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वरिष्ठ पत्रकार विनोद दुआ का निधन, काफी समय से थे बीमार

दोपहर करीब साढ़े चार बजे उनका निधन हुआ। दूरदर्शन और एनडीटीवी जैसे समाचार चैनलों के लिए सेवाएं दे चुके दुआ हिंदी पत्रकारिता के जाने माने चेहरा रहे।

नई दिल्ली: वरिष्ठ पत्रकार विनोद दुआ नहीं रहे। उन्हें उपचार हेतु दिल्ली के एक अस्पताल में  भर्ती कराया गया था। वह पिछले 4-5 दिनों से आईसीयू में भर्ती थे। वह 67 साल के थे।


पारिवारिक सूत्रों ने बताया कि दोपहर करीब साढ़े चार बजे उनका निधन हुआ। दूरदर्शन और एनडीटीवी जैसे समाचार चैनलों के लिए सेवाएं दे चुके दुआ हिंदी पत्रकारिता के जाने माने चेहरा रहे। 

दुआ को लीवर में संक्रमण के कारण कुछ दिनों पहले परमानंद अस्पताल में भर्ती कराया गया था। पिछले 5 दिनों से वह अपोलो अस्पताल के आईसीयू में भर्ती थे। दुआ अपने पीछे दो बेटियां छोड़ गए हैं। 

दुआ की पत्नी का इसी साल जून में कोरोना संक्रमण के कारण निधन हो गया था। दुआ भी कोरोना से लड़े थे और इसके बाद से उनका शरीर लगातार कमजोर होता गया। दुआ का अंतिम संस्कार रविवार दोपहर 12 बजे लोधी श्मशान गृह में किया जाएगा।

मल्लिका दुआ ने अपने इंस्टाग्राम पर लिखा, ''हमारे निर्भीक, निडर और असाधारण पिता विनोद दुआ का निधन हो गया है। उन्होंने एक अद्वितीय जीवन जिया, दिल्ली की शरणार्थी कॉलोनियों से शुरु करते हुए 42 वर्षों तक पत्रकारिता की उत्कृष्टता के शिखर तक बढ़ते हुए, हमेशा सच के साथ खड़े रहे।'' 

उन्होंने लिखा, “वह अब हमारी मां, उनकी प्यारी पत्नी चिन्ना के साथ स्वर्ग में है, जहां वे गीत गाना, खाना बनाना, यात्रा करना और एक दूसरे से लड़ना-झगड़ना जारी रखेंगे।'


वरिष्ठ पत्रकार विनोद दुआ गंभीर हालत में ICU में भर्ती, सोशल मीडिया पर फर्जी उड़ी निधन की खबर

सोशल मीडिया पर उनकी मौत की अफवाह उड़ी है, जिसका खंडन उनकी बेटी ने क‍िया है।

नई दिल्ली: वरिष्‍ठ पत्रकार विनोद दुआ (67) 'गंभीर' हालत में हैं और उन्हें आईसीयू में भर्ती कराया गया है। उनकी बेटी मल्लिका ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर जानकारी दी है। सोशल मीडिया पर उनकी मौत की अफवाह उड़ी है, जिसका खंडन उनकी बेटी ने क‍िया है।

उनकी बेटी मल्लिका ने बताया कि मेरे पिता जी आईसीयू में हैं और उनकी हालत काफी नाजुक है। उनका स्वास्थ्य अप्रैल से तेजी से खराब हो रहा था। वह अपने जीवन की किरण खो जाने के सदमे से अभी तक उबर नहीं पाए हैं। उन्होंने असाधारण जीवन जिया है और हमें भी ऐसा ही जीवन दिया है। वह किसी तकलीफ के हकदार नहीं हैं। वह बहुत प्रिय और श्रद्धेय हैं। मैं आप सबसे यह प्रार्थना करने का अनुरोध करती हूं कि उन्हें कम से कम तकलीफ हो।

व‍िनोद दुआ दूरदर्शन और एनडीटीवी जैसे समाचार चैनलों में काम कर चुके हैं और हिंदी पत्रकारिता के जाने माने चेहरे हैं।


क्रॉस फायरिंग में हुई थी भारतीय फोटो पत्रकार दानिश सिद्दीकी की मौत, अफगानिस्तान के 90 फीसदी इलाकों पर हमारा कब्जा: तालिबान

तालिबान के प्रवक्ता के मुताबिक, दानिश सिद्दीकी क्रॉस फायरिंग में मारे गए थे। उनकी गलती यह थी कि उन्होंने रिपोर्टिंग को लेकर तालिबान से इजाजत नहीं ली थी। अगर वह ऐसा करते तो हम उन्हें सुरक्षा मुहैया कराते।

नई दिल्ली/काबुल: बीते दिनों अफगानिस्तान में तालिबान और अफगानिस्तान के बीच जंग को कवरेज करने के दौरान तालिबानियों की गोलियों का शिकार बने भारतीय फोटो जर्नलिस्ट दानिश सिद्दीकी की मौत के मामले में पहली बार तालिबान का बयान सामने आया है। तालिबान के प्रवक्ता के मुताबिक, दानिश सिद्दीकी क्रॉस फायरिंग में मारे गए थे। उनकी गलती यह थी कि उन्होंने रिपोर्टिंग को लेकर तालिबान से इजाजत नहीं ली थी। अगर वह ऐसा करते तो हम उन्हें सुरक्षा मुहैया कराते।

उक्त बातें तालिबान के प्रवक्ता ने भारत के एक चर्चित समाचार चैनल से बातचीत के दौरान कही। कतर की राजधानी दोहा स्थित तालिबान के पॉलिटिकल ऑफिस के प्रवक्ता मोहम्मद सोहेल शाहीन ने कहा कि तालिबान ने अफगानिस्तान पर 90 फीसदी कब्जा कर लिया है। इस दौरान जब तालिबान प्रवक्ता से पूछा गया कि वो भारत को दोस्त मानते हैं या दुश्मन। इसपर उसने कहा कि यह सवाल आप अपनी सरकार से पूछिए कि वो हमें दोस्त मानते हैं या दुश्मन?

हालांकि, जब प्रवक्ता से पूछा गया कि दानिश सिद्दिकी की हत्या तालिबान लड़ाकों ने की तो उन्होंने तत्काल इसका खंडन किया। प्रवक्ता सोहेल शाहीन ने कहा कि आप यह नहीं कह सकते कि तालिबान लड़ाकों ने उनकी हत्या की। आखिर उन्होंने हमसे रिपोर्टिंग की इजाजत क्यों नहीं ली? हमने एक नहीं, कई बार इस बात की घोषणा की। पत्रकारों से कहा कि वो हमारे यहां आएं। हमारे साथ को-ऑर्डिनेट करें, हम उन्हें सुरक्षा मुहैया कराएंगे। तालिबान प्रवक्ता ने आगे कहा कि इसके बजाए वह काबुल में सुरक्षा बलों के बीच घुले-मिले रहे। वहां कुछ पता नहीं चल रहा था, कौन सुरक्षा बल से है, कौन मिलिशिया से है या फिर कोई पत्रकार है। वह क्रॉस फायरिंग में मारे गए, इसलिए यह नहीं कहा जा सकता है कि किसकी गोली से उनकी मौत हुई थी। 



मीडिया संस्थानों पर छापेमारी के मुद्दे पर विपक्ष ने केंद्र को घेरा, सूचना एवं प्रसारण मंत्री ने दिया ये जवाब

समाचार पत्र दैनिक भास्कर और उत्तर प्रदेश के रीजनल समाचार चैनल भारत समाचार पर इनकम टैक्स द्वारा की गई छापेमारी को लेकर आज विपक्ष ने संसद में कोहराम मचाया। विपक्ष ने इसे लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर प्रहार बताया।

