आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए इन्हें सिरे से खारिज किया है।

‘काबुल वॉचर्स’ का रिपोर्ट के मुताबिक, मुल्ला बरादर ने मुल्ला उमर के साथ मिलकर तालिबान की स्थापना की थी। वह पाकिस्तान के क्वेटा में रहता था और तालिबान की शूरा काउंसिल का सदस्य था। उसे मोहम्मद आरिफ आघा के नाम से भी जाना जाता था। अमेरिका सहित अन्य पश्चिमी देशों के साथ शांति समझौते के दौरान वह दोहा में शेर मोहम्मद अब्बास स्टेनेकजई के साथ तालिबान के राजनीतिक मिशन की अगुवाई कर रहा था।


अमेरिका 9/11 आतंकी हमले की बरसी आज, अफगान में तालिबान ने टाला शपथ ग्रहण समारोह

काबुल/न्यूयॉर्क: अफगानिस्तान पर हथियारों के दम पर कब्जा जमाने के बाद आज तालिबानी सरकार का शपथग्रहण समारोह होना था और आज ही अमेरिका में हुए 9/11 आतंकी हमले की बरसी भी है। लिहाजा, तालिबान ने अब अपना इरादा बदल लिया है। रिपोर्ट की मानें तो तालिबान ने 9/11 आतंकी हमले की बरसी पर होने वाले अफगानिस्तान सरकार के शपथ-ग्रहण समारोह को रद्द कर दिया है। 


रूस की एक समाचार एजेंसी के मुताबिक, तालिबान ने अफगानिस्तान में अपनी नवगठित अंतरिम सरकार के शपथ-ग्रहण समारोह को सहयोगियों के दबाव के बाद रद्द कर दिया है।  बता दें कि कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा था कि तालिबान की अंतरिम सरकार का शपथ ग्रहण 9/11 की 20वीं बरसी के दिन हो सकता है। 9/11 आतंकी हमला अमेरिका के इतिहास का काला दिन है, जिसमें करीब 3000 से अधिक लोगों की मौतें हो गई थीं।
तालिबान ने सरकार गठन से पहले चीन, तुर्की, पाकिस्तान, ईरान, कतर और भारत जैसे पड़ोसी देशों के साथ ही अमेरिका को भी शपथ ग्रहण में शामिल होने का न्योता दिया है।

तालिबान ने यह कदम ऐसे समय पर उठाया है जब अधिकतर देशों ने कह दिया है कि वे तालिबान को मान्यता देने में जल्दबाजी नहीं करेंगे। दो बार टालने के बाद तालिबान ने बीते मंगलवार को अंतरिम सरकार के गठन का ऐलान किया। हालांकि, रूस ने तालिबान के निमंत्रण को ठुकरा दिया है और कहा है कि वह शपथ-ग्रहण समारोह में शामिल नहीं होगा।

बता दें कि 20 साल पहले 2001 में अलकायदा के आतंकवादियों ने अमेरिका पर अब तक का सबसे भयानक हमला किया था। विमानों को हाईजैक करके आतंकवादियों ने वर्ल्ड ट्रेड सेंडर के ट्विन टावर और पेंटागन मुख्यालय से टकरा दिया था। इन हमलों में 3 हजार से अधिक लोग मारे गए थे। इसका बदला लेने के लिए ही अमेरिका ने अफगानिस्तान में सैनिक अभियान की शुरुआत की थी। इस दौरान तालिबान को सत्ता से हटाया गया तो अलकायदा सहित कई आतंकी ठिकानों पर बमबारी की गई। 

दो दशक में अरबों डॉलर धन और हजारों सैनिकों की कुर्बानी के बावजूद अमेरिका तालिबान की जड़ें नहीं काट पाया। अफगानिस्तान से अमेरिकी सैनिकों की वापसी से पहले ही तालिबान ने काबुल सहित पूरे देश पर कब्जा जमा लिया। अलकायदा और हक्कानी नेटवर्क सहित कई आतंकवादी संगठनों को अफगानिस्तान में एक बार फिर खुला मैदान मिल गया है, जहां से वह अपने नापाक मंसूबों को अंजाम देने की कोशिश कर सकते हैं। 


तालिबान की अगवानी करने वाला रूस उसकी ताजपोशी में नहीं होगा शामिल, नहीं बताया कारण

स ने इस कार्यक्रम में शामिल होने से क्यों मना किया, इस बात की जानकारी अभी नहीं मिल सकी है। वहीं कयासबाजियों का दौर तेज है।

नई दिल्ली: अफगानिस्तान में तालिबान शासन की अगवानी करने वाला रूस अब उसकी ताजपोशी से दूरी बनाकर रखेगा। क्रेमलिन स्थित रूस के राष्ट्रपति कार्यालय ने शुक्रवार को इस बात की जानकारी दी। इससे पहले रूस के ऊपरी सदन के प्रवक्ता ने इस हफ्ते के शुरू में कहा था कि रूस के राजदूत स्तर के अधिकारी तालिबान सरकार के शपथग्रहण समारोह में हिस्सा लेंगे।

एक न्यूज एजेंसी द्वारा जारी की गई रिपोर्ट के मुताबिक, रूस ने इस कार्यक्रम में शामिल होने से क्यों मना किया, इस बात की जानकारी अभी नहीं मिल सकी है। वहीं कयासबाजियों का दौर तेज है। अनुमान लगाया जा रहा है कि तालिबान की अंतरिम सरकार का जो रूप स्वरूप है, उसने रूस को पीछे हटने पर मजबूर कर दिया है।

बता दें कि तालिबान की अंतरिम सरकार में कई ऐसे नाम हैं, जो अंतर्राष्ट्रीय संगठनों द्वारा वांटेड हैं। यहीं नहीं उनके नाम पर काफी बड़ा इनाम भी घोषित है। गौरतलब है कि तालिबान ने अपनी सरकार के शपथग्रहण में गिने-चुने देशों को ही आमंत्रित किया था। इसमें एक देश रूस भी था। 

यह भी बता दें कि तालिबान ने नई सरकार की ताजपोशी में शामिल होने के लिए पाकिस्तान, चीन तुर्की, कतर, रूस, और ईरान को बुलावा भेजा था। सूत्रों का दावा था कि इन देशों से अच्छे संबंधों के आधार पर तालिबान ने इन्हें वरीयता दी है। हालांकि तत्काल रूप से किसी देश ने यहां पहुंचने के लिए हामी नहीं भरी थी। 


अफगानिस्तान: तालिबान का वीभत्स चेहरा एक बार फिर आया सामने, सालेह के भाई रोहुल्लाह को पीट-पीटकर मार डाला!

अमरुल्लाह लगातार तालिबान के खिलाफ बोलते और लड़ते आए हैं। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अमरुल्लाह सालेह के भाई रोहुल्लाह सालेह को तालिबान ने पंजशीर में बुरी तरह से टॉर्चर करने के बाद मार डाला है।

काबुल: अफगानिस्तान पर बंदूकों के दम पर कब्जा करने बाद तालिबान की कायराना हरकतें जारी है। ताजा मामले में उसने अरुल्लाह सालेह के भाई रोहुल्लाह को पहले तो खूब टॉर्चर किया और फिर पीट-पीटकर मार डाला। 

बताते चलें कि अमरुल्लाह लगातार तालिबान के खिलाफ बोलते और लड़ते आए हैं। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अमरुल्लाह सालेह के भाई रोहुल्लाह सालेह को तालिबान ने पंजशीर में बुरी तरह से टॉर्चर करने के बाद मार डाला है। हालांकि तालिबान ने अब तक इस हत्या की जिम्मेदारी नहीं ली है। वहीं, दूसरी तरफ अमरुल्लाह सालेह ने अब तक इस मामले को लेकर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।

अमरुल्लाह सालेह का जन्म पंजशीर में अक्टूबर 1972 में हुआ था। ताजिक मूल के अमरुल्लाह ने कम उम्र में ही अहमद शाह मसूद के तालिबान विरोधी आंदोलन को जॉइन कर लिया था। अमरुल्लाह सालेह निजी तौर पर तालिबान का दंश झेल चुके हैं। 1996 में तालिबानों ने उनकी बहन का अपहरण कर हत्या कर दी थी। 

सालेह राजनीति में आने से पहले जासूसी विभाग में रहे हैं। वह अफगानिस्तान खुफिया एजेंसी के प्रमुख रह चुके हैं। पिछले कुछ महीनों में तालिबान ने ऊपर कई जानलेवा हमले किए हैं। सालेह मौजूदा वक्त में पंजशीर घाटी में हैं।

बता दें कि तालिबानियों को पंजशीर के लड़ाके कड़ी चुनौती दे रहे हैं। पंजशीर पर अभी तक तालिबान का कब्जा नहीं हो पाया है। हालांकि, तालिबान कई बार पंजशीर पर खुद के कब्जे की बात कहता है। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि अभी तालिबान के लिए पंजशीर बहुत दूर है।


अमेरिका व चीन के बीच रिश्तों की खटास होगी कम, 7 महीने में पहली बार बाइडन-चिनफिंग के बीच फोन पर हुई बात

व्हाइट हाउस ने कहा कि बाइडन ने चिनफिंग को यह संदेश दिया कि विश्व की दो बड़ी अर्थ व्यवस्थाएं रहते हुए दोनों देश प्रतिस्पर्धी रहें, मगर भविष्य में ऐसी कोई स्थिति न हो जहां दोनों देशों के बीच संघर्ष के हालात हो जाएं।

वाशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने द्विपक्षीय रिश्तों की खटास को कम करने के इरादे से चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग से सात महीने में पहली बार फोन पर नब्बे मिनट तक बात की है। इसे लेकर व्हाइट हाउस ने कहा कि बाइडन ने चिनफिंग को यह संदेश दिया कि विश्व की दो बड़ी अर्थ व्यवस्थाएं रहते हुए दोनों देश प्रतिस्पर्धी रहें, मगर भविष्य में ऐसी कोई स्थिति न हो जहां दोनों देशों के बीच संघर्ष के हालात हो जाएं।

बाइडन के पदभार संभालने के बाद से दोनों नेताओं के बीच यह बातचीत ऐसे समय में हुई है जब दोनों देशों के बीच कड़वाहट से भरे मुद्दों की कोई कमी नहीं है। चीन की ओर से किए जा रहे साइबर सुरक्षा उल्लंघन, कोरोनो वायरस महामारी से निपटने के तरीके से अमेरिका नाराज है। हाल ही में व्हाइट हाउस ने चीनी व्यापार नियमों को 'जबरदस्ती और अनुचित' बताया था। हालांकि बाइडन की बातचीत का केंद्र तल्ख मुद्दों पर नहीं था। इसके बजाय उनके कार्यकाल में एनिश्चित रूप से एक मजबूत शुरुआत के लिए अमेरिका-चीन संबंधों के लिए आगे के रास्ते पर चर्चा करने पर केंद्रित था।


व्हाइट हाउस ने एक बयान में कहा, 'दोनों नेताओं के बीच एक व्यापक, रणनीतिक चर्चा हुई जिसमें उन्होंने उन क्षेत्रों पर चर्चा की जहां हमारे हित मिलते हैं, और उन क्षेत्रों पर जहां हमारे हित, मूल्य और दृष्टिकोण भिन्न होते हैं।' अमेरिकी सरकार को उम्मीद है कि बढ़ते मतभेदों के बावजूद दोनों पक्ष जलवायु परिवर्तन और कोरियाई प्रायद्वीप पर परमाणु संकट को रोकने सहित आपसी सरोकार के मुद्दों पर मिलकर काम कर सकते हैं।

वहीं, एएनआइ के मुताबिक शी चिनफिंग ने फोन पर कहा कि अगर दोनों देश एक-दूसरे से ऐसे ही उलझते रहेंगे तो इससे समूचे विश्व को नुकसान होगा। लेकिन अगर दोनों देश साथ मिलकर काम करेंगे तो इससे विश्व का भी भला होगा। अमेरिकी राष्ट्रपति बाइडन के आमंत्रण पर चिनफिंग ने खुश हुए कहा कि दोनों पक्षों को पर्यावरण परिवर्तन, महामारी से बचाव और विश्व के आर्थिक क्षति से उबरने की प्रक्रिया पर विचार करना चाहिए। इस प्रक्रिया में दोनों देशों को एक-दूसरे के मतभेदों का भी सम्मान बनाए रखना चाहिए।


अफगान में पाक ने जो किया उसके नतीजे वह जल्द भुगतेगा: ईरान के पूर्व राष्ट्रपति

उन्होंने यह भी कहा है कि पंजशीर के खिलाफ जंग में पाकिस्तान के अधिकारी सीधे-सीधे तालिबान का साथ दे रहे हैं।

नई दिल्ली: अफगानिस्तान पर तालिबान का कब्जा होने में उसकी मदद करने वाले पाकिस्तान को जल्द ही नतीजें मिलेंगे और उसे भी इसका अंजाम भुगतना पड़ेगा। ऐसा कहना है ईरान के पूर्व राष्ट्रपति का। उन्होंने यह भी कहा है कि पंजशीर के खिलाफ जंग में पाकिस्तान के अधिकारी सीधे-सीधे तालिबान का साथ दे रहे हैं।


महमूद अहमदीनेजाद ईरान के राष्ट्रपति रहे हैं। उन्होंने तालिबान, अफगानिस्तान और पाकिस्तान को लेकर अपनी बात रखी है। उन्होंने कहा है कि पंजशीर की लड़ाई में पाकिस्तान के अधिकारी सीधे तौर पर शामिल हैं। 

उन्होंने पाकिस्तान को सलाह देते हुए कहा है कि अफगानिस्तान में जो हुआ है उसका असर पाकिस्तान पर भी पड़ने वाला है। इसका विस्तार पाकिस्तान तक हो सकता है। और जिन देशों ने इसे डिजायन किया है और समर्थक हैं उन्हें इसके परिणाम भुगतने होंगे। उन्होंने साफ़ शब्दों में कहा है कि कोई यह न समझे कि मैं किसी अज्ञात भविष्य के बारे में बात कर रहा हूं। यह बहुत नजदीक है और जल्द ही होगा।

उन्होंने कहा है कि अफगानिस्तान में जो कुछ हो रहा है, उसका असर पूरी दुनिया पर पड़ेगा। और इसका सबसे खासा असर पाकिस्तान, भारत, चीन और ईरान जैसे देशों पर पड़ने वाला है। उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान के हालात को सुलझाने के लिए भारत और ईरान को साथ आने की जरूरत है। राजनीतिक और मानवीय मुद्दों के ढांचे में इसे हल करने की योजना बनानी चाहिए।

