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13 दिसंबर को पीएम मोदी करेंगे काशी विश्वनाथ धाम प्रोजेक्ट का उद्घाटन, जानिए कैसा दिखेगा मंदिर

पीएम नरेंद्र मोदी 13 दिसंबर को आपमे संसदीय क्षेत्र वाराणसी में काशी विश्वनाथ धाम प्रोजेक्ट का 13 दिसंबर को उद्घाटन करेंगे। बता दें कि ये प्रोजेक्ट पीएम मोदी के महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट्स में से एक बड़ा प्रोजेक्ट है।

नई दिल्ली: पीएम नरेंद्र मोदी 13 दिसंबर को आपमे संसदीय क्षेत्र वाराणसी में काशी विश्वनाथ धाम प्रोजेक्ट का 13 दिसंबर को उद्घाटन करेंगे। बता दें कि ये प्रोजेक्ट पीएम मोदी के महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट्स में से एक बड़ा प्रोजेक्ट है।


लगभग 30 हजार स्क्वेयर फीट में फैले इस विशाल प्रोजेक्ट को श्रद्धालुओं की सुविधाओं में बढ़ोतरी के उद्देश्य से तैयार किया गया है। इसमें ललिता घाट से काशी विश्वनाथ मंदिर तक यात्री सुविधा केंद्र समेत कई सुविधाओं की व्यवस्था की गई है।

उद्घाटन के अवसर पर देशभर के विख्यात संतों, ज्योतिर्लिंग के महंत, पीठाधीश्वर और महामंडलेश्वर को आमंत्रित किया गया है। बता दें कि इस प्रोजेक्ट के जरिए काशी विश्वनाथ मंदिर को गंगा नदी पर स्थित ललिता घाट से लिंक किया जाएगा। पीएम मोदी 13 दिसंबर को ललिता घाट से इस कॉरिडोर में प्रवेश करेंगे और इसके उद्घाटन के बाद पैदल चलते हुए बाबा विश्वनाथ के मंदिर पहुंचेंगे।

कैसा होगा मंदिर और मंदिर परिसर


काशी विश्वनाथ प्रोजेक्ट को पीएम मोदी ने मार्च 2018 में लॉन्च किया था। इसके ब्लूप्रिंट के तहत प्रोजेक्ट का कुल क्षेत्रफल 03 हजार स्क्वेयर मीटर है जिसमें सप्ताह के दिनों में 15 हजार लोगों के पहुंचने की व्यवस्था , सप्ताहांत के दिनों में 40 हजार और सावन व शिवरात्रि जैसे कार्यक्रमों में ढाई से तीन लाख लोगों के शामिल होने पर पर्याप्त व्यवस्था का इंतजाम होगा।

इसके अलावा इसमें काशी विश्वनाथ धाम पहुंचने वाले श्रद्धालुओं के लिए यात्री सुविधा केंद्र, अतिथि विश्राम गृह, लाइब्रेरी, म्यूजियम और आध्यात्मिक पुस्तक केंद्र हर 25 फीट पर ललिता घाट से काशी विश्वनाथ मंदिर तक स्थित होंगे।

इतना ही नहीं गंगा व्यू कैफे, 3500 स्क्वेयर फीट में फैला मंदिर चौक, सिटी म्यूजियम और नीलकंठ पवैलियन भी इस प्रोजेक्ट का अहम आकर्षण होगा।

मंदिर के मुख्य प्रांगण में कॉमन एरिया जैसे कॉरिडोर, घाट और यात्री सुविधा केंद्र, भोगशाला और नीलकंठ पवैलियन जैसी बिल्डिंग स्थित होगी, जिनका संचालन काशी विश्वनाथ धाम परिषद द्वारा किया जाएगा। 

इसके अलावा जलपान केंद्र, गंगा व्यू कैफे और अन्य सुविधाएं पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल के तहत लीज पर दी जाएगी।