नई दिल्ली: देश के नामी समाचार पत्र दैनिक भास्कर और उत्तर प्रदेश के रीजनल समाचार चैनल भारत समाचार पर इनकम टैक्स द्वारा की गई छापेमारी को लेकर आज विपक्ष ने संसद में कोहराम मचाया। विपक्ष ने इसे लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर प्रहार बताया। वहीं, इस मसले पर जवाब देते हुए केंद्र सरकार ने कहा कि एजेंसियां अपना काम कर रही हैं। उन पर कोई दबाव नहीं है। साथ ही यह भी कहा है कि कोई भी मुद्दा उठाने से पहले उसके बारे कि में सारी सच्चाई भी जान लेनी चाहिए। 

सूचना और प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर ने गुरुवार को कहा कि एजेंसियां अपना काम कर रही हैं और इसमें कोई दखल नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि किसी को पहले पूरी जानकारी लेनी चाहिए और कई बार ऐसे मामले आते हैं चो सच से काफी दूर होते हैं। 

इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने गुरुवार को मीडिया समूह दैनिक भास्कर और उत्तर प्रदेश आधारित हिंदी न्यूज चैनल भारत समाचार के दफ्तरों पर कई शहरों में छापेमारी की। टैक्स चोरी के आरोपों को लेकर यह छापेमारी की गई है। हालांकि, विपक्ष ने इसे लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर प्रहार बताया है। संसद के दोनों सदनों में भी विपक्ष ने इस मुद्दे को लेकर नारेबाजी की।


भास्कर अखबार के मालिकों के घर और संस्थान पर इनकम टैक्स डिपार्टमेंट का छापा, Tax चोरी का है आरोप, कांग्रेस ने मोदी सरकार पर बोला हमला

इनकम टैक्स इन्वेस्टिगेशन विंग की ये छापेमारी भास्कर के नोएडा, जयपुर और अहमदाबाद कार्यालय पर की गई है।

भोपाल: टैक्स चोरी करने के आरोप में भास्कर अखबार के मालिकों के घर और संस्थानों पर इनकम टैक्स विभाग ने आज छापेमारी की है। मिली जानकारी के मुताबिक, ये छापेमारी भास्कर के कई कार्यलयों पर रात ढाई बजे के बाद शुरू की गई। इनकम टैक्स इन्वेस्टिगेशन विंग की ये छापेमारी भास्कर के नोएडा, जयपुर और अहमदाबाद कार्यालय पर की गई है।

वहीं, छापेमारी के दौरान इनकम टैक्स विभाग के अधिकारियों ने भास्कर कार्यालय में मौजूद सभी कर्मचारियों के फोन जब्त कर लिए गए हैं। साथ ही किसी को बाहर नहीं जाने दिया जा रहा है। इनकम टैक्स की टीम प्रेस कॉन्प्लेक्स सहित आधा दर्जन स्थानों पर मौजूद है।

100 से अधिक कर्मचारी छापेमारी में शामिल

ईडी, इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के साथ लोकल पुलिस का सपोर्ट भी है। ऑपरेशन दिल्ली और मुंबई टीम के द्वारा संचालित किया जा रहा है। छापेमारी की कार्रवाई में 100 से ज्यादा अधिकारी कर्मचारी शामिल है। छापेमारी के दौरान टीम को कई अहम दस्तावेज मिले हैं।


कांग्रेस ने मोदी सरकार पर बोला हमला

भास्कर ग्रुप पर छापेमारी को लेकर कांग्रेस ने मोदी सरकार पर हमला बोला है। कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने ट्वीट किया है, ''रेड जीवी जी, प्रेस की आज़ादी पर कायरतापूर्ण हमला! दैनिक भास्कर के भोपाल, जयपुर और अहमदाबाद कार्यालय पर अब इनकम टैक्स के छापे। लोकतंत्र की आवाज़ को “रेडराज” से नही दबा पाएंगे।''



दिल्ली हिंसा: SC से FB को तगड़ा झटका, VP को विधानसभा की कमेटी के सामने होना ही होगा पेश

सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि फेसबुक कर वॉइस प्रेजिडेंट अजित मोहन को कमेटी के सामने पेश होना पड़ेगा। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने यह जरूर कहा है कि वह चाहें तो सवालों का जवाब देने से मना कर सकते हैं क्योंकि कानून व्यवस्था का मामला दिल्ली सरकार के अधीन नहीं आता।

नई दिल्ली: दिल्ली हिंसा को लेकर दिल्ली विधानसभा की कमेटी द्वारा फेसबुक के भारत के वॉइस प्रेजिडेंट अजित मोहन को जारी कोई गए सम्मन को सुप्रीम कोर्ट ने निरस्त करने से इनकार कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि फेसबुक कर वॉइस प्रेजिडेंट अजित मोहन को कमेटी के सामने पेश होना पड़ेगा। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने यह जरूर कहा है कि वह चाहें तो सवालों का जवाब देने से मना कर सकते हैं क्योंकि कानून व्यवस्था का मामला दिल्ली सरकार के अधीन नहीं आता।



बता दें कि विधानसभा की 'पीस एंड हारमनी' कमिटी ने दिल्ली हिंसा के दौरान भड़काऊ सामग्री पर रोक लगाने में विफलता को लेकर फेसबुक को समन जारी किया था।



हालांकि, कोर्ट ने साफ किया है कि कानून-व्यवस्था दिल्ली विधानसभा के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता है। इसलिए, अजित मोहन इससे जुड़े सवालों का जवाब देने से कमिटी को मना कर सकते हैं।


गौरतलब है कि फेसकबुक के वाइस प्रसिडेंट अजीत मोहन ने दिल्ली विधानसभा की कमेटी के तरफ से भेजे गए समन को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। फरवरी में अजीत मोहन की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट  ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।


बता दें कि साल 2020 के फरवरी में पूर्व दिल्ली में हुए दंगों में फेसबुक की क्या भूमिका थी, इसकी जांच को लेकर दिल्ली सरकार की पीस एंड हारमनी कमेटी ने समन किया था।


इसके बाद अजीत मोहन ने सुप्रीम कोर्ट का रुख करते हुए वहां पर याचिका दायर की थी। इस कमेटी ने दिल्ली दंगों से जुड़े मामलों में गवाह के रूप में पेश नहीं होने पर अजित मोहन को नोटिस जारी किया था। बहरहाल, अब अजीत मोहन को कमेटी के सामने पेश होना ही पड़ेगा।


टूलकिट मामला : ट्विटर इंडिया के एमडी से दिल्ली पुलिस ने की पूछताछ

टूलकिट मामले में ट्विटर इंडिया के एमडी मनीष माहेश्वरी से दिल्ली पुलिस ने पूछताछ की है।

नई दिल्ली: अपनी मनमर्जी चलानी अब ट्विटर को महंगा पड़ रहा हैं। एक तरफ भारत सरकार ने उसे दिया हुआ कानूनी सरक्षण हटा दिया है तो दूसरी तरफ उसके खिलाफ गाजियाबाद में पहला एफआईआर भी दर्ज हो चुका है। वहीं अब दिल्ली पुलिस ने भी टूलकिट मामले में जांच तेज कर दी है।


बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा ने हाल ही में कांग्रेस पार्टी के कथित टूलकिट को लेकर एक ट्वीट किया था। बाद में ट्विटर ने उसे 'मैनिपुलेटेड मीडिया' घोषित कर दिया। इस मामले में ट्विटर इंडिया के एमडी मनीष माहेश्वरी से दिल्ली पुलिस ने पूछताछ की है। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, दिल्ली पुलिस की एक टीम ने इस साल 31 मई को मामले के संबंध में माहेश्वरी से पूछताछ करने के लिए बेंगलुरु की यात्रा की थी।