वहीं, तालिबान सरकार को मान्यता देने को लेकर उन्होंने कहा है कि ऐसी सरकार को मान्यता देना जिसने हथियारों के बल पर सत्ता संभाली है और जिसकी कोई नीति नहीं है, यह शर्म की बात है। यह पूरे मानव समाज को नुकसान पहुंचाएगा।


तालिबानी फैसला: महिलाओं की जगह कैबिनेट में नहीं, उन्हें बच्चे पैदा करना चाहिए

अफगानिस्तान में तालिबान कैबिनेट के गठन हो चुका है लेकिन इसमें एक भी महिला को जगह नहीं दी गई है। इतना ही नहीं महिलाओं के प्रति तालिबान का वास्तविक चेहरा भी सामने आ चुका है। तालिबान ने कहा है कि महिलाओं की जगह कैबिनेट में नहीं है उन्हें बच्चे पैदा करना चाहिए।

काबुल: अफगानिस्तान में तालिबान कैबिनेट के गठन हो चुका है लेकिन इसमें एक भी महिला को जगह नहीं दी गई है। इतना ही नहीं महिलाओं के प्रति तालिबान का वास्तविक चेहरा भी सामने आ चुका है। तालिबान ने कहा है कि महिलाओं की जगह कैबिनेट में नहीं है उन्हें बच्चे पैदा करना चाहिए।


 अफगानिस्तान में तालिबान के खिलाफ प्रदर्शन जारी है। तालिबान के प्रवक्ता सैयद जकीरूल्लाह हाशमी ने कहा है कि महिलाओं को बच्चा पैदा करना चाहिए। उनका कैबिनेट में होना जरुरी नहीं है। हाल ही में तालिबान ने अपनी कैबिनेट बनाई है। इस कैबिनेट में 33 लोगों को शामिल किया गया है, लेकिन किसी भी महिला को जगह नहीं दी गई है। 

तालिबानी प्रवक्ता ने अब महिलाओं को लेकर कहा है कि एक महिला मंत्री नहीं बन सकती है। यह ऐसा है जैसे उसके गर्दन पर कोई चीज रख देना जिसे वो नहीं उठा सकती है। महिलाओं के लिए कैबिनेट में होना जरुरी नहीं है। उन्हें बच्चे पैदा करना चाहिए। महिला प्रदर्शनकारी अफगानिस्तान की सभी महिलाओं का प्रतिधिनत्व नहीं कर रही हैं। 

अफगानिस्तान में अलग-अलग जगहों पर अपने अधिकार की मांग को लेकर महिलाएं लगातार प्रदर्शन कर रही हैं। तालिबान द्वारा इन महिलाओं के साथ क्रूरता किये जाने की तस्वीरें भी सामने आ रही हैं। 

अफगानिस्तान में तालिबान के खिलाफ मोर्चा खोलने वाली महिलाएं उनकी बंदूकों से डरे बिना सड़कों पर उतर रही हैं। इधर तालिबान सरकार के आंतरिक(गृह) मंत्रालय ने अफगानिस्तान में कई दिनों से जारी प्रदर्शनों को समाप्त कराने के लिए शासनादेश जारी किया है। 
     
आंतरिक मंत्री ने देश में सभी तरह के प्रदर्शनों को समाप्त कराने के लिए यह आदेश जारी किया है जिसके तहत प्रदर्शनकारियों को किसी भी तरह का प्रदर्शन करने के लिए पूर्व में अनुमति लेनी होगी। इसके अनुसार उन्हें प्रदर्शन में लगने वाले नारों और बैनरों के लिए भी पहले ही मंजूरी लेनी होगी। 

इस बात की संभावना बहुत कम है कि देश के कट्टरपंथी इस्लामी शासकों से अपने अधिकारों की मांग को लेकर लगभग रोजाना हो रहे प्रदर्शनों की अगुवाई कर रही महिलाओं को नये नियमों के तहत प्रदर्शन करने की इजाजत होगी। मंत्रालय के बयान के मुताबिक, ''सभी नागरिकों के लिए घोषणा की जाती है कि वे मौजूदा वक्त में किसी तरह का प्रदर्शन किसी भी नाम के तहत करने का प्रयास न करें।''

सोशल मीडिया पर इस तरह के कई वीडियो वायरल हो रहे हैं, जहां तालिबान के लड़ाकों द्वारा महिलाओं को पीटा जा रहा है. मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो तालिबान के लड़ाकों ने महिलाओं और पत्रकारों को डंडों और रायफल की बट से पीटा है। साथ ही कई पत्रकारों को गिरफ्तार कर उनकी पिटाई की है। 

तालिबान ने महिलाओं पर कपड़े पहनने, स्कूलों में लड़के-लड़कियों को एक साथ नहीं पढ़ने, ऑफिस में काम नहीं करने समेत कई अन्य चीजों पर प्रतिबंध लगा दिए हैं।

इयसको लेकर काबुल समेत अन्य शहरों में महिलाएं तालिबान के खिलाफ प्रदर्शन कर रही हैं। महिलाएं सरकार में हिस्सेदारी की मांग कर रही है।


अब AK-47 बढ़ाएगी तालिबान के अफगान की इकॉनमी?, 'बंदूकधारी' हाजी मोहम्द को बनाया गया रिजर्व बैंक का मुखिया

अफगानिस्तान के केंद्रीय बैंक 'दा अफगानिस्तान बैंक' (DAB) के बंदूकधारी चीफ हाजी मोहम्मद इदरिस की तस्वीर भी वायरल हुई है। इसमें वह दफ्तर में बैठकर लैपटॉप चलाते दिख रहे हैं तो टेबल पर बंदूक भी रखा है।

काबुल: अफगानिस्तान पर तालिबान ने किस तरह से कब्जा किया इसे पूरी दुनिया ने देख। रही सही कसर तालिबान के कैबिनेट में टॉप मोस्ट वांटेड आतंकियों को शामिल करके तालिबान द्वारा पूरी कर दी गई। पीएम, डीप्टी पीएम, गृहमंत्री, रक्षामंत्री समेत कई टॉप आतंकी अब अफगानिस्तान में माननीय बन चुके हैं। वहीं अब अफगानिस्तान के केंद्रीय बैंक यानि 'दा अफगानिस्तान बैंक' का चीफ भी एक बंदूकधारी को बनाया गया है।

तालिबानी कैबिनेट के कम से कम 14 सदस्य संयुक्त राष्ट्र की कालीसूची में नामित आतंकवादी हैं। इस बीच अफगानिस्तान के केंद्रीय बैंक 'दा अफगानिस्तान बैंक' (DAB) के बंदूकधारी चीफ हाजी मोहम्मद इदरिस की तस्वीर भी वायरल हुई है। इसमें वह दफ्तर में बैठकर लैपटॉप चलाते दिख रहे हैं तो टेबल पर बंदूक भी रखा है। 

हाल ही में तालिबान के प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने इदरिस को डीएबी का मुखिया बनाए जाने की घोषणा की थी। भारत के रिजर्व बैंक की तरह डीएबी भी अफगानिस्तान का केंद्रीय बैंक है और बैंकिंग सेक्टर के साथ अर्थव्यवस्था भी काफी हद तक इसकी नीतियों पर निर्भर करती है।

जबीहुल्लाह मुजाहिद ने एक ट्वीट में कहा था कि हाजी मोहम्मद इदरिस को "सरकारी संस्थानों और बैंकिंग मुद्दों को व्यवस्थित करने और लोगों की समस्याओं के समाधान के लिए" डीएबी का कार्यवाहक प्रमुख नियुक्त किया गया है। हाजी मोहम्मद इदरिस अफगानिस्तान को जौजान का रहने वाला है और तालिबान के आर्थिक आयोग का प्रमुख रहा है। 

बताते चलें कि चीन और पाकिस्तान जैसे चंद मुल्कों को छोड़कर अधिकतर देशों ने अफगानिस्तान को आर्थिक मदद बंद कर दी है। अफगानिस्तान पर तालिबान के कब्जे के बाद से ही अधिकतर बैंक बंद हैं तो लोगों को कैश की किल्लत का सामना करना पड़ रहा है। जरूरी वस्तुओं की किल्लत की वजह से महंगाई आसमान पर जा चुकी है।


अफगान में तालिबान की सरकार लेकिन बड़ा सवाल-कहां गायब है तालिबानी सुप्रीम लीडर हिबतुल्लाह अखुंदजादा?

सवाल यह है कि हिबतुल्लाह अखुंदजादा आखिर कहां है। तालिबान बार बार ये दावा कर रहा है कि अखुंदजादा जल्द ही सामने आना वाला है, लेकिन सरकार का ऐलान होने के बाद भी उसके नाम से तालिबान ने सिर्फ एक लिखित संदेश जारी किया है।

काबुल: अफगानिस्तान में तालिबान कैबिनेट का गठन हो गया है लेकिन अभी भी उसका सुप्रीम लीडर हिबतुल्लाह अखुंदजादा गायब है।  दरअसल, तालिबान ने हिबतुल्लाह अखुंदजादा को अपना सुप्रीम लीडर चुना है। लेकिन सवाल यह है कि हिबतुल्लाह अखुंदजादा आखिर कहां है। तालिबान बार बार ये दावा कर रहा है कि अखुंदजादा जल्द ही सामने आना वाला है, लेकिन सरकार का ऐलान होने के बाद भी उसके नाम से तालिबान ने सिर्फ एक लिखित संदेश जारी किया है।

तालिबान की ओर से पहली बार आए उसके सुप्रीम लीडर के संदेश में न तो कहीं अखुंदजादा के दस्तखत हैं और न ही कहीं कोई मुहर लगी है। बस आखिर में उसका नाम जरूर टाइप किया हुआ है। हिबतुल्लाह अखुंदजादा तालिबान का सुप्रीम लीडर है। अफगानिस्तान में तालिबान सरकार बनने के बाद भी उसका सामने न आना कई सवाल खड़े कर रहा है।

सवाल इसलिए और भी गंभी हो जा रहे हैं क्योंकि अखुंदजादा के बारे में तालिबान प्रवक्ताओं से कई बार पहले भी सवाल हो चुके हैं और हर बार उनका जवाब यही होता है कि वो जल्द ही सामने आने वाले है। तालिबानी प्रवक्ता जबीउल्लाह मुजाहिद ने कहा है कि हेबतुल्लाह अखुंदजादा कंधार में हैं और वो शुरु से कंधार में ही रह रहे हैं। बहुत जल्द वो आप सबके सामने भी आएंगे। लेकिन कब सामने आएंगे इसकी जानकारी स्पष्ट रूप से नहीं दी जाती।

वैसे तो लिबान कई बार अखुंदजादा के बारे में इस तरह के दावे और वादे कर चुका है लेकिन सरकार के ऐलान के वक्त और उसके बाद भी उसका सामने न आना, उन कयासों को मजबूत कर देता है। जो अब तक अखुंदजादा के बारे में किए जा रहे थे।

हालांकि, तालिबान का यह भी इतिहास रहा है कि वह अपने सुप्रीम लीडर को मिस्ट्री बनाकर रखता है। लेकिन वो जंग का दौर था, अब तालिबान की सरकार बनने और उनके नेताओं के दावों के बाद भी अगर वो सामने नहीं आ रहा है, तो साफ है कि पर्दे के पीछे कोई बड़ा खेल जारी है और इसे लेकर कई थ्योरी सामने आ रही है।


फिलहाल, अखुंदजादा को लेकर कई तरह की चर्चाएं हैं। इनमें से मुख्य रूप से यह बात सामने आ रही है कि अखुंदजादा को शायद पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI ने अपने कब्जे में ले रखा है। क्योंकि, अफगान में तालिबानी सरकार के गठन में आईएसआई ने महत्तवपूर्ण भूमिका आदा की है। आखिरी बार उसे पेशावर में देखा गया था और उसके पाकिस्तान सेना के अस्पताल में भर्ती होने की चर्चा है। यह भी खबरें मिल रही है कि वह कोरोना से ग्रसित है। अब ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि क्या अखुंदजादा आईएसआई के इसारे पर काम कर रहा है और तालिबान वही काम अफगानिस्तान में करेगा जो उसके आका पाकिस्तान द्वारा इस्लामाबाद से आदेशित किया जाएगा।


अफागानिस्तान: सच दिखाने पर तालिबान की कायराना हरकत, पत्रकारों को पीट-पीटकर किया लहुलूहान

अफगानिस्तान के मामलों में पाकिस्तानी हस्तक्षेप के खिलाफ काबुल में हुए विरोध प्रदर्शन को कवर कर रहे पत्रकारों पर तालिबान का कहर टूटा है और उसने न सिर्फ कई पत्रकारों को गिरफ्तार किया, बल्कि हिरासत में उन्हें कठोर यातनाएं भी दीं और बुरी तरह पीटा।

काबुल: तालिबान दुनिया से किया अपना वादा अब लगातार तोड़ता जा रहा है। पहले तो महिलाओं की आजादी छीन ली और अब उन पत्रकारों पर हमले कर रहा है और उनके साथ ज्यादिती कर रहा है जो उसके कारनामों को दुनिया के सामने ला रहे हैं। ताजा मामले में तालिबानी आतंकियों द्वारा दो पत्रकारों को मार-मारकर लहुलूहान कर दिया है जिन्होंने उसके खिलाफ सच्चाई दिखाई थी।


अफगान में तालिबान राज में अब सच दिखाना पत्रकारों के लिए सजा हो गया है। पाकिस्तान ने तालिबान की किस कदर मदद की है, यह किसी से छिपी नहीं है, मगर तालिबान नहीं चाहता कि पत्रकार बिरादरी के लोग इस पर से पर्दा हटाएं। यही वजह है कि अफगानिस्तान के मामलों में पाकिस्तानी हस्तक्षेप के खिलाफ काबुल में हुए विरोध प्रदर्शन को कवर कर रहे पत्रकारों पर तालिबान का कहर टूटा है और  उसने न सिर्फ कई पत्रकारों को गिरफ्तार किया, बल्कि हिरासत में उन्हें कठोर यातनाएं भी दीं और बुरी तरह पीटा।