संतों की मांग के आगे झुकी उत्तराखंड की सरकार, 'देवस्थानम बोर्ड' को किया भंग

मौजूदा सीएम पुष्कर धामी ने तीर्थ पुरोहितों की मांग पर एक कमेटी का गठन किया था और कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर फैसला लेने का साधू-संतो से वादा किया था। वैसे तो फैसला 30 अक्टूबर तक करना था लेकिन यहां भी एक माह की देरी हो गई। आखिरकार जीत साधू और संतों की हुई है।

देहरादून: आखिरकार साधू और संतों का विरोध रंग लाया और उत्तराखंड सरकार को देवस्थानम बोर्ड को भंग करना पड़ गया है। पुष्कर सिंह धामी ने पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत का फैसला पलट दिया है। उन्होंने देवस्थानम बोर्ड को भंग कर दिया है। इस बोर्ड का लंबे समय से विरोध हो रहा था और तीर्थ-पुरोहित इसे भंग करने की मांग पर आंदोलन कर रहे थे। 

बता दें कि देवस्थानम बोर्ड का गठन जनवरी 2020 में तब के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने किया था। इस बोर्ड के गठन के जरिए 51 मंदिरों का नियंत्रण राज्य सरकार के पास आ गया था। उत्तराखंड में केदारनाथ, गंगोत्री, यमुनोत्री और बद्रीनाथ चार धाम हैं। इन चारों धामों का नियंत्रण भी सरकार के पास आ गया था। तब से ही तीर्थ-पुरोहित इस फैसले को वापस लेने की मांग पर अड़े हुए थे।

मौजूदा सीएम पुष्कर धामी ने तीर्थ पुरोहितों की मांग पर एक कमेटी का गठन किया था और कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर फैसला लेने का साधू-संतो से वादा किया था। वैसे तो फैसला 30 अक्टूबर तक करना था लेकिन यहां भी एक माह की देरी हो गई। आखिरकार जीत साधू और संतों की हुई है। 


दिल्ली की केजरीवाल सरकार बुजुर्गों को कराएगी रामलला के दर्शन, ऐसे करें आवेदन

दिल्ली की केजरीवाल सरकार द्वारा बुजुर्गों को तीर्थयात्रा कराया जा रहा है और अब उसकी तीर्थ स्थानों की लिस्ट में अगले साल उत्तर प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव को देखते हुए अयोध्या को भी 'मुख्यमंत्री तीर्थयात्रा योजना' में शामिल किया गया है।

नई दिल्ली: दिल्ली की केजरीवाल सरकार द्वारा बुजुर्गों को तीर्थयात्रा कराया जा रहा है और अब उसकी तीर्थ स्थानों की लिस्ट में अगले साल उत्तर प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव को देखते हुए अयोध्या को भी 'मुख्यमंत्री तीर्थयात्रा योजना' में शामिल किया गया है।

दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने कहा कि 'मुख्यमंत्री तीर्थयात्रा योजना' में हमने अयोध्या दर्शन को शामिल किया है। एक बुज़ुर्ग के साथ एक और व्यक्ति जा सकते हैं। दिल्ली से अयोध्या के लिए पहली ट्रेन 3 दिसंबर को जाएगी। दिल्ली सरकार के ई-डिस्ट्रिक्ट पोर्टल पर जाकर रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं।


कार्तिक पूर्णिमा आज, जानिए स्नान का सही समय

नई दिल्ली: ज्योतिष में पूर्णिमा तिथि को बेहद शुभ माना जाता है। मान्यता है कि कार्तिक मास की पूर्णिमा को भगवान विष्णु के मत्स्यावतार का प्राकट्य हुआ था। इस वजह से इस तिथि का विशेष महत्व है। इस दिन पवित्र नदी में स्नान और दान करने का महत्व शास्त्रों में वर्णित है। 