एक प्रतिष्ठित समाचार चैनल को रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली पुलिस की जांच न केवल अमेरिका स्थित मूल कंपनी के साथ ट्विटर इंडिया के संबंधों की एक स्पष्ट तस्वीर स्थापित कर रही है, बल्कि "भारतीय कानून लागू करने वाली संस्थाओं को गुमराह करने के लिए कॉरपोरेट पर्दा का जटिल जाल" का भी खुलासा कर रही है।

दिल्ली पुलिस ने ट्विटर इंडिया को नोटिस भेजकर इस बारे में जानकारी मांगी थी कि कांग्रेस के कथित "टूलकिट" पर संबित पात्रा के ट्वीट को "मैनिपुलेटेड मीडिया" के रूप में क्यों टैग किया गया था। सरकार के शीर्ष सूत्रों ने कहा कि ट्विटर इंडिया के प्रबंध निदेशक से पूछताछ करने का निर्णय दिल्ली पुलिस को उसके नोटिसों पर "अपमानजनक" प्रतिक्रिया मिलने के बाद लिया गया।


ट्विटर को दिए गए कई मौके, जानबूझकर उसने नहीं माना नया IT कानून: केंद्र सरकार

रविशंकर प्रसाद ने लिखा, 'ट्विटर अपने फैक्ट चेकिंग मकैनिजम को लेकर अति उत्साही रहा है लेकिन यूपी जैसे कई मामलों में कार्रवाई करने में विफल रहने के बाद यह फर्जी सूचना से लड़ने में इसकी अयोग्यता को दर्शाता है।'

नई दिल्ली: आज भारत सरकार ने ट्विटर को दी गई कानूनी संरक्षण को वापस ले लिया है। यानी कि अब ट्विटर के खिलाफ आईपीसी की धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया जा सकता है और इसकी शुरुआत भी आज उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद से हो गई है। गाजियाबाद पुलिस  ने ट्विटर के खिलाफ एक वीडियो वायरल होने से रोकने के मामले में मुकदमा दर्ज किया है।

वही केंद्र सरकार के तरफ से ट्विटर से कानूनी संरक्षण वापस लेने से जुड़ा पहला आधिकारिक बयान आया है। केंद्रीय कानून और आईटी मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा है कि ट्विटर को आईटी नियमों का पालन करने के लिए कई मौके दिए गए लेकिन उसने जानबूझकर इसका पालन न करने का रास्ता चुना। इसके अलावा उन्होंने यह भी कहा कि उत्तर प्रदेश में जो भी हुआ वह फर्जी खबरों से लड़ने में ट्विटर के मनमानेपन का उदाहरण है। 

केंद्रीय मंत्री रविशंकर ने एक के बाद एक कई ट्वीट करके ट्विटर पर निशाना साधा। उन्होंने लिखा, 'भारत की संस्कृति अपने बड़े भूगोल की तरह बदलती रहती है। कुछ स्थितियों में, सोशल मीडिया के प्रसार के साथ एक छोटी सी चिंगारी भी आग लगा सकती है, खासतौर पर फर्जी खबरों के मामले में।'

रविशंकर प्रसाद ने लिखा, 'ट्विटर अपने फैक्ट चेकिंग मकैनिजम को लेकर अति उत्साही रहा है लेकिन यूपी जैसे कई मामलों में कार्रवाई करने में विफल रहने के बाद यह फर्जी सूचना से लड़ने में इसकी अयोग्यता को दर्शाता है।'

रविशंकर प्रसाद ने यह भी कहा, 'भारतीय कंपनियां फिर वह आईटी हो या फार्मा, जब बिजनेस के लिए अमेरिका या किसी और देश जाती हैं, तो स्वेच्छा से वहां के कानूनों का पालन करती है। तो फिर ट्विटर जैसे प्लेटफॉर्म गलत का शिकार हुए लोगों को आवाज देने के मकसद से बनाए भारतीय कानूनों का पालन करने में क्यों आनाकानी कर रहे हैं।'

उन्होंने अंत में कहा, 'अगर किसी विदेशी कंपनी को लगता है कि वे खुदको भारत में अभिव्यक्ति की आजादी का झंडा बुलंद करने वाला बताकर यहां के कानूनों का पालन करने से बच सकते हैं, तो इस तरह के प्रयासों को असफल कर दिया जाएगा।'


भारत सरकार की सख्ती का दिखा असर, ट्विटर ने कार्टूनिस्ट मंजुल समेत कई को भेजा नोटिस

कार्टूनिस्‍ट मंजुल, मो. जुबैर और सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी सूर्य प्रताप सिंह ने ट्विटर की ओर से भेजे गए नोटिस के स्क्रीनशॉट अपने हैंडल पर साझा किए हैं।

नई दिल्‍ली: अबतक भारत सरकार के साथ पंगेबाजी कर रहे ट्विटर की अक्ल ठिकाने पर आ गई है। अब ट्विटर ना सिर्फ भारत के कानून को मान रहा है बल्कि ऐसे लोगों को नोटिस भेजकर कार्रवाई की भी बात कह रहा है जो नियमों के विपरीत ट्विटर के जरिये अपनी बात थोपने का काम करते थे।


कानूनों को लागू कराने वाली देश की अज्ञात एजेंसियों ने ट्विटर से चर्चित कार्टूनिस्ट मंजुल, वेबसाइट ऑल्ट न्यूज के सह-संस्थापक मोहम्मद जुबैर एवं अन्य के कुछ ट्वीट को कथित तौर पर कानून का उल्लंघन मानते हुए इन्‍हें हटाने के लिए कहा है।


समाचार एजेंसी पीटीआइ की रिपोर्ट के मुताबिक कार्टूनिस्‍ट मंजुल, मो. जुबैर और सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी सूर्य प्रताप सिंह ने ट्विटर की ओर से भेजे गए नोटिस के स्क्रीनशॉट अपने हैंडल पर साझा किए हैं। 


फिलहाल यह साफ नहीं है कि किन एजेंसियों ने इन दिग्‍गजों के ट्वीट के मसले को उठाया है। यह भी स्‍पष्‍ट नहीं है कि किन उल्लंघनों के लिए ऐसा किया गया है। पीटीआइ की रिपोर्ट के मुताबिक ट्विटर को भेजे गए ईमेल का अभी तक कोई जवाब नहीं आया है। सूत्रों ने बताया कि इलेक्ट्रानिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय इन निर्देशों को ट्विटर को भेजने में शामिल नहीं है।

मंजुल की ओर से साझा किए गए स्क्रीनशॉट में ट्विटर को यह कहते हुए दिखाया गया है कि हम यह नोटिस आपको पारदर्शिता के हित में सूचित करने के लिए जारी कर रहे हैं। आपके ट्विटर अकाउंट के संबंध में भारतीय कानून लागू करने वाली एजेंसियों से हमें एक अनुरोध मिला है। एजेंसियों की ओर से कहा गया है कि आपके ट्विटर हैंडल पर डाली गई सामग्री से भारत के कानून का उल्लंघन होता है।

ट्विटर ने यह भी कहा है कि यदि उसको किसी यूजर्स के अकाउंट से सामग्री हटाने के लिए कानून लागू करने वाली एजेंसियों से कानूनी अनुरोध मिलता है तो यूजर को सूचित करना कंपनी की नीति है। ट्व‍िटर ने यह भी कहा है कि हम आपको कानूनी सलाह देने में असमर्थ हैं। हम यह भी चाहते हैं कि आपको अनुरोध का मूल्यांकन करने का अवसर मिले और आप अपने हितों की रक्षा के लिए उचित कानूनी उपाय आजमा सकते हैं।


तहलका प्रकरण: तरुण तेजपाल को बरी किये जाने के खिलाफ गोवा सरकार ने बॉम्बे हाईकोर्ट में दाखिल की याचिका

तहलका प्रकरण: तरुण तेजपाल को बरी किये जाने के खिलाफ गोवा सरकार ने बॉम्बे हाईकोर्ट में दाखिल की याचिका