तालिबान द्वारा दो पत्रकारों की पिटाई की एक तस्वीर सामने आई है, जिसने सबको झकझोर कर रख दिया है। अफगानिस्तान को कवर करने वाले द न्यूयॉर्क टाइम्स के रिपोर्टर ने अपने ट्विटर अकाउंट पर इस तस्वीर को शेयर किया है, जो तालिबानी जुल्म की कहानी बयां कर रही है। उन्होंने ट्वीट कर कहा कि कल काबुल में दो पत्रकारों को प्रताड़ित किया गया और बुरी तरह से पीटा गया है। 

लॉस एंजलिस के पत्रकार मरकस याम ने ट्वीट कर दावा किया कि तालिबानी जुल्म के शिकार ये दोनों अफगानी पत्रकार इटिलाट्रोज के रिपोर्टर हैं, जिनका नाम है नेमत नकदी और ताकी दरयाबी। महिलाओं के प्रदर्शन को कवर करने के दौरान इन्हें हिरासत में लिया गया और तालिबानी हुकूमत द्वारा बेरहमी से पीटा गया। इन्होंने अपने ट्वीट में एक हैशटैग का भी इस्तेमाल किया है- जर्नलिज्म इज नॉट अ क्राइम।


बताते चलें कि काबुल में मंगलवार को रैली को तितर-बितर करने के लिए तालिबान लड़ाकों ने गोलीबारी की और प्रदर्शन को कवर कर रहे कई अफगान पत्रकारों को गिरफ्तार कर लिया था।  काबुल स्थित पाकिस्तानी दूतावास के सामने अफगानिस्तान के आंतरिक मामले में पाकिस्तान के कथित हस्तक्षेप के खिलाफ प्रदर्शन हुआ, खासतौर पर इस्लामाबाद द्वारा पंजशीर में तालिबान विरोधी लड़ाकों के खिलाफ तालिबान की कथित मदद के विरोध में। सोशल मीडिया पर कई पोस्ट किए गए हैं जिनमें पत्रकारों को रिहा करने की मांग की गई है। जिन पत्रकारों को हिरासत में लिया गया था और बाद में रिहा किया गया उनमें से एक अफगान पत्रकार ने एसोसिएटेड प्रेस को बताया कि उसे तालिबान ने सजा दी। 

सुरक्षा कारणों से पहचान गोपनीय रखते हुए पत्रकार ने बताया, 'उन्होंने (तालिबान ने) मुझे जमीन पर नाक रगड़ने और प्रदर्शन को कवर करने के लिए माफी मांगने पर मजबूर किया।

उन्होंने बताया, 'अफगानिस्तान में पत्रकारिता करना कठिन होता जा रहा है।' अफगानिस्तान के टोलो न्यूज चैनल ने बताया कि गिरफ्तार लोगों में उनका कैमरामैन वाहिद अहमदी भी शामिल हैं।


दुनियाभर में अफगान के राजदूतों ने की तालिबान से बगावत, नई सरकार और नए झंडे को मानने से इन्कार

सभी दुतावासों के जरिए जारी साझा बयान में कहा गया है कि तालिबान सरकार गैर-संवैधानिक है और सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा है।

काबुल: बंदूकों के दम पर सत्ता हासिल करने के बाद बेशक तालिबान ने अफगानिस्तान में सरकार का गठन कर लिया है लेकिन अब उसे दुनियाभर के अफगानी दूतावास के राजदूतों का विरोध झेलना पड़ रहा है। दरअसल, राजदूतों ने नई सरकार और नए झंडे को स्वीकार करने से मना कर  दिया है।

 मिली जानकारी के मुताबिक, पिछली गनी सरकार के विदेश मंत्रालय की तरफ से बयान जारी करके ऐलान किया गया कि दुनिया भर में मौजूद सभी अफगानी राजदूत पिछली अफगानी सरकार को ही मानते हुए काम करते रहेंगे और नई तालिबानी सरकार को स्वीकार नहीं करते। सभी दुतावासों के जरिए जारी साझा बयान में कहा गया है कि तालिबान सरकार गैर-संवैधानिक है और सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा है।

बयान में यह भी आरोप लगाया गया है कि नई तालिबानी सरकार ने औरतों के हक का भी हनन किया है। लिहाजा वो तालिबानी सरकार को मानने से इनकार करते हैं। इस बयान में बगावत के ऐलान के साथ ही ये भी साफ कर दिया गया है कि सभी मौजूदा अफगानी राजदूत अपने-अपने दुतावासों में तालिबानी नहीं बल्कि पुराना झंडा ही इस्तेमाल करते रहेंगे।


तालिबान के जरिए अफगानिस्तान को दिए गए नए नाम इस्लामिक अमिरात ऑफ अफगानिस्तान को भी मानने से साफ इनकार कर दिया है। बता दें कि सूत्रों के मुताबिक पिछली अफगान सरकार के सभी राजदूत हामिद करजई और डॉ. अब्दुल्ला के लगातार संपर्क में थे। लिहाजा आज इस बगावत से साफ है कि भले ही करजई और डॉ. अब्दुल्ला ने औपचारिक तौर पर तालिबान की नई सरकार का विरोध नहीं किया हो लेकिन अब बिल्कुल साफ है कि वो इससे नाखुश हैं और ये विद्रोह संभवतः उन्हीं के इशारे पर हुआ है।


तालिबान पर मेहरबान चीन, 31 मिलियन डॉलर के पैकेज का किया ऐलान, पाकिस्तान ने दुनिया से की ये अपील

चीन ने अफगानिस्तान को यह मदद ऐसे समय पर दी है जब तालिबान शासन के सामने बड़ी आर्थिक चुनौती है तो देश खाद्य संकट का सामना कर रहा है।

काबुल/बीजिंग: अफगानिस्तान पर तालिबान का कब्जा होते ही सबसे पहले उसके साथ 'दोस्ताना रिश्ते' की बात कहने वाले चीन ने अब उसके लिए अपना खजाना खोल दिया है। 

चीन ने बुधवार को अफगानिस्तान के लिए 200 मिलियन युआन (31 मिलियन यूएस डॉलर) मूल्य के अनाज, सर्दियों के सामान और कोरोना वायरस वैक्सीन की मदद देने का ऐलान किया है। 

चीन ने अफगानिस्तान को यह मदद ऐसे समय पर दी है जब तालिबान शासन के सामने बड़ी आर्थिक चुनौती है तो देश खाद्य संकट का सामना कर रहा है। 


चीन पहला देश है जिसने 15 अगस्त को काबुल के साथ पूरे देश पर तालिबान का कब्जा होने के बाद अफगानिस्तान के लिए मदद का ऐलान किया है। चीन ने तालिबान की अंतरिम सरकार का समर्थन करते हुए कहा है कि यह व्यवस्था बनाने और अराजकता को खत्म करने के लिए जरूरी कद है। 


अफगानिस्तान के पड़ोसी देशों के विदेश मंत्रियों की वर्चुअल मीटिंग में चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने कहा कि उनका देश अफगानिस्तान को 200 मिलियन युआन मूल्य के अनाज, सर्दियों की आपूर्ति, वैक्सीन और दवाइयां देगा। वांग ने कहा कि चीन ने अफगानिस्तान को पहले बैच में 30 लाख कोरोना टीके देगा। वांग ने कहा कि चीन अफगानिस्तान की अर्थव्यवस्था को दोबारा खड़ा करने के लिए दूसरे देशों के साथ मिलकर काम करेगा। 


पाकिस्तान ने दुनिया से की ये अपील


पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने बुधवार को अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अफगानिस्तान में तालिबान सरकार की मदद का ऐलान करते हुए कहा कि यहां मानवीय संकट और आर्थिक संकट को रोकने की जरूरत है। कुरैशी ने चीन, ईरान, ताजिकिस्तान, तुर्केमेनिस्तान और उज्बेकिस्तान के विदेश मंत्रियों की वर्चुअल बैठक में यह बात कही।


अफगान में तालिबान की सरकार अवैध, उसके समानांतर सरकार बनाएंगे: अहमद मसूद

पंजशीर घाटी में तालिबान के खिलाफ विद्रोही गुट का नेतृत्व कर रहे अहमद मसूद ने तालिबान के समानांतर सरकार बनाने का ऐलान कर दिया है।

काबुल: अफगानिस्तान पर कब्जा करने के बाद तालिबान ने अब देश में अपनी सरकार बना ली है। लेकिन अहमद मसूद ने एक बार फिर से दहाड़ भरी है और उन्होंने अफगान पर तालिबान की सरकार को अवैध बताते हुए कहा कि वह उसके समानांतर सरकार बनाएंगे। पंजशीर घाटी  में तालिबान के खिलाफ विद्रोही गुट का नेतृत्व कर रहे  अहमद मसूद ने तालिबान के समानांतर सरकार बनाने का ऐलान कर दिया है। विद्रोही गुट की तरफ से कहा गया है कि हम यहां एक वैध और ट्रांजिशनल प्रजातांत्रिक सरकार बनाएंगे। यह वैध सरकार लोगों के मत से बनेगी और अंतरराष्ट्रीय समुदाय द्वारा स्वीकार की जाएगी। 

रजिस्टेंस फ्रंट की तरफ से कहा गया है कि तालिबान की यह अवैध सरकार अफगानिस्तान के लोगों के लिए कतई ठीक नहीं और इससे यहां अस्थिरता आएगी। यह अफगानिस्तान की शांति और सुरक्षा के लिए भी खतरनाक है। इससे पहले अहमद मसूद ने अपना एक वीडियो भी जारी किया था और इस वीडियो में उन्होंने अफगानिस्तान के लोगों से तालिबान के खिलाफ आवाज बुलंद करने के लिए कहा था। 

रजिस्टेंस फोर्स ने ग्लोबल एजेंसी यूएन, यूएनएचआरसी, ईयू और अन्य संगठनों से अपील की है कि वो तालिबान को सपोर्ट ना करें। इससे पहले तालिबान ने सोमवार को कहा था कि उसने पंजशीर पर कब्जा कर लिया है। हालांकि, विद्रोही गुट इसे गलत बता रहे हैं और कह रहे हैं कि पंजशीर घाटी पर तालिबान का पूरी तरह से कब्जा नहीं हुआ है। 


फ्रांस की नामी सीमेंट कंपनी ने आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट से की थी डेढ़ करोड़ डॉलर की डील, कोर्ट ने माना दोषी

दुनिया के लिए आतंक का पर्याय रहे खुंखार आतंकी संगठन इस्लामिट स्टेट से फ्रांस की एक नामी सीमेंट कंपनी ने डेढ़ करोड़ डॉलर की डील की थी। अब इस मामले में कोर्ट ने सीमेंट कंपनी को दोषी करार दिया है।

पेरिस: दुनिया के लिए आतंक का पर्याय रहे खुंखार आतंकी संगठन इस्लामिट स्टेट से फ्रांस की एक नामी सीमेंट कंपनी ने डेढ़ करोड़ डॉलर की डील की थी। अब इस मामले में कोर्ट ने सीमेंट कंपनी को दोषी करार दिया है।

मिली जानकारी के मुताबिक, नामी सीमेंट कंपनी लाफार्ज पर मानवता के खिलाफ अपराधों में शामिल होने के आरोपों को सही पाया गया है। सीमेंट कंपनी लाफार्ज ने ISIS समेत कई सशस्त्र समूहों को सीरिया में डेढ़ करोड़ अमेरिकी डॉलर दिए थे। इस मामले में कंपनी पर मानवता के खिलाफ अपराधों में शामिल होने के आरोप को सही पाया गया है। फ्रांस की शीर्ष अदालत ने निचली कोर्ट के उस फैसले को पलट दिया है, जिसमें लाफार्ज पर लगे आरोपों को खारिज कर दिया गया था। 

एक इंटरनेशनल न्यूज चैनल की रिपोर्ट के मुताबिक लाफार्ज पर खूंखार आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट सहित कई समूहों को लगभग 1.53 करोड़ डॉलर का भुगतान करने का आरोप है ताकि देश के युद्ध के शुरुआती वर्षों में उत्तरी सीरिया में कंपनी की सीमेंट फैक्ट्री को चालू रखा जा सके। उसके इस काम को मानवता के खिलाफ अपराधों में शामिल होना माना गया है।

बता दें कि लाफार्ज का 2015 में स्विस समूह होलसीम में विलय हो गया था और 2011 में उपजे संघर्ष के बाद सीरिया में एक कारखाने को चालू रखने के अपने प्रयासों के लिए कंपनी के खिलाफ जांच की जा रही है। अब इस मामले में शीर्ष अदालत के फैसले से कंपनी को झटका लगा है। यही नहीं इसने कारोबारी जगत की छवि को भी धूमिल करने का काम किया है।


UN में 'आतंक के आका' पाकिस्तान ने फिर अलापा 'कश्मीर राग', भारत ने लगाई लताड़, कहा-'हिंसा की संस्कृति को बढ़ावा देना तुम्हारा काम'

एक बार फिर से भारत ने पाकिस्तान द्वारा यूएन में कश्मीर राग अलापने पर उसे जमकर लताड़ लगाई है। साथ ही भारत ने कहा है कि पाकिस्तान का काम हिंसा की संस्कृति को बढ़ावा देना है।

नई दिल्ली: पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान कई बार संयुक्त राष्ट्र में भारत द्वारा बेइज्जत किया जा चुका है लेकिन एक कहावत है कि 'कुत्ते की दुम कभी सीधी नहीं हो सकती' और पाकिस्तान इस कहावत को चरित्रार्थ करता रहता है। एक बार फिर से भारत ने पाकिस्तान द्वारा यूएन में कश्मीर राग अलापने पर उसे जमकर लताड़ लगाई है। साथ ही भारत ने कहा है कि पाकिस्तान का काम हिंसा की संस्कृति को बढ़ावा देना है।

संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान की आलोचना करते हुए भारत ने कहा कि पाक अपने घर और अपनी सीमाओं के पार हिंसा की संस्कृति को लगातार बढ़ावा दे रहा है। भारत के खिलाफ जहर उगलने के लिए संयुक्त राष्ट्र के मंच का इस्तेमाल करने को लेकर भी भारत ने इस्लामाबाद को लताड़ लगाई।

संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन की प्रथम सचिव विदिशा मैत्रा ने कहा कि शांति की संस्कृति केवल एक अमूर्त मूल्य या सिद्धांत नहीं है जिस पर केवल सम्मेलनों में चर्चा हो और इसका जश्न मनाया जाए, बल्कि सदस्य देशों के बीच वैश्विक संबंधों में सक्रिय रूप से इस पर काम करने की जरूरत है।

उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान आतंकियों को सपोर्ट करता है। संयुक्त राष्ट्र महासभा ने मंगलवार को शांति की संस्कृति पर उच्च स्तरीय मंच के दौरान अपने वक्तव्य में भारत ने ये बातें कहीं।

जब पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र के मंच पर विषय के इतर भारत के खिलाफ जहर उगला और कश्मीर मसले को उठाया तो जवाबी हमले में भारत की विदिशा मैत्रा ने कहा कि आज हमने पाकिस्तान के प्रतिनिधिमंडल द्वारा भारत के खिलाफ हेट स्पीच के लिए संयुक्त राष्ट्र के मंच का इस्तेमाल करने का एक और प्रयास देखा। उन्होंने कहा कि चाहे हो घर हो या सीमा पार, पाकिस्तान लगातार 'हिंसा की संस्कृति' को बढ़ावा दे रहा है। हम ऐसे सभी प्रयासों को खारिज और निंदा करते हैं।

बता दें कि संयुक्त राष्ट्र में जब पाकिस्तान को बोलने का मौका मिला तो उसने उलुल-जुलूल बकना शुरू कर दिया और भारत के खिलाफ जहर उगलने लगा। इस्लामाबाद के दूत मुनीर अकरम ने जम्मू-कश्मीर के मुद्दे को उठाया और दिवंगत पाकिस्तान समर्थक नेता सैयद अली शाह गिलानी के बारे में महासभा हॉल में अपनी टिप्पणी की, जो पूरी तरह फोरम के विषय पर केंद्रीत न होकर से भारत पर केंद्रित था। इसके बाद भारत ने जवाबी हमला किया और पाकिस्तान की लताड़ा। 

मैत्रा ने कहा कि इसमें कोई संदेह नहीं है कि आतंकवाद, जो असहिष्णुता और हिंसा की अभिव्यक्ति है, सभी धर्मों और संस्कृतियों का विरोधी है। उन्होंने कहा कि दुनिया को उन आतंकवादियों से चिंतित होना चाहिए जो इन कृत्यों को सही ठहराने के लिए धर्म का इस्तेमाल करते हैं और जो इसमें उन आतंकियों समर्थन करते हैं। यह रेखांकित करते हुए कि भारत मानवता, लोकतंत्र और अहिंसा के संदेश को फैलाना जारी रखेगा।

उन्होंने आगे कहा कि भारत विशेष रूप से धर्म के मुद्दे पर संयुक्त राष्ट्र में चर्चा का आधार बनाने के लिए ऑब्जेक्टिविटी, गैर-चयनात्मकता और निष्पक्षता के सिद्धांतों को लागू करने के अपने आह्वान को दोहराता है। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र को ऐसे मुद्दों पर सेलेक्टिव होने से बचना चाहिए जो शांति की संस्कृति में बाधा डालते हैं।


इंडोनेशिया: जेल में आग लगने से 40 से ज्यादा कैदियों की मौत, 50 झुलसे

इंडोनेशिया की एक जेल में अचानक आग लग जाने से 40 से ज्यादा कैदियों की मौत हो गई है और 50 से भी ज्यादा कैदियों के आग में झुलसने की खबर है। झुलसे कैदियों को उपचार हेतु अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

नई दिल्ली: इंडोनेशिया की एक जेल में अचानक आग लग जाने से 40 से ज्यादा कैदियों की मौत हो गई है और 50 से भी ज्यादा कैदियों के आग में झुलसने की खबर है। झुलसे कैदियों को उपचार हेतु अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

मिली जानकारी के मुताबिक, इंडोनेशिया की राजधानी के निकट बुधवार तड़के एक जेल में आग लगने से कम से कम 41 कैदियों की मौत हो गई, वहीं 39 अन्य झुलस गए। न्याय मंत्रालय के सुधार विभाग के प्रवक्ता रिका अपरिआंती ने कहा कि यह आग राजधानी के बाहरी इलाके में स्थित तांगेरांग जेल के 'सी ब्लॉक में लगी। इस जेल में मादक पदार्थों की तस्करी से जुड़े अपराधियों को रखा जाता है। अधिकारी आग लगने के कारणों की जांच कर रहे हैं।


उन्होंने बताया कि इस जेल की क्षमता 1225 कैदियों को रखने की है लेकिन यहां दो हजार से अधिक कैदियों को रखा गया था। आग लगने के वक्त जेल के 'सी ब्लॉक में 122 कैदी थे। बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों और सैनिकों को आग बुझाने के काम में लगाया गया।

मंत्रालय के प्रवक्ता ने बताया कि कई घंटों की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया जा सका और सभी कैदियों को अस्पताल पहुंचाया गया। बता दें कि जेल से भागने के लिए और दंगों के कारण आग लगना इंडोनेशिया में आम है, जेलों में भीड़भाड़ एक समस्या बन गई है जो खराब फंडिंग से जूझ रही हैं।


अफगानिस्तान: तालिबानी कैबिनेट में खुंखार आतंकियों की भरमार, कोई करोड़ों का इनामी तो कोई है यूएन की लिस्ट में, बड़ा सवाल- दुनिया कैसे देगी मान्यता ?

अफगानिस्तान में तालिबानी कैबिनेट का गठन हो चुका है। लेकिन कैबिनेट में करोड़ों को इनामी आतंकियों के साथ-साथ ऐसे भी आतंकियों को जगह दी गई है जिन्हें यूएन ने आतंकी घोषित कर रखा है।

काबुल: अफगानिस्तान में तालिबानी कैबिनेट का गठन हो चुका है। लेकिन कैबिनेट में करोड़ों को इनामी आतंकियों के साथ-साथ ऐसे भी आतंकियों को जगह दी गई है जिन्हें यूएन ने आतंकी घोषित कर रखा है। 

तालिबान की नई सरकार में मुल्ला हसन अखुंद को अंतरिम प्रधानमंत्री की जिम्मेदारी दी गई है। दो लोगों को अंतरिम उपप्रधानमंत्री की जिम्मेदारी दी गई है, इनमें एक नाम मुल्ला अब्दुल गनी बरादर का है, जिन्होंने अमेरिका के साथ हुई बातचीत का नेतृत्व किया और अफगानिस्तान से अमेरिका की पूरी तरह विदाई से जुड़े समझौते पर हस्ताक्षर किए।

तालिबान के प्रवक्ता द्वारा मिली जानकारी के मुताबिक, आमिर खान मुत्तकी को अंतरिम विदेश मंत्री बनाया गया है, जबकि भारतीय सैन्य अकादमी से पढ़ चुके अब्बास स्टानकजई को विदेश उप मंत्री नियुक्त किया गया है।

वहीं, कुख्यात हक्कानी नेटवर्क का नेतृत्व करने वाले सिराजुद्दीन हक्कानी को अंतरिम गृह मंत्री बनाया गया है जबकि मुल्ला याकूब को अंतरिम रक्षा मंत्री की जिम्मेदारी मिली है। मुल्ला याकूब के पिता मुल्ला मोहम्मद उमर ने तालिबान की स्थापना की थी। 

5 खुंखार आतंकियों को कैबिनेट में जगह

तालिबान सरकार में कम से कम पांच ऐसे लोग शामिल हैं, जिन्हें यूएन यानी संयुक्त राष्ट्र ने आतंकी घोषित कर रखा है। इसके अलावा, तालिबान ने अब उसी सिराजुद्दीन हक्कानी को अफगानिस्तान का नया गृहमंत्री बना दिया है, जो मोस्ट वांटेड आतंकवादी है, जिसके सिर पर अमेरिका ने इनाम घोषित कर रखा है।

सिराजुद्दीन हक्कानी का नाता पाकिस्तान के नॉर्थ वजीरिस्तान इलाके से है। खूंखार आतंकवादी संगठन हक्कानी नेटवर्क को चलाने वाले सिराजुद्दीन हक्कानी के बारे में कहा जाता है कि वो नॉर्थ वजीरिस्तान के मिराम शाह इलाके में रहता है। हक्कानी नेटवर्क के इस शीर्ष आतंकवादी का नाम FBI की मोस्ट वॉन्टेड लिस्ट में अभी भी शामिल है। ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि आतंकियों से भरी इस सरकार को दुनिया कैसे मान्यता देगी।


ये हैं खुंखार आतंकी जिनसे सजी है तालिबानी कैबिनेट

मुल्ला हसन अखुंद (प्रधानमंत्री)

  • 'रहबरी शूरा' के प्रमुख के रूप में 20 साल तक काम किया और मुल्ला हेबतुल्लाह अखुंदजादा के करीब माने जाता है
  • 1996 से 2001 तक अफगानिस्तान में तालिबान की पिछली सरकार के दौरान विदेश मंत्री और उप प्रधानमंत्री के रूप में कार्य किया था
  • तालिबान के जन्मस्थान कंधार का रहने वाला है
  • अफगानिस्तान में तालिबान सरकार का मुखिया बना मुल्ला हसन अखुंद संयुक्त राष्ट के वैश्विक आतंकियों की सूची में शामिल है
  • संयुक्त राष्ट्र प्रतिबंध रिपोर्ट ने अंखुद को उमर के करीबी सहयोगी और राजनीतिक सलाहकार के रूप में डिस्क्राइब किया है


मुल्ला बरादर (उप प्रधानमंत्री)

  • 1994 में तालिबान के गठन में वह भी शामिल था
  • 1996 से 2001 तक जब तालिबान ने अफगानिस्तान पर राज किया, तब मुल्ला बरादर ने अहम भूमिका निभाई थी और रक्षा मंत्री के रूप में कार्य किया था
  • बरादर को कभी मुल्ला उमर का करीबी माना जाता था
  • संयुक्त राष्ट्र प्रतिबंध नोटिस (यूएन सैंक्शन नोटिस) में कहा गया है कि तालिबान सरकार के पतन के बाद बरादर ने गठबंधन बलों पर हमलों के लिए जिम्मेदार एक वरिष्ठ सैन्य कमांडर के रूप में कार्य किया

अब्दुल सलाम हनाफी (दूसरा उप-प्रधानमंत्री)

  • मई 2007 में उत्तरी अफगानिस्तान के जॉज़ुजान प्रांत का प्रभारी बनाया गया था
  • मादक पदार्थों की तस्करी के लिए संयुक्त राष्ट्र ने उस पर प्रतिबंध लगा रखा है
  • माना जाता है कि अब्दुल सलाम हनाफी ही यूएस-अफगानिस्तान शांति समझौते की कुंजी था
  • मादक पदार्थों की तस्करी में शामिल रहा है


सिराजुद्दीन हक्कानी (गृह मंत्री)

  • हक्कानी का नाम वैश्विक स्तर के आतंकवादियों की सूची में हैं
  • अमेरिका ने उसके बारे में सूचना पर 50 लाख डॉलर (73 करोड़ 36 लाख और 65 हज़ार) का इनाम घोषित कर रखा है
  • हक्कानी नेटवर्क के इस शीर्ष आतंकवादी का नाम FBI की मोस्ट वॉन्टेड लिस्ट में अभी भी शामिल है
  • सिराजुद्दीन हक्कानी के कारनामों की लिस्ट भी काफी बड़ी है


आमिर खान मुतक्की (विदेश मंत्री)

  • मुतक्की खुद को हेलमंद का रहने वाला बताता है
  • पिछली तालिबान सरकार में शिक्षा मंत्री के साथ-साथ संस्कृति और सूचना मंत्री कार्यभार संभाला था
  • मुतक्की को बाद में कतर भेजा गया, उसे शांति आयोग और वार्ता दल का सदस्य नियुक्त किया गया
  • उसने अमेरिका के साथ बातचीत की


'आतंक के आका' पाकिस्तान के 'कंट्रोल' में रहेगा तालिबान, ISI चीफ के दौरे के बाद तय हुआ पीएम का नाम

बेशक अफगानिस्तान की हुकूमत तालिबान करेगा लेकिन उसका पूरा रिमोट कंट्रोल पाकिस्तान के पास ही होगा। यानी तालिबान के अफगान का पीएम काबुल में जरूर बैठेगा लेकिन उसे वही करना होगा जो उसका इस्लामाबाद में बैठा आका कहेगा।

इस्लामाबाद/काबुल: जिस बात की आशंका पहले से ही जताई जा रही थी आखिरकार वही होने जा रहा है। बेशक अफगानिस्तान की हुकूमत तालिबान करेगा लेकिन उसका पूरा रिमोट कंट्रोल पाकिस्तान के पास ही होगा। यानी तालिबान के अफगान का पीएम काबुल में जरूर बैठेगा लेकिन उसे वही करना होगा जो उसका इस्लामाबाद में बैठा आका कहेगा।

तालिबान सरकार के प्रमुख के रूप में मुल्ला मोहम्मद हसन अखुंद का नाम पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल फैज हमीद के पिछले हफ्ते अचानक काबुल आने के कुछ दिनों बाद आया है। 

आईएसआई प्रमुख ने अपनी यात्रा के दौरान मुल्ला बरादर और हिज्ब-ए-इस्लामी नेता गुलबुद्दीन हिकमतयार से मुलाकात की थी। ऐसे कयास लगाए जा रहे हैं कि हमीद के कहने पर ही पीएम पद के लिए नाम तय हुआ है।

उस वक्त मीडिया रिपोर्ट में यह कहा गया था कि हमीद ने अफगानिस्तान की मौजूदा स्थिति पर चर्चा करने के लिए काबुल का दौरा किया था। उधर, तालिबान के प्रवक्ता जबीहुल्ला मुजाहिद ने एक संवाददाता सम्मेलन में सोमवार को कहा था कि जल्द ही नई सरकार की घोषणा की जाएगी। हालांकि उन्होंने सरकार के ऐलान को लेकर तारीख के बारे में नहीं बताया।

मुजाहिद ने इस बात से भी इनकार किया कि नई सरकार के गठन को लेकर तालिबान नेतृत्व के भीतर कोई मतभेद है। उन्होंने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा था कि अंतिम निर्णय ले लिए गए हैं, हम अब तकनीकी मुद्दों पर काम कर रहे हैं। हालांकि इससे पहले मुल्ला अब्दुल गनी बरादर का नाम अफगानिस्तान में नई सरकार के प्रमुख नेता के रूप में सामने आया था। 

बरादार तालिबान के नेता मुल्ला मोहम्मद उमर के करीबी दोस्त थे। जब तालिबान ने आखिरी बार अफगानिस्तान पर शासन किया था तब बरादर ने उप रक्षा मंत्री के रूप में कार्य किया था।