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन भगवान शिव ने त्रिपुरासुर नामक राक्षस का अंत किया था। जिसके कारण इसे त्रिपुरारी पूर्णिमा भी कहते हैं। वहीं सिख धर्म में इस दिन को बेहद खास माना जाता है। इस दिन सिखों के प्रथम गुरु गुरुनानक देव का अवतरण हुआ था। 

कार्तिक पूर्णिमा पर नदी में स्नान का महत्व-
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कार्तिक पूर्णिमा के दिन पवित्र नदी में स्नान करने से व्यक्ति को पापों से मुक्ति मिल जाती है। 

मान्यता है कि इस दिन स्वर्ग से देवतागण भी आकर गंगा में स्नान करते हैं। इसलिए कार्तिक पूर्णिमा के दिन गंगा स्नान जरूर करना चाहिए। अगर आपका गंगा स्नान के लिए जाना संभव नहीं है तो घर पर ही पवित्र जल में गंगाजल मिलाकर स्नान किया जा सकता है।

दान का महत्व-

कार्तिक पूर्णिमा के दिन हर व्यक्ति को अपनी सामर्थ्य अनुसार दान करना चाहिए। शास्त्रों के अनुसार, इस दिन फल, अनाज, वस्त्र और गुड़ आदि चीजों का दान किया जा सकता है। शास्त्रों में पूर्णिमा तिथि मां लक्ष्मी को समर्पित मानी जाती है। मान्यता है कि इस दिन मां लक्ष्मी की प्रिय वस्तुओं मिठाई, दूध और नारियल का दान करने से धन की देवी माता लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं।

शुभ मुहूर्त-

पूर्णिमा तिथि 18 नवंबर को दोपहर 12 बजकर 01 मिनट से प्रारंभ होकर, 19 नवंबर को दोपहर 2 बजकर 28 मिनट पर समाप्त होगी। पूर्णिमा तिथि के दिन स्नान का शुभ मुहूर्त दोपहर 2 बजकर 28 मिनट तक है। दान करने का शुभ समय 19 नवंबर को सूर्यास्त से पहले तक है।

तुलसी पूजन

कार्तिक पूर्णिमा के दिन तुलसी पूजा का विशेष महत्व होता है। अगर आप देवउठनी एकादशी के दिन तुलसी पूजा नहीं कर पाएं हैं तो कार्तिक पूर्णिमा के दिन कर सकते हैं। मान्यता है कि ऐसा करने से घर में सुख-समृद्धि का वास होता है।


मां अन्नपूर्णा की रथ यात्रा वाराणसी रवाना, भक्तों में खुशी की लहर, कनाडा से लाई गई हैं मूर्तियां

एसीएस अवनीश अवस्थी ने बताया कि आज इस मूर्ति को उत्तर प्रदेश ले जाकर चार दिनों तक प्रदेश में मूर्ति का भ्रमण कराएंगे। 15 तारीख को प्रदेश के CM योगी आदित्यनाथ और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में इसे काशी विश्वनाथ धाम के नए मंदिर में स्थापित किया जाएगा।

नई दिल्ली/लखनऊ/वाराणसी: माता अन्नपूर्णा रथ यात्रा गाज़ियाबाद के मोहन नगर पहुंची। यह यात्रा आखिर में वाराणसी के काशी विश्वनाथ मन्दिर में पहुंचेगी। 15 नवंबर को मूर्ति को मंदिर में स्थापित किया जाएगा। बता दें कि मां अन्पूर्णा समेत कई देवी देवताओं की मूर्तियां हाल ही में कनाडा से वापस भारत पहुंची हैं। इन मूर्तियों को चोरी कर लिया गया था।

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मां अन्नपूर्णा की मूर्ति कनाड़ा से वापस भारत आने पर केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने कहा कि जो मूर्तियां भारत से चोरी की गईं थी, या ले ली गईं थी, वे अब लौट रही हैं। अब तक 200 ऐसी मूर्तियां वापस लाई गई हैं। मां का मूर्ति स्वरुप काशी लौटने की तैयारी में है, ये हमारे लिए गौरव का विषय है।