नई दिल्ली: तहलका पत्रिका के पुर्व एडिटर इन चीफ तरुण तेजपाल को बरी किए जाने के खिलाफ गोवा सरकार की बॉम्बे हाई कोर्ट में अपील की है। गोवा सरकार ने बॉम्बे हाई कोर्ट में कहा है कि रेप के मामले में पत्रकार तरुण तेजपाल के खिलाफ फिर से सुनवाई होनी चाहिए। वहीं, बॉम्बे हाईकोर्ट ने गोवा सरकार द्वारा दाखिल की गई याचिका को स्वीकार कर लिया है और तरुण तेजपाल को नोटिस भेजकर अपना पक्ष रखने को कहा है।



सरकार ने हाई कोर्ट में अपील दायर याचिका में तर्क दिया है कि  है फैसले के बाद पीड़ता को लगने वाले आघात, उसके चरित्र पर पर उठाए गए सवालों में आदलत का आभाव देखा गया। सरकार ने तर्क दिया कि अदालत ने पीड़िता के सबूतों को नजरअंदाज किया गया। सरकार ने यह भी कहा कि अदालत ने बचाव पक्ष के सभी सबूतों को सच माना जबकि पीड़िता के सबसे अहम सबूत, माफी वाले ई-मेल को नजर अंदाज कर दिया।

गौरतलब है कि तरुण तेजपाल को 21 मई को फास्ट-ट्रैक अदालत ने अपने फैसले में दोषी न मानते हुए बरी कर दिया था। 58 साल के पूर्व पत्रकार के ऊपर 2013 में एक फाइव स्टार होटल की लिफ्ट में तहलिका मैगजीन के ही एक इवेंट के दौरान सहकर्मी के साथ रेप करने का आरोप लगाया गया था।

शिकायतकर्ता के अनुसार, तेजपाल ने 7 नवंबर 2013 को होटल की लिफ्ट में महिला के साथ दुष्कर्म किया और अगले दिन फिर से उसका शोषण करने की कोशिश की। तेजपाल ने अदालत में इन आरोपों का खंडन किया और बाद में उन्हें बरी कर दिया गया। बता दें कि 2014 से  तेजपाल जमानत पर बाहर थे।


गोवा सरकार ने की दोबारा सुनवाई की मांग

गोवा सरकार निचली अदालत के "पीड़ित के आघात के बाद के व्यवहार के समझ की कमी" के आधार पर फिर से सुनवाई की मांग करती है। अपने फैसले में, अदालत ने सुझाव दिया कि महिला ने यौन उत्पीड़न की शिकार के साथ संगत तरीके से व्यवहार नहीं किया।

अदालत ने अपने फैसले में कहा, "तस्वीरों के प्रिंटआउट से साफ साबित होता है कि अभियोक्ता बिल्कुल अच्छे मूड में थीं। खुश, सामान्य और मुस्कुराती हुई। वह किसी भी तरीके से परेशान या आहत नहीं दिखाई देती हैं। हालांकि उन्होंने दावा किया है कि यौन उत्पीड़न करने के कुछ ही मिनटों बाद उसे दहशत और आघात की स्थिति में डाल दिया गया था।"


गोवा सरकार के तर्क

हाई कोर्ट की गोवा पीठ के समक्ष दायर की गई अपील में इस हफ्ते संशोधन करके निचली अदालत के पहलुओं और तेजपाल को बरी किए जानें के खिलाफ दलीलों को शामिल किया गया है। बता दें कि सरकार ने दावा किया है कि अदालत ने इस मामले में माफी वाले  ई-मेल को नजरअंदाज किया है जो कि सबसे महत्वपूर्ण तथ्य है इसी से आरोपी का जुर्म दिखाई देता है।

बताया गया है कि तेजपाल ने 2013 में यह ई-मेल अपनी सहकर्मी को भेजा था जिसमें उन्होंने अपनी हरकतों के लिए माफी मांगी थी। बता दें कि 21 मई को बरी होने पर तेजपाल ने "सच्चाई के साथ खड़े होने" के लिए न्यायाधीश को धन्यवाद दिया था।


अब लाइन पर आया ट्विटर, दिल्ली हाईकोर्ट को बताया- नए IT नियमों का करेंगे पालन

अब लाइन पर आया ट्विटर, दिल्ली हाईकोर्ट को बताया- नए IT नियमों का करेंगे पालन

नई दिल्ली: आख़िरकार ट्विटर लाइन पर आ ही गया। कई दिनों तक केंद्र पर ट्विटर तमाम तरह के आरोप लगाता रहा यहाँ तक कि केंद्र सरकार के खिलाफ उसने दिल्ली हाईकोर्ट में भी याचिका दाखिल कर दी। अब ट्विटर ने ही दिल्ली हाईकोर्ट को बताया है कि वह केंद्र द्वारा बनाये गए आईटी के नियमों का पालन करेगा।


ट्विटर की ओर से सोमवार को दिल्ली हाई कोर्ट को यह जानकारी दी गई है। ट्विटर ने उच्च न्यायालय को बताया कि उसने आईटी रूल्स, 2021 को लागू कर लिया है और भारत में एक स्थानीय अधिकारी नियुक्ति भी 28 मई से कर दी है, जो स्थानीय शिकायतों का निपटारा करेगा।

हाई कोर्ट में जहां ट्विटर ने कहा कि हमने केंद्र के कानूनों को माना है, वहीं सरकार ने कहा कि ऐसा नहीं हुआ।

इसके साथ ही ट्विटर ने बताया कि भारत में एक स्थानीय अधिकारी नियुक्ति भी 28 मई से कर दी गई है। यह अधिकारी स्थानीय शिकायतों का निपटारा करेगा।


वहीं ट्विटर के इस जवाब पर केंद्र कहा कि नहीं ऐसा नहीं है। ट्विटर ने नए नियम लागू नहीं किए हैं। सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने कहा कि यदि डिजिटल मीडिया के लिए आईटी नियमों पर रोक नहीं लगाई गई है तो ट्विटर को इनका पालन करना होगा।


दिल्ली उच्च न्यायालय में दायर एक जनहित याचिका में शुक्रवार को कहा गया था कि ट्विटर ने शिकायत निवारण स्थानीय अधिकारी नियुक्त करने संबंधी केंद्र के आईटी कानून के नियम का पालन नहीं किया है. इसमें अनुरोध किया गया है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्विटर को इस नियम का अविलंब पालन करने का निर्देश दिया जाए.
 केंद्र सरकार द्वारा जारी नए सूचना प्रौद्योगिकी नियमों का पालन नहीं किए जाने पर सोशल मीडिया नेटवर्क ट्विटर (Twitter) के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट में बीते हफ्ते याचिका दाखिल की गई थी। याचिका में ट्विटर को तत्काल प्रभाव से सरकार द्वारा जारी नियमों का पालन करने का आदेश देने की मांग की गई थी।

वकील अमित आचार्य ने याचिका में कहा था कि केंद्र सरकार ने इसी साल 25 फरवरी को नए सूचना प्रौद्योगिकी नियमों को जारी करते हुए ट्विटर सहित सभी सोशल मीडिया नेटवर्कों को 3 माह के भीतर इस पर अमल करने का निर्देश दिया था। 25 मई को समय सीमा समाप्त होने के बाद भी ट्विटर ने अब तक अपने प्लेटफॉर्म पर ट्वीट के बारे में शिकायतों के निवरण के लिए स्थानीय शिकायत अधिकारी की नियुक्ति नहीं की है।


सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यस्थों और डिजिटल मीडिया आचार संहिता के लिए दिशानिर्देश) नियम, 2021 को केंद्र सरकार ने 25 फरवरी, 2021 को अधिसूचित किया था। इसके तहत सोशल मीडिया नेटवर्कों को इस बात का पता लगाना होगा कि कोई मैसेज सबसे पहले किसने भेजा। इसके साथ ही किसी पोस्ट, मैसेज के बारे में शिकायतों का निवारण के लिए स्थानीय शिकायत अधिकारी नियुक्त करने को कहा है।


जल्द ही शुरू होंगे ट्विटर के बुरे दिन, इसे छोड़ बाकी सभी सोशल मीडिया कंपनियों ने माना IT नियम

जल्द ही शुरू होंगे ट्विटर के बुरे दिन, इसे छोड़ बाकी सभी सोशल मीडिया कंपनियों ने माना IT नियम

नई दिल्ली: ऐसा प्रतीत हो रहा है कि ट्विटर के दिन भारत में पूरे होने वाले हैं। दरअसल, ट्विटर को छोड़ बाकी सारी सोशल मीडिया कंपनियों ने भारत सरकार की आईटी मिनिस्ट्री के नियमों को मान लिया है। इस बात की जानकारी खुद भारत सरकार ने दी है लेकिन ट्विटर कभी बयानबाजी कर रहा है तो कभी कोर्ट में याचिकाएं दाखिल कर रहा है। यानि वह आईटी के नियमों को नहीं मान रहा है। ऐसे में संभव है कि ट्विटर के जल्दी ही बुरे दिन खासकर भारत में शुरू हो जाएंगे।
  
यह भी बताते चलें कि हाल ही में टूलकिट मामले को लेकर दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने ट्विटर के दिल्ली और गुरुग्राम स्थित दफ्तरों पर छापेमारी की थी, जिसके बाद माइक्रो-ब्लॉगिंग साइट ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की थी। आईटी नियमों को लेकर ट्विटर दिल्ली हाई कोर्ट का भी दरवाजा खटखटा चुका है।

सूत्रों ने बताया है कि ज्यादातर प्रमुख सोशल मीडिया कंपनियों ने सूचना प्रौद्योगिकी नियम, 2021 के अनुसार अपने मुख्य अनुपालन अधिकारी, नोडल संपर्क व्यक्ति और शिकायत अधिकारी की जानकारी इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय के साथ साझा कर दी है। इन कंपनियों में कू, शेयरचैट, टेलिग्राम, लिंक्डिन, गूगल, फेसबुक, वॉट्सऐप जैसी प्रमुख सोशल मीडिया कंपनियां शामिल हैं। इन सभी ने मंत्रालय के साथ नए नियमों के तहत मांगी गई जानकारी मुहैया करवा दी है। हालांकि, अभी तक ट्विटर ने मांगी गई जानकारी सरकार को नहीं दी है।


बीते दिन केंद्र सरकार की ओर से कड़ी प्रतिक्रिया मिलने के बाद, ट्विटर ने कल देर रात एक मैसेज भेजा है, जिसमें भारत में एक कानूनी फर्म में काम करने वाले एक वकील को नोडल संपर्क व्यक्ति और शिकायत अधिकारी के रूप में बताया गया है। हालांकि, नियमों की मानें तो सरकार को भेजी जाने वाली जानकारी में उसी शख्स का नाम होना चाहिए जोकि सोशन मीडिया कंपनी का कर्मचारी हो और भारत का नागरिक हो। ऐसे में ट्विटर ने अभी तक मुख्य अनुपालन अधिकारी की जानकारी मंत्रालय तक नहीं भेजी है।

ट्विटर ने दी थी अभिव्यक्ति की आजादी की दुहाई

इससे पहले, ट्विटर ने गुरुवार को एक बयान में कहा था कि दिल्ली पुलिस का उसके दफ्तरों में आना डराने-धमकाने की चाल है। सोशल मीडिया कंपनी ने यह भी कहा कि वह भारत में कर्मचारियों की सुरक्षा और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर संभावित खतरे को लेकर चिंतित है। इसके बाद, सरकार ने इन आरोपों की निंदा करते हुए इन्हें पूरी तरह से  आधारहीन तथा गलत बताया था। सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने कहा था कि ट्विटर सहित सोशल मीडिया कंपनियों के प्रतिनिधि, भारत में हमेशा सुरक्षित हैं और रहेंगे और उनकी व्यक्तिगत सुरक्षा को कोई खतरा नहीं है। आईटी मंत्रालय ने कहा था कि ट्विटर अपने इस कदम के जरिए जानबूझकर आदेश का पालन नहीं करके भारत की कानून व्यवस्था को कमजोर करने का प्रयास कर रहा है।


सरकार से टकराव के बीच ट्विटर बोला- ‘हमें भारत में अपने कर्मचारियों की चिंता’

सरकार से टकराव के बीच ट्विटर बोला- ‘हमें भारत में अपने कर्मचारियों की चिंता’

नई दिल्ली: ऐसा प्रतीत हो रहा है कि अब भारत में शायद ट्विटर के दिन पूरे हो चुके है। पहले तो समय पर भारत के नए कानून को लेकर ट्विटर द्वारा जवाब नहीं दिया गया और 6 माह का समय मांगा गया है और अब दिली पुलिस द्वारा टूलकिट मामले  में नोटिस भेजे जाने पर ट्विटर ने भारत में अपने कर्मचारियों के सुरक्षा की चिंता जताई है। 

भारत सरकार के नए डिजिटल नियमों को लागू करने के ट्विटर ने सरकार से 6 महीने की मोहलत मांगी है। लेकिन टूलकिट विवाद में सरकार के सामने झुकने को तैयार नहीं। कांग्रेस और बीजेपी के बीच छिड़े टूलकिट विवाद को लेकर दिल्ली पुलिस के ट्विटर के दफ्तर पहुंचने के कई दिनों बाद ट्विटर ने इस मुद्दे पर कहा है कि वह भारत में अपने कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर चिंतित है।

बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा के ट्वीट को 'मैन्युप्युलेटेड' टैग देने के बाद दिल्ली पुलिस जांच के लिए ट्विटर के दफ्तर गई थी। हाल ही में दिल्ली स्थित ट्विटर के दफ्तरों पर रेड का जिक्र करते हुए सोशल मीडिया कंपनी की प्रवक्ता ने मीडिया से कहा, 'फिलहाल हम अपने कर्मचारियों को लेकर हाल ही में भारत में हुई घटनाओं को लेकर चिंतिंत हैं।  इसके अलावा अभिव्यक्ति की आजादी के समक्ष खतरे की जो आशंका पैदा हुई है, उसे लेकर भी चिंतित हैं, जिसके लिए हम काम करते रहे हैं।

बता दें कि बीते सोमवार दिल्ली पुलिस ट्विटर के दफ्तर गई थी। दिल्ली पुलिस, संबित पात्रा के ट्वीट को मैन्युप्युलेटेड टैग दिए जाने को लेकर जारी जांच के दौरान ट्विटर इंडिया के हेड को नोटिस देने वहां पहुंची थी।

 

कयों बढ़ा विवाद

दरअसल, बीजेपी के प्रवक्ता संबित पात्रा ने एक टूलकिट शेयर की थी और कहा था कि कांग्रेस कांग्रेस ने यह टूलकिट बनाई है जिसके जरिए मोदी सरकार को बदनाम करने का काम हो रहा है। उन्होंने कहा था कि राहुल गांधी कोरोना को लेकर जो भी ट्वीट करते हैं, वह जिस अंदाज में पीएम मोदी पर हमला करते हैं, वह सब कांग्रेस की टूलकिट का हिस्सा है।

इसपर जवाबी कार्रवाई करते हुए कांग्रेस ने ट्विटर से इसकी शिकायत की थी और दस्तावेज को फर्जी बताया था, जिसके बाद ट्विटर ने कुछ पोस्ट्स को 'मैन्युप्यलेटेड मीडिया' का टैग दिया था।