अफगानिस्तान में तालिबान की सरकार, मोहम्मद हसन बने पीएम, अब्दुल गनी बरादर बने डिप्टी PM, जानिए-कैबिनेट में किस-किस को मिली जगह

तालिबान की नई सरकार में मुल्ला मोहम्मद हसन अखुंद को तालिबानी सरकार का प्रधानमंत्री बनाया गया है। अब्दुल गनी बरादर को अफगानिस्तान का नया उप प्रधानमंत्री बनाया गया है।

काबुल: अफगानिस्तान पर 15 अगस्त को कब्जा करने के बाद आखिरकार आज देश में तालिबान की सरकार बन गई है। तालिबान ने अपनी नई सरकार का ऐलान कर दिया है। तालिबान की नई सरकार में मुल्ला मोहम्मद हसन अखुंद को तालिबानी सरकार का प्रधानमंत्री बनाया गया है। अब्दुल गनी बरादर को अफगानिस्तान का नया उप प्रधानमंत्री बनाया गया है।

एक न्यूज एजेंसी से मिले इनपुट के मुताबिक, तालिबान की सरकार में सिराज हक्कानी को आंतरिक मामलों का मंत्री बनाया गया है। तालिबान के मुख्य प्रवक्ता ज़बीउल्लाह मुजाहिद ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बताया कि मुल्ला मोहम्मद हसन को अहम जिम्मेदारी दी गई है। 

तालिबान के को-फाउंडर रहे अब्दुल गनी बरादर को उप प्रधानमंत्री की जिम्मेदारी दी गई है। तालिबान के संस्थापक मुल्ला उमर के बेटे मुल्ला याकूब को रक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी दी गई है।

खूंखार हक्कानी नेटवर्क के नेता सिराजुद्दीन हक्कानी को आंतरिक मामलों का मंत्री बनाया गया है। इसके अलावा सिराजुद्दीन हक्कानी को तालिबान के उपनेता की जिम्मेदारी भी दी गई है।


काबुल में एक सरकारी कार्यालय में तालिबान के प्रवक्ता ने कहा कि यह कैबिनेट अभी पूरा नहीं है, यह सिर्फ कार्यकारी है। तालिबान के प्रवक्ता ज़बीउल्लाह मुजाहिद ने कहा कि हम देश के अन्य हिस्सों से भी लोगों को इस कैबिनेट में शामिल करने की कोशिश करेंगे।


अफगान में तालिबानी सरकार! मुल्ला मोहम्मद हसन होंगे सरकार के मुखिया, इस खुंखार आतंकी को गृहमंत्री बनाने की तैयारी

अफगानिस्तान पर बंदूकों के दम पर कब्जा करनेवाले तालिबान ने अब देश में सरकार गठन की कवायद तेज कर दी है या फिर यह भी कहना सही होगा कि सरकार बनाने को लेकर सारी तैयारियां लगभग पूरा हो चुकी हैं और जल्द ही नई सरकार का एलान हो जाएगा।

काबुल: अफगानिस्तान पर बंदूकों के दम पर कब्जा करनेवाले तालिबान ने अब देश में सरकार गठन की कवायद तेज कर दी है या फिर यह भी कहना सही होगा कि सरकार बनाने को लेकर सारी तैयारियां लगभग पूरा हो चुकी हैं और जल्द ही नई सरकार का एलान हो जाएगा।

इस बीच खबर है कि तालिबान की सरकार का नेतृत्व मुल्ला मोहम्मद हसन अखुंद को दिए जाने की तैयारी है। वह अब तक तालिबान की शीर्ष निर्णयकारी संस्था 'रहबरी शूरा' के प्रमुख रहे हैं। पाकिस्तानी मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक तालिबान के सरगना मुल्ला हेबतुल्लाह अखुंदजादा ने हसन को यह जिम्मेदारी देने का फैसला लिया है। इसके अलावा मुल्ला अब्दुल गनी बरादर को उनके डिप्टी के तौर पर नियुक्त करने का फैसला हुआ है।

इसके अलावा बरादर के साथ ही मुल्ला अबदस सलाम को भी हसन अखुंद के डिप्टी के तौर पर नियुक्त करने का फैसला लिया गया है। कई सूत्रों के हवाले से द न्यूज इंटरनेशनल ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया है कि अगले सप्ताह तक सरकार गठन का ऐलान हो सकता है। मुल्ला हसन फिलहाल तालिबान की शीर्ष निर्णयकारी संस्था रहबरी शूरा के मुखिया हैं।

सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, मुल्ला हसन कंधार के रहने वाले हैं, जहां से तालिबान का जन्म हुआ था। वह तालिबान के संस्थापक सदस्यों में से एक रहे हैं। वह 20 साल तक रहबरी शूरा के हेड रहे हैं और उन्हें हेबतुल्लाह अखुंदजादा का करीबी माना जाता रहा है। तालिबान की 1996 की पिछली सरकार में हसन विदेश मंत्री और डिप्टी प्राइम मिनिस्टर के पद पर थे। तालिबान के संस्थापक मुल्ला उमर के बेटे मुल्ला याकूब को डिफेंस मिनिस्टर की जिम्मेदारी मिल सकती है। 

यह भी खबर है कि याकूब मुल्ला हेबतुल्ला का छात्र रहा है। इस सरकार गठन की खास बात यह है कि तालिबान के एक और धड़े हक्कानी नेटवर्क के नेता सिराजुद्दीन हक्कानी को होम मिनिस्टर की जिम्मेदारी मिल सकती है। वह जलालुद्दीन हक्कानी के बेटे हैं, जिन्होंने सोवियत यूनियन के खिलाफ लड़ाई का नेतृत्व किया था।

वहीं अमीर खान मुत्तकी को विदेश मंत्री बनाने की तैयारी है। सिराजुद्दीन हक्कानी को ग्लोबल आतंकी घोषित किया गया है। एफबीआई की वेबसाइट के मुताबिक अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने सिराजुद्दीन हक्कानी की जानकारी देने पर 50 लाख अमेरिकी डॉलर का ऐलान किया था। अमेरिकी एजेंसियों के मुताबिक सिराजुद्दीन पाकिस्तान में रहता रहा है। 



यूएस द्वारा घोषित किए गए खुंखार आतंकी को गृहमंत्री बनाने की तैयारी

हक्कानी पाकिस्तान के नॉर्थ वजीरिस्तान इलाके में रहता रहा है। इसके अलावा उसके आतंकी संगठन अलकायदा से भी करीबी संबंध रहे हैं। काबुल के एक होटल में 2008 में हुए आतंकी हमले में सिराजुद्दीन हक्कानी वॉन्टेड रहा है। इस हमले में एक अमेरिकी नागरिक समेत 6 लोगों की मौत हो गई थी।

माना जाता रहा है कि हक्कानी ने पाकिस्तान से बैठे-बैठे ही अफगानिस्तान में कई आतंकी हमले कराए थे, जिसमें अमेरिका और नाटो सेनाओं को निशाना बनाया गया था। इसके अलावा 2008 में हामिद करजई की हत्या की साजिश रचने के मामले में भी सिराजुद्दीन हक्कानी की संलिप्तता रही है।


अफगान छोड़ने से पहले अरबों डॉलर का हथियार जला गई थी अमेरिकी फौज, तालिबानियों को सता रहा है माइंस का डर !

अमेरिकी फौज ने अरबों डॉलर के हथियार, वाहन और अन्य सैन्य उपकरण जलाकर नष्ट कर दिए थे। वहीं, तालिबानी आतंकियों को अब उन स्थानों पर भी जाने से डर लग रहा है जहां अमेरिकी फौज के हथियार आदि जले-अधजले व नष्ट हुए पड़े हैं। तालिबानी आतंकियों को डर है कि कहीं वहां पर अमेरिकी फौज द्वारा माइंस ना बिछाए गए हों।

काबुल: अब तक ऐसी खबरें आ रही थी कि अमेरिका ने सिर्फ काबुल एयरपोर्ट पर उन सैन्य हथियारों और वाहनों को डिसेबल कर दिया था जिसे वह लेकर नहीं जा सके थे। लेकिन अब खबर आ रही है कि अमेरिकी फौज ने अरबों डॉलर के हथियार, वाहन और अन्य सैन्य उपकरण जलाकर नष्ट कर दिए थे। वहीं, तालिबानी आतंकियों को अब उन स्थानों पर भी जाने से डर लग रहा है जहां अमेरिकी फौज के हथियार आदि जले-अधजले व नष्ट हुए पड़े हैं। तालिबानी आतंकियों को डर है कि कहीं वहां पर अमेरिकी फौज द्वारा माइंस ना बिछाए गए हों।

अफगानिस्तान छोड़ने से पहले अमेरिकी अरबों डॉलर के हथियार और वाहनों को बर्बाद कर गए हैं। लोकल अफगान मीडिया ने तालिबान के हवाले से यह बात कही है। सोमवार को तालिबान ने रिपोर्टर्स को सीआईए के पूर्व ऑपरेशनल सेंटर के अंदर जाने की इजाजत दी थी। इस दौरान उसने बताया कि अमेरिकी सैनिकों ने यहां से जाने से पहले सभी मिलिट्री उपकरण, वाहन और कागजात को आग लगा दी थी। टोलो न्यूज ने इस बारे में खबर दी है। 

‘ईगल’ नाम का सीआईए का यह कैंप काबुल के देह सब इलाके में स्थित है। अमेरिकी खुफिया अफसर और अफगान की एनडीएस 01 फोर्सेज यहां पर तैनात थीं। अब यह इलाका तालिबान के कब्जे में है। अमेरिकी सेना ने जरूरी कागजात, सैकड़ों हम्वीज, सैन्य टैंक और हथियारों को नष्टकर दिया था। तालिबान ने टोलो न्यूज के हवाले से यह बात कही है। कैंप के कमांडर मौलवी अथनैन ने कहा कि उन्होंने यहां से वह सबकुछ नष्ट कर दिया जो इस्तेमाल हो सकता था। 

इस बीच अभी तालिबान ने इस कैंप के कई कमरों में प्रवेश नहीं किया है। उन्हें डर है कि यहां पर माइन्स बिछी हो सकती हैं। गौरतलब है कि 31 अगस्त की सुबह अमेरिकी सेना ने अफगानिस्तान छोड़ दिया था।

गौरतलब है कि 20 साल तक चले लंबे युद्ध के बाद अमेरिकियों के यहां से जाने के बाद फिलहाल अफगानिस्तान बदहाल है। अमेरिकी रक्षा सचिव लॉयड जे ऑस्टिन-3 ने कहा कि वॉशिंगटन ने अफगानिस्तान से 6000 अमेरिकी नागरिकों निकाला है। यहां से उसने कुल 124000 नागरिकों को निकाला है। 15 अगस्त 2021 को तालिबान ने अफगानिस्तान पर पूरी तरह से कब्जा कर लिया हालांकि, पंजशीर घाटी में अभी भी उसका कब्जा नहीं है। 



पाकिस्तान के खिलाफ काबुल में नारेबाजी से भड़का तालिबान, करा दी फायरिंग

वैसे तो यह बात जग जाहिर हो चुकी है कि पाकिस्तान ही तालिबान का आका है और वह पाकिस्तान के लिए कुछ भी करने को तैयार है। लेकिन अब वह पाकिस्तान के खिलाफ प्रदर्शन करने वालों को भी नहीं झेल पा रहा है और पाकिस्तान विरोधी नारेबाजी करने पर फायरिंग कर दे रहा है।

काबुल: अफगानिस्तान पर बंदूकों के दम पर सत्ता हासिल करने वाला तालिबान बेशक दुनिया से तमाम तरीके के वादे कर रहा है और 'गुड ब्वाय' बनने का प्रयास कर रहा है लेकिन हकीकत इसके उलट है। वैसे तो यह बात जग जाहिर हो चुकी है कि पाकिस्तान ही तालिबान का आका है और वह पाकिस्तान के लिए कुछ भी करने को तैयार है। लेकिन अब वह पाकिस्तान के खिलाफ प्रदर्शन करने वालों को भी नहीं झेल पा रहा है और पाकिस्तान विरोधी नारेबाजी करने पर फायरिंग कर दे रहा है।

मिली जानकारी के मुताबिक, काबुल पर तालिबान के कब्जे के बाद से अफगानिस्तान में आम लोग लगातार पाकिस्तान का विरोध कर रहे हैं। काबुल की सड़कों पर लोग पाकिस्तान मुर्दाबाद, आजादी और सपोर्ट पंजशीर के नारे लगा रहे हैं। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अफगान लोग अफगानिस्तान में पाकिस्तान समर्थित आतंकवाद के विरोध में प्रदर्शन कर रहे हैं। ये लोग विरोध-प्रदर्शन करते हुए काबुल स्थित पाकिस्तान दूतावास भी पहुंचे जहां पाकिस्तान मुर्दाबाद के नारे लगाए हैं। न्यूज एजेंसी एएफपी की रिपोर्ट मुताबिक विरोध-प्रदर्शन कर रहे इन लोगों को तितर-बितर करने के लिए तालिबान ने हवाई फायरिंग की है।

जानकारी के मुताबिक, हज़ारों महिला और पुरुष प्रदर्शन कर रहे हैं। इन लोगों का कहना है कि अफगानिस्तान को एक स्वतंत्र सरकार चाहिए न कि कोई पाकिस्तानी कठपुतली सरकार। लोग पाकिस्तान, अफगानिस्तान छोड़ो जैसे नारे लगा रहे हैं।

बता दें कि अफगानिस्तान में तालिबान के सरकार गठन में हो रही देरी के बीच पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई के प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल फैज हमीद 4 सितंबर को काबुल पहुंचे थे। रिपोर्ट्स बताती हैं कि हमीद ने तालिबान के वरिष्ठ नेताओं से बातचीत की है और सरकार में हक्कानी नेटवर्क के उचित प्रतिनिधित्व की बात उठाई है।

पाकिस्तान पर तालिबान को सपोर्ट करने के आरोप लगते रहे हैं। कई मीडिया रिपोर्ट्स ने इस बात का सबूत भी पेश किया है कि  कैसे पाकिस्तान अफगानिस्तान सरकार को अस्थिर करके तालिबान का सहयोग कर रही है। अफगानिस्तान और अमेरिका के साथ सालों से जारी युद्ध में पाकिस्तान एकमात्र ऐसा देश रहा है जो तालिबान का समर्थक है। तालिबान ने लगातार पाकिस्तान को अपना दूसरा घर बताया है। हाल ही पाकिस्तान के केंद्रीय मंत्री ने कहा था कि पाकिस्तान, तालिबान का 'संरक्षक' रहा है और लंबे वक्त तक उनकी देखभाल की है। पाकिस्तान, तालिबान शासन को मान्यता देने वाला सबसे पहला देश हो सकता है। 


अफगानिस्तान: अभी तालिबान के लिए पंजशीर 'बहुत' दूर है!