सोशल मिडिया कंपनियों को सरकार ने भेजा नोटिस, पूछा-‘क्यों नहीं किया नियम का पालन’

सोशल मिडिया कंपनियों को सरकार ने भेजा नोटिस, पूछा-‘क्यों नहीं किया नियम का पालन’

नई दिल्ली: सोशल मीडिया कंपनियों और सरकार के बीच लड़ाई तेज हो गई है। आज भारत के आईटी मिनिस्ट्री ने सभी सोशल मीडिया प्लेट्फॉर्म को नोटिस भेजकर बुधवार को पूछा है कि उन्होंने इलेक्ट्रोनिक्स एवं प्रोद्यौगिकी मंत्रालय के 25 फ़रवरी को जारी किए गए नए नियमों का पालन क्यों नहीं किया? पत्र में कहा गया है कि नए रेगुरेशसंस के मानने को लेकर तय तारीख को सरकार सोशल मीडिया फर्म्स के लिए और आगे नहीं बढ़ाने जा रही है, जो बुधवार को खत्म हो रहा है। यानि जो भी जवाब देना है उसके लिए सोशल मीडिया कंपनियों को आज ही देना होगा।

नोटिस जारी कर मंत्रालय ने पूछा है उन्होंने सक्षम अधिकारियों की नियुक्ति क्यों नहीं की, अगर नियुक्ति की है तो उसके विवरण आज शाम तक मुहैया कराएं। नोटिस में मंत्रालय की तरफ से कहा गया कि अगर वे अपने आप को सोशल मीडिया नहीं मानते हैं तो उसकी वजह बताएं।  मंत्रालय इसके अतिरिक्त और भी जानकारी मांग सकता है और कार्यवाही करने के लिए स्वतंत्र है। आईटी मंत्रालय ने नए सोशल मीडिया नियमों के तहत कंपनियों द्वारा नियुक्त मुख्य अनुपालन अधिकारी, भारत स्थित शिकायत अधिकारी के बारे में ब्यौरा मांगा है।

आईटी मंत्रालय ने कहा कि बड़ी सोशल मीडिया कंपनियों के लिये अतिरिक्त जांच-पड़ताल की जरूत समेत अन्य नियम बुधवार से प्रभाव में आ गये हैं। सरकार ने सोशल मीडिया फर्म से जल्द से जल्द नए आईटी नियमों के तहत कंपाइल्ड डिटेल्स मुहैया कराने को कहा है।

इलेक्ट्रोनिक और सूचना प्रोद्यौगिकी मंत्रालय की तरफ से बुधवार को सोशल मीडिया इंटरमीडियरिज को लिखे गए पत्र में 50 लाख से ज्यादा भारत में रजिस्टर्ड यूजर्स को सोशल मीडिया फर्म माना गया है। इसके साथ ही, उन फर्मों से कहा गया है कि वे अपने ऐप्स के नाम, वेबसाइट या फिर सेवाएं जिसका दायरा नए आईटी नियमों के तहत आता हो, उनकी अनुपालन स्थिति मुहैया कराएं।

भारत सरकार द्वारा सोशल मीडिया कंपनियों को भेजे गए नोटिस में कहा गया है कि चीफ कंप्लायंस ऑफिसर के नाम और ब्यौरा, रेसिडेंड ग्रिवेंस ऑफिसर, जिसे उन्होंने भारत में नियुक्त कर रखा हो, इसके साथ ही स्थानीय ऑफिसर का पता मांगा है। 


Facebook है 'सेफ', क्या ट्विटर के आनेवाले हैं 'बुरे दिन' ?

Facebook है 'सेफ', क्या ट्विटर के आनेवाले हैं 'बुरे दिन' ?

नई दिल्ली: टूलकिट मामले से शुरू हुआ विवाद अब ट्विटर, फेसबुक और इंस्टाग्राम जैसी सोशल मीडिया साइट के भारतीय कानून के पालन और उनके कार्यान्वयन पर आकर टिक गया है। आईटी मिनिस्ट्री के उच्च पदस्थ सूत्रों की मानें तो इन कंपनियों को भारतीय कानून का पालन करना ही होगा या फिर अपना बोरिया बिस्तरा भारत से समेटना होगा।


कांग्रेस की टूलकिट को लेकर संबित पात्रा के ट्वीट पर ट्विटर के मेनुपुटेड फ्लैग करने के बाद अब केंद्र सरकार का रुख और ज्यादा कड़ा होता जा रहा है। आईटी मंत्रालय के उच्च पदस्थ रिपोर्ट्स के मुताबिक  फरवरी महीने में तमाम सोशल मीडिया साइट के लिए जो नियम बनाए गए थे, उन्हें लागू करने के लिए ट्विटर, फेसबुक और जैसे तमाम सोशल मीडिया साइट्स को 3 महीने का वक्त दिया गया था। 26 मई को उसकी समय सीमा समाप्त हो रही है। ऐसे में फेसबुक ने अपना एक बयान जारी करके फिलहाल आई बला को टालने में सफल हो गया है लेकिन ट्विटर को तरफ से अभी तक कोई प्रतिक्रिया नही आई है।

फेसबुक की तरफ से बाकायदा बयान जारी कर कहा गया है, "हमारा उद्देश्य 80 नियमों के प्रावधानों का पालन करना है और कुछ ऐसे मुद्दों पर चर्चा जारी रखना है, जिनके लिए सरकार के साथ ज्यादा गहराई से काम करने की आवश्यकता है। आईटी नियमों के अनुसार हम परिचालन और प्रक्रियाओं को लागू करने और अपनी दक्षता में सुधार करने के लिए काम कर रहे हैं। फेसबुक अपने मंच पर स्वतंत्र रूप से और सुरक्षित रूप से खुद को व्यक्त करने की लोगों की क्षमता के लिए प्रति प्रतिबद्ध हैं।"
 
हालांकि अभी तक इस मामले में ट्विटर की तरफ से कोई भी बयान या जवाब आईटी मंत्रालय को नहीं भेजा गया है। वहीं, सूत्रों से खबर मिली है कि ट्विटर के प्रति सरकार की नजर टेढ़ी बनी हुई है। खुद पीएम नरेंद्र मोदी में 2 दिन से ट्विटर पर एक भी ट्वीट नही किया है। 



ट्विटर को लेकर निम्न जानकारियां सरकार की तरफ से सूत्रों के हवाले से सामने आई हैं




1. ट्विटर और सोशल मीडिया साइट्स को वे एक और ईस्ट इंडिया कंपनी नहीं बनने देंगे। भारत में रहकर वे व्यापार करने के लिए स्वतंत्र हैं और लाभ कमाने के लिए भी स्वतंत्र हैं, लेकिन अमेरिकी कानून वे भारत में नहीं चला सकते।


2. सरकार ने ट्विटर और अन्य सोशल मीडिया साइट्स को भारतीय नियमों को लागू करने के लिए पर्याप्त समय दिया है, अगर वह समय सीमा के भीतर नोडल ऑफिसर चीफ कंप्लायंस ऑफीसर और स्थानीय शिकायत अधिकारी नहीं नियुक्त करते हैं, तो आईटी कानून के तहत सरकार ट्विटर पर कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र है।


3. टि्वटर और अन्य सोशल मीडिया साइट विचारों को व्यक्त करने का एक प्लेटफार्म है और माध्यम भर है। ऐसे में ट्विटर अपने विचारों और निष्कर्षों को किसी भी विचार पर थोप नहीं सकता है।


4. अगर ट्विटर और सोशल मीडिया साइट पर अपने विचार और निष्कर्षों को उसके माध्यम को इस्तेमाल करने वाले उपयोगकर्ताओं पर थोपता है तो ऐसे में वह आईटी की धारा 29 के तहत मिलने वाली तमाम छूट का लाभ नहीं उठा सकता है।


5. ट्विटर या फिर कोई भी अन्य सोशल मीडिया साइट अपने विचार और निष्कर्ष, अगर अपने उपयोगकर्ताओं पर थोपता है तब फिर वह अवमानना और हर्जाने, जिसकी छूट आईटी की धारा 29 के तहत इन साइट्स को मिली हुई है, उससे बाहर हो जाएग़े।


6. ट्विटर और तमाम सोशल मीडिया साइट्स को समान रूप से लागू वेरीफिकेशन सिस्टम भी लागू करना होगा।


7. ट्विटर को यह बताना होगा कि जब भारतीय कानून के मुताबिक किसी शिकायत पर जांच एजेंसियां कार्रवाई कर रही हैं तब वे उन जांच एजेंसियों की जांच को प्रभावित करने के लिए कैसे निष्कर्ष पर पहुंचा ?


8. ट्विटर और तमाम सोशल मीडिया साइट्स को भारत में रहकर भारत के नियम और कानून का पालन करना होगा भले ही उनके मुख्यालय दुनिया के किसी भी देश में स्थित क्यों ना हो।


एक प्रतिष्ठित समाचार चैनल की वेबसाइट पर छपी खबर के मुताबिक मंत्रालय के अधिकारियों ने बताया है कि 26 मई तक इन तमाम सोशल मीडिया साइट्स के लिए आईटी के रूल के मुताबिक देश में नोडल ऑफिसर, शिकायत अधिकारी और शिकायत निस्तारण अधिकारी नियुक्त करने होंगे। सरकार का रुख साफ है, हम तमाम सोशल मीडिया साइट्स और उन पर व्यक्त किए गए विचारों की स्वतंत्रता के पक्षधर हैं, लेकिन इन साइटों पर व्यक्त किए गए विचारों पर इन सोशल मीडिया साइट्स के निष्कर्ष पर पहुंचने की और न्याय अधिकारी बनने के दुस्साहस के खिलाफ हैं।


आज रात से भारत में बंद हो जाएगा फेसबुक, ट्विटर और इंस्टाग्राम !

आज रात से भारत में बंद हो जाएगा फेसबुक, ट्विटर और इंस्टाग्राम !

नई दिल्ली: अगर आप फेसबुक से या फिर ट्विटर या इंस्टाग्राम के जरिए अपने चाहनेवालों दोस्ते के टच में रहते हैं तो अब आपको यह आदत बदलनी पड़ेगी। क्योंकि आज यानि 25 मई की रात 12 बजे के बाद संभव है कि आपको फेसबुक, ट्विटर अपनी सेवाएं ना दे पाए। 


दरअसल,  इस साल 25 फरवरी को भारत सरकार के इलेक्ट्रानिक्स एवं इनफारमेशन टेक्नोलॉजी मंत्रालय (MEITY) ने सभी सोशल कंपनियों (Social Media Companies) को नए नियमों का पालन करने के लिए तीन महीने का समय दिया था। इनमें भारत में अपना ऑफिसर और कॉंटेक्स ऐड्रेस देना, कंपलायंस अधिकारी की नियुक्ति, शिकायत समाधान, आपत्तिजनक कंटेट की निगरानी, कंप्लायंस रिपोर्ट और आपत्तिजनक सामग्री को हटाना जैसे नियम हैं। आज यानि 25 मई को समय सीमा खत्म हो रही हैं और सोशल मीडिया कंपनियों ने भारत सरकार को जानकारी नहीं दी है। लिहाजा यह संभव है कि आज रात से फेसबुक, ट्विटर औऱ इंस्टाग्राम समेत कई सोशल कंपनियों की दुकान भारत में बंद हो जाए।


अभी तक केवल कू नाम की कंपनी को छोड़ कर किसी अन्य कंपनी ने इनमें से किसी अधिकारी की नियुक्ति नहीं की है। दरअसल, सोशल मीडिया पर पीड़ित लोगों को यह नहीं पता कि वे किससे शिकायत करें और कहां उनकी समस्या का समाधान होगा।

हालांकि, कुछ प्लेटफॉर्म ने इसके लिए छह महीने का समय मांगा है। कुछ ने कहा कि वे अमेरिका में अपने हेडक्वार्टर से निर्देशों की प्रतीक्षा कर रहे हैं। ये कंपनियां भारत में काम कर रही हैं, भारत से मुनाफा कमा रही हैं लेकिन दिशा निर्देशों के पालन के लिए हेडक्वार्टर से हरी झंडी का इंतजार करती हैं। ट्विटर जैसी कंपनियां अपने खुद के फैक्ट चेकर रखती हैं जिनकी न तो पहचान बताती है और न ही तरीका कि कैसे तथ्यों की जांच की जा रही है।

बताते चलें कि सोशल मीडिया कंपनियों को आईटी ऐक्ट की धारा 79 के तहत उन्हें इंटरमीडियरी के नाते लाइबलिटी से छूट मिली हुई है। लेकिन इनमें से कई विषयवस्तु के बारे में फैसला कर रही हैं जिनमें भारतीय संविधान और कानूनों का ध्यान नहीं रखा जा रहा।

नए नियम 26 मई 2021 से लागू होने जा रहे हैं। अगर ये कंपनियां इन नियमों का पालन नहीं करती हैं तो उनका इंटरमीडियरी स्टेटस छिन सकता है और वे भारत के मौजूदा कानूनों के तहत आपराधिक कार्रवाई के दायरे में आ सकती हैं। ऐसे में सोशल मीडिया कंपनियों के सामने दो ही विकल्प बचते हैं। पहला कि वह भारत सरकार द्वारा लाए जा रहे कानून का पालन करें। दूसरा और आखिरी रास्ता यह कि वह अपना कारोबार भारत से समेट लें।


'तहलका' पत्रिका के पूर्व एडिटर इन चीफ तरुण तेजपाल दुष्कर्म के मामले में किये गए बरी

'तहलका' पत्रिका के पूर्व एडिटर इन चीफ तरुण तेजपाल दुष्कर्म के मामले में किये गए बरी

नई दिल्ली: 'तहलका' पत्रिका के पूर्व एडिटर इन चीफ तरुण तेजपाल को अदालत ने दुष्कर्म के आरोप से बरी कर दिया है। उनपर बीते 8 साल से दुष्कर्म का मामला चल रहा था। तरुण तेजपाल पर उनके महिला सहकर्मी से दुष्कर्म करने का आरोप था। उन्हें गिरफ्तारी के बाद मई 2014 से जमानत पर रिहा किया गया था।


बता दें कि एक महिला सहकर्मी ने तरुण तेजपाल पर नवंबर 2013 को गोवा के एक फाइव स्टार होटल में लिफ्ट के अंदर रेप करने का आरोप लगाया था। जिसके बाद 30 नवंबर 2013 को उन्हें गिरफ्तार किया गया था और बाद में जमानत पर रिहा कर दिया गया था। मामले में गोवा पुलिस ने फरवरी 2014 में उनके उनके खिलाफ 2846 पन्नों की चार्जशीट दायर की थी।


27 अप्रेल से टल रहा था फैसले का दिन


अतिरिक्त जिला अदालत 27 अप्रैल को फैसला सुनाने वाली थी लेकिन न्यायाधीश क्षमा जोशी ने फैसला 12 मई तक स्थगित कर दिया था. 12 मई को फैसला एक बार फिर 19 मई के लिए टाल दिया गया था।

अदालत ने पूर्व में कहा था कि कोरोना वायरस वैश्विक महामारी के चलते स्टाफ की कमी के कारण यह मामला स्थगित किया गया था। तरुण तेजपाल ने इससे पहले बंबई उच्च न्यायालय का रुख कर अपने ऊपर आरोप तय किए जाने पर रोक लगाने का अनुरोध किया था लेकिन उनकी याचिका खारिज कर दी गई थी।


गंभीर धाराओं में दर्ज किया गया था मुकदमा


तरुण तेजपाल पर भारतीय दंड संहिता (भादंसं) की धारा 342 (गलत तरीके से रोकना), 342 (गलत मंशा से कैद करना), 354 (गरिमा भंग करने की मंशा से हमला या आपराधिक बल का प्रयोग करना), 354-ए (यौन उत्पीड़न), 376 (2) (महिला पर अधिकार की स्थिति रखने वाले व्यक्ति द्वारा बलात्कार) और 376 (2) (के) (नियंत्रण कर सकने की स्थिति वाले व्यक्ति द्वारा बलात्कार) के तहत मुकदमा चल रहा था।


आपका फेसबुक एकाउंट नहीं है 'स्वतंत्र', सरकार रख रही नजर, FB की ट्रांसपेरेंसी रिपोर्ट में दावा, भारत सरकार ने 6 महीने में मांगा 40300 यूजर्स का डेटा!