अब तक दोनों ही पक्ष अपनी-अपनी जीत के साक्ष्य दुनिया के सामने नहीं रख पाए हैं। 15 अगस्त को काबुल पर कब्जा करने के बाद से तालिबान लगातार पंजशीर को कब्जाने की कोशिश में है पर उसे अबतक कड़ी टक्कर मिलती रही है।

काबुल: तालिबान यह दावा कर रहा है कि उसने पंजशीर पर कब्जा कर लिया है लेकिन सच्चाई कुछ ही नजर आ रही है। या फिर यह कहना सही होगा कि तालिबान के लिए अभ पंजशीर 'बहुत दूर' है। दरअसल, तालिबान ने तीसरी बार पंजशीर पर जीत का दावा किया है। दूसरी ओर, पंजशीर के लड़ाकों का दावा है कि वे अब भी तालिबानियों को कड़ी टक्कर दे रहे हैं।

अब तक दोनों ही पक्ष अपनी-अपनी जीत के साक्ष्य दुनिया के सामने नहीं रख पाए हैं। 15 अगस्त को काबुल पर कब्जा करने के बाद से तालिबान लगातार पंजशीर को कब्जाने की कोशिश में है पर उसे अबतक कड़ी टक्कर मिलती रही है।

पंजशीर घाटी में तालिबान के खिलाफ नेशनल रेजिस्टेंस फोर्स के जवान खड़े हैं। इस दल में स्थानीय सशस्त्र बल के लोग (मिलिशिया) और पूर्व अफगान सुरक्षा बल शामिल हैं। इसकी संख्या करीब नौ से दस हजार के बीच है। हाल में जारी तस्वीरों से पता लगता है कि ये संगठित ढंग से प्रशिक्षण प्राप्त हैं।

बताते चलें कि काबुल ढहने के बाद पूर्व राष्ट्रपति अमरुल्ला साहेल और अफगान सरकार के तालिबान के सामने न झुकने वाले सैनिकबल पंजशीर चले गए थे, जहां वे मसूद के नेतृत्व में तालिबान को टक्कर दे रहे हैं।

इस बीच नेशनल रजिस्टेंस फोर्स के प्रवक्ता अली माइसम नाजारी ने समाचार एजेंसी रॉयर्ट्स से कहा कि वे तभी अपनी ओर से शांति वार्ता के लिए तैयार हो सकते हैं, जब तालिबान विकेंद्रीकृत राजनीति करने को राजी हो जाए। यानी इस तरह का शासन करे, जिसमें सामाजिक न्याय, समानता और सभी के स्वतंत्रता हो।

800 तालिबानी आतंकियों को मारने का दावा

15 अगस्त को काबुल पर तालिबान के कब्जे के बाद से पड़ोसी राज्य पंजशीर के लड़ाकों ने अपनी जमीन की सुरक्षा बढ़ा दी थी। पंजशीर में मसूद का दावा है कि अब तक हुईं झड़पों में वे करीब 800 लड़ाकों को मार गिरा चुके हैं।


अफगानिस्तान में तालिबान सरकार! देश के झंडे का साथ-साथ राष्ट्रगान भी बदलेगा

अफगानिस्तान में बंदूकों के दम पर कब्जा करने के बाद तालिबान ने अब सरकार गठन की कवायद तेज कर दी है। तालिबान के अफगान में देश का झंड़ा बदलने के साथ-साथ देश का राष्ट्रगान भी बदला जाएगा।

काबुल: अफगानिस्तान में बंदूकों के दम पर कब्जा करने के बाद तालिबान ने अब सरकार गठन की कवायद तेज कर दी है। तालिबान के अफगान में देश का झंड़ा बदलने के साथ-साथ देश का राष्ट्रगान भी बदला जाएगा।

एक समाचार चैनल की रिपोर्ट के मुताबिक, तालिबान के प्रवक्ता जबीहुल्ला मुजाहिद ने सोमवार को मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि अगली सरकार अफगानिस्तान के झंडे और राष्ट्रगान पर फैसला करेगी। उन्होंने यह भी कहा कि तालिबान प्रशासन सरकारी कर्मचारियों को वेतन भी देगा।

इस बीच, तालिबान के सह-संस्थापक मुल्ला बरादर को अफगानिस्तान में तालिबान सरकार के नेता के रूप में बताए जाने की खबरों के बीच, जबीहुल्ला ने कहा कि मुल्ला हिबातुल्लाह अखुंदजादा जीवित है और जल्द ही सार्वजनिक रूप से सामने आएगा। 


'हमारे लड़ाके खून के आखिरी बूंद तक लड़ेंगे', तालिबान के कब्जे के दावे पर गरजे अहमद मसूद

मसूद ने तालिबान के खिलाफ जंग जारी रहने की हुंकार भरते हुए कहा कि हम अजेय हैं और तालिबान के खिलाफ आखिरी बूंद तक हमारे लड़ाके जंग करेंगे।

काबुल: एक तरफ तालिबान ने पंजशीर घाटी पर खुद का कब्जा होने का दावा किया है तो दूसरी तरफ उससे लोहा लेने वाले नेशनल रेजिस्टेंस फोर्स के नेता अहमद मसूद ने इसे खारिज किया है। मसूद ने तालिबान के खिलाफ जंग जारी रहने की हुंकार भरते हुए कहा कि हम अजेय हैं और तालिबान के खिलाफ आखिरी बूंद तक हमारे लड़ाके जंग करेंगे।

मसूद ने कहा कि मैं अपने खून की आखिरी बूंद तक तालिबान से लड़ता रहूंगा। उनका यह बयान तालिबान के दावे के कुछ घंटों के बाद ही आया है, जिसमें उसने कहा था कि पंजशीर पर उन्होंने कब्जा जमा लिया है। सोशल मीडिया साइट फेसबुक पेज पर जारी एक ऑडियो संदेश में मसूद ने कहा, 'हमारी फोर्सेज अब भी पंजशीर में मौजूद हैं और तालिबान के खिलाफ जंग जारी है।'

इसके अलावा उन्होंने अफगानिस्तान के लोगों से भी तालिबान के खिलाफ जंग में साथ आने की अपील की थी। इससे पहले तालिबान लड़ाकों की ओर से पंजशीर घाटी के गवर्नर हाउस पर तालिबानी झंडा फहराने का वीडियो सामने आया था। तालिबान का कहना है कि उन्होंने पंजशीर पर कब्जा जमा लिया है और अब लड़ाई को रोका नहीं जाएगा। तालिबान के मुताबिक अहमद मसूद ने उनसे सीजफायर और समझौते का प्रस्ताव रखा था, जिसे उन्होंने खारिज कर दिया है।

इसके अलावा अहमद मसूद ने पंजशीर की जंग में पाकिस्तान के भी शामिल होने का आरोप लगाया है। मसूद ने कहा कि पाकिस्तान की ओर से तालिबान को पंजशीर में मदद की जा रही है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय मूकदर्शक बना हुआ है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की मदद से ही तालिबान ने उनके परिवार के सदस्यों की हत्या कर दी थी। टोलो न्यूज के मुताबिक अहमद मसूद ने कहा, 'सभी देश पंजशीर में पाकिस्तान की संलिप्तता के बारे में जानते हैं, लेकिन चुप हैं। पाकिस्तान ने पंजशीर में सीधे तौर पर अफगानियों पर हमला किया है।'


अफगानिस्तान में सरकार बनाने जा रहा तालिबान, चीन और पाकिस्तान होंगे खास मेहमान

सूत्रों का दावा है कि तालिबान ने नई सरकार की ताजपोशी में शामिल होने के लिए पाकिस्तान, चीन तुर्की, कतर, रूस, और ईरान को बुलावा भेजा है।

काबुल: अफगानिस्तान पर बंदूकों को दम पर सत्ता हथियाने वाला तालिबान सरकार गठन की तैयारी कर रही है। ताजपोशी के मौके पर चीन और पाकिस्तान उसके खास मेहमान होंगे। सूत्रों का दावा है कि तालिबान ने नई सरकार की ताजपोशी में शामिल होने के लिए पाकिस्तान, चीन तुर्की, कतर, रूस, और ईरान को बुलावा भेजा है। हालांकि अभी तक इस समारोह में तालिबान द्वारा भारत को आमंत्रित करने की बात सामने नहीं आई है। 


तालिबान के प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने काबुल में सोमवार को एक प्रेस कांफ्रेंस की। मुजाहिद ने कहा कि युद्ध खत्म हो चुका है। अब हमें एक स्थिर अफगानिस्तान की उम्मीद है। उसने यह भी कहा कि अब जो भी विद्रोह करेगा, देश और यहां के लोगों का दुश्मन होगा। प्रेस कांफ्रेंस में मुजाहिद ने यह भी कहा कि भगोड़े कभी भी इस देश का पुनर्निर्माण नहीं करेंगे। इसे हमें और हमारे देश के लोगों को ही करना होगा। मुजाहिद ने यह भी कहा कि वह काबुल एयरपोर्ट पर संचालन फिर से शुरू करने वाला है। इसके लिए कतर, तुर्की और यूएई से तकनीकी टीमें काम कर रही हैं।

गौरतलब है कि पंजशीर पर कब्जे के बाद पूरे अफगानिस्तान पर तालिबान का कब्जा हो चुका है। तालिबान ने कहा कि उसने काबुल के उत्तर में स्थित पंजशीर प्रांत पर कब्जा कर लिया है। पिछले महीने 15 अगस्त को काबुल फतह करने के बाद देश का एकमात्र यही हिस्सा था, जहां तालिबान अभी तक जूझ रहा था। 

सालेह पंजशीर छोड़ ताजिकिस्तान भागे

वहीं, दूसरी तरफ तालिबान लड़ाके रातोंरात पंजशीर के आठ जिलों में फैल चुके हैं। हालांकि अपनी सुरक्षा के लिए इस सूत्र ने अपना और इलाके का नाम बताने से इंकार कर दिया। सोमवार को ही तालिबान ने इस बात की घोषणा कर दी थी कि पंजशीर पर अब उसका पूरी तरह से कब्जा हो चुका है। बताया जाता है कि इसके बाद अफगानिस्तान के पूर्व उपराष्ट्रपति अमरुल्लाह सालेह पंजशीर छोड़कर ताजिकिस्तान चले गए हैं। 


पंजशीर पर तालिबान का कब्जा, कहा-'बागियों को बख्शेंगे नहीं', अमरुल्लाह सालेह के ताजिकिस्तान भागने की खबर

पंजशीर घाटी पर कब्जा जमाने के बाद तालिबान ने अफगानिस्तान में उसके राज के खिलाफ विद्रोह करने वालों को कड़ी चेतावनी दी है। तालिबान ने कहा है कि यदि कोई भी विद्रोह करता है तो उसे बख्शा नहीं जाएगा और करारा हमला किया जाएगा।

by न्यूज9डेस्क

काबुल: तालिबान ने अफगान के बचे हुए क्षेत्र पंजशीर घाटी पर भी कब्जा कर लिया है। साथ ही तालिबान ने 'बागियों' को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि वह उन्हें किसी भी कीमत पर नहीं बख्सेगा। वहीं, दूसरी तरफ अमरुल्लाह सालेह के ताजिकिस्तान भागने की खबर है।

पंजशीर घाटी पर कब्जा जमाने के बाद तालिबान ने अफगानिस्तान में उसके राज के खिलाफ विद्रोह करने वालों को कड़ी चेतावनी दी है। तालिबान ने कहा है कि यदि कोई भी विद्रोह करता है तो उसे बख्शा नहीं जाएगा और करारा हमला किया जाएगा। इसके अलावा तालिबान के प्रवक्ता ने कहा कि अभी अफगानिस्तान में एक अंतरिम सरकार का ही गठन किया जाएगा, जिसमें बाद में बदलाव किए जा सकते हैं।

दरअसल तालिबान के ही अलग-अलग गुटों में सत्ता के बंटवारे को लेकर मतभेद की स्थिति है। शायद यही वजह है कि फिलहाल अंतरिम सरकार ही बनाई जा रही है ताकि स्थायी सरकार के गठन के लिए वक्त मिल सके।

एक समाचार एजेंसी से तालिबान के प्रवक्ता ने कहा कि पंजशीर घाटी में विद्रोहियों का नेतृत्व कर रहे पूर्व उपराष्ट्रपति अमरुल्लाह सालेह देश छोड़कर ही भाग गए हैं। तालिबान के प्रवक्ता ने दावा किया है कि अमरुल्लाह सालेह ताजिकिस्तान भाग गए हैं। हालांकि इससे पहले कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया था कि सालेह गुप्त ठिकाने में हैं और वहीं से लड़ाई का नेतृत्व कर रहे हैं। उनके अलावा पंजशीर के एक और नेता अहमद मसूद ने ट्वीट कर बताया है कि वे सुरक्षित हैं। अमरुल्लाह सालेह लगातार जंग जारी रखने और तालिबान के आगे सरेंडर न करने की बात करते रहे हैं। 

हालांकि तालिबान के अभियान को आगे बढ़ता देख वह शायद देश छोड़कर निकल गए हैं। लेकिन आमतौर पर सोशल मीडिया पर एक्टिव रहने वाले सालेह ने अपनी लोकेशन और पंजशीर के हालातों को लेकर कोई जानकारी नहीं दी है। इस बीच तालिबान का कहना है कि वह अफगानिस्तान में हालात सामान्य बनाने की कोशिश में जुटा है। तालिबान का कहना है कि जल्दी ही काबुल से दूसरे देशों के लिए उड़ानों का संचालन शुरू हो सकेगा। इससे अफगानिस्तान में फंसे उन लोगों को राहत मिलेगी, जो कहीं और जाना चाहता है। इसके अलावा अफगानिस्तान का दुनिया से संपर्क फिर बहाल हो सकेगा।



अफगानिस्तान: पंजशीर घाटी पर तालिबान ने किया अपने कब्जे का दावा

हालांकि, अभी तक तालिबान से जंग लड़ रहे रेजिस्टेंस फोर्स का नेतृत्व करने वाले अहमद मसूद की तरफ से कोई बयान नहीं आया है। सोशल मीडिया पर शेयर की जा रही कुछ तस्वीरों में तालिबानी लड़ाकों को पंजशीर के गवर्नर ऑफिस के गेट के बाहर खड़ा देखा गया है।