आपका फेसबुक एकाउंट नहीं है 'स्वतंत्र', सरकार रख रही नजर, FB की ट्रांसपेरेंसी रिपोर्ट में दावा, भारत सरकार ने 6 महीने में मांगा 40300 यूजर्स का डेटा!

नई दिल्ली: फेसबुक पर हेट स्पीच लिखना या करना अब आपको महंगा पड़ सकता है। क्योंकि, आपकी हर हरकत पर सरकार नजर रख रही है। यानी अब आपका फेसबुक एकाउंट हेट स्पीच या उलूल जुलूल बातें लिखने के लिए स्वतंत्र नही रहा। दरअसल, भारत सरकार ने 40 हजार से ज्यादा फेसबुक यूजर्स का देता फेसबुक से मांगा है। इस बात की जानकारी खुद फेसबुक ने दी है।



सोशल मीडिया कंपनी फेसबुक ने अपनी ताजा ट्रांसपेरेंसी रिपोर्ट में कहा है कि भारत सरकार ने उससे साल 2020 के आखिरी 6 महीनों में 40 हजार 300 यूजर्स के डेटा मांगे थे। रिपोर्ट में बताया गया है भारत सरकार की ओर से आए अनुरोधों में जनवरी से जून 2020 की तुलना में 13.3 फीसदी बढ़ोतरी देखी गई। इस दौरान भारत ने 35 हजार 560 यूजर्स के डेटा मांगे थे।

अमेरिकी कंपनी फेसबुक ने जुलाई से दिसंबर 2020 के बीच में भारत के सूचना प्रसारण मंत्रालय के निर्देशों के मुताबिक, 878 आइटम्स को प्रतिबंधित भी किया। इनमें से 10 आइटम को कुछ समय के लिए प्रतिबंधित किया गया था। 

रिपोर्ट के मुताबिक, भारत ने जुलाई से दिसंबर 2020 के बीच कुल 40 हजार 300 अनुरोध भेजे थे। इनमें से 37 हजार 865 अनुरोध कानूनी प्रक्रिया वाले थे और 2 हजार 435 अनुरोध इमरजेंसी डिस्क्लोजर वाले। यूजर्स के डेटा देने के सबसे ज्यादा अनुरोध करने वालों में हालांकि, भारत दूसरे पायदान पर है। पहले नंबर पर अमेरिका है जिसने जुलाई-दिसंबर 2020 के बीच कुल 61 हजार 262 यूजर्स के डेटा मांगे। 


रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि साल 2020 के पहली छमाही की तुलना में दूसरी छमाही के अंदर दुनियाभर की सरकारों से मांगे जाने वाले यूजर्स के डेटा की संख्या में 10 फीसदी इजाफा हुआ है। पहली छमाही में जहां दुनियाभर की सरकारों ने मिलकर फेसबुक से 1 लाख 73 हजार 592 यूजर्स के डेटा मांगे थे तो वहीं दूसरी छमाही में यह आंकड़ा 1 लाख 91 हजार 13 तक पहुंच गया था। भारत में 62,754 यूजर/अकाउंट्स से संबंधित डेटा की मांग की गई थी और 52 फीसदी मामलों में कुछ डेटा प्रस्तुत किया गया था।

रिपोर्ट में कहा गया है, 'फेसबुक सरकार की ओर से आए डेटा पाने के अनुरोधों का जवाब संबंधित कानूनों और अपनी सेवा की शर्तों के मुताबिक देता है। हमें मिले हर अनुरोध की ध्यानपूर्वक समीक्षा की जाती है और जो अनुरोध जरा सा भी अस्पष्ट लगता है उसे हम या तो रिजेक्ट करते हैं या फिर उसपर अधिक जानकारी मांगी जाती है।


चर्चित एंकर रोहित सरदाना का हार्ट अटैक से निधन

रोहित सरदाना कोरोना से भी संक्रमित थे।

नई दिल्ली: टीवी जर्नलिज्म की दुनिया का एक सितारा आज और खो गया। अपनी बेबाक एंकरिंग के लिए लोगों की दिलों में पहचान बनाने वाले आजतक चैनल के एकंर रोहित सरदाना अब नहीं रहे। उनकी आज हार्ट अटैक से मौत हो गई। 

बताया जा रहा है कि रोहित सरदाना कोरोना से संक्रमित थे हालांकि उनकी रिपोर्ट निगेटिव आई थी लेकिन सीटी स्कैन होने के बाद उनमें कोरोना का संक्रमण पाया गया। आज सुबह करीब 4 बजे उन्हें नोएडा स्थित मेट्रो अस्पताल के आईसीयू वार्ड में भर्ती कराया गया लेकिन इस बीच उन्हें हार्ट अटैक आया और उनका निधन हो गया।

रोहित सरदाना सहारा, जी न्यूज समेत कई टीवी चैनलों में लंबे समय तक कार्य कर चुके थे। इस दौरान उन्होंने कई हिट प्रोग्राम को होस्ट किया। फिलहाल वह आजतक में थे। रोहित सरदाना के निधन से मीडिया जगत में शोक व्याप्त है। 


बॉलीवुड गैंग वाले बयान पर विवाद बढ़ता देख रहमान का आया ट्वीट, कही ये बात

ए आर रहमान ने अपने लेटेस्ट ट्वीट में कहा- खोया हुआ पैसा वापस आ सकता है, शोहरत वापस आ सकती है लेकिन जिंदगी का महत्वपूर्ण समय कभी वापस नहीं आता है. शांति. चलिए ये आगे बढ़ने का समय है. हमारे पास करने के लिए बेहतर चीजें हैं.

बॉलीवुड में नेपोटिज्म को लेकर चल रही बहस के बाद से ही कई सितारे अपने-अपने अनुभवों को लेकर प्रतिक्रिया दे रहे हैं और बॉलीवुड के एलीट कल्चर पर सवाल उठा रहे हैं. हाल ही में बॉलीवुड के साथ ही साथ इंटरनेशनल लेवल पर भी सफलता का परचम लहराने वाले म्यूजिक कंपोजर ए आर रहमान के बॉलीवुड गैंग वाले बयान के बाद इस बहस को और हवा मिली है. रहमान ने कहा था कि बॉलीवुड में एक गैंग हैं जो उन्हें नुकसान पहुंचा रहा हैं. हालांकि रहमान के लेटेस्ट ट्वीट से लगता है कि वे अपने बयान से उपजे विवाद को लंबा नहीं खींचना चाहते हैं.

दरअसल रहमान ने डायरेक्टर  शेखर कपूर के ट्वीट को रिट्वीट किया और प्रतिक्रिया देते हुए कहा, खोया हुआ पैसा वापस आ सकता है, शोहरत वापस आ सकती है लेकिन जिंदगी का महत्वपूर्ण समय कभी वापस नहीं आता है. शांति. चलिए ये आगे बढ़ने का समय है. हमारे पास करने के लिए बेहतर चीजें हैं.