काबुल: एक बार फिर से पंजशीर घाटी पर तालिबान द्वारा कब्जे का दावा किया जा रहा है। तालिबान ने सोमवार को ऐलान किया है कि अब तक अजेय रहा पंजशीर प्रांत पूरी तरह उसके कब्जे में है। तालिबान प्रवक्ता जबीउल्लाह ने एक बयान जारी कर कहा कि इस जीत से हमारा देश पूरी तरह से युद्ध के दलदल से निकल चुका है।

Taliban sources say their forces take Panjshir before government formation  in Afghanistan

हालांकि, अभी तक तालिबान से जंग लड़ रहे रेजिस्टेंस फोर्स का नेतृत्व करने वाले अहमद मसूद की तरफ से कोई बयान नहीं आया है। सोशल मीडिया पर शेयर की जा रही कुछ तस्वीरों में तालिबानी लड़ाकों को पंजशीर के गवर्नर ऑफिस के गेट के बाहर खड़ा देखा गया है।

What is India big challenge in Afghanistan Pakistan and China are big  obstacles with Taliban influence Jagran Special

इससे पहले तालिबान ने रविवार को दावा किया था कि उसने पंजशीर प्रांत के सभी जिलों पर नियंत्रण कर लिया है। तालिबान के एक प्रवक्ता ने कहा कि पंजशीर के सभी जिला मुख्यालय, पुलिस मुख्यालय और सभी कार्यालयों पर कब्जा कर लिया गया है। तालिबान ने कहा कि विपक्षी बलों के कई हताहत भी हुए हैं। वाहनों, हथियारों को भी नुकसान पहुंचा है। 

Afghan security forces have repelled an overnight attack by the Taliban

इस दौरान रविवार को यह भी खबर आई कि रेजिस्टेंस फ्रंट के प्रवक्ता की और घाटी में तालिबान से लोहा ले रहे अहमद मसूद के करीबी फहीम दश्ती की भी तालिबानी हमले में रविवार को मौत हो गई थी। पंजशीर में तालिबान के आगे कमजोर पड़ने के बीच नेशनल रेजिस्टेंस फ्रंट ऑफ अफगानिस्तान ने एक बयान जारी कर सीजफायर करने की मांग की थी। 

गौरतलब है कि 15 अगस्त को काबुल पर कब्जे के बाद से अब तक पंजशीर ही अफगानिस्तान का अकेला प्रांत था, जो तालिबान के नियंत्रण में नहीं था। कई प्रत्यक्षदर्शियों ने पहचान जाहिर न करने की शर्त पर समाचार एजेंसी एपी को बताया कि रविवार रात हजारों तालिबानी लड़ाकों ने पंजशीर के आठ जिलों पर कब्जा किया।


तालिबानी नेता मुल्ला बरादर से UN के मानवीय मामलों के अवर महासचिव ने की मुलाकात, जानिए-अफगानिस्तान को लेकर क्या हुई बात

उनकी ये मुलाकात काबुल में विदेश मंत्रालय में हुई। अफगानिस्तान के टोलो न्यूज़ के मुताबिक इस मुलाकात की जानकारी तालिबान के प्रवक्ता मोहम्मद नईम ने ट्वीट के ज़रिए दी है।

काबुल: अफगानिस्तान में बंदूकों के दम पर कब्जा करने वाला तालिबान अब धीरे-धीरे दुनिया भर के नेताओं से मुलाकात का सिलसिला शुरू कर चुका है। चीन और पाकिस्तान को हिमायती बनाने के बाद भारत के राजदूत से भी तालिबान ने मुलाकात की। अब मुलाकात के सिलसिले को तालिबान आगे बढ़ाता ही जा रही है। ताजा मामले में यूएन के मानवीय मामलों के अवर महासचिव मार्टिन ग्रीफिथ्स से तालिबानी नेता मुल्ला बरादर ने मुलाकात की है।

उनकी ये मुलाकात काबुल में विदेश मंत्रालय में हुई। अफगानिस्तान के टोलो न्यूज़ के मुताबिक इस मुलाकात की जानकारी तालिबान के प्रवक्ता मोहम्मद नईम ने ट्वीट के ज़रिए दी है। मोहम्मद नईम ने ट्वीट में जानकारी दी कि मुलाकात के बाद मार्टिन ग्रीफिथ्स ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र अफगानिस्तान के साथ अपना समर्थन और सहयोग जारी रखेगा।


अफगानिस्तान के तालिबान शासकों ने रविवार को काबुल से और काबुल के लिए कुछ घरेलू यात्री उड़ानें शुरू कर दीं। इसके साथ ही उन्होंने अब तक अपने कब्जे से दूर पंजशीर प्रांत पर हमला तेज कर दिया है। अफगानिस्तान की राजधानी के उत्तर में स्थित छोटे से प्रांत पंजशीर में तालिबान विरोधी लड़ाकों का नेतृत्व अफगानिस्तान के पूर्व उपराष्ट्रपति अमरुल्ला सालेह कर रहे हैं जिन्होंने लड़ाई की वजह से विस्थापित हुए हजारों लोगों के लिए मानवीय सहायता की अपील की।


तालिबान के एक वरिष्ठ प्रवक्ता ने रविवार को ट्वीट किया कि पंजशीर के आठ जिलों में से एक रोखा जिले पर तालिबान का नियंत्रण है। पंजशीर के लड़ाकों से तालिबान के कई प्रतिनिधिमंडलों ने बात की है जो विफल रही है। अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी के देश छोड़ने के बाद सालेह पंजशीर पहुंच गए थे जिसके बारे में कहा जाता है कि उसे कोई जीत नहीं सकता।


अफगानिस्तान: पंजशीर घाटी में तालिबान से जंग में अहमद मसूद की फौज के प्रवक्ता फहीम दश्ती की मौत

रेजिस्टेंस फोर्स से जुड़े कई ट्विटर हैंडलों से भी रेजिस्टेंस फ्रंट के प्रवक्ता फहीम दश्ती की मौत की जानकारी दी गई है।

काबुल: तालिबान से जंग के क्रम में अहमद मसूद के प्रवक्ता की मौत की खबर सामने आई है। रेजिस्टेंस फोर्स से जुड़े कई ट्विटर हैंडलों से भी रेजिस्टेंस फ्रंट के प्रवक्ता फहीम दश्ती की मौत की जानकारी दी गई है। 

एक ट्वीट में लिखा है, 'भारी मन से हम रेजिस्टेंस फ्रंट के प्रवक्ता फहीम दश्ती की तालिबानी आतंकियों के हमले में हुई मौत की जानकारी दे रहे हैं।' हालांकि, ट्वीट में इसके अतिरिक्त कुछ नहीं बताया गया है। 

बता दें कि पंजशीर में बढ़ते तालिबान के खतरे के बीच दश्ती अक्सर हर अपडेट ट्वीट किया करते थे। उन्होंने रविवार को भी ट्वीट कर यह जानकारी दी थी कि तालिबानी लड़ाकों को इस इलाके से खदेड़ दिया गया है।


दश्ती की मौत की खबर ऐसे समय आई है जब शुक्रवार रात से ही पंजशीर को लेकर तालिबान और रेजिस्टेंस फ्रंट के बीच जंग तेज हो गई है। फहीम दश्ती जमात-ए-इस्लामी पार्टी के वरिष्ठ नेता थे और साथ में वह फेडरेशन ऑफ अफगान जर्नलिस्ट्स के भी सदस्य थे।

गौरतलब है कि तालिबान ने पूरे अफगान पर कब्जा कर लिया है लेकिन पंजशीर के लड़ाके उसे कड़ी टक्कर दे रहे हैं।


पंजशीर के शेरों ने मार गिराए 600 तालिबानी आतंकी, एक हजार को किया कैद

एक तरफ तालिबान द्वारा पंजशीर पर खुद के कब्जे की बात कही जा रही है तो दूसरी तरफ उसके लड़ाकों के मरने और बंदी बनाये जाने की खबरें आ रही हैं।

काबुल: अफगानिस्तान के पंजशीर में तालिबान और विद्रोही बलों यानी रेजिस्टेंस फोर्सेस के बीच खूनी संघर्ष जारी है। इस बीच दोनों के बीच जंग तेज हो गई है। एक तरफ तालिबान द्वारा पंजशीर पर खुद के कब्जे की बात कही जा रही है तो दूसरी तरफ उसके लड़ाकों के मरने और बंदी बनाये जाने की खबरें आ रही हैं।


मिली जानकारी के मुताबिक, तालिबान और प्रतिरोध बलों की जंग में पंजशीर के उत्तर-पूर्वी प्रांत करीब 600 तालिबानी मारे गए हैं। स्पुतनिक ने अफगान रेसिस्टेंस बलों के हवाले से शनिवार को यह बात कही।

पंजशीर के रेजिस्टेंस फोर्स (प्रतिरोध बलों) का दावा है कि शनिवार सुबह से पंजशीर के विभिन्न जिलों में करीब 600 तालिबानियों का खात्मा किया गया। इतना ही नहीं, 1000 से ज्यादा तालिबानी लड़ाकों को कैद किया गया है या उन्होंने सरेंडर किया है। रेजिस्टेंस फोर्स के प्रवक्ता फहीम दास्ती ने यह ट्वीट किया।

स्पुतनिक के मुताबिक, प्रवक्ता ने आगे कहा कि तालिबान को अन्य अफगान प्रांतों से आपूर्ति प्राप्त करने में समस्या है। इस बीच, क्षेत्र में बारूदी सुरंगों की मौजूदगी की वजह से पंजशीर प्रतिरोध बलों के खिलाफ तालिबान का अभियान धीमा पड़ गया है।

तालिबान से जुड़े सूत्र ने कहा कि पंजशीर में लड़ाई जारी है, लेकिन कैपिटल बाजारक और प्रांतीय गवर्नर के परिसर की ओर जाने वाली सड़क पर बारूदी सुरंग होने की वजह से तालिबान को अपनी कार्रवाई की धीमा करना पड़ा है। 

पंजशीर को नेशनल रेजिस्टेंस फ्रंट का गढ़ माना जाता है, जिसकी अगुवाई पूर्व अफगान गुरिल्ला कमांडर अहमद शाह मसूद के बेटे अहमद मसूद और पूर्व राष्ट्र अमरुल्ला सालेह कर रहे हैं। पुरानी सरकार के सत्ता से बेदखल होने के बाद सालेह ने खुद को अफगानिस्तान का केयरटेकर यानी कार्यवाहक राष्ट्रपति घोषित किया है।


अफगानिस्तान: कुर्सी के चक्कर में तालिबान और हक्कानी नेटवर्क में झड़प, चली गोलियां, बरादर हुए घायल

अब कुर्सी के बंटवारे को लेकर तालिबान और हक्कानी नेटवर्क के बीच झड़प होने की खबर है। इतना ही नहीं इस दौरान हक्कानी नेटवर्क द्वारा बरादर पर गोली चला दी जिससे वह घायल हो गया है।

काबुल: अफगानिस्तान में बंदूकों के दम पर सत्ता हथियाने वाले तालिबान को लोकतंत्र की बात समझ में नहीं आ रही है। अब कुर्सी के बंटवारे को लेकर तालिबान और हक्कानी नेटवर्क के बीच झड़प होने की खबर है। इतना ही नहीं इस दौरान हक्कानी नेटवर्क द्वारा बरादर पर गोली चला दी जिससे वह घायल हो गया है।


खबर है कि तालिबान के सह-संस्थापक अब्दुल गनी बरादर और हक्कानी गुट के बीच झड़प हुई है और इसमें गोली भी चली है। अफगानिस्तान की वेबसाइट पंजशीर ऑब्जर्वर की रिपोर्ट के मुताबिक, इस झड़प में अब्दुल गनी बरादर घायल हो गए हैं। बताया जा रहा है  कि हक्कानी गुट ने ही गोली चलाई है।

पंजशीर ऑब्जर्वर ने सूत्रों के हवाले से खबर दी है कि काबुल में बीती रात तालिबान के दो वरिष्ठ नेताओं के बीच सत्ता संघर्ष को लेकर गोलीबारी हुई। पंजशीर के मुद्दे को कैसे हल किया जाए, इसे ललकेर अनस हक्कानी और मुल्ला बरादर के लड़ाकों के बीच असहमति थी और इसी को लेकर झड़प हो गई। हक्कानी की ओर से चलाई गई गोली में मुल्ला बरादर कथित तौर पर घायल हो गए हैं और उनका पाकिस्तान में इलाज चल रहा है। हालांकि, सूत्रों ने गोलीबारी की पुष्टि नहीं की है। 

इलाज के लिए पाकिस्तान ले जाया गया !


नॉर्दन अलायंस ने भी ट्वीट कर इस घटना का जिक्र किया है। नॉर्दन अलांयस का कहना है कि बरादर ने तालिबानियों को पंजशीर में नहीं लड़ने और काबुल आने को कहा है। इस झड़प में मुल्ला बरादर गंभीर रूप से घायल हो गए हैं और उन्हें इलाज के लिए पाकिस्तान ले जाया गया है। 

अलायंस ने काबुल में तालिबानी नेताओं के बीच आपसी संघर्ष को नहीं दिखाने को लेकर मीडिया को लताड़ा है। अलायंस का कहना है कि सत्ता के लिए इन लोगों में आपस में लड़ाई जारी है।


अफगानिस्तान: तालिबानी सरकार का गठन टला, पंजशीर के लिए जंग तेज, अहमद मसूद बोले-'जारी रहेगी लड़ाई'

एक तरफ तालिबान पंजशीर पर कब्जा कर लेने का दावा कर रहा है तो दूसरी तरफ पंजशीर के शेर उसके दावे की हवा निकाल दे रहे हैं। अब तालिबान और पंजशीर के बीच जंग तेज हो गई है।

काबुल: अफगानिस्तान पर तालिबान ने कब्जा तो कर लिया है लेकिन पंजशीर के शेरों से उसे कड़ी चुनौती मिल रही है। अभी भी तालिबान और पंजशीर के बीच जंग जारी है। एक तरफ तालिबान पंजशीर पर कब्जा कर लेने का दावा कर रहा है तो दूसरी तरफ पंजशीर के शेर उसके दावे की हवा निकाल दे रहे हैं। अब तालिबान और पंजशीर के बीच जंग तेज हो गई है।


अफगानिस्तान में तालिबान सरकार के गठन को टाले जाने के बीच पंजशीर पर कब्जे को लेकर लड़ाई तेज हो गई है। हालांकि तालिबान ने इस क्षेत्र पर कब्जा करने का दावा किया है, जिसके बाद इस जीत के जश्न में काबुल में जमकर फायरिंग की गई। तालिबान लड़ाकों की फायरिंग में 17 लोगों के मारे जाने और 41 के घायल होने की खबर है। पंजशीर घाटी पर नियंत्रण रखने वाले नार्दर्न अलायंस ने तालिबान के दावे को खारिज किया है। अलायंस ने कहा कि उसका पंजशीर पर अब भी नियंत्रण है।

तालिबान के एक कमांडर ने शुक्रवार को दावा किया, 'अल्लाह की रहम से अब हमारा पूरे अफगानिस्तान पर नियंत्रण हो गया है। पंजशीर अब हमारे नियंत्रण में है।' इस दावे खबर पहुंचते ही काबुल में शुक्रवार रात जमकर हर्ष फायरिंग की गई। फायरिंग की खबर पर तालिबान के प्रवक्ता जबीउल्ला मुजाहिद ने कहा, 'हवा में फाय¨रग करने से बचें और अल्लाह का शुक्रिया अदा करें। गोलियों से नागरिकों को नुकसान पहुंच सकता है। इसलिए गैरजरूरी गोलीबारी न करें।'


वहीं अफगानिस्तान के पूर्व उप राष्ट्रपति अमरुल्ला सालेह ने कहा कि उनके लोगों ने हथियार नहीं डाले हैं। उन्होंने एक वीडियो संदेश में कहा, 'इसमें शक नहीं है कि हम मुश्किल हालात में हैं। हम तालिबान के हमले का मुकाबला कर रहे हैं। हमारा अब भी नियंत्रण है।' सालेह पंजशीर में तालिबान से मुकाबला कर रहे गठबंधन बलों नार्दर्न अलायंस के कमांडरों में एक हैं।

नार्दर्न अलायंस के प्रमुख अहमद मसूद ने भी तालिबान के कब्जे के दावे को खारिज किया है। उन्होंने कहा कि वह अल्लाह, न्याय और आजादी के लिए संघर्ष करते रहेंगे। बता दें कि अफगानिस्तान के ज्यादातर हिस्सों पर नियंत्रण के बाद तालिबान ने गत 15 अगस्त को काबुल पर कब्जा कर लिया था। लेकिन काबुल से 150 किलोमीटर दूर पंजशीर क्षेत्र पर अब भी तालिबान के नियंत्रण से बाहर है।


तालिबान को अपनी कठपुतली बनाने की फिराक में पाकिस्तान आर्मी, जानिए-कैसे

अफगानिस्तान में तालिबान ने हथियारों के दम पर बेशक सत्ता हासिल कर ली हो लेकिन सत्ता संचालन करने का अनुभव उसके पास नहीं है। ऐसे में उसका परम मित्र पाकिस्तान अब उसकी 'मदद' करेगा। ये अलग बात है कि मदद के बहाने पाकिस्तान की आर्मी उसे अपनी कठपुतली बनाने की फिराक में है।

इस्लामाबाद/काबुल: अफगानिस्तान में तालिबान ने हथियारों के दम पर बेशक सत्ता हासिल कर ली हो लेकिन सत्ता संचालन करने का अनुभव उसके पास नहीं है। ऐसे में उसका परम मित्र पाकिस्तान अब उसकी 'मदद' करेगा। ये अलग बात है कि मदद के बहाने पाकिस्तान की आर्मी उसे अपनी कठपुतली बनाने की फिराक में है।


इमरान खान की सरकार को कंट्रोल कर रही पाकिस्तान की सेना अब अफगानिस्तान में भी तालिबान सरकार को अपने हाथों की कठपुतली बनाना चाहती है। तालिबान सरकार का गठन दो बार टाले जाने के बीच पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के प्रमुख काबुल पहुंचे हैं तो सेना प्रमुख कमर जावेद बाजवा ने कहा है कि इस्लामाबाद पड़ोसी देश में सरकार गठन में मदद कर रही है। बाजवा ने शनिवार को ब्रिटेन के विदेश सचिव डोमिनिक राब से कहा कि उनका देश अफगानिस्तान में समावेशी प्रशासन के गठन में मदद करेगा। 


जनरल बाजवा ने राब के साथ अफगानिस्तान में मौजूदा हालात को लेकर चर्चा की। पाकिस्तान ऑब्जर्वर की रिपोर्ट के मुताबिक, जनरल बाजवा ने बैठक में कहा कि पाकिस्तान अफगानिस्तान में शांति और स्थिरता के लिए लड़ता रहेगा और समावेशी प्रशासन के गठन में मदद करेगा। जनरल बाजवा ने यह बात ऐसे समय पर कही है जब पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी के प्रमुख लेफ्टिनेंट जरनल फैज हमीद शनिवार को काबुल पहुंचे। तालिबान नेतृत्व सरकार गठन की प्रक्रिया को अब तक अंजाम नहीं दे सका है।

तालिबान ने अफगानिस्तान में नयी सरकार के गठन को अगले सप्ताह के लिए स्थगित कर दिया है। तालिबान के प्रवक्ता जबीउल्ला मुजाहिद ने शनिवार को यह जानकारी दी। तालिबान एक ऐसी सरकार बनाने के लिये संघर्ष कर रहा है जो समावेशी और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को स्वीकार्य हो। 

उम्मीद की जा रही थी कि तालिबान शनिवार को काबुल में नई सरकार के गठन की घोषणा करेगा, जिसका नेतृत्व संगठन के सह-संस्थापक मुल्ला अब्दुल गनी बरादर कर सकते हैं। तालिबान ने 15 अगस्त को काबुल पर काबिज होने के बाद दूसरी बार, काबुल में नई सरकार के गठन की घोषणा स्थगित की है। मुजाहिद ने कहा, ''नई सरकार और कैबिनेट सदस्यों के बारे में घोषणा अब अगले सप्ताह की जाएगी।''


पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल फैज हामिद तालिबान कौंसिल के निमंत्रण पर शनिवार को काबुल पहुंचे। जनरल हामिद के नेतृत्व में आईएसआई के वरिष्ठ अधिकारियों का प्रतिनिधिमंडल तालिबान नेता मुल्ला अब्दुल गनी बरादर तथा अन्य नेताओं से मिलेंगे। हाल ही में पाकिस्तान के आंतरिक मंत्री शेख राशिद ने एक इंटरव्यू में कहा कि पाकिस्तान ने लंबे समय तक तालिबान की देखरेख की है।

 उन्होंने कहा, ''हम तालिबान नेताओं के संरक्षक हैं। सभी शीर्ष तालिबान नेता पाकिस्तान में ही पैदा हुए हैं। उन्हें पाकिस्तान में आश्रय, शिक्षा और घर मिला है। हमने उनके लिए सब कुछ किया है।'' इससे पहले हाल में पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने तालिबान के साथ संबंधों को सीधे तौर पर उजागर करते हुए अपने बयान में कहा था कि दुनिया को अफगानिस्तान को नहीं छोड़ना चाहिए और ऐसा किये जाने पर इसके गंभीर परिणाम सामने आएंगे।


अफगानिस्तान: तालिबान की कायराना हरकत, काबुल में महिला एक्टिविस्ट को पीट-पीट कर किया लहूलुहान, महिलाओं ने खोला मोर्चा

एक्टिविस्ट नगरिस साद्दात का आरोप है कि शनिवार को एक प्रदर्शन के दौरान तालाबिन ने उनकी पिटाई की है। अफगानिस्तान में तालिबान के शासन के दौरान राजनीतिक व्यवस्था में महिलाओं को अधिकार देने की मांग को लेकर यह प्रदर्शन किया जा रहा था।

काबुल: हर समय बंदूक, गोलियों से बात करने वाले तालिबान को इस समय कुछ समझ नहीं आ रहा है। खुद को 'गुड बॉय' साबित करने में जुटा तालिबान दुनिया से तमाम तरह के वादे जरूर कर रहा है लेकिन उन वादों पर वह खरा नहीं उतर रहा। अफगानिस्तान पर कब्जा करने के बाद तालिबान के तेवर में थोड़ा भी बदलाव नहीं आया है। 

महिलाओं और  बच्चों के प्रति उसका कायराना हरकत जारी है। ताजा मामले में उसने एक महिला एक्टिविस्ट को पीट-पीटकर सिर्फ इसलिए लहूलुहान कर दिया है क्योंकि वह महिलाओं के हक में तालिबान के खिलाफ प्रदर्शन कर रही थी। वहीं, एक्टिविस्ट पर हुए हमले के बाद महिलाओं ने तालिबान के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।


मिली जानकारी के मुताबिक, अफगानिस्तान में एक महिला एक्टिविस्ट ने तालिबान पर उनकी बेरहमी से पिटाई करने का आरोप लगाया है। यह महिला एक्टिविस्ट काबुल में एक प्रदर्शन में शामिल हुई थीं। राजनीतिक अधिकारों की मांग को लेकर किये गये इस प्रदर्शन में शामिल इस महिला कार्यकर्ता का एक वीडियो भी सामने आया है। इस वीडियो में उनके सिर पर गहरी चोट नजर आ रही है और खून उनके चेहरे तक नजर आ रहा है। 


एक्टिविस्ट नगरिस साद्दात का आरोप है कि शनिवार को एक प्रदर्शन के दौरान तालाबिन ने उनकी पिटाई की है। अफगानिस्तान में तालिबान के शासन के दौरान राजनीतिक व्यवस्था में महिलाओं को अधिकार देने की मांग को लेकर यह प्रदर्शन किया जा रहा था।

टोलो न्यूज ने अपनी एक रिपोर्ट में बताया है कि तालिबान इस प्रदर्शन का शुरू से ही विरोध कर रहा था और उसने प्रदर्शनकारी महिलाओं पर प्रेसिडेन्शियल पैलेक से पास आंसू गैस भी छोड़े। 
महिला एक्टिविस्ट और प्रदर्शनकारियों का कहना था कि वो प्रेसिडेन्शियल पैलेस के गेट के सामने प्रदर्शन करना चाहती थीं। लेकिन तालिबान से इनकी इजाजत नहीं दी। कुछ पत्रकारों ने इस प्रदर्शन का वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किया है। इस वीडियो में नजर आ रहा है कि तालिबान महिला प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़ रहा है। 

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, तालिबान ने महिलाओं को वहां से हटाने के लिए गोलियां भी चलाईं। एक अन्य समाचार एजेंसी (Khaama Press News Agency) के मुताबिक तालिबान ने पत्रकारों से कहा कि वो वहां से हट जाएं। 

बता दें कि काबुल पर तालिबान के कब्जे के बाद महिलाओं के द्वारा किया गया यह चौथा प्रदर्शन था। इससे पहले हेरात प्रक्षेत्र और अन्य दूसरी जगहों पर महिला प्रदर्शनकारियों ने अपने अधिकारों की मांग को लेकर प्रदर्शन किया था। 


जिस दिन तालिबान को पंजशीर पर जीत मिलेगी वह दिन घाटी में मेरा आखिरी दिन होगा: अहमद मसूद

पाकिस्तानी मीडिया में यह खबर आई कि तालिबानियों द्वारा पंजशीर पर कब्जा कर लिया गया जिसका नॉर्दन अलायंस के चीफ अहमद मसूद ने खंडन करते हुए कहा है कि जिस दिन तालिबान पंजशीर को जीत लेगा उस दिन घाटी में उनका आखिरी दिन होगा।

काबुल: तालिबान को पंजशीर के लड़ाके तगड़ी चुनौती दे रहे हैं। पाकिस्तानी मीडिया में यह खबर आई कि तालिबानियों द्वारा पंजशीर पर कब्जा कर लिया गया जिसका नॉर्दन अलायंस के चीफ अहमद मसूद ने खंडन करते हुए कहा है कि जिस दिन तालिबान पंजशीर को जीत लेगा उस दिन घाटी में उनका आखिरी दिन होगा।

पंजशीर घाटी को तालिबान द्वारा कब्जा किए जाने की खबरों के बीच अहमद मसूद ने हुंकार भरी है और कहा कि जिस दिन तालिबान पंजशीर को जीत लेगा, उस दिन घाटी में मेरा आखिरी दिन होगा। पंजशीर में तालिबानी कब्जे की मीडिया रिपोर्ट को नॉर्दन अलायंस के मुखिया अहमद मसूद ने सिरे से खारिज किया और कहा कि यह पाकिस्तान और वहां की मीडिया की साजिश है। रेसिस्टेंस फोर्स के मुखिया ने कहा कि तालिबान से उनकी जंग जारी रहेगी। 

पंजशीर से रेसिस्टेंस फोर्स की कमान संभाल रहे और तालिबान को चुनौती देने वाले अहमद मसूद ने एक ट्वीट में कहा कि तालिबान के पंजशीर पर कब्जा करने की खबरें फर्जी हैं। उन्होंने कहा 'पंजशीर को जीतने की खबरें पाकिस्तानी मीडिया में घूम रही हैं। यह एक झूठ है। इसे जीतना पंजशीर में मेरा आखिरी दिन होगा,इंशाअल्लाह।'


बता दें कि नॉर्दन अलांयस के एक ट्वीट के मुताबिक, 'पंजशीर में गुरुवार रात की लड़ाई में 450 तालिबान मारे गए और 230 ने आत्मसमर्पण किया। वहीं, बदख्शां प्रांत के 170 तालिबानी रेसिस्टेंस फोर्स में शामिल हुए।' 

सालेह ने भी भरी हुंकार

इससे पहले खुद को अफगानिस्तान का कार्यवाहक राष्ट्रपति घोषित करने वाले एवं पंजशीर घाटी में प्रतिरोध बलों में शामिल हो चुके अमारुल्लाह सालेह ने शुक्रवार को कहा कि वह देश से नहीं भागे हैं और प्रांत को घेरने वाले तालिबान तथा अल कायदा जैसे आतंकवादी समूहों का समर्थन करने के लिए पाकिस्तान को सीधे तौर पर दोषी ठहराया। एक वीडियो संदेश में, सालेह (जो पूवोर्त्तर प्रांत पंजशीर में अहमद मसूद के प्रतिरोध आंदोलन के साथ सेना में शामिल हो गए हैं) ने कहा कि उनके अफगानिस्तान से भागने से संबंधित रिपोर्ट 'पूरी तरह से निराधार' हैं।